छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग-सात





चन्द्रकला लउहा नहा के तियाह हो जाथे । दाल भात, पतीली म रखथे सब्जी साफ करत रहिस । भूरी अऊ कुसुवा बस्ता लेके आ जाथे । मेडम बहुत दिन के बाद आईच । पाछू पाछू चंदा आथे । चंदा कईथे जय सतनाम- चन्द्ररकला जय सतनाम । चन्द्ररकला कईथ । ऐ शब्द ह बड़े चमत्कारिक हे । चंदा कईथे, जो सत्य है उसकी जय हो । संसार में जो सत्य है वही सतनाम है । चन्द्ररकला ह भूरी अऊ कुसुवा ल पास बईठा के पाठ करे देथे । दूनों झन पढ़े म धियान देत रहय । ऊकर ज्ञान, अक्षर ज्ञान के जोत जलगे रहय । भूरी ह टपाटप पढ़ लय और कई ठन सवाल, प्रस्न पूछय । चन्द्ररकला ह बतावत जाय । चंदा कईथे, दो दिन रायगढ़ चले गे रहे त अच्छा नई लगत रहिस । चंदा ह बताथे सब जगह महिला मंडल म अच्छा काम करते हे । महिला मन म जागृति आय लगिच । कोई ल नई डरय । थाना, कचहरी के बात भी करथे ।

चन्द्ररकला कईथे, सरिया म एक ठन, मकान अऊ आधा एकड़ जमीन खरीदंह कहत रहेंव । चन्दा कईथे दीदी बहुत मिल जाहय । पईसा भर होना चाही । चन्द्ररकला कईते, जमुना से पता लगाय बर कहिबे । चन्द्ररकला कईथे, आफिस जाय के बेरा होगे । बच्चे लोग जाओ घर । दूनो झन चल देथे । चन्द्ररकला आफिस चले जाथे । उहा आफिस के काम निपटाथे । चपरासी । बताथे, काल जमुना सरिया से आय रहिच । सब ठीक कहिच । श्रीमती राधा बाई चपरासिन कहिच – मेडम मकाडू के बहू मिट्टी तेल डाल के जल के घर म मरगे । बहुत आदमी जरे हे । ओकर परिवार के मन आय हे । कहत हे इ दहेज नई दे सकेन । ओकर सेती मोर बेटी ल जलाके मार डारिन । बाप अउ भाई पुलिस थाना म रिपोर्ट लिखाय गय हे । रिपोर्ट नई लिखत ए । कहत हे लिखित म सिकायत दे दे । लिखित म सिकायत देय हे । तभी ले जाँच पड़ताल नई करत ऐ । चन्द्ररकला कईथे, मोर पार ओकर भाई ले आ । आवेदन के कापी मोला देखा दे । राधा बाई ओकर भाई दीपक ल ले आथे । दीपक बताईच । दो साल पहिली सादी होईच । पाँच लाख रूपिया दहेज म देय रहेन । बीच बीच म टी.वी. फ्रीज, स्कूटर देय रहेन । अब मारूति, ए.सी. कार माँगत रहिन । ए चिट्ठी लिखे रहिस । कई बार समझाय रहेंवं दहेज लोभी मन मोर बहिनी ल जला के मार डारिन । थानेदार ह पईसा लेके कोई रिपोर्ट नई लिखत ऐ । चन्द्ररकला एक आवेदन महिला मंडल के नाम लिखवा लेथे । आज भर अऊ देख ले । काल थाना म महिला मंडल घेराव करही । थानेदार ल कार्यवाही करना पड़ही । काल 12 बजे थाने के घेराव करही आप लोग रईहा ।

चन्द्ररकला मधु ल बुलाके कयथे थाने के घेराव काल 12 बजे के होही । सबोच्च महिला मन ला काल बुलाले । मधु सब ल खबर देथे । चंदा ल साम के चन्द्ररकला बताते । ठीक 12 बजे थाने पास इकट्ठा होबो । सारंगढ़ अऊ सरिया के दौ सौ से जादा महिला सकलागे । चन्द्ररकला, चंदा बाद मे आथे । खूब जोर से नारे बाजी बोय लगिच । थाने के घेराव महिला मन कर देथे । चन्द्रकला, मधु कईथे, दहेज हत्या के प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया गया । थानेदार बहुत समझाथे । महिला मंडल कहिच जब तक गिरफ्तार दहेज लोभी के परिवार नई करबे तब तक थाना के घेराव हो ही । जमके थानेदार के विरोध म नारेबाजी करथे । होहल्ला सुनके हजारों आदमी सकला जाथे । पुसूस वर्ग भी महिला मन के साथ देथे । थानेदार ल अल्टीमेटम देथे । यदि 1 बजे तक गिरफ्तार नही होई त थाना ल जला दे जाही । दू चार बदमास टूरा मन थाना म पथराव सुऱू कर देथे । थानेदार एफ.आई.आर. दर्ज करके परिवार के सास, ससुर, देवर, पति, अऊ ननद ल गिरफ्तार करके ले आथे ।

चन्द्ररकला कईथे चला अब यहाँ से जुलूस के रूप म सहर घूम के नगरपालिका आफिस के पास समाप्त करबो । नारेबाजी करत सहर घूमथे । महिला मंडल के कार्यवाही के सब समथर्न करथे । चन्द्ररकला के बड़ाई होथे । सारंगढ़ म चन्द्ररकला के चरचा होत रईथे । मधु महिला मन ल धन्यवाद व आभार व्यक्त करथे । अइसने अऊ सहजोग अपेक्षित हे । सब महिला अपन अपन घर चले जाथे । चंदा कईथे, दीदी आज जबरदस्त कार्यवाही होगे । सब गिरफ्तार होगे । मौत के सजा हो जाही । चन्द्ररकला कईथे, हत्यारा मन ल फासी के सजा होवय, तभे चेतही दहेज लोभी मन । चंदा कईथे हजारों लड़की दहेज के बलि म चढ़े जाथे । रोजिना सुनत रईथन । चंदा अऊ चन्द्रकला एक-दसर ल बधाई देथे ।

चन्दा ह घर पहुँच के दूध के चाय, तुलसी पत्ती डाल के बनाथे । दूनों झन चाय पीके अपन अपन घर चल देथे । चन्द्ररकला हाथ पाँव धो के सोचत सोचत बईठे रथे । भूरी नोनी ह कतरा लेके आ जाथे । दाई ह भेजे हे । भूरी कईथे, काल के भईस ह पड़िया पीला जनम हे । पाँच किलो दूध देत हे । वाह भूरी बेटी, अतका धियान रखिथव । भूरी कईथे, मोला पढ़ातस न । ओकरे सेती आय हंव । चन्द्ररकला कटोरी के कतरा ल खाथे । बहुत सुवादिस्ट बने रहय । चन्द्ररकला कथे । भूरी तय खाय हंच । मय दो बार खा डरे हंव । तोर बर बँचा के रखे हे । चन्द्ररकला खाना खा के सो जाथे ।

सुबह उठके नवभारत अखबार देखथे । त फोटो सहित चन्द्ररकला देवी अऊ महिला मंडल के छपे रहय । महिला मंडल द्वारा थाने का घेराव किया । हत्यारों को गिरफ्तार किया गया । महिला मंडल के कार्यवाही की प्रसंसा करे रहय । चन्द्ररकला देवी के जगा जगा चरचा होवय । चन्द्ररकला पेपर पढ़ के खुस हो जाथे । चन्दा ल बताईच । चन्दा ह फोटो अखबार म छपे देख के परसन्न हो जाथे । चन्दा ह दस बारा महिला मन ल बताईच, फोटो छपे हे । बड़े धमाके दार खबर रहय । रायगढ़ जिला म अच्छा असर पड़िच । पुलिस अधीक्षक ह थानेदार के ट्रांसफर कर देथे । महिला आंदोलन के रंग म पुलिस विभाग म दाग लग गे । पुलिस विभाग महिला अपराध के कार्यवाही म सतर्क हो गय ।

चन्द्ररकला सरिया म एक कच्चा मकान पाँच हजार रूपिया म अऊ आधा एकड़ खेत पाँच हजार म खरीदथे । मकान म महिला मंडल के कार्यालय खोल देथे । खेत म साग सब्जी महिला मंडल द्वारा लगाथे । बढ़िय फूल गोभी, टमाटर, भटा, मिर्च, मुरई होथे । महिला मन दो हजार रूपिया के साग भाजी बेच के महिला बैंक म जमा करा देथे । महिला बैंक से गरीब, आदिवासी, अनुसूचितजाति के महिला मन ऋण देथे । बहुत सारे महिला मन आत्मनिर्भर बन जाथे । कलेक्टर हर्षंमंदर ह गोपनीय रिपोर्ट लेके, विस्व बैंक से दस लाख रूपिया अनुदान महिला मंडल सरिया ल देथे । चन्द्रकला देवी के काम से कलेक्टर बहुत खुस हो जाथे । महिला मंडल ल महिला स्वास्थ्य एवं बाल विकास के काम भी मिल जाथे । सत प्रतिसत सिसु स्वास्थ्य के प्रथम पुरस्कार भी सरिया महिला मंडल ल मिलथे ।

कलेक्टर साहब केन्द्र म सरिया मंडल के काम ल मॉडल बनाके भेज देथे । चन्द्ररकला देवी के नाम देस विदेस म होय लगथे । चन्द्ररकला देवी महिला विकास के पर्यायवाची बन गय रहय । कुछ बी हो सारंगढ़ महिला मंडल सरिया महिला मंडल के बुलावा मिलत रहिच ।

सारंगढ़ अऊ सरिया म महिला अईताचार म कमी होगे रहय । साहूकार मन के धंधा बंद होगे रहय । पुस्स मन चन्द्ररकला देवी से जले लगिन । कई गंभीर सिकायत कर देथे । चन्द्रकला जवबाब दे देथे । चन्द्रकला आफिस म काम करत रहिच । त ओतके बेरा पूछत पूछत कामदेव आ जाथे । चन्द्रकला कका के पाँव छूथे । सुखी रहो । चन्द्रकला कईथे, कि कक आज तक कहाँ कहा रहे । कामदेव बताथे । बेटी जूट मील बंद होय के बात मय अमृत जोसी लेबर लीडर के संग रायपुर के खरोरा खनिज मजदूर के काम करे लग गेंव । अमृत जोसी के संग मिल के काम करत रहेव । खरोरा म गिट्टी खदान हावय । खदान श्रमिक संघ बना के मजदूर मन के सेवा करत रहेंव । जोसी मोला बड़े भाई मानय । मयभी बड़े छोटे भाई मानथंव । खरोरा म एक दो जादा श्रमिक काम करत रहिन । खदान मालिक मन अबड़ सोसन करय । झमन ओकर काजिव रोजी मजदूरी देवात रहेंन । हमार संगठन बहुत मजबूत होगे रहिस ।

कामदेव बताईछ । अमृत जोसी को साथ मजदूर आंदोलन के प्रसिक्छन होय चम्पाद बिहास अऊ कलकत्ता बी दो महीना प्रसिक्छन लेके आय हन । प्रसिक्छण म शंकर गुहा नियोगी भिलाई, दल्ली राजहरा भी हमार साथ रहिस । छत्तीसगढ़ से हम पाँच श्रमिक नेता रहेंन । बहुत बढ़िया प्रसिक्छन देय रहिन । रूस अऊ चीन के श्रमिक नेता भी प्रसिक्छन देईच । बहुत ज्ञान मिलिच । अमृत तो अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन के कार्यकारिणी म सदस्य चुने गय हे । खरोरा म राजनीतिक पार्टी म श्रमिक संगठन के सक्ति बढ़त हे कहिके, रोके बर सिकायत करत रहिन । साजिस के तहत संगठन के दो फाड़ करवा देथे । एक फाड़ के श्रमिक मन अमृत के निवास स्थान म डकैती डलवा देथे अऊ अमृत के पिटाई करके, जान से मारने के धमकी देथे, खरोरा छोड़े कहिथे चले जाथे । थाना म रिपोर्ट अज्ञात व्यक्ति के जुर्म दर्ज हो जाथे । कोई कार्यवाही नी होईच त ओहर जान के डर से खरोरा छोड़ के अपन गाँव बरोंडा माना आ जाथे । मय भी रायगढ़ आगे हंव । अमृत के चार पाँच लाख रूपिया नुकसान होगे । चार लाख रूपिया श्रमिक के माहवारी वेतन देय बर बैंक से लाय रहिच । खरोरा के श्रमिक संघ के कार्यालय म तोड़ फोड़ करके तहस नहस भी कर देथे । कोई जगा बेईठे बर नई रहय । बहुत नुकसान हम ल होगे रहिस । अमृत जी ओजस्वी वाणी, सतनाम अमृत वाणी से प्रभावित होगे मय भी सतनाम पंत म दीक्छित होगे हंव । एक दम सादा सरबदा, दारू, मांस, मछली, चोंगी, बीड़ी, सब छोड़ दे हंव,साधु संयासी जईसे जीवन होगे ।

चन्द्रकला कईथे, ठीक हे कका आज रात रूक जाव । अऊ बहुत बात करबो । राधा बाई ल कईथे, चाय, नास्ता ले आव । गरम भजिया दो प्लेट लाथे । कामदेव भजिया चना खाथे । चाय पीके बईठे रथे । चन्द्रकला कईथे, कल साढ़े पाँच बजे आ जा कोई काम होही त । यह घूम फिर के सहर देख के आ जाव । कामदेव नगरपालिका आफिस के सहर घूमे बर चल देथे । तहसील कार्यालय देख के तरिया के पार म पीपर के रूख के नीचे थक के बईठ जाथे । एक झन घूमत आके बईठ जाथे । कामदेव नमस्ते करथे । दुकालू पूछथे कहाँ से आय हच । कामदेव कईथे, रायगढ़ ले आय हंव । मोर भतीजी ह नगरपालिका म बड़े बाबू हे । दुकालू कईथे चन्द्रकला देवी हरे । हाँ हाँ । ओकर नाव गाँव गाँव म फेमस होगे हे । सरिया क्षेत्र म लईका लईका मन जानत हे । ओकर काम बढ़िया हे । ओहा महिला मन ल जागृत कर दीच । कामदेव अऊ पूछथे । अऊ का का होत हे ऊहां । सब ठीक ठाक हे भाई ।

कामदेव घूमत घामत तरिया ले बाहीर भीतर होत नगरपालिका आ जाथे । साढ़े पाँच बजे चन्द्रकला देवी आफिस छोड़ देथे । कामदेव के संग घर आ जाथे । कामदेव से परिचय चंदा देवी बारे से कराथे । चंदा ह टपले कामदेव के पाँव छूथे । सुखी रहा के आसीस देते । चंदा कईथे, कहाँ से आवत हे । चन्द्रकला कईथे, चंदा, मोर कका ह रमता जोगी बहता पानी ऐ । जहां खाय ल मिलिच ऊँहे रूक जाते । मजदूर नेता ऐ । जीवन भर जूट मील म खटिच । जूटमील बंद होय के बाद रायपुर चल दिच । रायपुर जाके सतनाम धर्म म दीक्छित होगे हे । पंडित बन गे हे । कुछ खाय पीयय नहीं । यहाँ तक लहसून नई खावय । चंदा कईथे, आज मोर घर कका ह खाहय । चन्द्रकला कईथे चंदा मोर फुवा (दीदी) ह बहुत पहिली सतनामी बनगे हावय । मय बचे हाँव । चन्दा कईथे, दीदी जउन ला कोनो समाज म ठउर नई मिलत ओहा सतनामी समाज म समा जाथे । सतनामी समाज म सभी जात के लोग हे । छत्तीसगढ़ म उंहे के मन सतनामी बनिन । फेर साहू, तेली, कुर्मी, राउत, सोनार, लोहार मन काबर सतनामी मन से छुआछूत मानते मोर समझ म नई आवत । हिन्दू समाज ह सतनामी मन ला पाकिस्तान जईसे समझथे । कामदेव कईथे, सब पोंगा पंडित मन अपन बेपार चलाय बर अलग कर देहे । सतनामी समाज अंध विस्वास नई मानय । वैज्ञानिक ढंग से सोचथे, वैज्ञानिक चिंतन हे । संत गुरू घासीदास के सिद्वांत, दर्शन, चिंतन आज भी प्रासंगिक हे । मोर विचार हे आज जादा जरूरत हे ।

चन्दा कईथे, ठीक कहत हव कका । मय जात हंव खाय के तियारी करथ हंव । चन्द्रकला कहिच बने सोहारी, बबरा बनाबे । चन्दा चल देथे । कामदेव कईथे, चन्दा नोनी बढ़िया हे । चन्द्रकला बताथे । महिला मंडल के अध्यक्ष । गाँव के बढ़ किसान हे । खाय पीये के कोई कमी नई ऐ । कामदेव कईथे तहूँ तो सरिया म जमीन खरीदे हच । चन्द्रकला कईथे, आधा एकड़ ह । मकान हे । कामदेव कईथे, मय रहि जाहेंव । महिला मंडल के आफिस हे । ठीक कोई बात नई ऐ । चन्द्रकला बताथे पूरनिमा के जबलपुर म लड़का होय हे । ओकर पति ह एस.डी.ओ. टेलीफोन्स हे । कामदेव कईथे, बढ़ीया पति पाये हे । चन्द्रकला कथे हां किस्मत वाली रहिच । चन्द्रकला कथे । बाबू जी ह रिटायर होगे हे । गोसाला के दूध बेचे के काम करत हे, चन्द्रसेन ह सहयोग करत हे । दूध म पानी मिलाके दो किलो दूध होटल म बेच देथे अपना खरचा निकाल लेथे । घर के खरचा चल जात हे । रहे के घर भी बनवा देहंव .

चन्दा हे खाना खाय बर बुलावा भेजथे । चन्द्रकला कईथे, कका हाथ मुँह धो ले । चल चलिन । चन्दा परछी म खटिया म बईठाथे । मस्त बढ़िया चारों ओर से घेरा वाला मकान, कुआँ बारी । अंगना के बीच म तुलसी के चौरा । चौरा के किनारे म जैत खाम छोटकन सफेद झण्डा फहरावत रहय । कामदेव उठ के जयखाम के परनाम करथे । चन्द्रकला कईथे, टेटकी बुआ के के ठन लईका हे । कामदेव कईथे, चार लड़का अऊ तीन लड़की हे । सबके सादी बिहाव कर डारे हे । न दहेज के झंझट न ताम झाम सादी के । सतनामी समाज आत्मनिर्भर समाज हे । सादी विवाह म कोई करचा नई होवय । ओकर सेती बुआ ह निपटा डारे हे ।

चन्दा ह परछी म पीढ़ा म बईठाथे । लोटा, गिलास म पानी लाथे । चन्दा थाली म सोहारी, बोबरा, मालपुआ, बरा परौसिच । चन्द्रकला, कामदेव भूरी अऊ कुसवा मन बईठ के संग म खाईन । चन्दा सात बार परोसा देईच । कामदेव भर पेट भोजन खाईच । कामदेव ल बहुत दिन म मन पसंद खाना मिले रहय । चन्द्रकला कईथे कैसे लउहा बना डाले । चन्दा कईथे, भूरी के ददा भी संग देईच हे । चन्द्रकला कामदेव खाना खाके सो जाथे ।

चन्द्रकला कईथे, कका विधान सभा चुनाब आवत हे । सरिया से चुनाव लड़हूँ । टेटकी बुआ, चन्द्रसेन, गफ्फार भाई ले काम करे ल बोल के रखिबे । कामदेव कईथे, मय अमृत ल रायपुर से ले आहंव । वहाँ सतनामी वोटर के सख्या चालीस हजार से जादा है । ईसाई वोटर खातिर फादर ल इंदौर से बुलवा ले । मुस्लिम वोटर बर गफ्फार भाई ऐ, फेर महिला मंडल के घरो घर पहुँच हे । जीत आसान हे बस टिकिट को जुगाड़ करना हे ।

चन्द्रप्रकास नायब तहसीलदार के उज्जैन से स्थानांतरण रायपुर जिला के बिलाई गढ़ तहसील म हो जाथे । चन्द्रप्रकास ल कोई ब्राम्हन मन कोई लड़की नई देईन । पुस्पा बहुत परेसान होगे । जेकर घर लड़की देखे जावय । पिताजी के ईसाई फादर होय के कारण मना कर देय । पुस्पा ईसाई लड़की से बिहाव नई कराना चाहय । चन्द्रकला से मिले बर बिलाईगढ़ जाथे । पुस्पा कईथे, बेटी तहीं सुझाव दे । सादी कईसे होही । चन्द्रकला, चंदा ल बताथे । पुस्पा के पाँव छूथे ।

पुस्पा ल चन्दा ह सुझाव देथे, अखबार म विज्ञापन सादी के निकलवा दे । देख मिलत हे नई । जाती बंधन झन लिखवाबे । चन्द्रकला कईथे, बढ़िया सुझाव हे चन्दा कईथे, मोर मामा जी डिप्टी कलेक्टर दुर्ग म हावय । ओकर लड़की ह डाक्टर हे । यदि पसंद आहय त फोटो मोर पास हे । देख लेव । पुस्पा रायगढ़ जाथे । विज्ञापन मेरीज के दे देथे । पता – चन्द्रकला देवी, नगर पालिका कार्यालय सारंगढ़ म.प्र. नव भारत रायपुर से मेरिज के विज्ञापन छपे रहय । चन्द्रप्रकास के पास फोन आय लगिच । चन्द्रकला देवी के पास पचास लड़कियों के फोटो आ गिच । फोटो पस्पा अऊ चन्द्रकला देखिन । फेर पसंद नई आईच । सब काली, साँवली, कम पढ़े लिखे रहय । चन्दा ल दिखाथे । ओह ल पसंद नई आईच । कई जगा से पत्र भी आय रहय । छटाई म कई दिन लग गे । चन्द्रप्रकास ल दिखाथे । पसंद नई आईच ।

चन्दा ल पुसपा कईथे, तोर ममा के लड़की के फोटो दिखा । डॉक्टर भारद्वाज नाम रहय । चन्द्रप्रकास भी ह पसंद कर लेथे । फेर लड़की देखाव कोन, चन्दा कईथे, मय अपन बहिनी ल बुला लेंथव । चंदा ह सारंगढ़ से टेलीफोन मामी से बात करथे । मामा जी मिल जाथे । चन्दा कईथे मामा जी ब्राम्हण लड़का नायब तहसीलदार बिलाईगढ़ म पोस्टिंग हे । प्रेमलता ल देखे चाहत हे । एम.एल. भारद्वाज कईथे, मामी मय सतनामी छोड़ दूसर से बिहाव नई करंव । चन्दा कईथे, थोड़ा सोच के बताहूँ । पिताजी फादर हे इंदौर चर्च म । ऐ करे सेती ब्राम्हन मन लड़की नई देत ऐ । मामाजी कईथे सोच विचार के बतवो । चंदा कईथे मामाजी पढ़े लिखे होके जात पात म विस्वास करत हच । बाबाजी तो जाती विहीन समाज के कल्पना करे हे । हमन ओही म फंस जाथन । ठीक हे चंदा बेटी सोच विचार के बतात हन । प्रेमलता से पूछथे । बेटी चन्दा के फोन आईच हे । लड़का नायब तहसीलदार हे, ब्राम्हण जात के । दहेज बहेज नहीं चाही । यदि मोर मन आतिच त चंदा के घर चल दे । प्रेमलता कईथे ठीक हे पापाजी ।

भारद्वाज जी चंदा ल चिट्ठी लिख थे, के प्रेमलता रविवार के दिन पहुँच जाही । चन्दा बहुत खुस हो जाथे । पुस्पा देवी ल बताथे । चन्द्रकला खुस हो जाथे । अऊ रविवार के दिन सारंगढ़ आ जाथे । डॉ. प्रेमलता ह दुर्ग से रायगढ़ ट्रेन द्वारा अऊ रायगढ़ से सारंगढ़ बस म बईठ आ जाथे । चंदा ह रद्दा देखत रहय । समारू ह साग भाजी तोड़े कोला म गय रहय । डॉ. प्रेमलता दुवारी ले घुसीच । चंदा कथे, आ बहिनी आ बहिनी । प्रेमलता पाँव छूथे । चंदा सब हाल चाल पूछथे । सब ठीक बताथे । कईसे चलत हे । तोर डाक्टरी पेसा । पोटिया कला म दवाखान खोले हंव । रोजिना अच्छा कमाई हो जाथे । प्रेक्टिस बढ़िया चलत हे । दू चार सौ मिल जाथे । चंदा हाथ पाँव धोवाय बर कुँआ म ले जाथे । बढ़िया साग भाजी लगे रहय । केरा म घेरा उतरे रहय । प्रेमलता कईथे, दीदी बहुत बढ़िया घर हे । चंदा कथे । हाँ बहिनी किसान तान खाय पीये के हो जाथे । प्रेमलता कईथे दीदी तहूं त बी.ए.पास हच । नौकरी चाकरी काबर नई करत । चंदा कथे बहिनी सब नौकरी चाकरी करे लगही त घर, गाँव म कोन रईही । मय गाँव म रहिके महिला मन के सेवा करत हंव । मय गाँव म खुस हंव । रानी सागर म गाँव म न सहर म । दोनों के बीच म हे । प्रेमलता ल पानी पिया के बईठाथे । तीन चार खटिया म चादर बिछा के परछी म रख देय रहय । बहिनी आत हंव मय, तंय बईठ ।

प्रेमलता कईथे मय सुने हंव चन्द्रप्रकास के बाप हर फादर (ईसाई) बन गे हे । चन्द्रप्रकास बताथे, पिताजी के हिसाब से तो ईसाई हन । चन्दा कईथे नहीं प्रेमलता एमन अपन धरम नई बदले हे । हिन्दू धर्म मानत हे । यदि ईसाई मेम ल बिहाव करतीन त कई झन मन घूमत हे । चन्द्रप्रकास कईथे, आज हमन जात पात नई मानन । चन्द्रकला कईथे, प्रेमलता कोठार कोती जाके चन्द्रप्रकास के संग बात कर ले । चन्द्रप्रकास कईथे, नई लगय दीदी । मोर पसंद हे । प्रेमलता कईथे, चल बात कर लेंथन । चन्द्रप्रकास दूनो झन चलके कोठार म घूमत घूमत बात करथे । प्रेमलता पूछथे कि ब्राम्हण रीति रिवाजसे बिहाव नई हो सकय । हमन कट्टर सतनामी आन । बिहाव म आपत्ति करही । चन्द्रप्रकास कईथे, तय जईसे चाहंव वईसे सादी हो जाहय । पसंद तो करत हच । दूनो झन पसंद एक दूसरे ल कर लेथे । पुस्पा-चन्द्रकला, चंदा ला बता देथे । चन्दा कईथे अब हाँ होगे । बधाई देथे । चन्द्रकला पुस्पा ल कईथे, अब हम रिस्तेदार बन जाबो ।

चंदा ह बढ़िया अंगना के गोरसी म अंगाकर रोटी जारे रहय । मंहर, महंर महकत रहय । गरम-गरम-गाय के घी लगा के दिच अऊ टमाटर के चटनी । सब्बे झन चाट चाट के खाथें । चन्दा कईथे भाई साहब हमन किसान आदमी । जो घर म हे उही ल खिलाबो । पुस्पा कईथे, बेटी माँ, पिताजी से बात करके सादी पक्का करथे । हमन ला पसंद आगेय । दूनों के रूप, रंग ह मिलत हे ।

चन्दा सब झन ल खवा-पीया के बिदा करिच । पुस्पा, चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास घर आ जाथे । चन्दा ह डॉ. प्रेमलात ल कहिच पसंद आईच । बने हट्टा कट्टा हे । रूप रंग अच्छे हे । नौकरी करत हे । काल परमोसन होके डिप्टी कलेक्टर बन जाही । मामा जी भी नायब तहसीलदार रहिच । प्रेमलता कईथे, सादी के बाद कोई तंग तो नई करही । चन्दा कईथे, बहिनी घर म कोनो नईऐ । पुस्पा देवी ह संग म रईही । कतका दिन के महमान हे पचहत्तर साल के डोकरी हे कब मर जाहय भरोसा नईए । चन्द्रकला दीदी ल गोदी लेय हे । ओह ह नौकरी करत हे । लाखों के सम्पत्ति हे । ठीक हे दीदी । बाबूजी, दाई ल पसंद आही त करहूँ, नई तो नई । माँ बाप राजी होना चाही, तभी सादी होही ।
चन्दा ह समारू ल बताथे ठीक हे संबंध बन जाहय तब ठीक हे । प्रेमलता अपन घर रायगढ़ से दुर्ग पहुँच के सब ल बताथे । माँ तो ठीक हे फेर पिताजी ह ईसाई बन के फादर इन्दौर चर्च में हे । विदेसी मेम से तीन लड़की हे । सब विदेस म रईथे । करोड़ों के सम्पत्ति हे । एम. आर. भारद्वाज कईथे, कईसे बिहाव करबो । सतनामी समाज ह छोड़ नई देही । फेर दू टूरी बाँचे हवायं । प्रेमलता कईथे बाबू मोर उमर भी जात हे पैंतीस साल होगे हे । चन्द्रकला के चालीस से जादा उमर होगे हे । यदि समाज ल देखबे त मोर सादी नई होही । सब झन पसंद कर लेहे । प्रेमलात के माँ कईथे, ठीक हे बेटी यदि कहत हे, त बिहाव कर देहंव ।

एम. एल. भारद्वाज डिप्टी कलेक्टर दुर्ग हे, अपन मित्र डिप्टी कलेक्टर, राजकुमार टंडन अऊ टामनसिंह सोनवानी संयुक्त कलेक्टर से चन्द्रप्रकास के बारे म जानकारी पूछथे । चन्द्रप्रकास सीधा-साधा, ईमानदारी अधिकारी राजस्व विभाग म जाने जाथे । सब कोई बताथे अच्छा लड़का हे । सिरफ उमर भर जादा रईथे । रूप रंग गोरा आकर्षक व्यक्तित्व रहय । टामनसिंह कईथे ठीक सादी जम गे । भारद्वाज खुद बिलाईगढ़ जाके सम्पर्क करथे । पहुत आदर सतकार करथे । पुस्पा से भी मिलाथे । प्रेमलता के माँ भीजाय रथे । पुस्पा ल कईथे, मेडम यदि सादी करबो तो समाज के मन विरोध करही । मय सोचत हंव यदि तुमन के सहमत होही त । अभी मार्च महीना के सुरू म फागुन माह के पंचमी, छठ, सप्तमी के तीन दिन के मेला गिरौदपुरी म भराही । जेमा समाज के महंत, गुरू गोराई, प्रमुख लोग जुरही । मा. अर्जुनसिंह दी आवत हे । कलेक्टर अजीत जोगी घलो आही । समाज के मंत्री बंशीलाल घृतलहरे, विधायक धनेश पाटिला जी अऊ कई सांसद मन आही । गिरौदपुरी म जैत खम के फैरा लेके बिहाव कराके, सबके आसीरबाद भी मिल जाही । कोई कह भी नई सकय । अंतरजातीय विवाह म प्रमाम पत्र अऊ पाँच हजार रूपिया सासन से मिलही । पुस्पा देवी, चन्द्रप्रकास तियार हो जाथे । भारद्वाज साहेब कईथे, सब मेला म मिलके अपन रिस्तेदार मन ल आहा । पुस्पा देवी कईथे, सर आप मन ही हमर परिवार हव । भारद्वाज साहब दुर्ग आ जाथे ।

पुस्पा देवी, चन्द्रकला ल बताथे, गिरौदपुरी मेला म आदर्स बिहाव होही । न ताम झाम, न बैण्ड बाजा लाखों लोग के बीच म बिहाव होही । अर्जुनसिंह मुख्यमंत्री, कई मत्री, सासंद मन आसीरबाद देही । कलेक्टर कमिस्नर उपस्थित रईही । चन्द्रकला कईथे माँ बहुत बढ़िया । अऊ सादी के खरच ले बचत होही । रायगढ़ म एक बढ़िया पार्टी दे देथे । मय भी छुट्टी ले लेहूं । चन्द्रकला कईथे माँ बहू के बर कपड़ा, लुगरा, सोना, चाँदी के जेवर बनवाना सुरू कर दे । सौ ग्रा सोना के जेवर बनवा दे । माथे म बिन्दी, कान के कुण्डल, दो अंगूठी, एक हार, चाँदी के पैर पट्टी, झुमका, बिछिया, कमर पट्टा, नथनी भी बनवा दे । बहू ल सोना म लाद दे । समाज के मन देखते रह जाय । ब्राम्हन मन जल के मर जाहय । सादी होय के बाद म मजाक उड़ाही । अभी तक कई झन से बात होईच, फेर ईसाई ल टूरी नई देन कह दिच । ओकर बाप जरूर ईसाई बाद में होय हे, बीज तो ब्राम्हन के हे । अब बड़े होगे त ईसाई कहिथे ।

चन्द्रप्रकास के पास फादर फ्रांसिस के पत्र आथे, बेटा दूसरी माँ रोमा के अकाल ह्दय गति रूक जाय ले मृत्यु हो गय हे । एक माह से जादा होगे । लड़की मन आय रहिन अऊ विदेस चल दिन । मय अकेला हंव । पूरा सम्पत्ति बेच के रायगढ़ म आके बसीहंव । करीब करोड़ के धन सम्पत्ति हे । मय मरणासन्न हंव । तय सम्पत्ति ल ले जाव । मय कुछ दिन के बाद म रायगढ़ जाहंव । पुस्पा देवी, चन्द्रकला मन बहुत रोथे । कईथे जईसे भी हो, घर के सदस्य रहिच । बहुत मान सम्मान देय रहिच । चन्द्रकला कईथे, दाई, रोमा माँ ह चन्द्रप्रकास के बेटी लेके आही । तय देख लेबे । रोमा ह चन्द्रप्रकास ल बहुत चाहत रहिस । चन्द्रप्रकास कईथे दीदी रोमा माँ अच्छी थी । उसकी आत्मा को सांति प्रदान करे ।

फादर फ्रांसिस इंदौर से रायगढ़ जाथे । कावर मकान मालूम नई रहय । गोसाला के पास ऐती ओती देखत हय । रामदेव देख के पूछथे । काकर घर ल देखथ हव । फादर कईथे, पुस्पा पाण्डेय के मकान कहाँ हे । फादर ल रामदेव घर ले जाथे । फादर हम मान संग संग रहत रहेन । चार कमरा म उमन रहत रहिन । तीन कमरा म हमन रहत हन । रामदेव पानी पिलाथे । एक कमरा साप करके, साफ चादर बिछा देथे । फादर पूछथे । रामदेव पहिचानत हच । हाँ महराज । सी.एम.ओ. के लड़का आय । पुस्पा देवी के पति । बहुत दिन के बाद म आय हावय । मय भी रिटायर होगे हंव । फादर पूछथे अऊ कोन कोन जीयत हे । रामदेव बताथे । महराज तूंहर जमाना के सियान म सब झन मरगे हे । पंडित मुकुटधर पांड़े जी हा बाँचे हे । ओहू ह खटिया धर लेहे हे । कल मय दूध अमराये बर गे रहेंव । पंडित जी के पाँव दबा के आय हंव । ओकर संग कोई नहीं रहय । डोकरा बिचारा अकेला तड़पत रथे । दिनेश पांड़े ह कभू कभू जात रईथे । पर सेवा जतन नई करय अपन मस्त पड़े रथे । फादर कईथे ओ तो बड़े साहित्यकार हे । हाँ पंडित जी देस भर म नाम हे । मय दूध पहुँचाथे जाथंव त भीड़ लगे रईथे साहित्यकार मन के । रायगढ़ साहित्यिक नगरी होगे हे । राजा चक्रधर सिंह के बाद रायगढ़ ल पंडित मुकुटधर पांड़े अऊ पंडित लोचन प्रसाद पांड़े के नाम से जाने जाथे ।

रामदेव फादर ल चाय पिलाथे । रमौतीन ह आके पाँव पड़के कईथे, महराज पुस्पा दीदी ल छोड़ के कहाँ चले गय रहे । बहुत परेसान होई च दीदी ह । बिहाई होके भी विधवा जईसे रहिस । इंहा के मनखे मन बहुत सताय हे । आज मरे के बेरा म भी सताय न नई छोड़य । रमौतीन कईथे महराज जेवन कईसे रहही । फादर कईथे जउन पका लव । मय तो सन्यासी जईसे हावंव । रामदेव ल बताथे । मोर दूसर पत्नी रोमा के देहांत दू महिना पहिले होगे । मय अकेला होगे व मरे के बेरा बेटा के पास रहिहंव । रामदेव ह भोजन कराईच । बहुत दिन के बाद भात खाय रहिच । रायगढ़ मातृभूमि के पानी अऊ चावल के सौधी महक से आनंद के अनुभित होथे । फादर फ्रांसिस रात म सोचत सोचत सो जाथे । रामदेव दरवाजा खटखटाथे । महराज तेल लगा देथंव । महराज ह थक गे रहय । रामदेव बढ़िया मालिस करथे । जल्दी नींद पड़ जाथे । रामदेव दरवाजा ओधा के अपन कमरा म जाके सो जाथे ।

रामदेव चन्द्रकला से टेलीफोन म बताथे । फादर इंदौर से आ गे हे । पुस्पा देवी, चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास, रायगढ़ आ जाथे । फादर बहुत रोथे । पुस्पा देवी बहुत समझाथे । चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास कईथे, बाबूजी इहाँ सगम में रहना हे । फादर के चोला ल उतार फेंक अऊ ब्राम्हन बन जा । बलराम अवधराम पांड़े बन जा । फादर बहुत सोचथे विचारथे । चन्द्रकला भोजन पका के खिलाथे । रात म अपन अपन कमरा म सोये लगथे । फादर के लिये अलग कमरा साफ सुथरा करिच । चन्द्रकला के संग पुस्पा सोहवं कहिथे आवत रहय । चन्द्रप्रकास अपन कमरा म सोगे । चन्द्रकला कईथे, दाई जान पिताजी के संग सोबे । पुस्पा ह्मित करके कमरा म जाके बईठीच फादर कईथे आव पुस्पा । मय तोर साथ अन्याय करें हवं । जवानी भर तो संग नई देय सकेंव । फेरमरे के बेरा म एक हो जाईन । पुस्पा गोड़ म गिर जाथे । फादर ह्दय से लगा लेथे । रात भर विचार विमर्स करथे । पुस्पा पति पाके खुस हो जाथे । पति के सुख चालीस साल बाद मिले रहय । पुस्पा बहुत खुस होथे । पुस्पा कईथे, स्वामी ये दाढ़ी, बाल मुड़वा के, गौरीसंकर मंदिर म चल पूजा करके हिन्दू धर्म म आ जा । अब साथ रईबो । फादर रात भर बहुत सोचिस । फादर दुविधा म पड़गे । फादर ह निर्णय लेथे । सुबह चाय पीये बईठे रहय । पुस्पा कईथे, रामदेव जा तो नाई ल पकड़ के ले आव। दाढ़ी मूंछ, बाल मुड़वाना हे । रामदेव चौक से नाई बुलवा लेथे । फादर के बाल, मूंछ, दाढ़ी साफ करके चुटई छोड़ दे रहय । पुस्पा फादर के ऊपर गोबर पानी छिड़कीच । गंगा जल म नहवाईच । बाथरूम म साबून म रगड़ रगड़ के नहवाईच । पुस्पा ह गौरीसंकर मंदिर ले जाके भगवान के पूजा करवाईच । पंडित जी चंदन के टीका लगाथे । नारियल तुलसी के प्रसाद देथे । फादर ल पूरा पंडित बना देथे । फादर ह अपन नाम पुराना नाम बलराम पाण्डेय रख लेथे ।

पुस्पा, बलराम पांड़े ल लेके कई मंदिर जाथे । केलो नदी म जाके नहवाथे । सिवलिंग म जल चढ़वाते । बलराम लईका जईसे करत रहय । बलराम के नवा जीवन सुरू होत रहिस । पूजा करत करत दिन के बारा बज गे रहय । चन्द्रकला ह बाबूजी बर धोती कुरता कोसा के लाय रहय । बलराम ह धोती कुरता म पूरा पंडित बन गे रहय । पहिली फादर के कोट, पेंट रहय । सब ला चन्द्रप्रकास ह केलो नदी म जाके फेंक देथ । फादर के सोने के क्रास रख लेथे । ईसाई धर्म के पुस्तक क्रास, स बल पानी म डूबा देथे । बलराम पांड़े बर गीता, हनुमाल चालीसा, रामायण, महाभारत, मनुस्मृति खरीद के लाथे । पुस्पा साथ म रामायण के पाठ कराथे । दिन भर रामायण के पाठ के बाद, खीर, पुड़ी, दाल भात के भोजन देथे । पुस्पा ह मांसाहर ल त्याग करके संकल्प कराथे । सुद्ध साकाहारी बना देथे । पुस्पा ह रात म बलराम पांड़े के खूब सेवा करथे । बलराम जी पत्नी के सेवा से खुस हो जाथे ।

दूसर दिन चन्द्रकला अऊ चन्द्रप्रकास अपन अपन ड्यूटी म चल देथे । पुस्पा अऊ बलराम बच जाथे । रामदेव घर के साग, सब्जी खरीद के ले आवय । पुस्पा कईथे, पांड़े जी चल बाजार कोती जाबो । धीरे धीरे पैदल चल के, राज फोटो स्टूडियो जाथे । गफ्फार भाई दुकान म बईठे रहय । गफ्फार भाई नमस्ते पुस्पा देवी जी । पुस्पा देवी बलराम पांड़े से परिचय कराथे । ये मोर पति ये । चालीस साल बाद रायगढ़ आय हे । इंदौर म फादर चर्च में रहिच । आज हिन्दू धर्म म आगे हे । पूजा पाठ कराय हंव । दूनों झन के एक फोटो खींच देतेच । गफ्फार भाई दोनो झन के फोटो ले लेथे । पुस्पा कईथे यदि अच्छा ओहे त बड़ा फोटो बनवा देबे । बलराम रायगढ़ के नया होगे रहय । कोई नई पहचानय । मालूराम ल बाद म पता चलथे । घर म मिले बर आथे । बातचीत करके चल देथे । पुस्पा देवी बहुत खुस रहय । बढ़िया बढ़िया चीज बना बना के खिलाथे । पत्नी, पति दोनों प्रसन्न रहिथे ।
क्रमशः

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