छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग- सोलह



न्द्रकला देवी सो के उठिस, फ्रेस होके बेडरूम ले निकलिस । अंगना के कुरसी म बईठ के समाचार पत्र पढ़त रहिस । रायगढ़ संदेश अखबार चार दिन बाद पहुँचय । मुख्य पृष्ठ म समाचार देय रहय कि गोसाला के गाय, बैल, अज्ञात बीमारी से मृत्यु । बैकुण्टपुर स्थित गोसाल के लगभग एक सौ से जादा गाय अज्ञात बीमारी के चपेट में आने से अकाल, काल के गाल में समा गये । विगत एक मास से गायों के मरने का सिलसिला जारी था । अब एक भी जानवर नहीं है । गोसाला प्रबंधन कमेटी न चौकीदार, जो पुस्तैनी गाय की सेवा करते आ रहे थे को हटाकर दूसरे चौकीदार नियुक्त कर दियें है । चन्द्रकला देवी के आँखी ले आँसू आ जाथे । पीढ़ी दर पीढ़ी गउ माता के सेवा करत रहीन, आज खतम होगे । पुस्पा देवी भी रो डारथे । बेटी गोसाला के गाय के दूध पी के पले-बढ़े रहेंव । चन्द्रप्रकास, पूरनिमा, चन्द्रसेन, रामदेव, कामदेव सब झन दूध पी के रहेंव । चन्द्रकला देवी कथे, दाई पूरा परिवार के जीये के आधार रहीस, कम से कम गो माता के सेवा करत रहीन, आज अनाथ हो गेन ।

पुस्पा देवी कथे बेटी अनाथ कईसे होही । चन्द्रप्रकास डिप्टी कलेक्टर बनगे हे । ओहा अभी पाँच-सात-साल अभी अऊ नौकरी करही, का पता कहा बसही पता लगे हे ओहा रायपुर सुन्दर नगर म मकान ले डारे हे । चन्द्रकला कथे, ठीक हे दाई तभो ले । पुस्पा कथे, बेटी अभी जाके चन्द्रसेन के नाम म चार एकड़ जमीन ल चढ़वा देथंव । मकान के आधा चन्द्रसेन के नाम म हो जाही त सब झंझट ले मुक्त हो जाही । वईसे घलो चन्द्रप्रकास रायगढ़ म नई रहय, रायपुर म बसही । डॉ. प्रेमलता ह सरकारी डॉक्टर बन गे हे । अभी ओकर पन्दरा बछर नौकरी बांचे हे, चन्द्रप्रकास ओकर संग रईही । चन्द्रप्रकास ल धन सम्पत्ति के लालच नईये । पुस्पा कथे, बेटी चन्द्रप्रकास ह मोला कई बार बोल चुके हे माँ रायगढ़ के सम्पत्ति ल दीदी के नाम कर दे । मंय ओकर करजा ल नई चुका सकंव । ओकर परसादे मोला नौकरी मिले हे । यदि दीदी नई होतिस त मंय बेरोजगार घुमत रहितेंव । यदि मंय सारी उमर करजा उतारिहंव त नई उतरही । चन्द्रकला कथे, दाई मोर सगा भाई भी अईसना नई सोंचय ।

पुस्पा कथे, बेटी चन्द्रप्रकास ल दूसर काबर मानत हस, तोर दाई के दूध पी के बड़े होय हे । मोर कोख म दस महीना जरूर रहीस, फेर रमौतीन के दूध पी के जीये हे । दाई के दूध के करजा अभी नई छुटाय हे । रमौतीन बहिनी धन्य हे, अईसे माता बहुत कम होथे जऊन अपन लईका ल कम दूध पिलावय अऊ चन्द्रप्रकास ल जादा । चन्द्रप्रकास के नानपन म पेट नई भरय काबर, जादा उमर के बच्चा होय म दूध नई आवत रहीस । मंय दूध जरूर-जरूर पियावंव । मोर दूध नई आवत रहीस । मय रात-रात रोवत रहेंव । मोर बेटा ह कईसे बांचही । गाय के दूध पिलावव, पेट भर नई पीयय । मंय संसों म सूख के कांटा बन गे रहेंव, फेर भगवान के किरपा ले रमौतीन ह तोला जनम दिस । मोर जी ह हलका होगे । मोला उपाय सूझिस, मंय नौकरी म चल देथंव त लईका ल कोन देखही । डरावत-डरावत एक दिन रमौतीन बहिनी के पास गयेंव अऊ परेसानी बतायेंव । तोर बुआ घलो रहय, कहिस भउजी तंय कुछ पईसा महीना म दे देबे । हमन लईका ल पोस देबो । मोर बात बनगे मंय पहिली दिनी ही दू सौ रूपिया रमौतीन ल दे देंव । तोर बुआ टेटकी ह चन्द्रप्रकास ल गोदी म लिस, रमौतीन कहिस टेटकी दे दूध पीला देथंव । जईसे गोदी म लिस, चन्दा हांसे लगिस । मस्त दूध पेट भर भी के खेले लगिस । पहिली बार भर पेट दूध पाय रहीस । मंय मुस्कावत अपन सिक्षकीय काम म चल देंव । साम के आंव त मस्त खेलत मिलिस । रमौतीन कहिस, दीदी मस्त दूध पीयत हे पर मोर टूरी के पेट नई भरत हे । मय कहेंव बहिनी तोर टूरी के जूठा बांचे दूध ल पिया देकर । मोर बेटा बांच जाही । अईसे करके चन्दू अऊ चन्द्रकला बड़े होय हे । पुस्पा के आँखी ले आँसू टपक जथे, चन्द्रकला घलो सुन के रो डारथे ।

चन्द्रकला कथे, दाई कालि रायगढ़ जाबो, पी. ए. ल टिकट आरक्षण कराये बर कहि दे हंव । दूसर दिन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर जाय बर रेल्वे स्टेसन पहुँच जाथे, चन्दा देवी विधायक घलो स्टेसन म मिल जथे । भोपाल से बिलासपुर गप मारत, सोवत पहुँच जाथे, चन्दा बिलासपुर से रायगढ़ अहमदाबाद एक्सप्रेस से पहुँच जाथे । प्रोटोकाल से कार आय रहय, चन्द्रकला देवी, पुस्पा देवी बईठ गे कार म अउ चन्दा देवी ह जीप म सांरगढ़ चल देथे । चन्द्रसेन ह सूटकेस अउ समान ल दूसर जीप म भर के ले आथे । विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एस. डी. एम. मन मैडम से भेंट करके चल देथे । रमौतीन दाई ह बढ़िया नीबू के चाय पीलाथे । रमौतीन कथे, बेटी गोशाला के सब गाय मन बीमार म एक महीना के भीतर मरगे । एक महीना होगे, दूध कईसन होथे नई जानन । तोर ददा ह उदास-उदास बईठे हे । तोर कका घलो के पास कोई काम नईए । एक सांस म रमौतीन अपन दुःख ल सुना डारथे । गोशाला ह जीये के आधार रहीस, ओहू लसेठ जी ह छोड़ा दे हे । चन्द्रकला कथे, दाई मोला सब मालूम होगे हे ओकरे सेती आय हंव । घबराय के जरूरत नईए । कोई उपाय सोंचत हंव, आज रात खाये के बेरा बिचारबो ।

पुस्पा कथे रमौतीन बहिनी काबर हदरत हव, घर म खेती किसानी हे ओला एक जूर मिलके करव । खाय के पुरता धान, गेहू, चना हो जाही । रहे बर दुमंजिला मकान हे । रमौतीन कथे, दीदी ये सब तो चन्द्रप्रकास के हे, हमर पास तो ये खपरा वाला मकान रहे बर हावय । सिर छिपाय के जगा हे । पुस्पा कथे, बहिनी ये सब तो मोरे आय चन्द्रप्रकास घलो तोर बेटा आय । चन्द्रप्रकास के सब धन सम्पत्ति ल चन्द्रकला दीदी के नाम करे ल कहे हे । चन्द्रकला ह कथे, माँ भाई के हिस्सा ल मंय नई खांव । यदि देना हे तो आधा हिस्सा ल चन्द्रसेन के नाम म करवा दे । पुस्पा कथे, ठीक हे बेटी जईसे चाही वईसे हो जाही । रात 9 बजे भोजन के बर परछी म पीढ़ा म लाइन से बईठथे । चन्द्रकला कथे, बाबूजी काबर मुँह ल ओरमाय हस, मंय तो हंव न । चन्द्रसेन ल एक बेटा कहिथस, बेड़े बेटा मंय हंव । बाबूजी मंय भोपाल ले सोंच के आय हंव के तुमन बर दूध डेयरी खोलिहंव । का विचार हे सब झन बतावव । चन्द्रसेन कथे, दीदी बहुत बढ़िया सोचे हस । ओतका म हम जीबो-खाबो । रामदेव, कामदेव अउ रमौतीन मन हाँ में हाँ मुड़ ल हला देथे । चन्द्रकला कथे, घर के पीछवाड़ा म पसुपालन बर एक परछी उतरवा देथंव, जेमा दस भईसी बाँधे जा सकय । चारा, भूँसा, पानी के बेवस्था रहय । फर्स ह पक्का रहय । भईसी के दूध ले बेचहा अऊ गोबर ल खाद बना के खेत म डारिहा, धान घलो जादा होही । सबके सलाह मसविरा हो जाथे, भात खा के सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह पी. ए. ल बुला के भारतीय स्टेट बैंक कृसि साखा, रायगढ़ से डेयरी उद्योग के लिये मैनेजर ल बुलवाथे । मैनेजर ह डेयरी के लिये एक लाख तक लोन देबर तियार हो जाथे । पचास हजार रूपिया सेड बनाये बर अउ पचास हजार रूपिया भंईसी खरीदे बर । चन्द्रकला देवी बैंक के मैनेजर ल फार्म चन्द्रसेन के नाव म भरवा देधे अउ गारेंटर अपन बन जाथे । पचास हजार रूपिया मार्जिन मनी जमा भी कर देथे । दूसर दिन मिस्त्री बुला के घर के पीछवाड़ा म परछी बनवा देथे । बैंक लोन म दस भंईसी मुर्रा नस्ल के हरियाणा से दो ट्रक म मंगवाथे । बैंक मैनेजर ह भैंस मालिक ल एक लाख के ड्राफ्ट दे देधे । भईसी मन के बीमा भी करवा देथे । सब भंईसी के कान म छल्ला पहिना देधे । दस भंईस के एक सौ बीस लीटर दूध होत रहीस । मस्त चारा-दाना, रामदेव अउ कामदेव अउ चन्द्रसेन खिलावय । दूध डेयरी चल निकलिस, एक साल भर म एक लाख रूपिया बैंक लोन ल छूट दीस । अच्छा दूध के धंधा ह चल निकलिस ।

चन्द्रकला देवी ह डेयरी के नाम – ‘सतनाम डेयरी’, प्रोप्राइटर ‘चन्द्रसेन यादव’ रखे रहय । ऐ बछर गेबर खाद डाले ले धान के फसल घलो जादा होईस । घर म धरे के जगा नई रहय । आयीस त लक्ष्मी ल बम्फर के, एकदम चकाचक होगे । रायगढ़ सहर म चन्द्रसेन दूधवाला के नाम से फेमस होगे । सुद्ध दूध, दही, मही, घी भी बनाय लगीन । आस-पास के सहर म घी, दही के माँग बहुत रहय । सतनाम डेयरी नाम के अनुसार काम भी करय । दूसर से दाम भी कम लेवय । पूरा परिवार जईसे गोसाला म काम करय वईसे सब जुर मिल के साफ सफाई, गोपर फेंकाई, दूध दुहाई अउ बेचाई । सतनाम डेयरी से ग्राहक मन संतुष्ट रहय । रामदेव यादव परिवार कई बछर ले गोसाला के दूध बेचत रहीन, सब सेठ, साहूकार, अधिकारी मन जानत रहिन ।

चन्द्रकला देवी ह दउरा म सरिया जाथे । गाँव-गाँव घर-घर लोगन से सम्पर्क करथे । कई विरोधी पार्टी वाला मन कहय, अब चुनाव आवत हे त घर घर घूमत हे अउ पाँच साल कहाँ रहीस । चन्द्रकला कथे, भाई हो तुमन जीतवाय रहय त मंय मंत्री बनगे रहेंव, मंत्री तो पूरा परदेस के होथे । मोर चुनाव क्षेत्र के साथ पूरा मध्यप्रदेस ल देखत रहेंव । मंय तो हर महीना आवत रहेंव, भले ही आप लोगन से नई मिल पायेंव । चन्द्रकला देवी नमस्कार करके आगे बढ़ जावय । महिला मंडल के सदस्य मन कर्मठ कार्यकर्ता रहय । जिंहा जावय महिला मन, उहाँ आरती उतार के सुवागत करय । महिला मंडल के सदस्य मन फेर चुनाव म खड़े होय बर कहीन । एक चुनाव म अ जीतवाबो । सरिया क्षेत्र म चन्द्रकला देवी के पक्ष म माहौल रहय । जतका बिकास चन्द्रकला के कार्यकाल म होईस, आज तक नी होय रहीस । चन्द्रकला देवी एक हफ्ता गाँव-गाँव के भारी दौरा करके सरपंच मन के दस्तखत कराके रख लेथे । चुनाव तियारी के शुरूआत कर देथे ।

गाँव के महिला मंडल के प्रमुख सदस्य मन ल पिछले चुनाव म प्रचार करे बर सायकल देय रहिस । सब कहीन ए साल अच्छा सायकल देबे, चन्द्रकला देवी । चन्द्रकला देवी कहिस, टिकिट मिले के बाद सब झन ला सायकल देहूँ । सब झन गाँव-गाँव, गली-गली परचार करीहव । चन्द्रकला देवी जनसंपर्क करके सारंगढ़, चन्दा देवी विधायक के पास जाथे । मधु, निर्मला, गुंजा सब महिला मंडल के सदस्य मन ल बुलवा लेथे । मधु नगरपालिका के अध्यक्ष बन जाथे । मधु अउ महिला मंडल के सदस्य मन एकमत हो के चन्दा देवी ल विधायक के टिकट फेर ए साल मिलय के प्रस्ताव पारित करीन । पूरा राज्य म महिला उत्थान के काम म सरिया अउ सारंगढ़ माडल बने हे । चन्दा देवी के मार्गदरसन अउ मेहनत के बल पर माडल बने हे । चन्दा देवी ह चाय नास्ता कराथे । सब झन संझौती बेरा म घर चले जाथे ।

चन्द्रकला कथे, मंय रायगढ़ जाथंव बहिनी । कार म बईठ के रात 10 बजे पहुँचथे । गनमेन अउ पी. ए. रेस्ट हाउस म रूक जाथे । चन्द्रकला देवी अपन घर म रूकथे । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ह रस्ता देखत रहीन । चन्द्रकला कथे, माँ मंय जेवन जे के आये हंव । चन्दा बहिनी जेवन बिना आन नई देवय । मोला एक गिलास गरम दूध देवव। हाथ मुंह धो के कुरसी म बईठ जाथे । पुस्पा दाई ह हाल चाल पूछथे, सब ठीक हे बताथे । चन्दा देवी विधायक हे ओकर घर म सब चीज उपजथे । मंय आधा दिन तो ओकर घर खाय हांवव, बढ़िया प्रेम से खिलाथे । गपसप मारत चन्द्रकला सो जाथे ।

रामदेव ह दूसर दिन रेल से सक्ती जाथे, सक्ती म दमउरहरा जाथे । उहा राउत परिवार म टूरी बाढ़े रहय, उमर तीस साल के उपर होगे रहय । सुन्दर गोरी नारी, ऊंच पूर, नाक-नक्शा बने रहय । रामदेव ह कंठी राउत ल कहिथे, तोर नोनी ल पसंद कर लेंव, मोर लड़का ल लेके रविवार के दिन आवत हंव । ओही दिन फलदान, सगाई, मुँह देखाई कराबो । रामदेव के बढ़िया सुवागत करथे । रामदेव दूसर दिन रेल से रायगढ़ आ जथे । रमौतीन अउ चन्द्रसेन ल बताते, कंठी राउत के दस एकड़ जमीन अउ पचास से जादा गाय, बईला हे, एक बदरी जंगल म चरे गय हे । बने-बने घर द्वार हे, पूरा घर ल ओही सम्हारत हे । बने चोर होगे हे । रमौतीन कथे, चन्द्रसेन घलो तो जादा उमर के होगे हे । पुस्पा देवी ह सुन के खुस हो जाथे । चन्द्रकला देवी घलो मीटिंग से आ जथे, बहुत खुस होथे । चला बहुत दिन के बाद म घर म बिहाव होत हे । रामदेव ह चन्द्रकला ल बताते कि बेटी ईतवार के दिन चन्द्रसेन ल लेके जाबो । फलदान के समान खरीद लेबे, एक जीप किराया म ले लेबो । चन्द्रकला कथे, बाबूजी तंय फिकर झन कर सब ठीक हो जाही ।

चन्द्रकला देवी ह पुस्पा देवी दाई ल बाजार ले के जाथे । बाजार से लूगरा, पोलखा दू जोड़ी सोना के अंगूठी, पैर पट्टी, झुमका खरीद लेथे । ईतवार के दिन सब झन कपड़ा पहिर के तियार हो जथे । चन्द्रकला देवी ह होटल से पाँच किलो मोतीचूर के लड्डू मंगवा लेथे । सेवफल पाँच किलो, केला, संतरा घलो डाली म रखवा लेथे । जीप अऊ कार म रायगढ़ से निकल जथे, सड़क खराब होय के कारण से दू घंटा म दमउदहरा पहूँच जथे । ठीक बारह बजे पहुँचथे । कंठी राउत, ह अपन सगा, संबंधी मन ल गाँव वाला मन ल बुला के रखे रहय । लगभग बीस आदमी जूरे रहय । घर के परसार म खटिया बिछा दे रहय, घर के भीतर परछी म खटिया चार पाँच ठन बिछा दे रहय । कंठी राउत अउ ओकर भाई महिंगल, सुधेराम, बुधेराम, गाँव वाला मन एक-दूसर के पायलगी करके जोहार करीन । महिला मन के घर के अंदर दौनामांजर ल लेके बैठाईस । बने घर समरे पकड़े रहय । दौनामांजर ह सबके टपाटप पाँव परिस । चन्द्रकला ह पहिचान लेथे, तंहि ह हमर बहू बनत हस । दौनामांजर लजावत हाँ म सिर हला देथे । महिला मन ललोटा म पानी देथे । गोड़ हाथ धोये बर कुआँ बारी कोती ले जाते, कुआँ से पानी निकाल के पैर धोवाथे । दो तीन एकड़ म बारी अउ खलिहान, कोठार रहय । बरे किसान, पसु पालक रहय । घर घलो चारों ओर घेराय रहय, अंगना के बीच म तुलसी चौरा रहय । अंगना म पथरी फरसी लगे रहय । कंठी राउत, आस-पास के सम्मानित किसान रहय । चन्द्रकला, पुस्पा देवी देख के खुस हो जथे । अंगना के परछी म बईठारते । दौनामांजर के दाई मंगली कथे दूकलहीन, समारीन, देवकी चार-पाँच महिला मन गाँव के आ जथे । पायलगी करके खटिया अउ पीढ़ा म बईठ जथे ।

कंठी राउत के घर के दूवारी म लाल बत्ती के कार देख के लईका मन के भीड़ लग जथे । गाँ म सोर उड़ जथे, कंठी राउत के घर मंत्री आय हे । गनमेन अउ पी. ए. गाड़ी म बईठे रहय । ड्राईवर ह लइका मन ल भगावत जाय, सब झन ह कार ल छू-छू देखय । धीरे धीरे स्कूल के गुरूजी, पटवारी, ग्राम सेवक, नर्स सबआ जाथे । कंठी राउत सब ल परछी म बईठाथे । सब झन ल चौंगी, बीड़ी देईस । सब झन जाग गे कि लड़खी देखे आये हे, आज फलदान हे । कंठी राउत ह बताईस कि रायगढ़ से आय हे, लड़का के बहिनी मंत्री हे । दौनामांजर के भाई सुखराम अउ कका महिंगल ह चाय-पानी लेके आईस । सब झन ल पिलाईस, कंठी राउत भोजन के पहिली से तियारी कर डारे रहय ।

रामदेव चन्द्रकला ल कईथे, बेटा चाय पानी तो पी डारेन, फलदान के नेंग करके जेवन जेबो । कारज हो जाय तो खाबो । कंठी राउत ल कईथे, बाबूजी ह कहत हे फलदान हो जावय, ओकर बाद खाना खाबो । कंठी राउत कईथे, बेटी पंड़ित महराज ल नई बुलाय हन, दूसर गाँव म रईथे । चन्द्रकला कईथे, बाबूजी हमन लाय हन न । पुस्पा पांड़े हावय, कारज पूरा कर देही । तुमन जईसे चाहत हंव । कंठी राउत ह अंगना म परछी म चादर बिछा देथे । एक डहार लड़की वाले, एक डहार लड़का वाले मन बईठ गे । पुस्पा पांड़े ह महाराज बनके कारज करीस । बीच म चौंक पुर के कलस मढ़ाईस, भगवान के फोटो रखीस, अगरबत्ती धूम के हूम दीस । वर-वधू ल बईठाइस । चन्द्रकला देवी ह कार से लट्टू, केला, सेव, जेवर-गहना ल मंगाईस । पुस्पा पांड़े ह दूनों झन ल अगरबत्ती जला के पूजा कराईस । एक-दूसरे के अंगरी म सोना के मुंदरी पहिनाईस, सब कोई ताली बजा के बधाई देईन । लड़की के गोदी भराई के रस्म घलो पूरा करीन । वर पक्ष के मन रामदेव ह सबसे पहिली दो सौ रूपिया वधू ल देईस अऊ आसीस देईस । दौनामांजर ह पाँव परिस । चन्दा देवी, कामदेव अउ पुस्पा देवी ह पईसा धराईन । वधू पक्ष के मन चन्द्रसेन ल रूपिया देईन । बर-वधू ल कहिन, सबके पाँव छू के आसीरबाद ले लेवव ।

पुस्पा देवी ह लड्डू, केला, सेव ल सब झन ल बंटवा देथे, बांचे लड्डू, केला, सेव ल घर म भेजवा देथे । समधी भेंट रामदेव, कामदेव, कंठी, महिंगल गले मिल के करथे । समधी भेंट के बाद सब जुटे सगा संबंधी मन ल जेवन जेय ल कहिथे । परछी म चादर बिछा के लाइन से बईठा देथे । महिंगल, सुधेराम, बुधेराम अउ ओकर लड़का मन भोजन परोसथे । इक्कीस प्रकार के पकवान, रोटी पोरसिन । छत्तीसगढ़ी भोजन खा के तृप्त हो जथे । गाय के शुद्द घी म पकाय रहय, फेर उपर के राहेर दार म चम्मच भर के घी डालय । कंठी राउत के जय जायकार होगे । सब झन भोजन करके बईठक म आ जथे । चन्द्रकला देवी ह सादी के मुहुरत कब करबे कहिस । पंचांग देख के पुस्पा पांड़े ह कहिस, बसंत पंचमी के दिन सादी के मुहूरत हे । कंठी राउत कहिस, ठीक हे । चन्द्रकला देवी कहिस, बाबूजी गायत्री परिवार के रीति रिवाज से नेंग होही, यदि तुमन चाहत होहू त गायत्री मंदिर म बिहाव कर डारबो जादा खर्चा नई होही । कंठी राउत कहिथे, तेल हरदी तो चढ़ाय ल पड़ही । चन्द्रकला कथे, अपन-अपन घर म वर-वधू के तेल-हरदी चढ़ाबो बस सात फेरा गायत्री मंदिर म होही । बिहाव तय हो जाथे ।

चन्द्रकला कथे, अब छुट्टी देवा जाय बर । दौनामांजर कथे दीदी दमउदहरा ऋषभदेव तीर्थ थोरकन दूरिहा म हे, चला देखा देथंव । कार, जीप म बईठ के दमउदहरा देखते, बहुत मनोहारी दृस्य रहय । पहार से जल प्रपात बन के पानी गिरत रहय । दहरा के रूप म पानी बारो महीना भरे रथे । साफ पानी, सीतल जल रहय । सामने के पथरा, पत्थर के चट्टान म पाली भासा म लिखे हावय । पं. लोचन प्रसाद पांड़े जी ह प्राचीन महाभारत, रामायण काल के बताय हे । बहुत प्राचीन सिलालेख हे । जैन धर्म के ऋसभदेव महाराज यहाँ तप किये थे । मैकाल पर्वत श्रंखला बहुत प्राचीन है जो कि अमरकंटक से रायगढ़ा, उड़ीसा, बिहार चले गय हे । बहुत मनोहारी स्थान हे, पर्यटन के लिए देस विदेस के पर्यटक आथे । दौनामांजर कथे, दीदी मंय रोजिना झरना म स्नान करे आथंव, बहुत मजा आथे । हमर कई बरदी गाय, गौरा ले चराय बर पहाड़ के अन्दर ले जाय गे हे, गरमी म नीचे लाहय । चन्द्रकला देवी कथे, तोर बिहाव अब होवत हे अच्छा लउहा-लउहा आबो । अब हमन ल रायगढ़ जाना हे, छोड़व । कंठी राउत ह सब झन ल धोती, लूगरा भेंट करथे । साम के पाँच बज गे रहय, दमउदहरा से सक्ती रात आठ बजे पहुँचथे । रात म जेवन जेके सो जथे । रमौतीन ल रामदेव कथे, बिहाव के तियारी कर, बसंत पंचमी म भांवर परही । रमौतीन कथे, कतका दिन बांच हे । रामदेव कथे, एक हफ्ता बांचे हावय । रमौतीन कथे, डोकरा अतका लउहा कईसे करबो तियारी । बिहाव पत्रिका छपवाय ल लगही । रामदेव कथे चन्द्रकला ह सब कर डारही, तंय संसो फिकर झन कर । तोर मईके मंय चल जाथों, पूरनिमा ल टेलीपोन से बुला लेबो । चन्द्रप्रकास ल टेलीफोन से सूचित करबो, सब आ जाही संसो झन कर । सब बढ़िया अच्छा ढंगसे हो जाही । रमौतीन कथे, बेटा के बिहाव करिहंव त संसो तो करना चाही । रामदेव कथे, बेटा के बिहाव बुढ़ापा म होत हे, मड़वा म बने नाचबे डोकरी । रमौतीन कथे, बेटा के बिहाव होथे काबर नई नाचिहंव, पागी छोर के नाचिहंव । मोर आखिरी बेटा के बिहाव होते हे । मोर दू टूरी मन के बिहाव म नाचे नई पायेंव । जरूर चन्द्रप्रकास के बिहाव म नाचे रहेंव । रामदेव कथे डोकरी सब ठीक हो जाही । रात म गप मारत सो जथे ।

चन्द्रकला देवी ह प्रिंटिंग प्रेस वाला ल घर म बुला के पत्रिका छापे बर आदेश दे देथे, दूसर दिन छापके देथे । चन्द्रकला के पी. ए. अउ स्टॉफ कर्मचारी मन नाम व पता लिख के डाक म डाल देथे । रायगढ़ के पत्रिका ल चपरासी अऊ चन्द्रसेन खुद जाके बाँट देते । चन्द्रसेन के कपड़ा घलो सिल के तियार आ जथे । बसंत पंचमी से तीन दिन पहले मड़वा गड़ जाथे । पूरनिमा ह जबलपुर से रायगढ़ चार दिन पहिली आ जथे । सुनील घलो साथ आ जथे । चार बच्चा के आय से घर किलकारी से गूंजे लगथे । चन्द्रप्रकास रायगढ़ आ जथे । डॉं प्रेमलता अउ चार लईका संग म लाय रहय । डॉ. प्रेमलता के माँ पिताजी घलो आय रहय । रमौतीन के मायके के भाई भौजी आगे । पुस्पा देवी ह सब लईका संग मस्त खेले लगिस । चन्द्रकला ह बिहाव के पूरा समान खरीद लिस । भोजन पकाय बर रसोईया चमन हलवाई ल लगा देधे । घर के अँगना म मड़वा गड़ गे, टेंट लग गे । घर के सामने बड़े टेंट म एक सौ कुरसी घलो लग गे रहय । एकदम झकास घर दिखत रहय । दूनो घर म झालर झिलमिलात, चमकत रहय । लाउडस्पीकर म बिहाव गीत बजत रहय । घर अंगना म आदमी, औरत, लईका भर गे रहय । बढ़िया खुसी के माहौल रहयष आसपास के पढ़ोसी मन आवत रहय ।

पुस्पा कथे, चूलमाटी के समय होत हे । चन्द्रकला ह रमौतीन दाई बर पोतिया लूगरा (कोसा), पुस्पा पांड़े बर पोतिया लूगरा, लूगरा कांध के डार के पाँव परिस । पूरनिमा, प्रेमलता अउ चन्दा देवी ल बनारसी लूगरा देईस । जतका पहुना आय रहय, सब ल लूगरा धोती देईस । पूरनिमा ह पर्रा म दीया जला के नवा लूगरा पहिर के निकलिस । प्रेमलता, चन्दा देवी, रमौतीन, पुस्पा देवी घलो नवा लूगरा पहनीस । जतका महिला पहुना रहीन सब लूगरा पहरिन । सुनील ह कुदारी, सब्बल माटी कोड़े बर चपराली ल पकड़वाईस । मुंडहर घर से पर्रा बोह के पूरनिमा निकलिस, पाछू-पाछू रमौतीन सब महिला मन संग बिहाव गीत गावत मड़ला ले निकलीन । चन्द्रकला देवी देवी ह चन्दा देवी के संग चलत रहीस । तरिया के पार म पहुँचीन । पीपर रूख तरी माटी के पूजा अगरबत्ती, धूप जाल के पूरनिमा ह करथे । प्रेमलता, चन्दा सब झन धरती माँ के पूजा करथे । सुवासा बने सुनील ह गैंती, सब्बल रखथे ओकरो पूजा, आरती उतारथे । गैंती ल पाँच हाथ पकड़ के माटी कोड़ के नेंग करथे ।

बिहाव गीत –
तोला माटी कोड़े ल नई आवय सुवासा धीरे-धीरे
अपन तोलगी ल छोर धीरे-धीरे

पाँच कुदारी मारके माटी खोदते । माटी ल रमौतीन दाई ह अपन अंतरा म झोंकथे । पुस्पा, प्रेमलता ह माटी अंचरा म झोंकथे । माटी पूजा के बाद गीत गावत, मंगल गीत गावत घर आ जथे ।
सुवासिन पूरनिमा ह बढ़ई घर से मंगरोहन लाथे । पहिली से बाजार ले कूड़ा, करसा खरीद के रामदेव ले आथे । रात आठ बजे चन्द्रसेन के तेल-हरदी चढ़ाते । तेल, हरदी, दाई, भउजी, काकी, मामी बहिनी सब तेल चढ़ाथे । बिहाव गीत से अंगना गमकत रहय । सब लईका मन खेलत-कूदत रहय । तेल चढ़ाय के बाद चन्द्रसेन ल मड़वा ले पूरनिमा अउ सुनील ह घर म ले जाथे । घर म बहुत दिन के बाद मड़वा गड़े रहय । घर म खुसी छागे रहय ।

बिहाव गीत –
एक गाँठ हरदी पीसे चक चंदन हो पीसे चक चंदन,
होत मोर दुलरू के बिहाव ।
एक तेल चढ़गे, लाला अहिबरन के हो,
लाला अहिबरन के ।

चन्द्रसेन के कपड़ा धोती, बनियान भींग गे रहय । हरदी, तेल से कांपत रहय । टावेल से पानी ल पोछिस अउ उपर से साल ओढ़िस । चन्द्रसेन घलो चरेर होगे रहय । रात म भोजन करके सोगे । जेला जहाँ दूनों घर म जगा मिलिस, सूतगे रहय । चन्द्रकला देवी, चन्दा अऊ प्रेमलता, पूरनिमा अलग कमरा म लईका मन ल लेके सूतगे । चन्द्रप्रकास, सुनील, समारू सब झन अलग कमरा म सूतगे । बांच गे रहय रमौतीन, पुस्पा रंघनी घर के परछी म सोगे । रामदेव अउ कामदेव, प्रेमलता के पिताजी एम. आर. भारद्वाज परछी म सूतगे । रात के बारा बज गे रहय, रसोईया मन घर चले गीन ।

बिहाव के दूसर दिन भर कई तेल हरदी चढ़ाईन । दोपहर म महिला मन हरदाही खेलिन । एक दूसरे ल हरदी, तेल लगाईन । पूरनिमा ह सुनील ल कस के हरदी लगाईस, सुनील घलो कम नई रहय ओहू ह कस के हरदी तेल लगाईस । चन्द्रकला देवी ल चन्दा देवी ल प्रेंमलता अऊ पूरनिमा हरदी लगा के तेल मालिस करीन । घर भर म लोग, लईका मन हरदी म पहिचान नई आवत रहय । सिरफ आँखी ह जुगुर जागर बरत दिखय । रामदेव, कामदेव ल रमौतीन लगाईस । एम. आर. भारद्वाज ल पुस्पा देवी ह समधी कहिके लगाईस, मड़वा म समधीन ल छुये के छुट रहिथे । पहिली बार तो समधी ल छुवत हंव, मंय तो बुढ़िया हंव समधी जी लगाय देवव हरदी । प्रेमलता के माँ आ जथे, कथे बने लगावव ह समधी । बुढ़वा ह जवान हो जाय । पुस्पा देवी ह परणाम करके चल देथे । प्रेमलता के माँ ह घलो हरदी-तेल पीठ म लगा देथे । सब झन मिल के तरिया म नहाय ल चल देथे ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी, प्रेमलता ह घर म स्नान कर लेथे, बाकी सब झन नहाय बर तरिया, नदिया चल देथे . सब झन अंगना म बईठ के जेवन खाथे । ठाढ़ बेरा म सरिया ले जमुना, महिला मंडल के सदस्य मन सारंगढ़ से मधु जीप म दस महिला के आ जाथे । चन्द्रकला देवी ल बधाई देथे, भाई के सादी बर । मधु महिला संगीत के बेवस्था म लग जाथे । सब पुरूष मन घर से बाहर चल देथे । फेर सुरू हो जाते महिला गीत संगीत । सिनेमा के धुन म बिधुन होके सब महिला मन मड़वा म नाचत रहय । पुस्पा देवी अउ रमौतीन घलो पर्रा धरके झूम के नाचिन । मधु कहिस, चन्दा अउ चन्द्रकला दूनो दीदी चलव नाचव । भाई के बिहाव करत हव, फिल्मी गीत म नचवाथे . घर म संगीतमय वातावरण म महिला मन आनंद लेथे । हास परिहास, नाटक, साहेब, दरोगा, कलेक्टर बन के मनोरंजन करीन । चन्द्रकला देवी ल कहीन दीदी तोर बिहाव नई होय हे, तेल हरदी नई चढ़े ऐ । आज तोला हरदी तेल चढ़ा देंथन । मधु, जमुना देवी, महिला मंडल के दस सदस्य अउ चन्दा देवी ह अंदर-बाहर कपड़ा के तेल हरदी लगा के किचकिचवा के नहवा देथे । सब महिला मन तेल-हरदी चढ़ा के नचवाईन, मस्त ठुमका लगा के नाचिस ।

मधु ह कथे, दीदी घर जाथन, मजा आगे आज । बहुत दिन म खेले कूदे म, नाचे गाय म । चन्द्रकला कथे, भोजन करके जावा न । रसोईया ल कथे, भईया सब झन ल भोजन करावव । दार-भात, सब्जी-पूरी खवाथे । खाना खा के सब महिला मन सरिया, सारंगढ़ चल देथे । चन्द्रकला कथे, परसो रिसेप्सेन रखे हन, सब झन ल लेके आबे । चन्द्रकला देवी से आफिस के कर्मचारी, अधिकारी मन बधाई देय आत रहय । पार्टी के नेता, कार्यकर्तागण मन बईठे, आवत जात रहय । कामदेव सब ला चाय नास्ता, फल मीठा खवावय, चाय पिलावय । मस्त धमा चौंकड़ी, लईका मन करत रहय । घर, अंगना, दूवार भरे रहय, घर म आनंद ही आनंद रहय ।

तीसर दिन दो बर अउ जीप, कार पाँच-छ ठन म लगभग दो सौ बराती ले के दमउदहरा पहुँच जाथे । बैण्ड बाजा स्पेसल ले जाय रहय । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा देवी, चन्दा देवी अउ कई बड़े अधिकारी, नेता मन ल कुरसी म बईठाय रहयष बाकी बराती मन ल दरी म बईठाईस । मस्त चाय पान, नास्ता कंठी राउत ह कराईस । बारात ल बाद म परघाईस । बिहाव के नेंग गायत्री मंदिर म गायत्री परिवार के अनुसार कराईस । सात फेरा म सात वचन लिन । पति पत्नी के अटूट बंधन म चन्द्रसेन अउ दौनामांजर बंध गे । चन्द्रकला देवी ल सब अधिकारी मन बधाई दीन । नेता, अधिकारी, कर्मचारी सब झन बधाई दे के अपन-अपन घर चल देथे । दिन म बिहाव पूरा हो जथे । दोपहर म भोजन कंठी राउत बढ़िया छप्पन भोग बनवा के रखे रहय । सब बरतिया मन ल अंगना अउ कोठार म बईठाय के शुद्ध घी के पकवान खवाईस । बरतिया मन छप्पन भोग खा के तृप्त हो जथे । घरतिया, बरतिया सब एक संग बईठ के दोना-पत्तल, पतरी म खाईन ।

दाईज म टीके रहय, झांपी, टुकनी, पाँच हजार रूपिया, पचहर दाईज, पाँच गाय लागत, पाँच बोरा धान, एक एकड़ जमीन देय रहय । चन्द्रकला कथे, बाबूजी हमन ल दाईज म कुछ नई चाही, ए मन ल हमन का करबो । रामदेव कथे, बेटी जो ले जा सकत हन ओला ले जाबो, बाकी धान, गाय ल रहेन देथन । जमीन ल चन्द्रसेन के नांव म चढ़ा देहा । दौनामांजर ल बिदा कराय के समय बहुत रोथे । दौनामांजर, माँ, भाभी, सहेली सबो के कले मिलके बहुत रोथ । लड़की मन आज से पहुना बन जाथे । बिदाई के नेंग करके चल देथे । बस, कार, जीप म बईठ के बराती मन दमउदहरा से रायगढ़ रात म आठ बजे पहुंचथे । सब अपन-अपन घर चल देथे । घर के पहुना मन बांचे रईथे, रात के भोजन करके सो जाथे ।

रामदेव रमौतीन ल कथे, कस डोकरी घर सुन्ना रईसे । मड़वा म बने डींड़वा नाचे के नहीं । रमौतीन कथे, काबर मंय डींडवा नई नाचिहंव, मोर बेटा के बिहाव होत हे । मोला अड़बड़ मजा डींडवा नाचे म आईस । अड़ोस-पड़ोस के महिला मन आ गे रहिन । बड़ नाचेन, सब महिला मन बने नाचिन, मजा आ गे । रामदेव कथे, ठीक हे टूरा के बिहाव म आनंद-मंगल मन म उछाह तो होना चाहिए । अब अंगना म कब मड़वा परही पता नहीं । रात म गपशप करत डोकरा डोकरी सो जाथे ।

दूसर दिन रिसेप्शन रखे रहय, चन्द्रकला देवी ह सरिया क्षेत्र के महिला मन ल निमंत्रण दे रहय । चुनाव होने वाला रहिस । सारंगढ़ अउ सरिया क्षेत्र के महिल मंडल के सदस्य मन बरदी के बरदी दल के दल आय रहय । चन्द्रकला देवी ह बढ़िया भोजन के बेवस्था करे रहय, बहुत पंडाल लगे रहय बिजली के रोसनी म जगर-मगर बरत रहय । पंडाल अउ सड़क म कई हजार के भीड़ जुटे रहय । गाँव वाला मन पंगत म बईठाय के, दरी म बईठाय के दोना पत्तल म भोजन खवाईस । दो से तीन हजार आदमी औरत मन खाना खाईन । चन्द्रकला देवी ल भाई के बिहाव के बधाई देत रहीन । वर-वधू ल गिफ्ट अउ लिफाफा घलो पकड़ावत जावय । रात के बारह बजे तक भोजन के बेवस्ता चलत रहीस । सहर के मेहमान मन ल एक पंडाल म बफे पद्धति से भोजन करवाईस । चन्द्रकला देवी के वाहवाही हो गे । रायगढ़ सहर म धूम-धाम से बिहाव होईस । अतका भीड़ कभू नही होय रहीस । पुस्पादेवी, रमौतीन, प्रेमलता, पूरनिमा, सुनील, चन्द्रप्रकास अऊ घर के पहुना मन सबसे आखरी म भोजन करीन । लईका मन बढ़िया सिनेमा के गाना म नाचत-झूमत रहीन, टूरा-टूरी मन डिस्को डांस नाचत रहीन । बड़े मन हांस-हांस के लोटपोट होगे रहीन । रात के एक बज गे, भोजन करके वर-वधू ल घर म ले जाथे ।

रमौतीन अऊ पुस्पा कथे, आज बने दिन हे सुहागरात बर, घर दे दव । पूरनिमा ह एक कमरा ल बढ़िया सजा देय रहय . चन्द्रसेन अऊ दौनामांजर के जीवन के सुरूवात सुहागरात से हो जथे, दो सरी अउ एक प्राण हो जथे । संग-संग जीये, मरे के कसम खाथे, दौनामांजर बहुत खुस हो जाथे । चरेर उमर के बिहाव होय रहय, गाँव के दुनियादारी ल सीख गेरहय . रात म गपसप करत सोगे । रात म देरी से सोय म बिहनिया 9 बजे जागीस । पूरनिमा ह चाय लेके गईस । पूरनिमा ह गुडमार्निंग कहिस, चाय बिस्कुट ल स्टूल म रख के आगे । दौनामांजर अऊ चन्द्रसेन फ्रेस हो के चाय पीईन । चन्द्रसेन कमरा म बाहर, सुनील, चन्द्रप्रकास अउ पहुना मन संग आके बईठ जथे । सुनील ह बधाई देथे । चन्द्रसेन कथे, सब ठीक-ठाक हे । अच्छा हे, चरेर उमर के बिहाव कतका जोर मारही, सुनील हांसत-हांसत लोटपोट हो जथे ।

चन्द्रसेन सब पहुना मन चाय-पानी पिलाय लगथे । मड़वा ह भरे रहय . लईका मन घलो सोय रहय . अड़बड़ नाचे-कूदे रहय । दस गियारा बजे तक सोवत रहीन । रमौतीन दाई ह दोपहर के भोजन के तियारी म लग जाथे । पूरनिमा ह दौनामांजर ल कथे, भउजी नहा धो के, पूजा-पाठ करके रंधनी म चल भात रांधे ल परही । दौनामांजर लउहा तियार हो जाथे । रमौतीन ह घर के देवता-धामी ल अगरबत्ती, धूप, होम देवाथे । तुलसी चौरा म दीया, अगरबत्ती से पूजा कराथे । फेर रंधनी घर ले जाथे समझाथे, बेटी मोर सास ह जो मोला बताय रहीस तोला बतात हंव, घर के चाबी ले । आज ले तंय घर के मालकिन अस । जो पका के देबे ओला मंय खा लेहूँ । पुस्पा देवी घलो समझाथे । दौनामांजर दूनों झन के पाँव म गिर जथे । पाँव परत हो दाई हाँ, मोला आसीस देवव । दूनों झन, दूधो-नहाओ, पूतो फलो के आसीस देथे । दौनामांजर ल उटा के छाती म लगा लेथे । रमौतीन कथे, बेटी हमन कतका दिन के पहुना आन, कतका दिन जीयत हन । तोर बेटा के मुँह देख के मरबो, तभे हमन ल मुक्ति मिलही । दौनामांजर ल रंधनी घर म सब समझा देथे ।

पूरनिमा ह भउजी के संग खाना बनाय लगथे । भउजी के कान म पूछथे, भउजी भईया ह बने मया करीस । भउजी हां म सिर हला देथे । पूरनिमा कथे दीदी जाग गे, रंघनी घर म आवत हे । चन्द्रकला देवी रंधनी घर म पीढ़ा म बईठ जथे । दौनामांजर पाँव छूथे, आसीस देथे । बछर भर म गोदी म बाबू खेलय । दौनामांजर ल छाती म लगा लेथे । खुसी के आँसू छलक जथे । चन्द्रकला देवी पीढ़ा म बईठ के चाय पीथे । साग ल पूरनिमा के संग साफ करे लगते, मटर ल छीले लगथे । बढ़िया ताजा मटर मीठ-मीठ लगत रहय । पूरनिमा घलो खात जावय । थोरिक देर रंधनी म बईठ के चन्द्रकला अपन कमरा कोती आ जाथे । सब पहुना मन संग अंगना म बईठ के काम बूता भोजन के बेवस्ता म लग जाथे ।

चन्दा देवी ह कथे दीदी अब बिहाव ह निपट गे, मंय ह घर जाहंव कहत रेहेंव . चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी नवा बहुरिया के हाथ के जेवन जेय के जाव । बेचारी ह कतका मेहनत करके भोजन बनावत हे । खीर, तसमई, पुड़ी, दार-भात, साग कतेक जिनिस के व्यंजन बनावत हे । चन्दा देवी कथे, दीदी बने हुसियार पतोथिया हस । मोर जहुरिया होही दौनामांजर ह । चन्द्रकला कथे, तंही ह उमर ल पूछ के बता । रंधनी घर म जा के दौनामांजर ल पूछथे, बहनी तोर जनम तिथि का हे । बताथे दीदी मोर उमर ह उन्तालीस, चालीस चलत हे । चन्दा कथे तब हो बहिनी पाँच बछर छोटे अस । चन्द्रकला कथे बहिनी एक बछर म दू लईका बिया डारही । जुड़वा होही त चार लईका मिल जाही । दौनामांजर सरमा जथे, दीदी काबर चार-चार लईका होवात हव ।अभी मंय खेले खाहंव, मौज मस्ती करे के बाद लईका बियाहंव । चन्द्रकला कथे, बहु तोर सास ह तोर लईका के मुँह देख के मरहूँ कहत हे, नई तो मोर आत्मा ह भटकही कहत हेत कईसे करबे । दौनामांजर कथे, भगवान जईसे हमन राजी हन ।

चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी रंधनी घर म पीढ़ा म बईठ के खीर-पुड़ी, बरा-भजिया, दार भात, साग खाते । बढ़िया सुवादिष्ट खाना पकाय रहय, दूनों झन मस्त भरपेट भोजन खाके आसीस, देईन . घर भर के पहुना मन ला भोजन कराथे । पूरनिमा, प्रेमलता, दौनामांजर बईठ के संग म खाथे । पूरा परिवार भोजन करके संतुष्ट हो के बधाई देथे । दौनामांजर मन लगा के जेवन बनाय रहय । लईका मन के किलकारी के घर-अंगना गूंजत रहय । भोजन करे के बाद म चन्दा देवी ह सारंगढ़ चल देथे । चन्द्रकला देवी पुहना, प्रेमलता, पूरनिमा के संग बईठ के गपबाजी ठट्ठा करेय लग जथे । दूसर दिन चन्द्रप्रकास, सुनील रायपुर अउ जबलपुर रेल से परिवार सहित चले जाथे । घर ह सुन्ना होगे रहय । घर के सामने पंडाल ह उजड़ गे रहय, बचे खुचे समान ल टेंट वाला मन ले जात रहय ।

चन्द्रकला देवी ह सबके हिसाब चुकता करीस । बिहाव म लगभग एक लाख के ऊपर खरचा होय रहय । चन्द्रसेन अपन डेयरी चलाय लगथे, डेयरी के धंधा से बने फायदा होत रहय । बैंक के करजा हर महीना किस्त म जमा करत जावय, दूध के धन्धा चल निकलथे । बढ़िया फायदा होवत रहय । खेती-किसानी से खाय बर आनाज धान, गेहूँ, चना तिंवरा हो जावय । घर म धन्य-धान्य के भंडार भर गे ।

चन्द्रकला देवी ह बिहाव के बाद सरिया विधानसबा क्षेत्र के भ्रमण म जाथे । सरिया के सारंगढ़ चन्दा देवी से मिले जाथे । सरकारी कार से जाय रथे, चन्दा देवी कथे दीदी चल तुरतुरिया वाल्मीकि आसरम देख दे । सब महिला मंडल ल ले के पिकनिक मनाबो । चुनाव घोसना होवईया हे, चुनाव के महासंगराम म कूद पड़बो । चन्दा देवी के बात मान के दूसर दिन सुबह से तीन जीप, कार म ले के सारंगढ़ से तुरतुरिया के लिये निकल पड़थे । सारंगढ़ से मिधौरी, भटगाँव, कसडोल से तुरतुरिया, बारनवापारा के जंगल म पहुँचथे । नदी के किनारे भोजन पकाय के जुगाड़ कर लेथे । सब समान उतार के रख देथे, सब कोई नदी नहाक के काली देवी के पहाड़ के मंदिर के दरसन करथे । वाल्मीकि आसरम म पूजा करथे, प्राकृतिक झरना से पानी तूरूर-तूरूर बहत रईथे बारों महीना ओकरे सेती नांव ह तुरतुरिया पड़गे ।

वाल्मीकि आसरम बहुत अच्छा, मनोरम स्थान घनघोर जंगल म हावय । पहिली जमाना म कईसे लोगन मन पहुँचत रहीन, बड़ चरज के बात ऐ । सीत ह लव-कुस ल ईंहें जनम दे रहीस । लव कुस के शिक्छा बाल्मीकि आसरम म होय रहीस । आसरम दरसनीय स्थान हे । तुरतुरिया के पास म बारनवापारा राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारन्य हे । सब महिला मन मिल-जुल के-भोजन पकाते । खेल-तमासा, नाच गाना घलो करथे, पिकनिक म मजा आ जथे । बढ़िया भोजन पत्तल म बईठ के खाथे । प्रकृति के गोद म, नदी के रेत म, अर्जुन पेड़ के जुड़ छांव म बईठ के मजा लेत रहिन । देस दुनिया के दूर, जंगल म मंगल मनावत रहीन । पिकनिक मनाय बर कालेज के छात्र मन रायपुर से आ जथे, महिला मन से धींगा-मस्ती करे लगथे । चन्द्रकला देवी कथे दीदी, बहिनी हो लउहा खाके घर चलव, सझौंती बेरा होत हे । फेर सांरगढ़ पहुत दुरिहा हे । चन्दा देवी सब महिला मन ल सकेल के कार जीप म बईठार के तुरतुरिया से अभ्यारन्य म सेर, भालू, हिरण, बनभईसा देखे चल देथे । अभ्यारन्य से एक घंटा बाद निकल के सारंगढ़ बर रवाना हो जथे ।

तुरतुरिया पिकनिक से महिला मन प्रसन्नचित रहय बहुत मौज मस्ती करीन । सब महिला मन चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी विधायक, मंत्री ल धन्यवाद देईन । रात नौ बजे सारंगढ़ पहुँचीन, सब अपन-अपन घर चल देथे । चन्द्रकला देवी ह चन्दा देवी के घर रात रूक जाथे । चन्दा देवी ह गरम-गरम दू गिलास दूध केसर डाल के लाथे । बढ़िया सुंगधित दूध मीठा, दू गिलास चन्द्रकला देवी ह पी जाथे । बहिनी कुछु मंय खांव पींयव नहीं । ड्राइवर, गनमेन रेस्ट हाउस म सोये बर चल देहे, तहूँ थक गे होबे चल बिस्तर लगा सोबो ।
चन्दा देवी ह कोलाबारी कोती हाथ-पाँव धो के जैत खाम म दीया रख के परनाम करथे, हे सतपुरूष साहेब, गरू घासीदास बाबा सहायता कर, छीमा कर बाबा जी । ऐ बछर अउ टिकट दिलवा दे । चन्द्रकला देवी ह आरम करत रहीस । समारू अउ लईका मन भोपाल म रहीन । समारू के बहिनी रमसीला ह कथे भउजी तेल लगा देथंव । चन्दा कथे, हाँ तेल ले के आजा । दीदी के पीठ, कनिहा के मालिस बढ़िया दबा-दबा के करथे । चन्द्रकला देवी ह हल्का, आराम लगथे । चन्दादेवी ह मालिस करवाथे, गपसप मारत कब नींद पड़ जथे, पता नई चलय । बड़ भिनसार कुकरा बासत नींद चन्दा देवी के खुलथे । पानी, पेसाब जाके फेर सो जाथे । रात म थोरक ठंड, जाड़ बढ़गे रिहिस । कम्बल, रजाई ओढ़ के सोगे । सुबे आठ बजे सूरज देवता ह चढ़गे रहय, अंगना म घाम बगर गे रहय । आंखी रमजत-रमजत उठिस, चन्द्रकला अउ चन्दा देवी ह । रमसीला कते भउजी हो आज बने नींद पड़े रहीस, अईसे लगते चन्दा कते, हां तय तेल मालिस हाथ, पाँव रगर के करे रहे, बहुत अच्छा लगीस । चन्द्रकला देवी ह ब्रश करके फ्रेश हो के आ जथे । रमसीला ह तुलसी पत्ता, अदरक डाल के दूध के चाय बना के गिलास भर के लाथे । तीनों झन पीढ़ा म बईठ के गुनगुना धूम चाय पीथे ।

चाय पीयत पीयत चंदा देवी कथे, दीदी चुनाव म टिकट मिलही के नहीं । सारंगढ़ अउ सरिया विधानसभा सीट के पुरूष कई दावेदार मन सक्रिय होगे हे । दिल्ली, भोपाल के चक्कर लगा के हजारों रूपिया खरचा कर डाले हे । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी जब पारटी ह टिकट देही त चुनाव लड़बो, नई तो नई लड़न, का हमन अपन औकात म नई जीत सकन । भले बहुत काम कराय हन पर काम कतको करवाव पर वोट डाले के समय रूपिया,पईसा ल देखथे । जब तक गाँव-गाँव म दारू, मुरगा, बकरा नई देबे, तब तक वोट नई देवय । आजकल गाँव के लोगन मन बहुत चालाक, हुसियार होगे हे । विरोधी पारटी से मिल के पईसा घलो ले लेथे । चतुर चालाक नेता मन गली मोहल्ला के नेता मन पईसा ले के अपन पाकिट म धर लेथे, वोटर मन ल कुछ छोट मोट दे देथे । बाकी बचे रूपिया जेब म । यदि ई मन ल नई पूछबे त हरवा देथे, चुनाव के समय करुता, धोती सफेद पहिर के झकास निकल पड़थे । चुनाव के समय पूछ-परख बढ़ जथे । चन्दा देवी कथे, दीदी यदि टिकिट मिलही त लड़हूँ नई तो निर्दलीय नई लड़व । आजकल गाँव गाँव म विधायक बने ललक जागृति बढ़गे हे । बहुत लम्बा कतार हे, गलाकाट प्रतिस्पर्धा होगे हे । एक दूसरे के कमजोरी ल बढ़ा-चढ़ा के नेता के समक्ष रखथे । विधानसभा क्षेत्र म यदि मोला टिकट नई देहा त चुनाव हार जाहा । मंय ह जीत जाहंव, मय विनिंग कण्डीडेट हंव । बने लम्बा चौड़ा, ओवरू सब नेता के चरण छू के था देथे ।

चन्दा देवी कथे, दीदी चल हमन दिल्ली जाके टिकट के जुगाड़ म लगबो । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी माननीय मुख्यमंत्री जी ह कहीस, क्षेत्र म काम करव टिकट मिल जाही । चन्दा कथे, दीदी सांसद अउ केन्द्रीय मंत्री मन हमन के विरोध म हे । मुख्यमंत्री के विरोध म हे । सायद मुख्यमंत्री ह अपन आदमी ल टिकट दिलवा पाथे के नहीं, मोला संका हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी मंय तो ओकरे भरोसा करे हंव, तहूं ह ओकरे भरोसा म हावस । चुनाव तियारे के संबंध म चरचा करत दस बजगे रहय । कार आगे रहय, रमसीला कथे भउजी चलव कुआँ म गरम-गरम पानी निकाल के नहवा देथंव । चन्दा अउ चन्द्रकला कथे चल लउहा नहा लेथन । रमसीला कुआं से बाल्टी म पानी निकारत जाय, दूनों झन के ऊपर म डारत जाय । लक्स साबुर म नहाईन । रमसीला ल कथे, पीठ म साबुन लगा के पथरा म रगड़ दे । चन्दा कथे, दीदी ईहाँ तरोई के रगड़े के बनाय रथें, बढ़िया रगड़-रगड़ के नहा ले । बढिया रगड़-रगड़ के नहाथे । जब तक तेल फूल लगाथे, तियार होथे, तब तक रामसीला ह चीला रोटी, पताल के चटनी बना लेथे । बढ़िया गरम-गरम चीला रोटी परोसथे । पताल के चटनी म मजा आ जथे । चार चार चीला रोटी म पेट भर जाथे, मजा आ जथे ।

अब मंय चलत हंव, रमसीला कथे, भउजी ड्राइवर अउ गनमेन ल रोटी देय हंव तब तक चहापी न । चन्दा कथे लउहा ला चहा ल । चन्द्रकला देवी चहा पीके कार म बईठ जथे । चन्दा देवी हाथ जोड़ के जय सतनाम, नमस्कार करथे । सारंगढ़ से रायगढ़ दू घंटा म पहुंच जाथे । पुस्पा दाई दुवारी म बईठ के रद्दा देखत रहय । रमौतीन दाई ह रंघनी घर म जाके दौनामांजर ल समझावत रहय, दाल म लहसून अउ लाल मिरचा के तड़का (फ्राई) लगाय बर बतावत रहय । जोर से छनाक ले जले के आवाज आथे, मिरचा के जले ले घर भर म मिरचा तेज ह हवाम फईल गे । सब आंक छीं-आंक छीं कर के छींके लगथे । घर से बाहर अंगना म आ जथे, सब कोई साथ म छींकत रहित । चन्द्रकला कथे, दाई का पकावत हंव, अड़ोस-पड़ोस के धम छींक पहुँच गे । रमौतीन कथे, बेटी बहरिया ला तड़का लगाय बर सिखावत रहेंव । दौनामंडर आँखी रमजत, आँसू पोंछत पाँव छूथे, चन्द्रकला कथे बाबू-लईका लउहा होय । दीदी, तोर आसीरबाद ले तीन महीना होगे महावारी नई होय हंव । चन्द्रकला ह माथा ल चूम लेथे, चल बहुत-बहुत बधाई । घर म वंस चलाय बर बाबूजी आवत हे । बलराम बाबूजी चन्द्रसेन ल बहुत चाहत रहीस, ओकरे सेती बेटा बन के आवत हे ।

रमौतीन, पुस्पा देवी दादी बने के खुसी म झूम जथे, नाचे लगथे । घर म खुसी आनंद ही आनंद हो जाथे । चन्द्रसेन डेयरी से आथे त ओहू ल पता लग जथे । बाप बने के खुसी म दौनामांजर के चुमा ले लेथे । रामदेव अउ कामदेव सुन के खुस हो जाथे । दौनामांजर के ओ जिन ले सेवा-सत्कार, देख-रेख सुरू हो जथे । पुस्पा अउ रमौतीन कोई गरू वाला जीच उठाय नई देवय । बढ़िया फल-फूल, दूध-मिठाई दौनामांजर ल खवावय, दौनामांजर ह गदबिदाय गे रहय ।

चन्दा ह टेलीफोन से चन्द्रकला देवी ल कथे, दीदी काली मंय भोपाल जात हंव, तहूँ जाबे तक संग चलव । चुनाव घोसणा होवईया हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी सरिया अउ सारंगढ़ के महिला मन ल दिल्ली ले जाय पड़ही, तंय सब झन ल पूछ लेबे । चन्दा कथे दीदी ठीक हे मंय दस बारा महिला मन ल तियार कर लेथंव । चन्दा देवी ह मधु, अनिता, चन्द्रिका, रामकली, निर्मला ल भोपाल, दिल्ली जाय बर कथे । सब महिला मन घर म पति से पूछ के बताबो कथे । सरिया से जमुना देवी अउ संगवारी मन ल पूछिथे, ब मना कर देथे । मधु दिल्ली के घटना से डर गे रहे बोलथे पिछले बार दिल्ली म बहुत मुस्किल से जीव बांचे रहीस । अब हमन अपन जान ल जोखिम म नई डारन । आप मन जावव । पार्टी टिकट ले के आहव त चुनाव के प्रचार कर देबो । हमन तो कोई पार्टी म नई आन, जेहा हमन ल पूछही, ओकरे काम करबो । चन्दा देवी अवाक रहि जाथे, चन्दा देवी ह सब बात गोठ ल बता देथे ।

चन्दा देवी भोपाल जाय बर रायगढ़ जीप म जाथे । सारंगढ़ से चन्द्रपुर महानदी के रपटा से नदी पार करत रथे, जीप बीच रपटा म फंस जथे । बीच धार म चक्का फंस जथे । चार-पाँच झन मिल के निकारथे । रपटा से बड़ मुस्किल से जीप पार हो जथे । रायगढ़ रेल्वे स्टेसन म चन्द्रकला देवी ह इन्तजार करत रहय । अहमदाबाद एक्सप्रेस से बिलासपुर आ जथे । ट्रेन ले उतार के भोपाल जाय बर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस बर प्लेटफार्म नं. चार म जाके बईठ जथे । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के डिब्बा ठीक 12 बजे लग जथे । ए. सी. एक नं. कोच म बर्थ नं. एक अउ दो म समान, सूटकेस रखवाथे । चन्द्रकला देवी ल विभागीय अधिकारी अउ कार्यकर्ता मन छोड़े आय रहय । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ठीक समय म छूट जथे । बिलासपुर से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगाँव, गोंदिया, नागरपुर से भोपाल सुबह 6 बजे पहुँच जाथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी कार म बईठ के बंगला चल देथे । चन्दा देवी चाय पी के अपन विधायक बिसराम गृह चल देथे । भूरी अउ कुसुवा स्कूल जाय के तियारी करत रहय, समारू चाय-नास्ता तियार करत रहय । चन्दा देवी सीधा रंधनी म चल देथे । भूरी, दाई आगे कहिथे । भूरी कहिथे, दाई अतका दिन कईसे लगा देय । चन्दा कथे, बेटी चुनाव घोसणा होवईया हे चुनाव यदि लड़ना हे विधानसभा क्षेत्र म रहे बर पड़ही । कुसुवा बाथरूम से निकल के आ के दाई के पाँव छूथे । चन्दा आसीस देथे, बड़े साहब बनव, खूब पढ़व लिखव । भूरी अऊ कुसुवा लउहा तियार हो के अपन-अपन स्कूल चल देथे ।

चन्दा देवी अउ समारू बाच जथें, दूनों झन मिल के सब्जी काट के तियार करथे । दार-चावल, सब्जी पकाथे, चन्दा देवी कथे, मंय नहा लेथंव । नहानी घर म घूस जाथे । समारू कथे, गाँव म गे रहे त बने चिक्कन चिक्कन दिखत हस । चन्दा हंस देथे । चन्दा कथे, अउ मोर डउका गाँव म हे ते हर खवाय-पियाय हे, त चिक्कन दिखत हंव । समारू कथे, का भरोसा औरत मनके मन सब ललचा जाय । चन्दा कथे अतका भरोसा तो करना चाही, कम से कम मंय तो नई करेंवा । समारू कथे, मंय कहाँ करत हंव तंय करे हस । मंय तो अतकेच कहेंव हंव बड़ सुघ्घर दिखत हस । चन्दा देवी कथे, चल ठीक हे, आ पीठ म साबुन लगा दे, रगड़ दे । समारू पीछ म साबुन लगा के कपड़ा म रगड़थे । चन्दा कथे, हाँ भरभरावत हे । काल कुआँ म नहावत रहेंव त रमसीला ह बने रगड़ दीस । समारू कथे, करिया गे हे । चन्दा कथे, बस-बस जादा तहूँ झन रगड़, नई तो करिया जाही । चन्दा नहा के तियार हो जथे ।

चन्दा अउ समारू भोजन करके आराम करथे, नींद पड़ जाथे । समारू ह पत्रिका पढ़त रईथे, दू बजे भूरी अउ कुसुवा आ जथे । लउहा कपड़ बदल के भात खा लेथे । भूरी दाई के संग म सो जाथे, कुसुवा समारू के संग पत्रिका, टी.वी. देखथे । समारू घलो दरवाजा बंद करके आराम करे लगथे । भोपाल के हवा पानी सूट करत रहय, पूरा परिवार अंगरेज मन जईसन दिखत रहय । भूरी अउ कुसुवा कक्षा 11 वीं अउ 12 वीं म पढ़त रहय, बोर्ड परीक्छा के तियारी म लग गे ।

चन्द्रकला देवी ह बंगला म हजारों महिला-पुरूष कार्यकर्ता से भेंट करथे, रात दस बजे तक भेंट करके सिकायत के आवेदन लेत रहय । जब सब चले गिन तब चन्द्रकला देवी ह आफिस, कार्यालय से निवास गईस । हाथ पैर धोके भोजन करके सो जाथे ।


क्रमशः
by-www.srijangatha.com

0 Comments:

Post a Comment

<< Home