छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग-बारह

चन्द्रकला देवी ह दूसर दिन कलेक्टर कार्यालय म अधिकारी मन के मिटिंग रखे रहय । कलेक्टर माननीया मंत्री जी के पुस्पा गुच्छ सें सुवागत करथे । मंत्री जी ल आस्वासन देथे सरकार के नीति के अनुसार कार्य करबो । मंत्री जी ह चेतावनी देथे, अधिकारी मन निडर होके, ईमानदारी से काम करय । अऊ भ्रष्टाचार के शिकायत मिलही त सक्त से सक्त अनुशासानात्मक कार्यवाही करे जाही । चन्द्रकला देवी कलेक्टर कार्यालय से सीधा समलेस्वरी समूह के मंदिर आसरम म जाथे । औघड़ बाबा अवधूत राम के दरसन करथे । आसरम के सेवादार से मिलके समस्या पूछथे । बिजली के कमी बताथे । दूसर दिन बिजली लग जाथे ।

पुस्पा कथे बेटी उत्कल एक्सप्रेस तीन बजे अवईया हे । चन्द्रकला कथे । चन्द्रसेन जा तंय कार म बईठ के रेलवे स्टेसन । चन्द्रप्रकास अऊ पूरनिमा ल लेके आबे । उत्कल एक्सप्रेस आधा घंटा देरी से आईच । चन्द्रसेन प्लेटफार्म एक म टहलत रहय । किताब अऊ इंडिया टुडे, माया देखत रहय । बुक सेंटर म नारायण केसरी से बात करत रहय । केसरी कथे काला लेय य हच । चन्द्रसेन बताथे भईया, पूरनिमा ह जबलपुर ले अऊ चन्द्रप्रकास ह दुर्ग से आवत हे । केसरी कथे ।चन्द्रप्रकास के परमोसन होगे हे के नई । चन्द्रसेन कथे भईया साल भर से जादा होगे तहसीलदार बन गे हे । अभी पाटन दुर्ग म तहसीलदार हे । ओकर ससुर ह संयुक्त कलेक्टर दुर्ग म हे । नारायण कथे तुंहर बढ़िया भाग जागे हे । दीदी अभी मंत्रई है । चन्द्रसेन कथे । भईया मय तो कछु नई बने हंव । मय तो गोसाला के दूध अभी भी बेंचव हंव । केसरी कथे । तय दूधम पानी मिला के जादा कमा लेथच । चन्द्रसेन कथे नई भईया मय दूध म पानी नई मिलावंव वईसे भी गाय मन दूध जादा देत हे ।

उत्कल एक्सप्रेस एक नंबर प्लेटफार्म म रूकते । गेट के पास डिब्बा म बईठे रहय । लइका अउ चन्द्रसेन ल सूटकेस, झोला पकड़के उतारथे । चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता घलो लईका धर के उतरीच । पूरनिमा अऊ प्रेमलता अपना लईका ल गोदी म पाय रहय । चन्द्रसेन, सबो के पाँव छूईच । सूटकेस उठा के कार म रखते । कार म बईठ के घर आ जाथे । चन्द्रकला देवी अऊ रमौतीन, पुस्पा देवी ओमन के अगोरा करत रहय । चन्द्रकला ह प्रेमलता के बेटी ल गोदी म पाके चुमे लगथे । चन्द्रकला कथे ग – दाई रोमा माँ जईसे अंग्रेज दिखत हे । पुस्पा कथे । बेटी रोमा देवी ह चन्द्रप्रकास के बेटी बन के आय हे । पूरनिमा के तीनों टूरी मन बारी बारी से चुमा लेथे । तीनों लक्ष्मी मन सुन्दर रहय । बड़ी माँ के गोदी म बईठे बर रोवत रहय । चन्द्रकला एक साथ तीनों ल गोदी म बईठाईच । कथे पूरनिमा तोर टूरी मन तोरो ले सुन्दर होही बहिनी । पूरनिमा कथे टूरी मन बड़ी माँ जईसे बनबो । पढ़बो लिखबो नेता बनबो । चन्द्रकला कथे, ह रे टूरी हो नेता बनिहा । हा माँ सिर हिला देथे । चन्द्रकला तीनों के सिर म हात रख देथे । बेटी हो खूब पढ़व । दाईददा के नाम ऊँचा करव । पूरनिमा कथे दीदी बहुत सैतानी करथे । धमा चौकड़ी मचाय रथे । सुनील कथे दीदी एको झन ल तुमन रख लेवा । पूरनिमा कथे मय अपन लईका नई छोड़ सकंव । भले सैतानी करत हे । चन्द्रकला कथे तहूँ त बचपन, नानपन म बहुत सैतानी करत रहे । चन्द्रसेन ल चाब देत रहे । हर समय झगड़त रहेव । पूरनिमा झेप जाथे । सुनील कथे दीदी आज भी ओ आदत ल नई छोड़े दे । रोजिना लड़त रथे । नानी मन ल मारथे पीटथे मय लईका

चन्द्रकला ह पूरनिमा ल अपन कमरा म ठहराथे । चन्द्रप्रकास अऊ डॉ. प्रेमलता ह अपन कमरा म रूकथे । प्रेमलता के टूरी ह बहुत रोवत रहय । दूध पिलावय तभो ले चूप नई होवय । चन्द्रकला, पुस्पा देवी, रमौतीन सब झन थक जाथे । चन्द्रप्रकास परेसान हो जाथे । शायद वातावरण बदले ले रोवत रहिस । पूरनिमा कथे दे दाई मोला चुप कराके देखत हंव । पूरनिमा ह गोदी म पाके पीढ़ा म बईठ के दूध पिलाईच । दूध पियत, पियत पेट भर गे । फेर मुँह देख के हांसे लगथे । प्रेमलता कथे । दीदी मय दूध पिलावत रहेंव त न पिईच । तोर दूध जादा मीठा हे । पूरनिमा कथे । चन्द्रप्रकास अऊ मय दाई रमौतीन के खूब दूध पीये हन । चन्द्रकला दीदी गाय के दूध पीयय । पूरनिमा कथे । प्रेमलता हमन दूध पीके बड़े होये हन । मजा आवय खेले कूदे म । मय हमेसा अव्वल आवंव । गोटा, बांटी, सातुल, लुकाछिपी म । पूरनिमा के दूध पियत, पियत बच्ची ह गोदी म सो जाथे । प्रेमलता ह पलंग म लेके सुला देथे ।

रमौतीन अऊ पुस्पा देवी ह रंघनी धर म भात, दार, साग, चटनी रांधत रहय । प्रेमलता पूरनिमा खाना खाय बनाय लगथे । सब जूर मिलके खाना बना के खाथे । लईका मन के उछल, उछल कूद म, किलकारी म घर गुंजत रहय । चन्द्रकला ल सगुन महसूस होईच । ओकर सुन्ना कोख म गुदगुदी होय लगिच । सोंचे लगिच आज मोटो कोख ले बच्चा होय रतिच त बड़े, बड़े होगे रहतिच । आँखी ले आँसू आ जाथे । करम के लकीर तो पहिली ले खिंची गय रहिच । भाग ल दोष देना ठीक नो हय । मय अपन हाथ म बिगाड़ेहंव । चन्द्रकला पेट ल छू छूके रो डारिच । पूरनिमा कथे काबर रोवत हच दीदी । चन्द्रकला कथे बहिनी तुहर कोख हरा भरा हे । मोर कोख सुख्खा है । पूरनिमा कथे दीदी तय मंत्री बने हच । तोर का कमी हे । मोर दूनों नोनी ल गोदी ले ले । मय देर बर तियार हंव । तोर संगा भोपाल म पढ़ही लिखही । पूरनिमा कथे मय तो मशीन जईसे बच्चा पैदा कर सकत हंव . मोर कोरा बड़ उपजाऊ हे । जईसे लईका दूध छोड़थे । मोर पेट ह निकल जाथे अभी तीन माह होगे हे । चन्द्रकला कथे बहिनी तय किसमत वाली हच । जतका लईका चाहत हच मिल जाथे । पूरनिमा कथे दीदी सुनील भी अच्छा आदमी हे । एक दिन मोला नई देखही त परेसान हो जाथे । फेर मोला रोजिना पियार चाही । तोर नाही शक्ति प्रबल हे । तोर स्त्रीत्व भारी हे । तय किस्मत से लड़का भी पटा लेय हच ।

चन्द्रकला कथे चल बाबू जी ल देख लेथन । बलराम ह खटिया म सोय रहय पूरनिमा कथे । बड़े ददा, बड़े ददा सोगे ग । बलराम कथे नहीं बेटी । आँकी मूंदे हंव । खाँसी ह नई छोड़त ऐ । सब लईका मन आ जाथे चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता बेटी ल गोदी म उठा के लाय रथे । चन्द्रकला कथे, ददा चन्द्रप्रकास के बेटी के चेहरा रोमा दाई से मिलत हे । एक दम अंग्रेजन दिखत हे । बलराम कथे मोला दे । गोदी म पाके दुलार करथे । बलराम कथे बेटी सही मोर रोमा ह चन्द्रप्रकास के बेटी बन के आ गे हे । प्रेमलता ल बोलथे बने जतन पियार कर रखबे मोर रोमा ल । प्रेमलता कथे हाँ बाबू जी । बलराम सब लईका मन ल बारी बारी से पाथे । पुस्पा देवी, अऊ रामौतीन भी आ जाथे । बलराम कथे पुस्पा अब मय जादा दिन के मेहमान नई अवं । अब सब लोग लईका ल देख लेव । चन्द्रप्रकास ल कथे बेटा तोर बहिनी मन अमेरिका म हे तय पता लिख ले । तीनों बेटी के पता लिखाथे । इंदौर के जमीन बेच के रायगढ़ ले आय रहय । चन्द्रप्रकास ल बताथे ।

पुस्पा देवी कथे । काबर हदरत हव । सुखे सुख म लईका मन हावय । पाँव दबावत पुस्पा कईथे, बलराम ह कथे पुस्पा देवी अब जादा दिन के संगी नोहव । मोर बेटी मन विदेश म हावय कल चिट्ठी ल डाक म डलवा देबे । रायगढ़ के पत्र लिख दे हवं । नोनी मन आही त माँ के पियार दुलार देथे । रोमा ह बहुत चाहत रहीस । मोर मरे के संदेश तार द्वारा भेज देबे । पता साफ साफ लिखबे । पुस्पा देवी सिर म हाथ फेरत कथे । जलदी ठीक हो जाबे । बलराम पुस्पा ल कथे । मरे के बेरा मय पुंछत हंव । मोर संका के निवारण कर दे । नहीं तो मोर जीव भटकत रईही । पुस्पा देवी कथे, कह न महराज जो होही तेला बताहूँ । देवी जी चन्द्रप्रकास आत्मज बलराम रामदेव नाम कईसे रखे हच । पुस्पा देवी अचकचा जाथे । अईसे प्रश्न के उत्तर कईसे देवय । पुस्पा देवी सम्भल के कथे । महराज चन्द्रप्रकास आप ही के बेटा ऐ । जब चन्द्रप्रकास के जनम होईच । त आप नई आयेव । अऊ मोर दूध नई आवत रहीच त रमौतीन ह अपन दूध पिलाके के बड़े करे हे । मय दिन भर काम म चले जांव । त रामदेव अऊ रमौतीन मन अपन बेटा कस पाले पोसे हे । फेर तुंहर आय के आस नई रहीस । तय मय ह स्कूल के दाखीला रजिस्टर म चन्द्रप्रकास बल्द बलराम रामदेव लिके हांवव । बलराम कथे ठीक हे देवी जी मय समझ गेंव । मोर संका के समाधान होगे । अब मय निसफिकर होके मर जाहंव । हे राम पुस्पा देवी ह गंगा जल अऊ तुलसी दल मंह मे डारधे । बलराम ह ईसारा करके कथे । सब झन बोजन कर लव । मोला दूध भात लाके रखाव । बलराम महराज ह भर पेट भोजन करथे । जेवन जे के, सब अपन अपन कमरा म सो जाथे ।

पुस्पा देवी भोजन कराके सो जाथे । बलराम रात म सोईच, त सोते रहिगे । बिहनहा पुस्पा देखते ल लास पड़े रहय । पुस्पा हिला डुला के देखिच । लास ठण्डा पड़ चुके रहय । पुस्पा दण्ड पुकार के रोईच । मोर मालिक मोला काबर छोड़ के चले गिच । मय मर जातेंव । बोम मारके रोईच । रोवई सुन के सब जाग जाथे घर भर म कल्लई मात जाथे । रोवई धोवई सुन के मोहल्ला वाले मन का होगे कहिके आ जाथे । रामदेव कथे, महराज ह गुजर गे । चन्द्रकला देवी के पिता जी मर गे कहिके सोर बस्ती म, रायगढ़ सहर म फईलगे । पुस्पा देवी, चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास पूरनिमा, रमौतीन, के रोवाई म आँखी सूज गे रहय । चन्द्रसेन अऊ चन्द्रप्रकास ह अपन सगा संबंधी मन ल फोन म सूचना देथे । चन्द्रप्रकास अपन ससुर साहेब ल दुर्ग फोन करके सूचना देथे । चन्दा देवी विधायक सांरगढ़ ल कलेक्टर साहब ह सूचना देथे । चन्दा देवी तुरंत दो घंटा म रायगढ़ पहुँच जाथे । कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक थानेदार, एस. डी. एम., तहसीलदार, उप संचालक समाज सेवा एवं विभागीय कर्मचारी, नगरपालिका के कर्मचारी गण, नेता, अधिकारी, सेठ साहूकार हजारों के संख्या म इकट्ठा हो जाथे । बलराम के इच्छानुसार राम भाठा के स्मसान घाट म लास ल दफनाय जाथे । महघट से तलाब म स्नान करेक सब अपन अपन घर जाय लगथे । चन्द्रप्रकास अऊ चन्द्रकला देवी ल सब ढांढस बंधाथे । धीरज देथे । सब एक एक करके अपन अपन घर चले जाथे ।

चन्दा देवी ह चन्द्रकला देवी ल समझाथे । पुस्पा देवी, चन्द्रप्रकास ल घलो समझाथे । तलाब से स्नान करके घरग आ जाथे । रमौतीन सब झन बर भोजन पका के खवाथे । घर के हँसते खेलते वातावरण ह गमगीन होगे रहय । सब के मुँह ओंदरे रहय । सोक व्यक्त करईया मन के तांता लगे रहय । मुख्यमंत्री, राज्यपाल महोदय के फोन कलेक्टर के पास आथे । सोक संवेदना व्यक्त सासन की ओर से कर दीजिए । कलेक्टर चन्द्रकला देवी ल कईथे, मेडम, मुख्मंत्री अऊ राज्यपाल महोदय द्वारा कहरा दुःख अशोक व्यक्त करे गे हावय । चन्द्रकला देवी धन्यवाद देथे । रात अऊ दिन घर भरे रहय । सोक संतप्त परिवार ल सबे झन ढांढस बंधावय । रात म भोजन करके सो जाथे ।

तीसर दिन तीज नहावन होथे । कोई भी ब्राम्हन मन सामिल नई होईन । साम के बेरा म बैकुण्ठकपुर के ब्राम्हन अऊ सियान मन के बईठक चन्द्रकला देवी ल बुलाईच । बने पन्दरा बीस झन बईठक म आ गे रहय । चन्द्रप्रकास कथे, मय हाथ जोड़ के बिनती करत हंव । मोर ददा के देश करम अऊ तेरही म ब्राम्हन भोजन स्वीकार कर लेवव । पंडित बिहारी लाल कईथे, देख चन्द्रप्रकास तय जरूर बामन हच । पर तोर बाप ह कुजात ईसाई पादरी बन गे रहिच । इसाई पादरी के वामन भोजन हमन नई करन । चन्द्रकला देवी, पुस्पा देवी, चन्द्रप्रकास बहुत बिनती करथे । फेर बामन मन टस से मस नई होईन । अऊ एकेक करके चल दीन । चन्द्रकला देवी देखते रहीगे । चन्दा देवी कथे । दीदी ब्राम्हन मन तो पंगत म नई बईठय । त का करिहव । मोर विचार म ब्राम्हन के जगा म, कोढ़ी अऊ गरीब मन ल भोजन करा दव । पुस्पा कईथे बेटी ठीक कहत हच । फेर घर ल तो सुद्ध करे ल पड़ही । प्रेमलता ह कथे । दाई यदि बामन नई खात ते रहन दे । बलराम के वसीयत, इच्छानुसार, सतनाम धर्म के अनुसार क्रियाकर्म कर जावय । चन्द्रकला देवी अऊ पुस्पा देवी ब्राम्हन मन से विस्वास उठ जाथे । मरे के बाद भी नियम धरम, पोंगा पंडित अंध विस्वास के बात । पुस्पा देवी कथे बने करे रहीस महराज ह ।

चन्द्रकला देवी मंत्री समाज कल्याण व महिला विकास ह सोक पत्र पाँच हजार छपवाके बंटवा देथे । म. प्र. शासन के सत्री मंत्री, राज्यपाल महोदय सभी अधिकारी ल शोक पत्र भिजवा देथे । सभी छत्तीसगढ़ के विधायक, समाज सेवी, नेतागण अऊ महिला बैंक अऊ महिला मण्डल के सदस्य मन ला बांट देथे । चन्द्रकला देवी ह रेस्ट हाउस अऊ सर्किट हाउस, होटल म कमरा बुक करा दे रहय । कलेक्टर, एस. डी. एम. ह व्ही. आई. पी. मन बर वाहन उपलब्ध करा दे रहय । रूके के बेवस्था म तहसीलदार, नायब तहसीलदार लगा दे रहय । दस करम के भोजन के बेवस्था मालूराम अग्रवाल, सुनील सांडिल्य चन्द्रसेन करत रहय । चार पाँच रसोईया, वेटर लगा दे रहय । लगभग दस हजार आदमी के भोजन वेवस्था करे रहय । दिन भर आदमी मन के तांता लगे रहय ।

पुस्पा के आँकी ले आँसू गंगा जईसे बोहात रहय । आँसू रूके के नाव नई लेत रहय । सादा के लूगरा म मुड़ ढाँक के ले जात रहय । पुस्पा देवी जनम जनम के पति के मृत्यु के बाद बिधवा हो जाथे । माँग के सिंदूर, चूरी, रंगीन लूगरा छीन जाथे । एकदम दुःखी जान पड़थे । वईसे बुढ़ापा म पति के संग सहिस । भरे जवानी अकेला काट दीच ।

हफ्ता भर बाद चन्द्रप्रकास के छुट्टी खतम हो जाथे । पुस्पा दाई ल कथे । माँ चल हमर साथ पाटन, साथ म रहिबो । पुस्पा कथे बेटा, घर म दीया जलाहव । कम से कम महीना भर । तुमन अपन अपन काम म जावव । चन्द्रकला देवी कथे जा भाई अपन ड्यूटी म । मय कुछ दिन रहिहों । विधानसभा सत्र होवईया हे भोपाल चल देहूँ । चन्द्रप्रकास किराया के जीप लेके पाटन, अपन परिवार सहित चल देथे । चन्द्रकला देवी घर से पन्दरा दिन बाद निकलिस । मालूराम ह सब बेवस्था करे रइस । एक दामाद बाबू के काम करे रहय । रमौतीन अउ पुस्पा देवी ह धन्यवाद देथे । चन्द्रसेन ह सब घर द्वार देखे लगथे । खेती-खार के जिम्मेवारी चन्द्रसेन, कामदेव अउ रामदेव उपर आ गे । बने असामी बन गे रहय । काबर बलराम के मकान अउ फार्म हाउस के देखईया कोनो नई रहय । चन्द्रकला देवी ह अपन विधान सभा क्षेत्र सरिया म महिला मंडल के सदस्य मन ला मिल के आ जाथे ।

मंत्री चन्द्रकला देवी जी ह विधायक चन्दा देवी के घर सारंगढ़ जाथे । चन्दा देवी ह भोपाल जाय के तियारी करत रहय । समारू ह उहाफोह म झूलत रहय, कि मय कहत रहि हूँ मोर खेती किसानी कोन करही ? चन्दा देवी कथे सब खेती खार ल तोर भाई ल सौंप दे । महीना-महीना म आबे देख लेबे । विधानसभा क्षेत्र म आय लगही । घर ल थोड़े छोड़े देबो । पाँच साल तो भोपाल म रहन जरूरी । काबर, भूरी अउ कुसुवा ल पढ़ाबो । भूरी ह पांचवी कक्षा अऊ कुसुवा ह चौथी किलास म पढ़त रहय । समारू ह बने सोच विचार के कोसिर के भूमि खेत ल अपन छोटे भाई दुकालू ल सौंप दीस । रानी सागर के खेत-खार, घर-द्वार ल समारीन बाई अऊ दाई ल देखे बर कहीच । समारू अउ चन्दादेवी कथे, हमन हर महीना आबो, खेती-किसानी बर पैसा घलो देबो ।

पुस्पा देवी रस्ता देखत रहय । चन्द्रकला देवी ल कथे बेटी रात कईसे होगे ? माँ चन्दा बहिनी के हाथ के दार भात, खब्जी, घी बढ़िया सुहाथे, मंय खाना खाके आय हंव । कान भोपाल जाना हे, तियारी करे बर आय हंव । मंत्री जी स्टाफ मन ला रेस्ट हाउस भेज देथे । काल जल्दी तियार होय बर कहि देथे । चन्द्रकला देवी जरूरी समान ल सूटकेस म रख लेथे अउ जल्दी सुत जाथे ।


चन्द्रकला देवी बिहनिया ले जल्दी नहा धो के तियार हो जाथे । बिहनिया 7 बजे अहमदाबाद एक्सप्रेस पकड़े बर रेल्वे स्टेसन चल देथे । रेल्वे स्टेसन म चन्दा देवी पहिली ल बईठे रहय । रेल्वे स्टेसन छोड़े बर पुस्पा देवी, रामदेव, चन्द्रसेन, कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक, एस. डी. एम., तहसीलदार, थानेदार, जिला समाज सेवा अधिकारी, अउ कर्मचारी, नगरपालिक के कर्मचारी लगभग सौ आदमी सी. आफ करे बर आय रहय । चन्दा देवी अपन कुसुवा बेटा अउ भूरी बेटी ल ले जात रहय, चन्द्रकला देवी के पाँव परथे । चन्द्रकला ह चुम्मा लेके पियार जताथे । कुछ देर बाद मा अहमदाबाद एक्सप्रेस आ जथे । प्रथम श्रेणी के कोच म सूटकेस, समान थानेदार मन रखवाथे । चन्दा देवी, समारू के सूटकेस घलो चढ़ाथे । चन्द्रकला देवी हाथ हला के सब झन के अभिवान स्वीकार करथे । अहमदाबाद एक्सप्रेस देखत-देखत ओझल हो जथे । अहमदाबाद एक्सप्रेस ठीक दस बजे बिलासपुर स्टेशन म रूक जथे, सब समान ल स्टाफ अउ कुली मन ह उतारथे ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी व्ही. आई. पी. वेटिंग रूम म रूक जथे । ठीक 1 बजे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर से भोपाल के लिये प्रस्थान करथे । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस धड़धड़ावत रायपुर, दुग, राजनांदगाँव, डोंगरगढ़, गोंदिया, नागपुर, आमला, इटारसी होवत भोपाल बिहनिया 6 बजे पहुँच जथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी कार मा बईठ के चौहत्तर बँगला के बंगला नं. 28 म पहुँचथे । चन्द्रकला देवी ल पहिली ले आबंटन होगे रहय । चन्दा देवी कथे दीदी मय अपन विधायक विश्राम गृह के कमरा नं. 20 मे जाथंव । चन्द्रकला देवी चाय पी के विधायक बिसराम गृह, फेमिली ब्लाक म चल देथे । चन्दा देवी जल्दी नहा धो के तियार होके विधानसभा पहुँच जथे । चन्द्रकला देवी घलो विधानसभा पहुँच जथे । विधानसभा के पहिली दिन दिवंगत सदस्य मन ला श्रद्धांजलि दे के विधानसभा स्थगित हो जथे ।

चन्दा देवी, सब महिला विधायक, मंत्री से परिचय करथे । चन्द्रकला देवी ह सबो मंत्री ले परिचय कराथे । माननीय मुख्यमंत्री जी से परिचय कराथे । चन्दा देवी सबसे कम उमर के महिला विधायक रहीस । विधानसभा म कोसा के लूगरा पोलखर पहिन के गिस त देखनी होगे । बढ़िया सुंदर गोरी नारी । चन्द्रकला देवी घलो बढ़ापा म सुन्दर दिखत रहय । सब के नजर दूनों झन म जात रहय । दूनों झन अपन मस्ती म झूमत रहय । सबके अभिवादन स्वीकार करत रहय । केन्टीन म बढ़िया चाय-नास्ता करके स्थान आ जाथे । समारू अउ चन्दा देवी ह आटो म बईठ के सरस्वती शिसु मंदिर म लईका मन ला भरती करा देथे । लईका मन बन आय-जाय के रिक्शा बंधाय रहय । भूरी उर्फ कौसल्या, कुसुवा उर्फ कमलेश्वर प्रसाद वारे, सरस्वती सिसु मंदिर म पढ़े लग गे । चन्दा देवी अउ समारू पढ़ावत रहय । दूनो झन पढ़े लिखे म होसियार रहय । प्रथम श्रेणी म परीक्षा पास हो जथे । चन्दा देवी ह सारंगढ़ दो महीन म जाय ले मिलय । सारंगढ़ के काम ल समारू ह देखय । हर महीना जाके सब झन ले मिलके समस्या ल सुलझावय चन्द्रकला देवी विधानसभा सत्र के बाद अपन क्षेत्र के एक बार दौरा जरूर करय । सब महिला मन से जीवंत सम्पर्क बनाय रहय । कभू-कभू चन्दा देवी ल घलो ले जावय । सरिया अउ सांरगढ़ के महिला बैंक अउ महिला मंडल ह माडल के रूप म मध्यप्रदेश भर म लागू हो जाये । चन्द्रकला देवी के माडल के लागू हो जाय ले महिला सशक्तिकरण म प्रगति होय लगय । महिला बैंक से छोटे-छोटे धंधा बर लोन मिल जावय । मध्यप्रदेस म लगभग सब्बो जिला म महिला बैंक खुल गे रहय । महिला जागृति के काम घलो बैंक करय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के बैंक महिला मंडल के चर्चा दिल्ली, भारत सरकार म होय लगिस । भारत सरकार ह अच्छा काम के कारण उत्कृष्ट पुरस्कार चन्द्रकला देवी ल देईस । भारत सरकार ह महिला विकास बर पचास करोड़ के आर्थिक सहायता घलो देईस । मुख्यमंत्री जी चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी ल बधाई घलो देईस अउ कहिथे, आप लोग बहुत अच्छा काम किये हो मैं बहुत खुस हूँ । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी उत्कृष्ट पुरस्कार मिले ले बहुत खुस होथे । मध्यप्रदेश म सब्बो जिला म दौरा करके मॉडल प्रचार-प्रसार करके महिला मन ल स्वावलंबी, स्वरोजगार, उद्योग-धंधा म लगाय बर प्रेरणा, प्रोत्साहन देथे । महिला ससक्तिकरण के काम म तेजी जथे । चन्द्रकला देवी महिला मन ल आगे बढ़ाय के योजना लगू करवाथे ।

क्रमशः

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