छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग- दस

चन्द्रकला महिला मंडल के बईठक ले बस के सारंगढ़ आ जाथे । दूसर दिन के अखबार नवभारत, देशबंधु, अमृत संदेश, रायगढ़ संदेश म जोरदार बड़े शीर्षक के छपे रहय । सरिया म महिला मंडल के संयोजक चन्द्रकला देवी विधानसभा देवी दिधानसभा चुनाव लड़े के घोसना । चन्द्रकला देवी अपनी बाईस साल की नौकरी से त्याग पत्र देके चुनाव लड़ने की घोसना । महिला मंडल ने कमर कसे के तियारी करिच । महिला मंडल के एक हजार सदस्य हावय । एक गाँव म दू महिला सदस्य । जिला म सिरिफ चन्द्रकला देवी ही के चरचा होत रहय । चन्दा, मधु, उर्मिला, जमुना एक सौ बीस सरपंच के नाव रहय । तहलका मच गे ।

चन्द्रकला देवी, अपना माँ पुस्पा देवी, पिता बलराम, रामदेव अऊ कामदेव, मालूराम से नौकरी से त्याग पत्र देहे बर सलाह लेथे । सब कोई विधानसभा चुनाव लड़े बर कथे । मालूराम कथे अभी चुना चार महीना बचे हे । सरिया म तीन चार कमरा के कच्चा मकान बनवा ले । चन्द्रकला देवी नगरपालिका के नौकरी से त्याग पत्र दे देधे । बाईस साल म पेंशन के पात्रता आ जाथे । चन्द्रकला देवी के त्याग पत्र सारंगढ़ नगरपालिका परिषद के बइठक म संकल्प पारित होके स्वीकार कर लिये जाथे । त्याग पत्र के सूचना दे देथे । पूर्ण रूप से महिला मंडल के काम म लग जाथे । महिला बैंक के काम ल भी देखथे । सरकारी योजना के लाभ महिला मन ल मिलय । जोर से काम करे लगिच । कई महिला मन ल स्वरोजगार बर लोन भी देवाईच । विधानसभा के टिकट चन्द्रकला देवी को ही दिया जाय । आवेदन म एक हजार महिला मन के हस्ताक्षर तीन चार कापी करा लेथे । चन्द्रकला देवी रायगढ़ जाके कांग्रेस भवन म कांग्रेस के सक्रिय सदस्य के फार्म भरते त सदस्यता मिल जाथे । ठाकुर पृथ्वीपाल सिंह, जगतपाल सिंह ह मालूराम ल बधाई देथे । सरिया क्षेत्र में कांग्रेस के संगठन ल मजबूत करे बर जवाबदारी भी देथे । महिला शाखा के ब्लाक अध्यक्ष के जवाबदारी भी देथे । चन्द्रकला देवी रात रायगढ़ म रूक जाथे । पुस्पा देवी रमौतीन माँ के चरण छूथे । माता दाई मन आसीरबाद देथे । जलदी चुनाव जीत के विधायक बन । बलराम जी सतनाम के दार्सनिक पृष्ठभूमि, गुरू घासीदास की अमृत वाणी, पंथी गीत, सब ल पढ़त रहय । दीन दुःखिया मन के सेवा म लगे रहय । कोई व्यक्ति ल भूका नई रहे देवय । चौका आरती भी अपन घर म कराईच । सबके आसीस चन्द्रकला ल मिलथे ।

चन्द्रकला रात म भोजन करे बर मालूराम ल टेलीफोन करके बुला लेथे । रातभर चुनाव के योजना बनथे । कांग्रेस के टिकट के आवेदन कब बर दिल्ली जाय के योजना बनाथे । मालूराम कईथे, चन्द्रकला देवी यदि कांग्रेस के टिकट मिल जाही त पईसा के कोई कमी नहीं होवय । फेर मय तो हंव । जतका खरचा हो जावय । चन्द्रकला देवी मस्ती करके सो जाथे । चन्द्रकला ल जीवन के आनंद मिले के राह सरल दिखत रहय । अब तो रात दिन विधायक बने के सपना देखत रहय । चन्द्रकला देर से उठथे । रमौतीन दरवाजा खटखटाथे । चन्द्रकला, चन्द्रकला पुस्पादेवी भी जगाथे । चन्द्रकला कथे । दाई बहुत दिन के निसफिकर सोवत हंव । अब नौकरी म सारंगढ़ नई जाना हे, अभी सोवन दे । आठ बजे तक चन्द्रकला सोवत रथे । बाथरूम जाके आ जाथे । रमौतीन दाई चाय लाथे । पुस्पा देवी, रमौतीन, बलराम, रामदेव सब बईठ के अंगना म चाय पीथे । पुस्पा देवी कईथे, बेटी तय चुनाव लड़ीहंव कथस । अतका पईसा कहा पाबे । चन्द्रकला कथे । दाई कांग्रेस के टिकट मिलही त कोई पईसा के कमी नई ए । यदि नई मिलही त चुनाव नई लड़व । मोला पेंशन मिल जाही, पेंशन से गुजारा चल जाही । या कोई काम धंधा दुकान खोल लेहंव । रमौतीन कईथे । ठीक हे चुनाव लड़ । विधायक बन के दिखा दे । गरीब, चपरासी के बेटी भी ह विधायक बन सकत हे ।

चन्द्रकला गफ्फार भाई से मिले बर राज फोटो स्टूडियो जाथे । गफ्फार भाई के पाँव छूथे । जीते रहो । विधायक बनो । गप्फार चचा मय सरिया से चुनाव लड़िहंव कहत हंव । तोर से सहजोगक अऊ आसीरबाद माँगे आयहंव । गफ्फार भाई, आवाज लगाथे । चाय पियत बताथे, चन्द्रकला चुनाव लड़त हे । नौकरी से त्याग पत्र दे देहे । अम्मा कथे बेटी ठीक हे चुनाव लड़ विजय श्री जरूर मिलही । चन्द्रकला दूनों के आसीरबाद लेके कांग्रेस भवन जाथे । अध्यक्ष सचिव ल नमस्कार करके बताथे चाचा जी मय चुनाव लड़हू कहत हंव । मोला आसीरबाद दे । पृथ्वीपाल सिंह ठाकुर कथे । मोर आसीरबाद तो हमेसा तोर साथ रईही । मय सिफारिस पत्र कांग्रेस कमेटी कती ले लिख देथवं, दिल्ली जाके श्रीमती इंदिरा गांदी जी से मिल लेबे । पत्र लेके चन्द्रकला अपन घर आ जाथे ।

मालूराम शाम के आथे । मेडल का प्रगति हे । चन्द्रकला कथे, कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के पत्र मिलगे हे । दिल्ली जाके श्रीमती गांधी जी से मिले बर कहे हे । मालूराम कईथे, दू तीन झन महिला मंडल के सदस्य ल घलो ले चलिन । तंय सांरगढ़ अऊ सरिया जाके महिला कार्यकर्ता मन के नाम ले आ । दिल्ली जाय बर हे । चन्द्रकला रात म योजना बना के जाथे । बस से सरिया जाथे । महिला मंडल के सदस्य मन हस्ताक्षर कराथे । जमुना सर्मा ल कथे । चल दिल्ली घूम के आबो । जमुना सर्मा कथे, पईसा कहाँ ले पाबो चन्द्रकला कथे चल न मय तो खरचा करहूँ सिरफ साथ म जाना हे । नहीं नई कर सकिच । चन्द्रकला सरिया से सारंगढ़ बस म आ जाथे । चन्द्रकला मधु केशरवानी के घर जाथे । दिल्ली जाय के बात करथे । पति से पूछके बताहंव कथे । मधु ल ओकर पति जगन्नाथ कथे । दिल्ली म बड़ गड़बड़ होथे । महिला मन के इज्जत राजनेता मन लूट लेथे । मय नई भेजंव । मधु केसरवानी कथे । तय मोर ऊपर म सक करत हच । मोर उमर ल तो देख चालीस पैंतालीस के डोकरी ल कोन पूछही । फेर मोरपास का हावय त देहूँ । डोकरी होगे हंव । जगन्नाथ कथे जा भई तोर दिल्ली जाय के साध हे त । फेर मोला बद्दी झनदेबे, के मोला नई बताय । मधु कईथे तोला काबर देहंव । उल्टा मोला मजा मिलही त काबर कहिहंव । जगन्नाथ कथे, दिल्ली म ठंड बहुत पड़थे, गरम कपड़ा ले जाबे ।

चन्द्रकला ह चन्दा के घर जाथे । चन्दा अंगना ल छर्रा छिटा देत रहय । बढ़िया गोबर म लीपत रहय । चन्दा कथे । आ आ दीदी । बहुत दिन म आय हच । खटिया म बईठ । मय हाथ धोके आवत हंव । चन्द्रकला भी कुआँ कोती चल देथे । चन्दा ह पानी निकालथे । गोबर सने हाथ धोय लगथे । ओतके बेर भूरी अऊ कुसुवा आ जाथे । मेडम आगे कहिके नाचे कूदे लगथे । भूरी कथे बड़े दाई आजकल ईहाँ नई आवय । चन्द्रकला कथे बेटी मय रायगढ़ चल देत हंव । अभी आय हंव । तीसरी, चौथी म पढ़े चल दे रहय । अब नानकुन नई रहय । अब गोठ ल समझ जावय । चन्दा कथे दीदी कहाँ ले आवत हच । चुनाव के तियारी कईसे चलत हे । चन्द्रकला कथे । बहिनी ओही काम से आय हंव । तोर सरपंची कईसे चलत हे । ठीक हे दीदी । हमर ईहाँ के उपसरपंच अरूण यादव ह बहुत बदमास हे । गुंडा गरदी करथे । बार बार शिकायत करते हे । पईसा खाय ल नई मिलत हेत सिकायत कराथे । मय परेसान होगे हंव । भूरी के ददा ह कथे अऊ अपन अधिकार ल अतका जलदी नई दय । अपन तौहीन समझथे । चन्द्रकला कथे धीरे धीरे सुधरही भईया ।

चन्दा ल कथे तोला दिल्ली ले जाय बर आय हंव । चन्दा कथे नान-नान लोक लईका हे, फेर खेती किसानी फदके हे । घर देखईया भी कोनों नईऐ । समारू कथे, चन्दा यदि तय जाना चाहबे श्रीमती इंदिरा गांधी से मिले बरत जा । चन्द्रकला दीदी के काम हे त जरूर जा । फेर धियान रहे ऊहाँ उल्टी सीधा झन होवय । रीवा के बदमास मन डेरा डाले रथे । रेस्टहाऊस सांसद भवन म सीधी सादा देखके अपन मोह जाल म फंसा लेथे । चन्दा कथे । अतका सुधार तो मय नई अवं । जेमन लड़का मन मोहा जाय । दिल्ली देखे के सउख हे । कईसे दिल्ली सहर हे । देखतेंव । चन्द्रकला ल घर म थोड़ा परिवर्तन लगिच। परछी म टेबल कुर्सी लगगे रहय । जब से सरपंच बने रहय, आदमी मन आवत जावत रहय । चन्दा भी सरकारी काम म धियान देत रहय । ग्राम पंचायत के सचिव भी । परछी म बईठ के काम निपटावय ।सरपंच के परछी म पटवारी, ग्रामसेवक दाई, मलेरिया वरकर, सब झन एक दिन आके बईठय । घर म चहल पहल होगे रहय । चन्द्रकला कथे । सरपंची म मजा आत होही । हाँ दीदी मजा आत हे । कोई भी निर्णय मय करथंव । गाँव के लोग भी माने लगिन । अच्छा लगत हे । नवा, नवा काम ऐ । समारू ह चन्दा कथे । जरूर दिल्ली जा । तहूं ह भटगाँव या सारंगढ़ से टिकिट माँग के देखबे । चन्दा कथे ठीक हे । एक काम दो काज हो जाही । चन्द्रकला कथे जाथंव । बहिनी परसो बस बईठ के रायगढ़ आ जाबे । मधु, जमुना भी दिल्ली जाहय । साथ म लेके आ जाबे ।

चन्दा कपड़ा, लूगरा, चादर एक सूटकेस म बंद करके मधु के घर पहुँचथे । बस स्टैण्ड म जमुना पहिली ले आ गे रहय । तीनों झन बईठ के रायगढ़ आथे । चन्द्रकला हे घर गोसाला पारा रिक्सा म पहुँचथे । चन्द्रकला के दाई रमौतीन ह भोजन कराथे । मालूराम अग्रवाल ह पाँच सीट टिकिट आरक्षण कराय रहय । उत्कल एक्सप्रेस ठीक ग्यारह बजे रायगढ़ स्टेशन से छूट जाहय कहिच । चन्द्रकला ह रिक्शा म बईठ के रेलवे स्टेसन पहुँचथे । पाँच मिनट बाद ट्रेन आथे । अपन-अपन सूटकेस लेके ट्रेन म चढ़थे । मालूराम अग्रवाल सब सूटकेस ल जंजीर म बाँध देथे । चन्दा ह खिड़की मेर बईठ जाते । बड़िया सीन देखते, देखते चाम्पा पहुँच जाथे । चन्द्रकला, मधु, जमुना, चन्दा गप मारत-मारत जात रहय । बीच बीच म मालूराम भी बोलत जावय । डेढ़ बजे उत्कल हर बिलासपुर पहुँचिस । चन्द्रकला कथे कुछ ले लेना जी । हमन के सेवा करते त मेवा मिलही । मालूराम स्टेशन से सेव क दरजन, केला डेढ़ कलो, भजिया, बिस्कुट रख लेथे । जल्दी ट्रेन म चढ़ जाथे । चन्दा खते काबर बेचारा ल परेशान करत हव । हमन ल बुजुर्ग हे । चन्द्रकला कथे अब बुढ़वा होगे । पहिली बने जोर मार रहिच । गरम-गरम भजिया ले खाव । मधु शरीर से भारी होगे रहय । जमुना बुजुर्ग महिला होगे रहय । चन्दा ह जवान रहिस । दउड़ दउड़ के पानी, खाना, खिलावय । सबके चहेती बनगे रहय, पद भी सरपंच होये के कारण जन सेवक बने गे रहय । बढ़िया खात पीयत, सोवत, जागत ट्रेन बड़े सुबेरे दस बजे दिल्ली पहुँचथे ।

चन्द्रकला, मधु, चन्दा, जमुना, अपन-अपन सूटकेस ल धर के उतर जाथे । मालूराम चेक करके पाछू उतरथे । मालूराम नई दिल्ली रेल्वे स्टेसन से टेक्सी द्वारा नार्थ एवेन्यू कमरा बंबर 182 सांसद बिलासपुर मिनीमाता ह दरवाजा ल खोलथे । मालूराम अऊ चन्द्रकला देवी कथे माताजी हमन रायगढ़ सारंगढ़ से आय हन । चंदा माता जी के चरण छूथे । सब कोई क्रम से चरण छूथे । माता जी अंदर ले जाथे । पानी चाय चपरासी ल लाय बर बोलथे चन्दा बोलथे माताजी मय सतनामी आँ । रानी सागर गाँव के सरपंच अवं । माताजी कथे । वाह बेटी, तही छत्तीसगढ़ के असली बेटा आंच। चंदा गदगद हो जाथे । चन्द्रकला देवी ह कईथे माताजी आप श्रीमती इंदिरा गांधी जी से मिलवा दे । मय सरिया विधानसभा से चुनाव लड़िहंव खातिर कांग्रेस से टिकट माँगे बर आंय हंव । माता जी आपके आसीरबाद मिल जाही त टिकिट जरूर मिल जाहय । चन्द्रकला कथे माताजी मय ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हंव ।

मिनी माताजी कईथे बेटी हो, चाय पीके स्नान ध्यान करके तियार हो जावव । बगल वाले कमरा खाली हे । मालूराम दूसर कमरा म जाके स्नान करत रहय । चन्द्रकला वहाँ पहुँच जाथे । कथे माताजी के किरपा ले मोला टिकिट मिलही । मालूराम कईथे, पाँव ल पकड़ ले । श्रीमती गांधई से मिलवा देही । चन्द्रकला वहीं जलदी नहा लेथे । चन्दा, मधु, जमुना जलदी तियार हो जाथे । माताजी पूछते । भोजन सब मिलके पका के खावव । सब समान हे । चन्दा कथे । माताजी मय भोजन बनावत हंव । आज ले मय रसोई सम्हार हूँ । माताजी कथे ठीक हे बेटी जतका दिन रईहा रहव । मय संसद भवन जाथंव । श्रीमती इंदिरा गाँधी से वही बात कहूँ । टाईम दे देही त मय तुरंत आहूँ । या बँगला म मिलके । माताजी संसद भवन बईठक म चल देथे ।

चन्दा, मधु, जमुना तीनों मिलके भोजन बनाय के तियारी करथे । सब दिल्ली म घर के मजा लेके खाईन। माताजी संसद भवन से एक बजे भोजन अवकास म आईच ।चन्दा भोजन परोसथे । बेटी बहुत दिन के बाद म अच्छा भोजन खाय ल मिलिच । बेटी गाँव के भोजन म जो सुवाद रथे सहर म नई मिलय । चन्दा कथे माताजी मोला भोजन रंधईया रख ले । माताजी कथे फेर रानी सागर के सरपंची कोन करही । तय सरपंची कर बेटी । बहुत कम महिला ल पास मिलते । फेर आगे जाना हे । विधायक के टिकिट भी माँगत हच । मय तोर बात बेवहार, चाल चलन से खुस हंव । तय जरूर आगे बढ़बे । माताजी आसीस देबे । तब होही मोर काम । माताजी कथे । बेटी तय तो मोर घरके बेटी अच । मोर आसीरबाद हमेसा रईही । माताजी बताथे कि श्रीमती इंदिरा गांधी ह कल सुबह नौ बजे मिले के समय देहे हे । कल जलदी तियार हो जाहा । चन्द्रकला गदगद हो जाथे । मालूराम कथे, आवेदन पत्र कई प्रति म तियार कर ले । चन्द्रकला कथे । तीन प्रति म तियार करले हंव । चन्दा वारे भी सारंगढ़ बर आवेदन पत्र बनाथे ।

चन्द्रकला देवी, मधु, जमुना अऊ चन्दा देवी स्नान करके तियार हो जाथे । मालूराम भी स्नान करके तियार हो जाथे । चंदा जल्दी चाय बना लेथे । माताजी बैईठक म आथे बईठ जाथे । लउहा लउहा चाय पी के त्रिमूर्ति भवन कोती निकल जाथे । मिनी माताजी अउ संग म सब की ठीक आठ पैंतालीस म वेटिंग रूम म पहुँच जाथे । पी.ए. चार्ज ल स्लीप मिनी माता देथे । मिलने वाला मन के सूचीनाम रहय । जार्ज स्वयं लेके मिनी माताजी ले जाथे । मधु, चन्द्रकला, चन्दा, जमुना देवी चरण स्पर्श करथे । माला भी पहिनाथे । माताजी कथे । मोर छत्तीसगढ़ के बेटी ऐ । चन्द्रकला देवी, चन्दा वारे, आवेदन पत्र श्रीमती इंदिरा गांधी ल देथे । आवेदन पत्र म कलेक्टर, जिला कांग्रेस कमेटी के अनुसंसा, एक हजार महिला मन के हस्ताक्षर, एक सौ बीस सरपंच के हस्ताक्छर रहय । मिनी माताजी कथे मेडम दोनों महिलाओं को कांग्रेस की टिकट दे दीजिए । श्रीमती गाँधी आस्वासन देथे । वर्किंग कमेटी से पास करवा दूँगी । चन्द्रकला देवी चन्दा देवी, पाँव छूथे आसीरबाद माँगथे । मालूराम, जमुना देवी, मधु, चन्दा देवी, मिनी माता के साथ वापस कमरा म आ जाथे । मिनी माता कथे । बेटी हो मय तो जाथंव रायपुर । आप लोग जब तक रहना हो तो रहो । मय एक कमरा बंद कर देथंव । तुमन दिल्ली मस्त घूमव फिरव । माताजी रायपुर रात के गाड़ी से चल देथे ।

मालूराम चन्द्रकला देवी, चन्दा, मधु अऊ जमुना देवी सब म.प्र. भवन म मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी से मिलथे । विधायक टिकट बर आवेदन पत्र देथे । पाँव छूथे आसीरबाद माँगथे । श्रीमती गांधी से मिलने के बात बताथे । अर्जुन सिंह जी ह पूरा पूरा भरोसा दे देथे । क्षेत्र म काम करे के निर्देस भी दे देथे । मालूराम महिला मन ल दिल्ली घुमाथे । दिल्ली के कुतुब मीनार, लाल किला, चाँदनी चौक, नगरपालिका मार्केट, जंतर-मंतर, मुगल गार्डन, इंडिया गेट, दिन भर घुमाथे । सब कोई थक के बईठ जाथे । इंडिया गेट म गुपचुप खाथे । भेलपुड़ी, मूँगफली भी लेथे । समूह म फोटो भी खिचाथे । ऊहाँ ले बस म बईठ के नार्थ एवेन्यू आथे ।

नार्थ एवेन्यू के सरवेंट क्वार्टर म दो झन रीवापारी ब्राम्हन ठहरे रहय । मालूराम के क्रियाकलाप देखत रहय । चार पाँच दिन ले खुफियागिरी करत रहय । चन्द्रकला देवी अऊ मालूराम जाके सोगे एक कमरा म । चन्दा, जमुना, मधु दरवाजा बंद किये बिना सोयके तियारी करह रहय । ओतके बेरा खिड़की ले कूद के दू बदमास मन आ जाथे । चन्दा ह बाथरूम गय रहय । मधु ल पकड़ लीन । जमुना वृद्ध महिला ल चाकू दिखा के कपड़ा उतवा लेथे । डरके मारे जो बदमास कहीन वही मधु अऊ जमुना करे लगीन । दूनो बदमास चाकू को जोर म डरा धमका के काम निकालत रहय । चन्दा देवी बाथरूम से निकलथे, देख के आगी लग जाथे । अऊ बदमान मन के ऊपर टूट पड़थे । बाघनिन जईसे । कछरा भीर के एक बदमास ल पीछू ले एक लात मारिच । दम ले मुंह के भर गिरगे । चाकू दूर म फेंका गे । चन्दा चाकू ल लूट लेथे । परछी म दूसर बदमाश ह भीड़े रहय । पाछू ले एक लात मारिच । ओह ह दीवार म माता-टकरा के अचेत हो जाथे । मधु के हिम्मद बढ़िगे रहय बिना कपड़ा के बदमाश के छाती म चढ़गे । लात घूंसा से दे पिटाई जमुना देवी ह घलो लात घूसा से पिटाई सुरू करीन जब तक बेहोश नई होईपन । पीटते रहीन । चन्दा देवी दूनो बदमास के हाथ पाव बांध के सूअर जईसे बांध दे रहय । दूनो बदमास मन अधमरा होगिन । मधु छाती म बईठे रहय, वईसे भी भारी शरीर टस से मस नई करिच । चन्दा गारी देथे । बेर्रा, भडुवा, रोगहा हो, तुंहर दाई बहिन नी होही का ? तुमन छत्तीसगढ़ी औरत म ल कमजोर समझथ । तुहर खून लहू भी जाहंव, अभी तुमन का देखेहव । मधु अऊ जमुना लूगरा, पोलखर, पेटीकोट पहिने लगिन । हल्ला सुन के चन्द्रकला देवी भी आ जाथे । देख के डारके मारे कांपे लगथे । चन्दा बताथे । दीदी बदमाश गलत नियत से आय रहीन । चाकू के नोक से डरावत धमकावत रहीन । जान के मारे के धमकी देके कपड़ा उतरवा के काम सुरू कर दे रहीन । ओतके बेरा मय बाथरूम से निकलेंव । फेर मोर सरीर म आगी, भूर्रीबर गे टूट पड़ेव बेर्रा, भडुवा मन के उपर । सुअर जईसे बाँध के रखेंव ह । मधु, जमुना, चन्दा ल धन्यवाद देथे । आज हमर इज्जत अऊ जान ल बचा दे । चन्द्रकला देवी भी धन्यवाद देथे । तोर जईसे हिम्मती नारी होना चाही । तय दूझन मरद ल मार मार के चेहरा बिगाड़ देहे । ऐमन कभू औरत मन ल नई छेड़ही ।अऊ बलात संग नई करही ।

चन्द्रकला नाईटी पहिने रहय । मालूराम ल कईथे, चल उठ । का होगे तोला देख । का कबसे चल उठ। आँकी रमजत, उठिच । चन्दा है बताईच । मालूरमाम कथे बड़ हिम्मत के काम करे हच । चन्द्रकला देवी अऊ मालूराम भी चार-चार पाँच-पांच लात मारथे । मालूराम पूछथे । कहाँ के हो रे । सर हम लोग रीवा, सतना के आन । ईहाँ रोजी मजूरी करे आय हन । हमन के चोरी के नियत से घूरे रहीन । पेर हमन के नियत बदलगे रहिस । गलत काम करके बाद म जेवर, गहना, रूपिया, पईसा लेके भाग जातेन । सरवेंट क्वार्टर म रहिथन । चन्द्रकला कथे । मालूराम जी चन्दा, मधू, जमुना यदि पुलिस म रिपोर्ट दर्ज कराबे त बार बार पेसी म य लगही । बलात्कार के प्रकरण भी बनही । पुलिस वाला मन फोर फोर के पूछही । जो इज्जत बजे हे ओहू चले जाही । मधु कथे हमर जान बाचगे भले इज्जत म हाथ डालत रहिस । जीवन म कईठन दुर्घटना होत रईथे । चन्दा देवी ह हमर इज्जत अऊ जान ल बचा दिच । जमुना देवी कईथे मोर मानिहव त कहत हंव । जतका गलती करे के ओकर ले जादा पिटाई करें हंव । दू चार लात मारके, नाम, पता लिखलव । अऊ नई दिल्ली छोड़े ल कह दव । आज ही रीवा चले जाय ।

जमुना देवी के कहना सभी मानथे । पुलिस के चक्कर नई पड़ीन कहिके । चन्दा देवी के गुस्सा सांत नई होय बेर्रा मन ल सबक सिखाना चाही । बहुत छटपटाथे, चिल्लाथे, सुअर जईसे बांध देय रहय । मालूराम कथे कल जाना भी हे । साले बदमाश मन के नांव तो लिखलंव । पूछते तोर का नाव हे, सुभास सर्मा, तोर नारायण त्रिवेदी । एक लात, मारथे । साले तुमन तो सीधा दीखत हंव रे । फेर तुमन चोरी चमारी काबर करत हव । दूनो झन बहुत गिड़गिड़ाथे, चिरौरी बिनती करथे, माफी माँगथे । अब अईसे गलती नई करबो । हम अभी रीवा भाग जाथन । हमला पुलिस म झन दे । पाँव पड़त हन । बहुत माफी माँगे के बाद चन्द्रकला देवी कथे । भाग साले हो । जमुना कईथे रीवा राज के मन सब अईसे । मूत पिअईया ऐ । दू दू लात सब फेर मारिन । चन्दा कथे । जादा झन मारीन नई तो मर जाही बेर्रा मन । फंस जाबो । मधु कईते ईकर गलती के सजा मिलगे । चन्दा ह रस्सी के गांठ ल छोड़ देथे । मालूराम कईथे, आसपास नई दिखना चाही । नई तो पुलिस ल बुला लेबो, दूनो बदमास मन जी बचाके भाग जाथे । ये घटना ले सबके नींद उचट गय रहे, गोठबात म बिहनिया होइस ।

क्रमशः

By-www.srijangatha.com


0 Comments:

Post a Comment

<< Home