छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग-सत्रह

चन्द्रकला देवी ह मंत्रालय म सरकारी कामकाज निपटा के बंगला आईस । चन्दादेवी के फोन आईस कि, दीदी मोर सास के तबियत ठीक नई हे मंय भोपाल से सारंगढ़ जाथंव । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी महूँ ह एक-दू दिन म रायगढ़ जाहूं कहत हंव । चुनाव घलो तीन महीना म होवईया हे । पार्टी ह टिकट तो दे देही । चन्दा देवी कथे, दीदी ठीक हे चुनाव तो लड़बो, हारिन या जीतीन । मुख्यमंत्री जी हा वादा तो करे हे जे विधायक हे, ओला जरूर टिकट मिलही । आधा घंटा तक सुख-दुःख के बात करीन । चन्द्रकला देवी ह हाथ मुँह धोके चाय नास्ता करत रईथे, दू-चार झन भेंट करईया से मुलाकात घलो करथे । सिरफ विधानसभा के टिकट मंगाईया, बायोडाटा थमा के चले जावय । प्रदेश भर से हजार से जादा आवेदन पत्र मिलगे रहय । बीस पच्चीस झन समर्थक लेके मंत्री अउ पार्टी अध्यक्ष के बँगला, आफिस म पहुँच जावय । कहय, विधानसभा म चुनाव मही ह भारी बहुमत से जीतहंव के दावा करय । सब ल टिकट के आस्वासन देवय के तोही ल टिकट मिलही । चन्द्रकला देवी रात म भोजन करके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी रात म भयानक सपना देखते, सपना म पुस्पा देवी पांड़े के मिथिया म दब गे हे, बचावव-बचावव कहत हे । चन्द्रकला बेटी मोला बचा ले कहत हे । चन्द्रकला देवी बचा नई पावव, पसीना से लथपथ हो जथे । का अपसुगन सपना देखे हंव । ठीक रात के चार बजे रहय, उठ के एक गिलास पानी पीईस अउ पसीना ल पोछीस । चन्द्रकला देवी सोंचिस, अब दाई ह जादा दिन के मेहमान नई ए । रात म नींद नई पड़ीच, समाचार पत्र पढ़े लगीस । दू-चार पत्रिका ल पलट के देखथे । बँगला म मार्निंग वाक घास म पैदल चलत रहय । मन म सोचत रहय, अब घर म का होत हे, अभी सात बजे टेलीफोन से बात करहूँ ।

चन्द्रकला देवी ह रायगढ़ फोन लगाईस, पुस्पा देवी ह फोन उठाईस । दाई परनाम चन्द्रकला देवी कथे । पुस्पा देवी कथे, जीयत रह बेटी । घर के हाल-चाल पूछथे, सब ठीक के कहिस । पुस्पा देवी कथे, बेटी दौनामांजर ह लदबदाय हे, नव महीना होवत हे । चले-फिर नई सकत हे । पेट ह बने जुड़वा लइका हे अइसे लगत हे । आधा घंटा से फोन म बात करिच । फोन ल काट देते । चन्द्रकला के हाय जीय होइच । सब बने-बने हे । सपना म का सपना डारे हंव, मन थोड़ा हलका लगिच । चपरासी चाय ले आथे, चन्द्रकला देवी चाय बिस्टिक खाथे । समाचार पत्र पढ़े लगथे, पलंग म जाके सो जाथे । हलका नींद पड़ जाथे । दस बजे सो के उठथे । स्नान ध्यान करके कार्यालय म आ के बईठ जाथे । दस बीस झन भेंट करईय़ा से मुलाकात करथे । बंगला म मंत्रालय जाके फाईल निपटाथे । साम 5 बजे बंगला आ जाथे चन्दा देवी के फोन आथे, दीदी मंय घर जाथंव, जय सतनाम । चन्द्रकला कथे जय सतनाम । चन्दा देवी भोपाल से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर से रायगढ़ ट्रेन म जाथे, रायगढ़ से सारंगढ़ बस म जाथे ।

चन्दा देवी जईसे घर पहूँचथे, पता चलथे सब झन काठी म गय हे । चन्दा देवी के सास काल साम 7 बजे के मर गे रहय । रमसीला ह चन्दा भउजी के गला मिलके खूब रोईच । चन्दा देवी घलो बहुत रोईच । रोवई म आँखी फूल गे रहय अड़ोसी-पड़ोसी मन ढांढस बंधाईन, सांत्वना देईन । टूरा-पिला, पूरस मन काठी देके, माटी देके आके तरिया म बईठे हे कहिच । समारू अउ ओकर भाई दुकालू ह दाई ल माटी देके आय रहय । बड़ दुःख लगत रहय । दाई के मरे ले घर सुन्ना होगे रहय । दाई ह लाठी धरे दुवारी म बईठे रहय, सटका धरे रहय त कोई दुवारी म घूस नई पावय । डोकरी बने कड़क रहय । कोई बदमासी करय तेला सटका म मार देवय । समारू सोच-सोच के आँसू ढरकावत रहय । अब घर के रखवारी कोन करही । अतका कन धन दौलत, खेत-खार, कुँआ बारी ल कोन देखही । मन झुंझवावत रहय । समारू के नाता-गोता मन समाझाईन । तरिया के पार म पीपर छाँव म बईठे अगोरत रहय ।

रमसीला कईथे, भउजी दाई के काठी पड़गे हे, चला नहाय ल तरिया । घर के बड़े सियान ह आगू रथे । चन्दा देवी बड़की हे । आगू-आगू चन्दा, रामसीला पाछू पाछू लाईन से पचास झन महिला मन नहाय निकलीन । तरिया घाट गईन । रमसीला के आदमी ह उरई ल लाके गड़िया दे रहय । चन्दा ह नहा के उतई म पाँच चुरूवन पानी सिंचिस अउ परनाम करिच । कहिस, दाई अतका दिन ले तोर अचरा के छाँव म रहेन, जुड़ावा, सितरावा । दुःख तकलीफ म सहायता करव । माई लोगन के नहाय के बाद म पुरू, मन असनादीन अउ उरई म पाँच चुरूवन पानी डारिन, परनाम करके जुड़ावा, सितरावा पुरखा मन कहीन । सब पुर्ष मन पानी सिंचथे, परनाम करथे, समारू ह आगू-आगू गईच, पाछू-पाछू सब झन । घर के दुवारी म बाल्टी म पानी रखे रहय । पानी म पाँव धोईन अउ सरीर म सिंचिन । समारू ह हाथ जोड़ परनाम करीच । सब झन अपन अपन घर चल देथे । घर म परिवार के मन बाच जथे । रमसीला अउ चन्दा मिलके भोजन पकाथे । मेहमान-पहुना मन ला जेवाथे । जेवन से पहिले समारू ह पत्तल दोना म दार-भात, पानी दुवारी म दाई के हिस्सा रख देथे । पहुना मन संग बईठ के जेवन जेथे । पुरूस के बाद महिला पहुना मन ल खवाथे । खवा-पिया के अंगना म बईठ जथे ।

चन्दा देवी ह समारू ल कथे, दस नाहवन कब होही । समारू बताथे रविवार पड़ही । चन्दा कथे सोक-पक्ष छपवा ले । सारंगढ़ अउ सरिया क्षेत्र के महिला मन ल खवाय ल पड़ही । समारू ह शोक पत्र लगभग पाँच सौ धापे बर प्रिंटिंग प्रेस म बोल देथे । समारू ह घर के दुबराज धान, पच्चीस बोरा कुटवा लेथे । एक बोरा उड़द, एक बोरा राहोर दार अउ दू बोरा तिवरा दार दरवा ले रहय । दसकरम के तियारी चलत रहय । चन्दा देवी ह फोन म चन्द्रकला देवी ल निमंत्रण देथे । पूरनिमा ल जबलपुर फोन करथे । चन्द्रप्रकास अउ डॉ. प्रेमलता के पिताजी एम. एल. भारद्वाज, डिप्टी कलेक्टर दुर्ग ल फोन से सूचना देथे । जतका नता-गोता अउ जान पहिचान वाले हे, ओमन सोक-पत्र देथे । समारू ह सारंगढ़ से टेंट मंगाथे, पंडाल लगवा दे रहय । रायगढ़ से रसोईया बुलवा ले रहय । लगभग तीन हजार आदमी के भोजन बेवस्था करे रहय ।

समारू अउ चन्दा के नेता-गोता मन सुकवार, सनिवार के आगे रहय । घर ह भरे रहय । ईतवार के दिन बारह बजे महिला मन नहा के तालाब से आगे रहय । पुरुष मन घलो नहा के आगे । ठीक एक बजे मंगल, चौंका आरती के कार्यक्रम बिलासपुर से आये पंडित रामाधीन सुरू करथे । मंगल गीत भजन एक घंटा चलिस । चोकहार म अंगन म भोजन करे बईठ जाथे । नरियर प्रसाद चढ़ाथे । नरियर के प्रसाद बांटे बर देथे । एक दोना पत्तल म खीर, पूड़ी, दाल भात, लड्डू, बरा, सोंहारी, मोहन भोग पंडित रामाधीन देथे । समारू ह दुवारी के बाहर गली म रखे देथे । दोना म पानी दे देथे, दाई तंय पहिली परसाद पा । अतके दिन के संग म रहे बर रहिस । अंगना म आके भोजन परसागे रहय । समारू ह दूनों हाथ जोड़के भोजन करे बर परनाम करिच, भोजन पावा कहिस । सब पहुना मन ल परछी, कोठार म बईठार के भोजन कराथे ।

चन्दा देवी ह सब महिला मन ल भोजन कराथे । चन्द्रकला देवी ह चार बजे आथे । सब महिला मन से मिलथे अउ संग म बईठ के भोजन करथे । चन्दा देवी ह पूछ पूछ के भोजन कराथे । लगभग पाँच हजार आदमी मन भोजन करथे । चन्दा देवी के वाहवाही हो जाथे । अतका आदमी ल कोई नई भोजन कराय रहीन । भोजन करके सब महिला, पुरूस मन पहुना मन घर चल देथे । दिन म खाना पीना होगे रहय । समारू ह दसकरम के संग भांजा अउ गुरू बिदा घलो कर दे रहय । चन्द्रकला देवी ह रात दस बजे तक रहीस, रात म रायगढ़ चल देथे ।

रात आठ बजे से चौका आरती, मंगल भजन के कार्यक्रम सुरू होथे । रात भर चौका होथे, जय सतनाम, गुरू घासीदास बाबा के गुनगान होथे। घर, गाँव सतनाम मय होगे रहय । मंगल भजन सुबह पाँच बजे तक चलत रहीच । सब चौकहार मन ल पाँच सौ एक रूपिया चन्दा देवी ह भेंट देथे । जीप म बईठ के बिलासपुर भेज देथे । सब पहुना मन चाय पीके अपन-अपन घर चल देथे । समारू के सगा संबंधी मन रूक गे रहय । समारू ह टेंट अउ रसोईया के हिसाब-किताब कर देथे । चन्दा देवी रात भर जागे रहय । दिन के बारह बजे तक सोवत रहय । समारू ह खाय बर जगाईच । आँखी ल रमजत उठीच । सब पहुना चले गिन, चन्दा पूछीच । समारू कथे, हाँ सब चल दीन ।

चन्द्रप्रकास अउ एम. एल. भारद्वाज जीप म रायपुर अउ दुर्ग चल देथे । सब पहुना एकेक करके झर जथे । घर सुन्ना के सुन्न हो जथे । चन्दा देवी चुनाव के तियारी घलो करत रहीस । चन्दा देवी ह मधु, सरला, क्रांति ल लेके सारंगढ़ क्षेत्र के गाँव के दउरा कर बर गीच । लगभग बीस गाँव के महिला मन से मिलिच । सब समर्थन दीन । गाँव-गाँव के मतदाता सूची घलो कार्यकर्ता मन ल दिवाईच । चुनाव के तियारी सुरू होगे । गाँव-गाँव के दीवार म लिखे के सुरू हो रहय । चन्दा देवी ह धूल-धक्का म सनाय रहय । गाँव-गाँव, घर-घर, दुवारी म हाथ जोड़ के वोट माँगय । अच्छा समर्थन मिले ल लगिच । चन्दा देवी के पक्ष म हवा चल गिस । सरपंच अ पंच मन चन्दा देवी ल टिकट देय पर पार्टी से माँग करीन । चन्दा देवी टिकट बर आस्वस्त होगे । रायगढ़ म जिला कमेटी से वर्तमान विधायक मन ल टिकट देय बर प्रस्ताव पारित करके हाई कमान ल दिल्ली भेज देथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी के टिकट पक्का होगे रहय ।

चन्दा देवी सारंगढ़ क्षेत्र के दउरा करके चन्द्रकला देवी से मिले रायगढ़ बस म चल देथ । संग म मधु भी रहय । चन्द्रकला देवी निवास म मिल जथे । चन्द्रकला कथे, चल बहिनी पार्टी कार्यालय जाके देख लेथन, काकर नाव भेजे गे हे । पार्टी के निरदेस अनुसार जिलाध्यक्ष ह वर्तमान विधायक मन ल टिकट देय के अनुसंसा करके भेज देय रहय । ओकर कापी चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी ल देथे । मधु कथे, महूँ ल सरिया से टिकट देवव । चन्द्रकला देवी ल नई मिलही त मोला टिकट देवावव । अध्यक्ष महोदय कथे, वर्तमान विधायक, मंत्री के रहत दूसर ले टिकट नई मिलय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के टिकट पक्का होगे । पार्टी ओही मन ल टिकट देही । चन्दा देवी कथे, बहिनी मधु दीदी के रहिते कईसे तोला टिकट मिलही । मधु कथे, मंय तो मजाक करत हंव । मंय तो अभी नगर पालिका के अध्यक्ष हंव । तीन साल अभी कार्यकाल बांचे हे । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी अभी काम करे के अवसर मिले हे । नगर के बिकास के काम करावव । भोपाल चलके अनुदास रासि स्वीकृत करावव । मधु कथे दीदी बिना कुछ दिये अनुदान रासि नहीं मिलय । चन्द्रकला कथे, बहिनी जो भी लगय रासि ले आवव । एडजेस्ट करा लेहा । कोन अपन घर से देहा, नगर पालिका से निकाल लेहा । मधु कथे, जब भोपाल जाहा त महूँ ल ले जाहव ।

चन्द्रकला देवी अपन निवास आ जाथे । पुस्पा देवी, रमौतीन, बेटी के भोजन के अगोला म बईठे रहय । पुस्पा कथे, बेटी अतका देरी कईसे कर देय । चन्द्रकला कथे, दाई पार्टी कार्यालय गे रहेन, देरी होगे । चन्दा अउ मधु घलो साथ म हे । दू थाली अउ लगा । चन्दा पूछथे, बहू के का होईच । दौनामांजर ह थाली म भोजन ले के आईच । बड़ पेट निकले रहय । चन्दा के पाँव परिस । दीदी अब दिन लकठियागे, आठ दिन के भीतर हो जाही । चन्दा कथे, चन्द्रकला दीदी ऐकर पेट म जुड़वा बच्चा हावय अईसे लगत हे । दौनामांजर कथे, चन्दा दीदी देक तो कहाँ लुकाय हे । चन्दा ह कान लगा के सुनथे पेट ल छूथे । दू मुड़ी जानत रहय । दौनामांजर चलत फिरत बच्चा जनमही कहत रहय । चन्दा कथे, अब ऐला अस्पताल म भरती करा देवव, पेट ह सिंधियागे हे, दू-चार दिन म पीरा उठ जाही । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ह भोजन परोसथे । खाना खाके चन्दा अउ मधु रायगढ़ से सांरगढ़ चल देथे ।

दौनामांजर के रतिहा पीरा उसल गे । कहिना रमरमावत (दरद) रहय । पुस्पा रमौतीन दाई, चन्द्रकला ह दौनामांजर ल चलावत रहीन । दरद बाढ़बे नई करीच । बिहनिया होगे । दौनामांजर ल नहवाईन, शौच कराथे । चाय-नास्ता घलो कराईन । दरद ह थोड़-थोड़ बाढ़त रहय । चिल्लाई शुरू कर दीच । चन्द्रकला कथे, दाई हो दौनामांजर के पीरा ह बाढ़त हे, अस्पताल म भरती करा देथंव । रमौतीन कथे, बेटी लईका के मुड़ी हे तीरम आगे हे । बने जोर से कांखही त लईका बाहर आ जाही । चन्द्रकला सिरहाना म बईठ के ढांढस बंधावत रहय । दौनामांजर बने जोर के धक्का दे, लईका के मुड़ी ह दिखत हे । चन्द्रकला ह छू के देखथे । पुस्पा दाई ह दूनों हाथ ले रास्ता ला चौड़ा करथे, जेमा बच्चा लउहा निकल जाय । दौनामांजर प्रसव पीड़ा म कल्पत रहय । पसीना-पसीना होत रहय । पुस्पादेवी अउ रमौतीन कथे, बेटी पीरा ह बाढ़गे बने जोर से धक्का दे । दौनामांजर दाई मन के हिम्मत से बने जोर के चिल्लाईच, मंय मर गेंव दाई हो, जोर से धक्का दीच । लईका के मुड़ी बाहर होगे । रमौतीन दाई ह दूनों हाथ डार के लईका ल बाहर निकालथे । दौनामांजर के हाय जी ह हलका लगिच । पाँच मिनट के बाद म पीरा उठगे । कसके धक्का लगाईच, दूसर लईका बाहर आगे । दाई, माँ बचावव । पुस्पा ह लईका ल पकड़के खीचिस, नोनी बेटी आय रहीस । रमौतीन ह बड़े लईका के हाथ पाँव ल दबावत रहीस । लईका ह ऐंव-ऐंव रोय लगीच । दूनो लईका ह स्वस्थ, सुन्दर, तगड़ा रहय । पुस्पा अउ रमौतीन लईका ल सम्हारत रहय । चन्द्रकला ह गरम पानी गिलास म दौनामांजर ल पिलाईच पसीना अउ पीरा म अधमरा होगे हरय । चन्द्रकला ह हवा देईच कुछ देर बाद म होस आईच ।

रामदेव ह सुनईन दाई बुलाय हे कहिके बैकुंठपुर चल देथे । दाई नवा पत्ती से नाल काट के दूनो लईका ल अलग-अलग करथे । दौनामांजर के चेत पानी सींचे ले आथे । कपड़ा ल सम्हारे लगथे । चन्द्रकला कथे, अभी सोय रहय । दाई ह साफ-सफाई करके दौनामांजर ल कपड़ा पहिना के पलंग म सुला देथे । चन्द्रकला ह चाय बिस्कुट खवाथे । दौनामांजर एकदम ठीक होगे रहय । बातचीत घलो कर लगीच । दाई ह दूनो लईका ल दिखाथे अउ पास म सोवा देथे । दौनामांजर ह दूनों लईका ल छूईच अउ पियार करीछ । दूनों लईका मन माँ के स्पर्श ले गरम-गरम हवा ले नींद म सो जथे । तब तक दाई हर घर के साफ सफाई कर डारे रहय । चन्द्रकला ह लेडी डाक्टर अउ सिसु रोग विशेषज्ञ ल फोन करके बुलवा ले रहय । डॉक्टर मन जच्चा-बच्चा ल स्वस्थ कहीन । यदि कोई तकलीफ होही त बुला लेहा । डॉक्टर मन समझा के चल देथे । चन्द्रकला देवी दौनामांजर के सेवा म लग गे रहय । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ल खिलौना अउ वंस चलाय बर बेटा मिल गे रहय ।

रामदेव अउ कामदेव, चन्द्रसेवन बहुत खुस होईन । रमौतीन आस-पड़ोस म लड्डू बंटवाथे । बच्चा मन ल मिठाई देथे । बड़ दिन के बाद म घर म लईका जनम होय रहय, ओहू म जुड़वा बेटा अउ बेटी । दुगुना खुसी होय रहय । चन्द्रसेन बहुत खुस रहय । तीन घंटा बाद लईका मन जागीच अउ ऐंव-ऐंव रोय लगीन । रमौतीन ह कथे, लईका मन भूख म रोवत हे । दौनामांजर ल जगाईच, बेटी उठ अ लईका मन ल दूध पिलाव । दौनामांजर ल कथे, बेटी ढेठी ल गरम पानी म धोले मईल ह निकल जाही । थोरक दबाके ढेंठी ल । दूनों ढेठी म धूध भरे रहय । एक ढेंठी ल बेटा के मुँह मा डारिच । चुमुल-चखल के दूध पीय लगथे । मस्त दूध पी के सोय लगथे । दूसर ढेंठी ल बेटी के मुँह म ओधाथे । चखल-चखल करके दूध पीये लगथे । पेट भर दूध पी के दाई के गोदी म सो जाथे, दौना मांजर ह दूध पिलाके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह फोन करके दुबारा पूरनिमा ल बताथ, चन्द्रसेन के जुड़वा लईका होय हे । कालि तंय ह रायगढ़ आ जा । चन्द्रप्रकास ल रायपुर फोन म बताथे । दुर्ग म चन्द्रप्रकास के ससुन ल छट्ठी के नेवता देथे । चन्द्रसेन ह दमउदहरा जाके ससुर अउ सास ल बताथे, बड़ खुस होथे । छट्ठी के नेवता चन्द्रकला देवी ह सरिया अउ सारंगढ़ के महिला मन ल देथे । चन्दा देवी ह मधु के संग पहिली के आगे रहय । सबे सगा-संबंधी, जान-पहिचान वाला मन ल नेवता दे देथे । चन्द्रकला देवी ह छट्ठी के तियारी म लग जथे । टेंट वाला ल पंडाल लगाय बर बोल देथे । रसोईया ल दू हजार आदमी के पकवान, भोजन बनाय के आदेस दे देथे । छट्ठी के तियारी पूरा हो जथे । दौनामांजर ल छः दिन म गरम पानी से ओखद जड़ी बूटी डाल के पकाय पानी म नहवाथे । नवा लूगरा, पोलखर पहिना के घर के कुल देवता, तुलसी चौरा म अगबत्ती, धूप-जला के पूजा कराथे । दौनामांजर ह पुस्पा, रमौतीन, रामदेव, कामदेव, चन्द्रकला देवी, चन्दा देवी, पूरनिमा, अपन ददा अउ दाई अउ सब बड़ सियान के पाँव छू के पैलगी करिच । सब आसीस दीन, दूधो नहाओ, पूतो फलो । चन्द्रकला देवी ह छाती से लगा के माथा ल चूम लेथे । घर म आनंद मंगल होत रहय । घर म धून-धड़ाका होत रहय । दौनामांजर ल दूबराज धान के भात-दार, मुनगा-बड़ी के साग भोजन म देईन । घर म सुद्ध घी से बनाय लड्डू जेमा काजू, किसमिस, बादाम छोहारा, लौंग, इलायची डाले गे रहय । करायत, तिल, अलसी, सोंठ के लड्डू, घी म बनाय रहय । माँजर ह थोरिक थोरिक चीख के देखिच । कांके पानी बड़े ओखद जड़ी-बूटी, खस औसधियुक्त पेय पीईच । सब पहुना मन ल काके पानी, लड्डू, दार-भात, सब्जी, हजार आदमी मन ल खवाईच । मस्त सुवागत सतकार करीन । चन्दा देवी अउ मधु मन बढ़िया सोहर गीत घलो गाईन अउ नाचिन । पूरनिमा, प्रेमलता, चन्द्रकला देवी लईका मन ल गोदी म ले के मस्त नाचिन, आनंद मंगल मनाईन ।

रायगढ़ सहर के नेता, अधिकारी, कर्मचारी अउ कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, एस. डी. एम., थानेदार सब मैडम ल बधाई दीन । चन्द्रसेन ल बधाई दीन । भोजन करके सब अपन-अपन घर जल देथे । निकट के नातेदार मन रात रूकथे । बांचे मनखे मन रात तक घर चल देथे । चन्दा देवी अउ मधु सरिया के मन जीप म सांरगढ़, सरिया चल देथे । मस्त चहल-पहल घर म रहय । चन्द्रप्रकास अ पूरनिमा के चार-चार बच्चा मन धमा-चौकड़ी मचाय रहय । घर भरे लगय । घर म खुसी आनंद मंगल रहय । बहुत अकन भेंट, रूपिया-पईसा, कपड़ा, खिलौना, लूगरा मिले रहय । छट्ठी के खवाई-पियाई रात तक चलत रहीच ।

चन्द्रकला देवी ह सबके हिसाब-किताब चुकता करथे । सब पहुना मन ल चन्द्रसेन ह धोती, लूगरा, गमछा, लूंगी भेंट म देथे । दौनामांजर के दाई-ददा मन ह खुस होगे । अतका खरचा करबो त हमर खेत बेचा जाही । हमन तो गरीब किसान ठेठवार आन । अईसे ताम झाम नई कर सकन । बहुत अच्छा, बड़ नाम कमाही बेटी मंतरी ह । मजा आ जथे, देख के आदमी मन ल । खुसी म फूले नई समावत रहय, रामदेव अ कामदेव । पुस्पा देवी ह बेटा ल पावय अउ रमौतीन ह बेटी ल बढ़िया लोरी सुना-सुना के सुलावय, बढ़िया खिलौना मिल गे रहय, दूनों दाई के रहत माँजर ल कोई तकलीफ नई होवय ।

दौनामांजर ल बारा दिन म बरही नहवाईन । महिना भर गरम पानी म नहावय । धीरे-धीरे सरीर पक्का होत गईच, पहिली जईसे सरीर होगे । बढ़िया पुष्टिवर्धक लड्डू दवाई खाईच जल्दी देह ह भर गय । शरीर ह पेट ह पहिली जईसे होगे रहय । दूनो लईका मन पेट भर दूध बी के सोवत रहय । माँजर ह घरके काम बूता घलो करे लागय । माँजर के दूनों ढेठी म दूध भरे रहयष कमी नई होवय । चन्द्रसेन डेयरी के धन्धा म लग जाथे । फार्महाउस से अनाज, धान, राहर, चना, सरसों, गन्ना, फल, केला, पपीता आ जावय । बढ़िया खाता-पीता घर होगे रहय । पुस्पा अउ रमौतीन डोकरी मन लईका ल रोये नई देवय, बारी-बारी ले सब झन पावय ।

चन्द्रकला देवी ह नगर पालिका के जन्म-मृत्यु पंजीयन के कर्मचारी ल बुला के पंजीयन करवा देथे । बेटा के नाम राजेन्द्र प्रसाद अउ बेटी के नाम कमलाबाई लिखवा दीच । चन्द्रकला देवी के घर टिकट मंगईया मन के भीड़ जुटे लगीच । पूरा छत्तीसगढ़ से पारटी कार्यकर्ता मन आय लगीन । सबो के आवेदन ले के बायो डाटा लेके, पारटी कार्यालय भेज देवय । हर समय भीड़ बने रहय ।

चुनाव आयोग ह चुनाव तिथि के घोसना कर देथे । पैंतालिस दिन पहिली राजपत्र म छप जथे । चुनाव के तारीख पक्का हो जथे । नामांकन के तारीख म चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी अपना समर्थक महिला नेता मन ल ले के नामांकन परचा भर देथे । दिल्ली म कार्यसमिति के बैठक म पूरा विधायक मन ल टिकट देय के घोसन हो जाथे । दूर दिन समाचार पत्र म चन्द्रकला देवी ल सरिया क्षेत्र से अउ चन्दादेवी ले सांरगढ़ से टिकट मिले के खबर छपे रथे । पुरूस वर्ग के नेता मन बहुत विरोध करके पारटी छोड़ देथे, पर पारटी ह नीतिगत निरनय ल नई छोड़य । वर्तमान विधायक ल पारटी टिकट देथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के नामांकन ल सही पाथे । विरोधी पक्ष के नेता मन नया चेहरा ल टिकट देथे । सरिया विधानसभा क्षेत्र से चन्द्रकला देवी, रामचन्द्र चौधरी, जवाहर-नायक उम्मीदवार रहय ।

सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चन्दा देवी वारे, सत्ता पक्ष से, विपक्ष से सेरसिंह, निरदलीय राम भजन जोलाहे उम्मीदवार रहय । नामांकन वापस ले बर सोचें रहय । कई निरदलीय महिला मन भरे रहय । मान-मनोवल से नाम वापस ले लेथे । चुनाव के महासमर म चन्दा देवी कूद जाथे । पहिली चुनाव के अनुभव ह काम आईच । गाँव-गाँव, गली-गली, घर-दूवारी म वोट मांगय । रात-दिन धूल-धक्कड़ म फदके रहय । बड़ भिनसार चाय पी के निकल के रात 12 बजे के बाद रात म घर आवय । न खाये पीये के फिकर न नहाय धोय के । चन्दा देवी चुनाव के महासमर म कूद पड़ीच । समारू ह चुनाव के कमान ल सम्हारे रहय । मधु ह नगर पालिका क्षेत्र के जवाबदारी लेय रहय । गाँव गाँ के महिला मंजल ल सक्रिय करके चुनाव के प्रचार म लगा देय रहय । सारंगढ़ क्षेत्र के हर गाँव के एक राउंड दउरा एक हफ्ता म चन्दा देवी पूरा करीच । पाँच ठन जीप, टेक्टर, कार, चुनाव प्रचार म लगाय रहय । चुनाव कार्यालय गाँव गाँव म गाँव के महिला मन चंदा देवी के पक्ष म पीरा कसके चुनाव समर म कूद गे रहय । चन्दा देवी ह पोस्टर, बेनर के बेवस्था अउ रूपिया, पईसा, खाय पीये के बेवस्था घलो कर देय रहीस ।

चन्द्रकला देवी ह रायगढ़ से सरिया म निवास बना ले रहीस । सरिया म चुनाव कार्यालय खोल दे रहिस । चुनाव के कमान पुस्पा दाई सम्हारे रहाय । पूरनिमा ह जबलपुर से आ गे रहय । कामदेव कका, गफ्फार चाचा, अमृत जोसी चुनाव प्रचार करत रहय । लगातार गाँव गाँव घर-घर अंगना म बईठक, आम सभा लेवय । परछी, चंउरा, चौपालगुड़ी, म धुआंधार प्रचार करत रहय । चन्द्रकला देवी ह दस जीप, सायकल, मोटर सायकल, टेक्टर, बैलगाड़ी चुनाव प्रचार म लगाये रहय । सरिया क्षेत्र, चुनावी पोस्टर बैनर से पट गे रहय । सरिया क्षेत्र म चन्द्रकला देवी के पक्ष म हवा चल गीस । सब महिला मन चुनाव प्रचार म कूद गीन । बहुत बढ़िया समरथन मिलत रहय । चन्द्रकला देवी ह महिला ससक्तिकरण बर अच्छा-अच्छा काम करे रहय । गाँव के विकास, उद्योग, कृषि, बागवानी, सिंचाई, स़ड़क, रोजगार धंधा म बहुत काम कराय ले चन्द्रकला देवी के जय जयकार होत रहय । सरिया म एक तरफ हवा बह गे । चारों मुड़ा चन्द्रकला देवी ल जीताय के समर खाईन, बढ़िया चुनाव प्रचार चलत रहीस ।

सरिया म चुनाव कार्यालय म भंडारा खोल दे रहय, कार्यकर्ता मन भोजन कराय अउ चुनाव प्रचार म जावय । सुबह खाना खा के जावय अउ आधा रात म आवय । अच्छा माहौल बन गे रहय . चन्द्रकला देवी ह बड़े नेता के संग सभा म रहय । चुनाव मतदान दिन सब मतदान केन्द्र म महिला एजेंट रहय । जादा से जादा महिला मन मतदान करीन। सरिया क्षेत्र म महिला मतदान के प्रतिसन 90 होईस अउ पुरूस मन के 60 प्रतिसत वोट पड़ीच । चन्द्रकला देवी, मतदान केन्द्र के वोट के धांधली झन होवय कहिके देखत रहीस ।

सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र म मतदान पचास प्रतिसत वोट पड़ीच । चन्दा देवी के पक्ष म हवा चले रहय । महिला मंडल के सदस्य मन अधिक से अधिक महिला मन वोट डालवाय रहय । चन्दा देवी जीत के प्रति आस्वस्त होगे । मत पेटी, सांरगढ़ से रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय म जमा हो जथे ।

चन्द्रकला देवी के भाग्य के फैसला, मत पेटी म बंद हो जथे । सरिया क्षेत्र म जबरदस्त मतदान के चरचा समाचार पत्र अउ टी. वी. म आय रहय । चन्द्रकला देवी जीत के प्रति आस्वस्थ रहय । पुस्पा दाई ह चुनाव के कोसाध्यक्ष रहीस । बढ़िया सब कार्यकर्ता मन खुस रहय । सब ला भोजन, डीजल, पेट्रोल के पईसा माँग अनुसार देवय । कार्यकर्ता मनु के उत्साह ह बढ़े रहय । चन्द्रकला देवी पस्त हो गे रहय । धूल धक्कड़, धाम म चेहरा मुरझा गे रहय । छप्पन साल म एकदम सौ साल के डोकरी कस दिखत रहय, सब कोई पहिचान नई पावय । दूसर दिन सुघ्घर साबुन से रगड़ रगड़ के नहाईच । केस ल सेम्पू से धोईच अउ काला रंग के मेंहदी लगाईच, चेहरा म क्रीम लगाईच अउ भोजन करके मस्त एक नींद सोईच । एक महीना के थकान ह दूर होईच ।
चन्दा देवी के चुनाव के कोसाध्यक्ष समारू रहय । पहिली चुनाव म घलो समारू ह देखे रहिस । अच्छा अच्छा चुनाव के काम निपट गे रहय । चन्दा देवी थकान से चूर हो गे रहय । दरद के गोली खाके सोईच । दिन भर सोवत रहिगे । समारू ह सबके हिसाब किताब करिच ।

कलेक्टरेट, रायगढ़ म मतगनना होईच । प्रथम चक्र से चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी आगू चलत रहीस । आखिरी चक्र म कई वोट मिले रहीस । चन्दा देवी ह बारह हजार से अधिक मत से जीत हासिल करीछ । चन्द्रकला देवी ह बीस हाजार मतों से विजयी होईच । दूनों महिला मन अपन सीट ल बरकरार रखीन । जय जयगार होगे, चन्द्रकला देवी के । भारत निर्वाचन आयोग से विजयी होय के परमाण पत्र कलेक्टर जिला निर्वाचन अधिकारी ह चन्द्रकला देवी ल देईच अउ बधाई दीच । चन्दा देवी ल विजयी घोसित करीच । प्रमाण-पत्र देईच अउ बधाई घलो दीच ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के जीत के खुसी म विजयी जुलुस रायगढ़ नगर म निकलिच । बधाई देवईया मन के तांता लगे रहय । रंग गुलाल, बैंड बाजा सहित विजय जुलूस पारटी कार्यालय से बाजार होके निवास स्थान समाप्त होईच । चन्द्रकला देवी सबो झन ल लड्डू बांटथे । जबरदस्त जुलूस रहय । पूरा सहर उमड़ पड़े रहय का लईका अउ का सियान । मजा आगे । घर म खुसी छा जथे । पुस्पादाई, रमौतीन, चन्द्रसेन, रामदेव, कामदेव, एम. ए. गफ्पार भाई, कृस्नचंद भारद्वाज झूम झूम के नाचिन, गाईन अउ मौज मस्ती मनाईन । चन्द्रकला देवी सब ल धन्यवाद करीच । सरिया अउ सारंगढ़ से आये महिला मंडल के सदस्य मन हिरदे ले आभार व्यक्त अउ धन्यवाद देईच । सब अपन घर जीप म बईठ के चल देथे ।

चन्दा देवी ह सांरगढ़ के महिला अउ पुरूस कार्यकर्ता मन ल तीन जीप म ले जाथे । सारंगढ़ म विजय जुलूस रात म निकलिच । रंग, गुलाल, ढोल-तासा बाजत रहीस । जुलूस, सहर घूम के रानीसागर निवास म खतम होईच । सब ल चन्दादेवी ल लड्डू बांटिच । हाथ पांव के अंगना के जैतखाम म अगरबत्ती जला के पूरा करीच । माटी के दीया जला के रखीच । जय सतनाम बाबा गुरू घासीदास जी की जय बोलाईच । आकास गूंज उठीस । बाबा जी के परनाम माथा टेक के करीच अ माँगिच, बाबा जी सहायता करबे । मय तो तोरे भरोसा हंव, समारू अउ पूरा परिवार मिलके पूजा आरती करथे । घर म आनंद खुसी छा गे रहय ।

दूसर दिन अखबार म सत्ता पक्ष के करारी हार के समाचार पत्र छपे रहय । मध्यप्रदेश के मुख्मंत्री सहित आधा दर्जन मंत्री, विधायक चुनाव हार गे रहय । सत्ता प के करारी हार से मुख्यमंत्री के जवाबदारी लेते हुए मंत्रीमंडल भंग करके मुख्यमंत्री पद से इसतीफा, राज्यपाल महोदय ल भेज देथे । राज्यपाल महोदय ह मुख्यमंत्री के निर्वाचन तक काम चलाऊ मुख्यमंत्री बने रहे के आग्रह करथे ।

चन्द्रकला देवी ह मंत्री पद से इसतीफा भेजवा देथे । प्रोटोकाल के कार अउ स्टाफ ल वापस कर देथे, विधायक रहिहूं कहिच । चन्दा देवी ह सब हिसाब किताब अउ सब कार्यकर्ता मन ल धन्यवाद घलो गाँव गाँव जाके देईच । पाँच साल के बात फेर वोट देहा कहिके निवदन करीच । चन्दा देवी ह भोपाल जाय बर रायगढ़ आ जाथे । चन्द्रकला देवी के निवास म आ जथे । पुस्पा देवी, रामदेव, कामदेव, रमौतीन, चन्द्रसेन, दौनामांजर मन विधायक जीत के आय ले बधाई दीन । चन्द्रकला देवी ह चुनाव आयोग ल व्यय के हिसाब घलो भेज देथे । दूसर दिन रायगढ़ से भोपाल जाय बर बिलासपुर चल देथे . बिलासपुर से भोपाल छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस म चल देथे । ट्रेन म नव निर्वाचित विधायक मन से परिचय होते । नवा-नवा विधायक चुन के जात रहय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी वारे, वरिष्ठ विधायक बनगे रहय । सब कोई नमस्कार परनाम करीन । गपसप करत बिलासपुर से भोपाल सुबह 6 बजे पहुँचीन । चन्दा देवी के संग समारू रहय . दो आटो म विधायक विसराम गृह पहुँचीन । चन्द्रकला देवी ह चाय पी के अपन बँगला, चौहत्तर बँगला चल देथे । चौकीदार, चपरासी मन दरवाजा खोलथे । चपरासी ल चन्द्रकला देवी बोलथे, सब समान ल पेक करके रख दो मंय बंगला एक-दू दिन म खाली कर देहूँ । पूरा बँगला खाली रहय । सुनसान, भूत बँगला जईसे खाली लगत रहय । मंत्री के बोर्ड, झंडा निकल गे रहय । स्टाफ के घलो ट्रांसफर होगे रहय ।

चन्द्रकला देवी ह लउहा स्नान करके पूजा पाठ, अगरबत्ती जलाईस । तियार हो के विधान सभा भवन चल देथे । विधानसभा सत्र म सपथ ग्रहण, नव निर्वाचित विधायक मन ल राज्यपाल महोदय, विधानसभा अध्यक्ष महोदय ह सपथ दिलवाथे । साम के वक्त विधायक दल के बैठक म बहुमत वाले पारटी के नेता ल मुख्यमंत्री चुने जाथे । दूसर दिन राजभवन म राज्यपाल महोदय ह मुख्यमंत्री अउ मंत्रीमंडल के सदस्य ल सपथ कराथे । चन्द्रकला देवी विपक्ष म जाके बईठ जाथे ।

चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी, विधानसभा भवन के बंगला आ जाथे । चन्द्रकला देवी ह विधायक विसराम गृह म चन्दा देवी के पास के कमरा ल आबंटन करा लेथे । चन्द्रकला देवी ह सब समान ल पेक करा डरे रहय . एक मेटाडोर म समान विधायक बिसराम गृह भेजवा देथे । बंगला के चाबी पी. डब्ल्यू. डी. के आफिस म जमा कर देथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी, न्यू मार्केट से साग भाजी, मीठा, खारा, नमकीन लेके निवास म पहुँच जथे । समारू ह सब समान ल जमवा देथे । चन्द्रकला देवी पड़ोसिन हो जथे ।

चन्दा देवी कपड़ा बदल के रंधनी म पहुँच जथे । बढ़िया दार-भात, सब्जी पकाथे । चन्द्रकला देवी ल भूरी ह खाना खाय ल बुलाथे, चल बड़ी माँ भोजन खाय बर । चन्द्रकला देवी, भूरी, कुसुवा, चन्दा देवी, समारू एके संग बईठ के भोजन करीन । खाना खा के गप मारत बईठे रहय । लईका मन सोगे । समारू घलो सोवत रहय । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी गप मारत-मारत सोचे लगथे । चन्द्रकला कथे चन्दा बहिनी, हमर दाई-ददा मन हमन के नाव चन्द्रकला ला सोच के धरीन होही, सोंच तो भला । चन्दा कथे दीदी मंय तो सउघे चन्द्रमा मोर नाव हे । चन्दा के सीतल किरण से सांति मिलथे । दिन के सूरज के घाम म आदमी तप जथे, परेसान हो जथे । सोचथे कब सूरज डूबे अउ चन्दा के सीतल, ठंडी किरण मिले । चन्द्रकला कथे बहिनी, तंय समूचा चन्दा आच, पर मंय तो ओकर कला आँव । जईसे परिवार, दूज, तीज, चौथ, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमीं, दसमी, अकादशी, द्वादसी, त्रयोदसी, चौदस, अमावस, पूरा अंधकार, कृष्ण पक्ष । सुक्ल पक्ष फिर वही क्रम अंतिम म पूनम के चांद । जईसे चन्दा के कला हावय वईसे ये मोर जीवन म अंधियार उजियार होईस । चन्द्रकला के आँखई ले आँसू झरर-झरर बहे लगथे । चन्दा कथे, का बात हे दीदी । चन्द्रकला कथे, बहिनी, मालूराम जी के याद आगे । दू साल से जादा होगे, संसार ल छोड़े । जब तक जीयत रहिस, का नई करे हे । सब कुछ ओकरे बनाय आय । मंय तो मंवरी रहेंव तभो ले एक ठन कुरिया घलो नई बनाय सकेंव ।

चन्दा देवी कथे, दीदी, मालूराम जी बने आदमी रहिस । तब तंय ह लोग, लईका के परयास काबर नई करे । चन्द्रकला कथे बहिनी, ओह पहिली ले बाल-बच्चेदार आदमी रहीस । ओला बच्चा नई चाहत रहीस । मंय भी सोचेव मंदिर के बिहाव ल समाज नई स्वीकारय । ओकरे सेती मंय ह नसबंदी आपरेसन करा डारे हंव, नई तो मोरो कई ठन लईका दनादन हो जातिच । चन्दा बहिनी, मोर किस्मत म प्रसव पीड़ा अउ लईका के सुख नई लिखे हावयष तब तो मंय बगठी हंव । उल्ला सांड़ जईसे घूमत-फिरत हंव . अब मरे के बेला मोला कोन पानी देही । मोर जतन कोन करही । सरीर अभी चलत-फिरत हे, जे दिन थाउ, अचल पड़ही त कोन जतनही । अब तो परिवार के जादा जरूरत हे, जवानी म खा पी लेंव ।

चन्दा कथे दीदी, जईसे जवानी कटिस, वईसे बुढापा घलो कट जाही । अब पेंसन घलो बढ़िया मिलही जीये लाईक ।कई झन पाले पोसे बर सेवा करईया मिल जाही । चन्द्रसेन भाई तो हे । चन्द्रकला कथे बहिनी, पुस्पा दाई, रमौतीन, रामदेव अउ कका कामदेव के उमर सौ बरिस जादा एक सौ पाँच बरिस होगे हे । सब एक संग आगू पाछू जाही । चन्दा कथे दीदी, सबे ल एक दिन जाना हे । अब तो पाँच साल तक राज कर सकत हन । पाँच साल तक भोपाल म रह सकत हन । चन्द्रकला कथे बहिनी, जब ले मोर संग धरे हंव मोला फायदा होय हे । चन्दा कथे दीदी, ऐ तो सतनाम साहेब के किरपा हे । कहाँ सोचत रहेन कि हमू मन एक दिन गोबर थपई से विधानसभा पहुँच जाबो । ऐ तो हमर किस्मत म लिखे रहीस, विधायक बन के ।

चन्द्रकला देवी ह गपसप मारत-मारत कलाई के घड़ी ल देखथे, रात के साढ़े दस बज के रहय । चन्दा बहिनी चल सोबो, काल जल्दी विधान सभा जाना हे । चल आज अतका गपसप मारे काली अ बईठको । चन्द्रकला देवी अपन कमरा म जाके सो जाथे । चन्दा देवी बाथरूम से हाँथ-पाँव धोके जाथे । समारू के नींद पड़गे रहय । चन्दा हे जगाथे, सोगे का जी । समारू कथे, हां थके रहेंव नीदं पड़गे । चन्दा ह कथे बच्चा मन सोगे के नहीं, देखथे सब सोगे रहय । चन्दा कथे, आज तेल मालिस कर भई । दो-तीन महीना म आज मिल हे । चन्दा देवी ह नरियर तेल निकाल के रखथे समारू ह आंखी ल रमजत-रमजत उठीच । चन्दाकथे मोर पीठ, कनिहा म तेल लगा के मालिस कर जी । चन्दा ह उलाट सो के मालिस पीठ, कमर म कराथे । बने दबा-दबा के मालिस कराईच । समारू कथे थक गेंव जी । चन्दा कथे, दे मंय तेल मालिस कर देथंव । पीठ, कमर, हाथ पाँव म तेल मालिस करथे । चन्दा के देंह एकदम गरम हो जाथे । मस्ती करके चंदा सांत हो जाथे । आत्मिक सुख के अनुभव करथे । समारू घलो आनंद लेके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी के रात म नींद नई पड़ीच, रात ऐती ल ओती कलथस करीस । चन्द्रकला देवी ह दिमाग म सेसे जीवन के काली छाया के चिंता सताय लगिच । चिंता के कारन रात म नींद नहीं पड़ीच । बिहंचे उठके मार्निंग वाक म सड़क म निकलगे । दो-तीन किलोमीटर घूमे गईच अउ वापिस आगे । तब तक चन्दा देवी के दरवाजा खुल गे रहय । समारू ह अखबार पढ़त हय । भूरी अउ कुसी ब्रस करत रहय । चन्दा देवी रंधनी म चाय बनावत रहय । अदरक, लौंग, इलाइची, कूटत रहय । चन्द्रकला देवी रंधनी म पहुँच जाथे । पीढ़हा म बईठ के रंधनी मचाय पीईन । समारू बर चाय भेजथे । भूरी अउ कुसुवा रंधनी म आ के बईठ के चाय संग म पीइन । बहुत बढ़िया चाय बनाय रहय, मजा आ गे चाय पीये म ।

चाय पीके चन्द्रकला देवी ह फ्रेस होय चल देथे । चन्दा देवी अउ समारू साग-भाजी के तियारी म लग जथे । लईका मन बर पोहा के नास्ता बनाथे । चन्दा देवी ह विधानसभा जाय बर स्नान करके तियारी करे लगथे । चन्द्रकला देवी लूगरा पोलखर पहिन के आ जाथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी पोहा के नास्ता करके विधानसभा जाय बर सड़क म आ जथे । पैदल चल के विधानसभा पहुँच जाथे । विधानसभा म मुख्यमंत्री ह सब मंत्री मंडल के सदस्य मन के परिचय कराथे । विधायक मन टेबल पीट के सुवागत करथे । विधानसभा म पूर्ण बहुमत मिल गे रहय । विधानसभा अध्यक्ष घलो सत्ता पक्ष के रहय । विधान सभा उपाध्यक्ष, विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य ल बना दिये जाथे । विधान सभा म मुख्यमंत्री जी द्वारा भोज दिये जाथे । दोपहर भोजनावकास म हास-परिहास कर भोज समाप्त हो जाथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी हर रेल्वे कूपन, बस कूपन, टेलीफोन एवं अन्य सुविधा के माँग करथे । अउ विसराम करे बर विसराम गृह आ जाथे । चन्द्रकला देवी कथे बहिनी, नींद लगत हे मंय जांथव सोहंव । चन्दा कथे ठीक हे महूँ सो जाथंव एक घंटा सो जाथे । चन्द्रकला ह पाँच बजे तक सोवत रईथे ।

चन्दा देवी के फोन नम्बर म चन्द्रसेन, रायगढ़ से फोन करथे अउ रोवत-रोवत बताथे दीदी, रायगढ़ सहर म रबड़ी खाय ले पचास आदमी बीमार हो के अस्पताल म भरती हे । होटल से पुस्पा दाई ह रबड़ी लाके, सियान मन चारों झन खाईन । फूड पायजनिंग होगे, उल्टी, दस्त, होगे । पूरा जहर सरीर म फईल गे । अस्पताल म चारों झन के मृत्यु होगे हे । मंय तो अनाथ होगे हंव । चन्द्रकला देवी ल आज छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से रायगढ़ भेज दे । चन्द्रसेन रोवत रोवत फोन रखिच । चन्दा देवी के गला सूख गे । झटपट चन्द्रकला देवी ह सांकल खटखटाईच, बेल घलो बजाईच । चन्द्रकला आँखी रमजत उठीच, का होगे चन्दा बहिनी । चन्दा बहिनी ह रोवत रोवत चन्द्रसेन के बात बता देथे । चन्द्रकला देवी गस खा के गिर जाथे । चन्दा देवी छींटा मारके होश म लाथे । चन्द्रकला देवी आँखी ले आँसू के धार बहत रहय । रूके के नाव नई लेत रहीस । चन्दा देवी कथे दीदी, चल रायगढ़ जाय ल पड़ही । चन्द्रकला कथे बहिनी, मोर तो रायगढ़ से दाना पानी अउ मातृ छाया उठगे । सब सियान मन मरगे । मोर घर ल कोन देखही, बम फारके होईच ।

समारू ह दूनों के सूटकेस म लूगरा, साया कुछ सामान भरके तियार कर देथे । रात के भोजन बर पराठा, सब्जी बना के रख देथे । चन्दा देवी ह चन्द्रकला ल पकड़ के रेल्वे स्टेसन ले जाथे । गाड़ी ह आधा घंटा लेट रईथे । चन्दा देवी ह दो टिकट कूपन से कटवाथे । ए. सी. म बर्थ आरक्षित मिल जाथे । भोपाल से रायगढ़ व्हाया बिलासपुर के टिकट बन जाथे । चन्द्रकला के हालत खराब होत रहय । चन्दा ह दरद के गोली डिस्प्रिन खवाथे अउ सो जा कहिथे । चन्द्रकला कथे जेकर घर चार-चार झन मर गे हे, कईसे नींद आही । मोर दाई-ददा, कका, मोर माँ पुस्पा के अकालमृत्यु होगे । चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास अउ मय अनाथ होगेन । चन्दा कथे दीदी, तोर तबियत खराब हे, थोरिक आराम करले । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस भोपाल से प्रस्थान करथे ।

चन्द्रसेन ह टेलीफोन से चन्द्रप्रकास ल बताथे । जल्दी काल आ जावव । चन्द्रप्रकास के हालत खराब हो जाथे । एक ठो माँ रहीस ओहू ह छोड़ के चले गे । चन्द्रप्रकास ह अपन ससुर ल दुर्ग टेलीफोन करथे । सब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुँचथे । चन्द्रसेन ह पूरनिमा ल सूचना देथे, पूरनिमा के हालत घलो रोवई म खराब होगे रहय । पूरनिमा, सुनील जबलपुर से कार म रायगढ़ तीन बजे तक पहुँचथे । चन्द्रकला अउ चन्दा, चन्द्रप्रकास, एम. आर. भारद्वाज अउ रिस्तेदार मन बिलासपुर से रेल म रायगढ़ तीन बजे पहुँचीन । चन्द्रसेन ह अपन ससुराल घलो पता भेज दे रहीस । दौनामंजर के रोवई म आखी सूज गे रहय, दूनों दाई के मरे ले । दौनामांजर के बच्चा मन अनाथ जईसे होगे । काबर दूनों मन गोदी म पावत रहय, खेलवाय, सोवावय, नहावावय, बढ़िया लईका मन बाढ़ता रहीन, अब कोन सहजोग देही । अड़बड़ रोईच । आस-पड़ोस के मन जुट गे रहय । चन्द्रसेन अउ दौनामांजर ल ढांढस बंधाईन ।

चन्द्रसेन ह चारों लास ल अस्पताल के मरचुरी म रखवा दे रहय । फूड पायजनिंग के पचास आदमी भरती होय रहय । होटल के रबड़ी के जाँच म पता चलथे, रबड़ी ठंडा करत समय छिपकली गिर के मर जाथे । रबड़ी के साथ मिल जथे अउ छिपकली के जहर से रबड़ी जहरीला हो जाथे । जतका झन रबड़ी खाय रहय मौत के मुँह म समा गे रहय । होटल मालिक ल गिरफ्तार कर जेल भेज दे जाथे । पुलिस ह एफ. आई. आर. दर्ज करके कारवाही करथे । रायगढ़ सहर अ पूरा परदेस म तहलका मच जाथे । दूसर दिन विधानसभा म ध्यानाकरसन के माध्यम से सरकार के धियान आकरसित करे जाथे मुख्यमंत्री ह जाँच के आदेश देथे । मृतक के परिवार ल आर्थिक सहायता एक एक लाख रूपिया के घोसना घलो करथे । पूरा देस भर रबड़ी खाय से पाचस आदमियों की मौत, खबर छपथे । टी. वी. न्यूज में घलो आ जाथे ।

चन्द्रकला अउ चन्दा देवी तीन बजे रायगढ़ पहुँचथे । वहाँ से सब झन अस्पताल लास लाये बर चल देथे । अस्पताल म कोहराम मचे रहय सब रोवई म मातम, सन्नाटा रहय । चन्द्रकला देवी ह लास ल देख के बहुत रोईच । दाई-ददा, कका, दाई के लास ल देख के बमफार के रोईच । सज के आँखी ले आँसू बहत रहय । घर के सियान के मौत होगे रहय । हजारों के भीड़ अस्पताल म रहय । अस्पताल से एम्बूलेन्स गाड़ी से लास गोसाला पास के निवास म लाथे । चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन, सुनील, एम. आर. भारद्वाज, गफ्फार भाई, बलदेव साव, डॉ. बिहारी लाल साहू, शिवरतन पांड़े, बिहारी लाल उपाध्याय, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, जगदीस मेहर अउ सब झन मिल के लास ल घर के अंगना म ले जाथे ।

चारों लास ल दू खटिया म सुला देथे । पानी से स्नान कराथे, शरीर म हरदी, चन्दन लगाथे । नया लूगरा, धोती पहिराथे । पुस्पादेवी अउ रमौतीन दाई ल टिकली, फुंदरी, चुरी पहिराथे । चारों झन के लाश ल चार मयाना म राम नाम सत्य हे, सबका यही गत्य हे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन के आँसू नई रूकत रहीस । रूंधे गला से चन्द्रसेन अउ चन्द्रप्रकास चारों मयाना म कंधा लगाथे । हजारों के भीड़ काठी म जाय बर जूटे रहय । कोतरा रोड के समसान घाट म चारों लाश ल जला के दाह संस्कार चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन करथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी विधायक, कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक, एस. डी. एम., तहसीलदार, थानेदार, नेता, अधिकारी मन पाँच लकड़ी डाल के दाह संस्कार पूरा करथे । लाश धू-धू करके जलत रहय । समासान घाट म दो मिनट मौन धारनकर श्रंद्धाजलि देथे । तरिया म नहाके कर घर आ जाथे । घर से सब अपन निवास स्थान चले जाथे । चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन हाथ जोड़ के परनाम, सब पहुना जो काठी म आय रहय, करथे ।

दौनामांजर घर वाला मन बर भोजन बनाथे, बुझे मन से सब भोजन करथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी विधायक से भेंट कराईया, सोक व्यक्त करईया मन के तांता लगे रहय । घर ह एकदम सुन्ना पड़गे रहय । छोट छोट लईका मन दादी माँ के कोरा बर अड़बड़ रोवय । चन्द्रकला अउ चन्दा देवी के कोरा म लईका मन चुप हो गीन . चन्द्रकला ह दूनों लईका मन ल चुमीच । मस्त हांस लगीन । चन्द्रप्रकास ह बहुत रोईच । दीदी, अब रायगढ़ सहर से मोर दाना पानी उठगे हे । अब ऐ संसार म कोई नईये । चन्द्रकला कथे भईया, अभी तो मंय जीयत हंव । चन्द्रसेन घलो हावय । तीनो भाई बहिनी हांवन । चन्द्रप्रकास कथे दीदी, पुस्पा दाई ह दू-तीन दिन पहिली टेलीफोन करे रहीस, कहिस बेटा, रायगढ़ के आधा मकान, घर, खेत-खार ल चन्द्रसेन के नाव म चढ़ा देहे हेव । आधा ह तोर नाव म हे । तोर ददा ह इंदौर के मकान ल बेच के रायगढ़ म मकान अउ खेत, फार्म हाउस खरीदे रहीस । तोर पिताजी तो कई बछर होगे हे मरगे हे । चन्द्रकला बेटी के ददा ह तोर धरम पिता ऐ । अउ रमौतीन ह तोर दाई ऐ । काबर ओकर दूध पी के पले बढ़े हच ।

चन्द्रप्रकास बताथे दीदी, पुस्पा दाई बह जानत रहीस कहिस बेटा मंय जादा दिन के संगवारी नो हंव । चन्द्रकला देवी ल अच्छा मानबे मुनबे । ओही ह माँ बाप के दुलार देही । चन्द्रकला के घलो लोग लईका नईये । तोर लईका के संग रईही । चन्द्रप्रकास बताईच दीदी, मंय तो पहिली से बता दे रहें । मोला रायगढ़ के धन-सम्पत्ति नई चाही । दीदी के नाव म चढ़ा हव । मोर कहे अनुसार चन्द्रसेन के नांव चढ़वा दे । चन्दा देवी ह लईका ल कोरा म लेके खेलावत रहीस, मस्त हांसत, रोवत, खेलत रहय ।

चन्द्रकला कथे भाई हो तीन दिन के अस (हड्डी) बीन लेथन । पुस्पा दाई के इच्छानुसार अस ल महानदी म चन्द्रपुर म सरो (विसर्जित) देथन । दस दिन म दसकरम खात-खवई कर देबो । चन्दा देवी कथे, ठीक कहत हे दीदी ह । सब सुनता हो के काम ल निपटाबो । तीन दिन म चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन, सुनील, कंठी राउत मारघट्टी जा के अस बीन लेथे । एक माटी के बरतन म रख लेथें । चारों झन के अस ल एके बरतन म रख लेथे । घर आ जाथे । जीप किराया म दू ठन ले लेथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी, पूरनिमा, प्रेमलात अउ चार महिला मन एक जीम म । दूसर जीप म चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन, सुनील, भारद्वाज, कंठी राउत अउ चार पाँच झन बईठ के चन्द्रपुर के घाट म महानदी म अस ल सरो देथे । चन्द्रकला देवी, चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास के आँखी ले आसू के धार फट पड़थे । आँसू टप-टप महानदी के जल म मिल जथे । जईसे पुस्पा बाई, रमौतीन दाई, रामदेव ददा, कामदेव कका के शरीर ह पंचतत्व म मिलगे । महानदी के जल म मिल के समुद्र म समा जाही, ओकरे संग चन्द्रकला देवी के आँसू ह जल म मिल जाथे । चन्द्रकला देवी ह बहुत रोथे । चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास, पूरनिमा के सर ले दाई ददा, कका के छाया ह उठ जाथे । घर के सियान मन खतम होगे । छत्तीसगढ़ के विख्यात कवि, भाई लक्ष्मण मस्तुरिया के गीत “मोर संग चलव ग” याद आगे –

कहाँ जाहव बड़ दूर हे गंगा,
सब जुर-मिल यही तरव ग,
मोर संग चलव ग ।

महानदी के सीतल जल धारा म स्नान करथे अउ गरीब मन ल भोजन कराथे । दसकरम के काम पूरा करथे । चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन दान घलो देथे । चन्दा देवी ह कथे दीदी, सब ल एक दिन जाना हे जो धरती म जनम लेय हे ओला एक दिन मरना होही । सबके आत्मा ह परमात्मा म जाके मिलगे । जईसे नदिया के पानी ह समुद्र म मिल जाथे, पता नई चलय कहाँ समा जाथे । चन्द्रसेनी देवी के दरसन पहाड़ी म करथे । पूजा पाठ करके चन्द्रपुर से रायगढ़ आ जथे । चन्द्रसेन ह घर के लिपई –पोताई घलो करवा लेथे । दू-चार दिन चंद्रप्रकास, डॉ. प्रेमलता ह दिया दिखाथे । पूरनिमा घलो बहुत रोथे । घर ल उज्जर करके पूजा पाठ घलो कराथे । सब पहुना मन अपन-अपन घर चल देथे । चन्द्रप्रकास ह चन्द्रसेन ल सब घर-द्वार सौंप के रायगढ़ से रायपुर, सुन्दर नगर आ जथे । चन्दा देवी घलो रायग़ से भोपाल चल देथे । बांच गे घर म चन्द्रकला देवी, चन्द्रसेन, दौनामांजर अ जुड़वा लईका मन । जुड़वा लईका मन ल कोरा नई मिलय सुन्ना होगे रहय . चन्द्रसेन डेयरी के धन्धा म लग जाथे । फार्म हाउस घलो देख लेवय । पुस्तैनी धंधा गउ माता के सेवा करई ह मुख्य धंधा बन जाथे । चन्द्रसेन दूधवाला, रायगढ़ अउ आसपास म बहुत परसिद्ध हो जाथे । चन्द्रकला देवी, दूनों लईका के पालन-पोसन म लग जाथे । सबके जीवन चक्र ह, समय चक्र के संग चले लगथे ।

क्रमशः

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भाग- सोलह



न्द्रकला देवी सो के उठिस, फ्रेस होके बेडरूम ले निकलिस । अंगना के कुरसी म बईठ के समाचार पत्र पढ़त रहिस । रायगढ़ संदेश अखबार चार दिन बाद पहुँचय । मुख्य पृष्ठ म समाचार देय रहय कि गोसाला के गाय, बैल, अज्ञात बीमारी से मृत्यु । बैकुण्टपुर स्थित गोसाल के लगभग एक सौ से जादा गाय अज्ञात बीमारी के चपेट में आने से अकाल, काल के गाल में समा गये । विगत एक मास से गायों के मरने का सिलसिला जारी था । अब एक भी जानवर नहीं है । गोसाला प्रबंधन कमेटी न चौकीदार, जो पुस्तैनी गाय की सेवा करते आ रहे थे को हटाकर दूसरे चौकीदार नियुक्त कर दियें है । चन्द्रकला देवी के आँखी ले आँसू आ जाथे । पीढ़ी दर पीढ़ी गउ माता के सेवा करत रहीन, आज खतम होगे । पुस्पा देवी भी रो डारथे । बेटी गोसाला के गाय के दूध पी के पले-बढ़े रहेंव । चन्द्रप्रकास, पूरनिमा, चन्द्रसेन, रामदेव, कामदेव सब झन दूध पी के रहेंव । चन्द्रकला देवी कथे, दाई पूरा परिवार के जीये के आधार रहीस, कम से कम गो माता के सेवा करत रहीन, आज अनाथ हो गेन ।

पुस्पा देवी कथे बेटी अनाथ कईसे होही । चन्द्रप्रकास डिप्टी कलेक्टर बनगे हे । ओहा अभी पाँच-सात-साल अभी अऊ नौकरी करही, का पता कहा बसही पता लगे हे ओहा रायपुर सुन्दर नगर म मकान ले डारे हे । चन्द्रकला कथे, ठीक हे दाई तभो ले । पुस्पा कथे, बेटी अभी जाके चन्द्रसेन के नाम म चार एकड़ जमीन ल चढ़वा देथंव । मकान के आधा चन्द्रसेन के नाम म हो जाही त सब झंझट ले मुक्त हो जाही । वईसे घलो चन्द्रप्रकास रायगढ़ म नई रहय, रायपुर म बसही । डॉ. प्रेमलता ह सरकारी डॉक्टर बन गे हे । अभी ओकर पन्दरा बछर नौकरी बांचे हे, चन्द्रप्रकास ओकर संग रईही । चन्द्रप्रकास ल धन सम्पत्ति के लालच नईये । पुस्पा कथे, बेटी चन्द्रप्रकास ह मोला कई बार बोल चुके हे माँ रायगढ़ के सम्पत्ति ल दीदी के नाम कर दे । मंय ओकर करजा ल नई चुका सकंव । ओकर परसादे मोला नौकरी मिले हे । यदि दीदी नई होतिस त मंय बेरोजगार घुमत रहितेंव । यदि मंय सारी उमर करजा उतारिहंव त नई उतरही । चन्द्रकला कथे, दाई मोर सगा भाई भी अईसना नई सोंचय ।

पुस्पा कथे, बेटी चन्द्रप्रकास ल दूसर काबर मानत हस, तोर दाई के दूध पी के बड़े होय हे । मोर कोख म दस महीना जरूर रहीस, फेर रमौतीन के दूध पी के जीये हे । दाई के दूध के करजा अभी नई छुटाय हे । रमौतीन बहिनी धन्य हे, अईसे माता बहुत कम होथे जऊन अपन लईका ल कम दूध पिलावय अऊ चन्द्रप्रकास ल जादा । चन्द्रप्रकास के नानपन म पेट नई भरय काबर, जादा उमर के बच्चा होय म दूध नई आवत रहीस । मंय दूध जरूर-जरूर पियावंव । मोर दूध नई आवत रहीस । मय रात-रात रोवत रहेंव । मोर बेटा ह कईसे बांचही । गाय के दूध पिलावव, पेट भर नई पीयय । मंय संसों म सूख के कांटा बन गे रहेंव, फेर भगवान के किरपा ले रमौतीन ह तोला जनम दिस । मोर जी ह हलका होगे । मोला उपाय सूझिस, मंय नौकरी म चल देथंव त लईका ल कोन देखही । डरावत-डरावत एक दिन रमौतीन बहिनी के पास गयेंव अऊ परेसानी बतायेंव । तोर बुआ घलो रहय, कहिस भउजी तंय कुछ पईसा महीना म दे देबे । हमन लईका ल पोस देबो । मोर बात बनगे मंय पहिली दिनी ही दू सौ रूपिया रमौतीन ल दे देंव । तोर बुआ टेटकी ह चन्द्रप्रकास ल गोदी म लिस, रमौतीन कहिस टेटकी दे दूध पीला देथंव । जईसे गोदी म लिस, चन्दा हांसे लगिस । मस्त दूध पेट भर भी के खेले लगिस । पहिली बार भर पेट दूध पाय रहीस । मंय मुस्कावत अपन सिक्षकीय काम म चल देंव । साम के आंव त मस्त खेलत मिलिस । रमौतीन कहिस, दीदी मस्त दूध पीयत हे पर मोर टूरी के पेट नई भरत हे । मय कहेंव बहिनी तोर टूरी के जूठा बांचे दूध ल पिया देकर । मोर बेटा बांच जाही । अईसे करके चन्दू अऊ चन्द्रकला बड़े होय हे । पुस्पा के आँखी ले आँसू टपक जथे, चन्द्रकला घलो सुन के रो डारथे ।

चन्द्रकला कथे, दाई कालि रायगढ़ जाबो, पी. ए. ल टिकट आरक्षण कराये बर कहि दे हंव । दूसर दिन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर जाय बर रेल्वे स्टेसन पहुँच जाथे, चन्दा देवी विधायक घलो स्टेसन म मिल जथे । भोपाल से बिलासपुर गप मारत, सोवत पहुँच जाथे, चन्दा बिलासपुर से रायगढ़ अहमदाबाद एक्सप्रेस से पहुँच जाथे । प्रोटोकाल से कार आय रहय, चन्द्रकला देवी, पुस्पा देवी बईठ गे कार म अउ चन्दा देवी ह जीप म सांरगढ़ चल देथे । चन्द्रसेन ह सूटकेस अउ समान ल दूसर जीप म भर के ले आथे । विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एस. डी. एम. मन मैडम से भेंट करके चल देथे । रमौतीन दाई ह बढ़िया नीबू के चाय पीलाथे । रमौतीन कथे, बेटी गोशाला के सब गाय मन बीमार म एक महीना के भीतर मरगे । एक महीना होगे, दूध कईसन होथे नई जानन । तोर ददा ह उदास-उदास बईठे हे । तोर कका घलो के पास कोई काम नईए । एक सांस म रमौतीन अपन दुःख ल सुना डारथे । गोशाला ह जीये के आधार रहीस, ओहू लसेठ जी ह छोड़ा दे हे । चन्द्रकला कथे, दाई मोला सब मालूम होगे हे ओकरे सेती आय हंव । घबराय के जरूरत नईए । कोई उपाय सोंचत हंव, आज रात खाये के बेरा बिचारबो ।

पुस्पा कथे रमौतीन बहिनी काबर हदरत हव, घर म खेती किसानी हे ओला एक जूर मिलके करव । खाय के पुरता धान, गेहू, चना हो जाही । रहे बर दुमंजिला मकान हे । रमौतीन कथे, दीदी ये सब तो चन्द्रप्रकास के हे, हमर पास तो ये खपरा वाला मकान रहे बर हावय । सिर छिपाय के जगा हे । पुस्पा कथे, बहिनी ये सब तो मोरे आय चन्द्रप्रकास घलो तोर बेटा आय । चन्द्रप्रकास के सब धन सम्पत्ति ल चन्द्रकला दीदी के नाम करे ल कहे हे । चन्द्रकला ह कथे, माँ भाई के हिस्सा ल मंय नई खांव । यदि देना हे तो आधा हिस्सा ल चन्द्रसेन के नाम म करवा दे । पुस्पा कथे, ठीक हे बेटी जईसे चाही वईसे हो जाही । रात 9 बजे भोजन के बर परछी म पीढ़ा म लाइन से बईठथे । चन्द्रकला कथे, बाबूजी काबर मुँह ल ओरमाय हस, मंय तो हंव न । चन्द्रसेन ल एक बेटा कहिथस, बेड़े बेटा मंय हंव । बाबूजी मंय भोपाल ले सोंच के आय हंव के तुमन बर दूध डेयरी खोलिहंव । का विचार हे सब झन बतावव । चन्द्रसेन कथे, दीदी बहुत बढ़िया सोचे हस । ओतका म हम जीबो-खाबो । रामदेव, कामदेव अउ रमौतीन मन हाँ में हाँ मुड़ ल हला देथे । चन्द्रकला कथे, घर के पीछवाड़ा म पसुपालन बर एक परछी उतरवा देथंव, जेमा दस भईसी बाँधे जा सकय । चारा, भूँसा, पानी के बेवस्था रहय । फर्स ह पक्का रहय । भईसी के दूध ले बेचहा अऊ गोबर ल खाद बना के खेत म डारिहा, धान घलो जादा होही । सबके सलाह मसविरा हो जाथे, भात खा के सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह पी. ए. ल बुला के भारतीय स्टेट बैंक कृसि साखा, रायगढ़ से डेयरी उद्योग के लिये मैनेजर ल बुलवाथे । मैनेजर ह डेयरी के लिये एक लाख तक लोन देबर तियार हो जाथे । पचास हजार रूपिया सेड बनाये बर अउ पचास हजार रूपिया भंईसी खरीदे बर । चन्द्रकला देवी बैंक के मैनेजर ल फार्म चन्द्रसेन के नाव म भरवा देधे अउ गारेंटर अपन बन जाथे । पचास हजार रूपिया मार्जिन मनी जमा भी कर देथे । दूसर दिन मिस्त्री बुला के घर के पीछवाड़ा म परछी बनवा देथे । बैंक लोन म दस भंईसी मुर्रा नस्ल के हरियाणा से दो ट्रक म मंगवाथे । बैंक मैनेजर ह भैंस मालिक ल एक लाख के ड्राफ्ट दे देधे । भईसी मन के बीमा भी करवा देथे । सब भंईसी के कान म छल्ला पहिना देधे । दस भंईस के एक सौ बीस लीटर दूध होत रहीस । मस्त चारा-दाना, रामदेव अउ कामदेव अउ चन्द्रसेन खिलावय । दूध डेयरी चल निकलिस, एक साल भर म एक लाख रूपिया बैंक लोन ल छूट दीस । अच्छा दूध के धंधा ह चल निकलिस ।

चन्द्रकला देवी ह डेयरी के नाम – ‘सतनाम डेयरी’, प्रोप्राइटर ‘चन्द्रसेन यादव’ रखे रहय । ऐ बछर गेबर खाद डाले ले धान के फसल घलो जादा होईस । घर म धरे के जगा नई रहय । आयीस त लक्ष्मी ल बम्फर के, एकदम चकाचक होगे । रायगढ़ सहर म चन्द्रसेन दूधवाला के नाम से फेमस होगे । सुद्ध दूध, दही, मही, घी भी बनाय लगीन । आस-पास के सहर म घी, दही के माँग बहुत रहय । सतनाम डेयरी नाम के अनुसार काम भी करय । दूसर से दाम भी कम लेवय । पूरा परिवार जईसे गोसाला म काम करय वईसे सब जुर मिल के साफ सफाई, गोपर फेंकाई, दूध दुहाई अउ बेचाई । सतनाम डेयरी से ग्राहक मन संतुष्ट रहय । रामदेव यादव परिवार कई बछर ले गोसाला के दूध बेचत रहीन, सब सेठ, साहूकार, अधिकारी मन जानत रहिन ।

चन्द्रकला देवी ह दउरा म सरिया जाथे । गाँव-गाँव घर-घर लोगन से सम्पर्क करथे । कई विरोधी पार्टी वाला मन कहय, अब चुनाव आवत हे त घर घर घूमत हे अउ पाँच साल कहाँ रहीस । चन्द्रकला कथे, भाई हो तुमन जीतवाय रहय त मंय मंत्री बनगे रहेंव, मंत्री तो पूरा परदेस के होथे । मोर चुनाव क्षेत्र के साथ पूरा मध्यप्रदेस ल देखत रहेंव । मंय तो हर महीना आवत रहेंव, भले ही आप लोगन से नई मिल पायेंव । चन्द्रकला देवी नमस्कार करके आगे बढ़ जावय । महिला मंडल के सदस्य मन कर्मठ कार्यकर्ता रहय । जिंहा जावय महिला मन, उहाँ आरती उतार के सुवागत करय । महिला मंडल के सदस्य मन फेर चुनाव म खड़े होय बर कहीन । एक चुनाव म अ जीतवाबो । सरिया क्षेत्र म चन्द्रकला देवी के पक्ष म माहौल रहय । जतका बिकास चन्द्रकला के कार्यकाल म होईस, आज तक नी होय रहीस । चन्द्रकला देवी एक हफ्ता गाँव-गाँव के भारी दौरा करके सरपंच मन के दस्तखत कराके रख लेथे । चुनाव तियारी के शुरूआत कर देथे ।

गाँव के महिला मंडल के प्रमुख सदस्य मन ल पिछले चुनाव म प्रचार करे बर सायकल देय रहिस । सब कहीन ए साल अच्छा सायकल देबे, चन्द्रकला देवी । चन्द्रकला देवी कहिस, टिकिट मिले के बाद सब झन ला सायकल देहूँ । सब झन गाँव-गाँव, गली-गली परचार करीहव । चन्द्रकला देवी जनसंपर्क करके सारंगढ़, चन्दा देवी विधायक के पास जाथे । मधु, निर्मला, गुंजा सब महिला मंडल के सदस्य मन ल बुलवा लेथे । मधु नगरपालिका के अध्यक्ष बन जाथे । मधु अउ महिला मंडल के सदस्य मन एकमत हो के चन्दा देवी ल विधायक के टिकट फेर ए साल मिलय के प्रस्ताव पारित करीन । पूरा राज्य म महिला उत्थान के काम म सरिया अउ सारंगढ़ माडल बने हे । चन्दा देवी के मार्गदरसन अउ मेहनत के बल पर माडल बने हे । चन्दा देवी ह चाय नास्ता कराथे । सब झन संझौती बेरा म घर चले जाथे ।

चन्द्रकला कथे, मंय रायगढ़ जाथंव बहिनी । कार म बईठ के रात 10 बजे पहुँचथे । गनमेन अउ पी. ए. रेस्ट हाउस म रूक जाथे । चन्द्रकला देवी अपन घर म रूकथे । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ह रस्ता देखत रहीन । चन्द्रकला कथे, माँ मंय जेवन जे के आये हंव । चन्दा बहिनी जेवन बिना आन नई देवय । मोला एक गिलास गरम दूध देवव। हाथ मुंह धो के कुरसी म बईठ जाथे । पुस्पा दाई ह हाल चाल पूछथे, सब ठीक हे बताथे । चन्दा देवी विधायक हे ओकर घर म सब चीज उपजथे । मंय आधा दिन तो ओकर घर खाय हांवव, बढ़िया प्रेम से खिलाथे । गपसप मारत चन्द्रकला सो जाथे ।

रामदेव ह दूसर दिन रेल से सक्ती जाथे, सक्ती म दमउरहरा जाथे । उहा राउत परिवार म टूरी बाढ़े रहय, उमर तीस साल के उपर होगे रहय । सुन्दर गोरी नारी, ऊंच पूर, नाक-नक्शा बने रहय । रामदेव ह कंठी राउत ल कहिथे, तोर नोनी ल पसंद कर लेंव, मोर लड़का ल लेके रविवार के दिन आवत हंव । ओही दिन फलदान, सगाई, मुँह देखाई कराबो । रामदेव के बढ़िया सुवागत करथे । रामदेव दूसर दिन रेल से रायगढ़ आ जथे । रमौतीन अउ चन्द्रसेन ल बताते, कंठी राउत के दस एकड़ जमीन अउ पचास से जादा गाय, बईला हे, एक बदरी जंगल म चरे गय हे । बने-बने घर द्वार हे, पूरा घर ल ओही सम्हारत हे । बने चोर होगे हे । रमौतीन कथे, चन्द्रसेन घलो तो जादा उमर के होगे हे । पुस्पा देवी ह सुन के खुस हो जाथे । चन्द्रकला देवी घलो मीटिंग से आ जथे, बहुत खुस होथे । चला बहुत दिन के बाद म घर म बिहाव होत हे । रामदेव ह चन्द्रकला ल बताते कि बेटी ईतवार के दिन चन्द्रसेन ल लेके जाबो । फलदान के समान खरीद लेबे, एक जीप किराया म ले लेबो । चन्द्रकला कथे, बाबूजी तंय फिकर झन कर सब ठीक हो जाही ।

चन्द्रकला देवी ह पुस्पा देवी दाई ल बाजार ले के जाथे । बाजार से लूगरा, पोलखा दू जोड़ी सोना के अंगूठी, पैर पट्टी, झुमका खरीद लेथे । ईतवार के दिन सब झन कपड़ा पहिर के तियार हो जथे । चन्द्रकला देवी ह होटल से पाँच किलो मोतीचूर के लड्डू मंगवा लेथे । सेवफल पाँच किलो, केला, संतरा घलो डाली म रखवा लेथे । जीप अऊ कार म रायगढ़ से निकल जथे, सड़क खराब होय के कारण से दू घंटा म दमउदहरा पहूँच जथे । ठीक बारह बजे पहुँचथे । कंठी राउत, ह अपन सगा, संबंधी मन ल गाँव वाला मन ल बुला के रखे रहय । लगभग बीस आदमी जूरे रहय । घर के परसार म खटिया बिछा दे रहय, घर के भीतर परछी म खटिया चार पाँच ठन बिछा दे रहय । कंठी राउत अउ ओकर भाई महिंगल, सुधेराम, बुधेराम, गाँव वाला मन एक-दूसर के पायलगी करके जोहार करीन । महिला मन के घर के अंदर दौनामांजर ल लेके बैठाईस । बने घर समरे पकड़े रहय । दौनामांजर ह सबके टपाटप पाँव परिस । चन्द्रकला ह पहिचान लेथे, तंहि ह हमर बहू बनत हस । दौनामांजर लजावत हाँ म सिर हला देथे । महिला मन ललोटा म पानी देथे । गोड़ हाथ धोये बर कुआँ बारी कोती ले जाते, कुआँ से पानी निकाल के पैर धोवाथे । दो तीन एकड़ म बारी अउ खलिहान, कोठार रहय । बरे किसान, पसु पालक रहय । घर घलो चारों ओर घेराय रहय, अंगना के बीच म तुलसी चौरा रहय । अंगना म पथरी फरसी लगे रहय । कंठी राउत, आस-पास के सम्मानित किसान रहय । चन्द्रकला, पुस्पा देवी देख के खुस हो जथे । अंगना के परछी म बईठारते । दौनामांजर के दाई मंगली कथे दूकलहीन, समारीन, देवकी चार-पाँच महिला मन गाँव के आ जथे । पायलगी करके खटिया अउ पीढ़ा म बईठ जथे ।

कंठी राउत के घर के दूवारी म लाल बत्ती के कार देख के लईका मन के भीड़ लग जथे । गाँ म सोर उड़ जथे, कंठी राउत के घर मंत्री आय हे । गनमेन अउ पी. ए. गाड़ी म बईठे रहय । ड्राईवर ह लइका मन ल भगावत जाय, सब झन ह कार ल छू-छू देखय । धीरे धीरे स्कूल के गुरूजी, पटवारी, ग्राम सेवक, नर्स सबआ जाथे । कंठी राउत सब ल परछी म बईठाथे । सब झन ल चौंगी, बीड़ी देईस । सब झन जाग गे कि लड़खी देखे आये हे, आज फलदान हे । कंठी राउत ह बताईस कि रायगढ़ से आय हे, लड़का के बहिनी मंत्री हे । दौनामांजर के भाई सुखराम अउ कका महिंगल ह चाय-पानी लेके आईस । सब झन ल पिलाईस, कंठी राउत भोजन के पहिली से तियारी कर डारे रहय ।

रामदेव चन्द्रकला ल कईथे, बेटा चाय पानी तो पी डारेन, फलदान के नेंग करके जेवन जेबो । कारज हो जाय तो खाबो । कंठी राउत ल कईथे, बाबूजी ह कहत हे फलदान हो जावय, ओकर बाद खाना खाबो । कंठी राउत कईथे, बेटी पंड़ित महराज ल नई बुलाय हन, दूसर गाँव म रईथे । चन्द्रकला कईथे, बाबूजी हमन लाय हन न । पुस्पा पांड़े हावय, कारज पूरा कर देही । तुमन जईसे चाहत हंव । कंठी राउत ह अंगना म परछी म चादर बिछा देथे । एक डहार लड़की वाले, एक डहार लड़का वाले मन बईठ गे । पुस्पा पांड़े ह महाराज बनके कारज करीस । बीच म चौंक पुर के कलस मढ़ाईस, भगवान के फोटो रखीस, अगरबत्ती धूम के हूम दीस । वर-वधू ल बईठाइस । चन्द्रकला देवी ह कार से लट्टू, केला, सेव, जेवर-गहना ल मंगाईस । पुस्पा पांड़े ह दूनों झन ल अगरबत्ती जला के पूजा कराईस । एक-दूसरे के अंगरी म सोना के मुंदरी पहिनाईस, सब कोई ताली बजा के बधाई देईन । लड़की के गोदी भराई के रस्म घलो पूरा करीन । वर पक्ष के मन रामदेव ह सबसे पहिली दो सौ रूपिया वधू ल देईस अऊ आसीस देईस । दौनामांजर ह पाँव परिस । चन्दा देवी, कामदेव अउ पुस्पा देवी ह पईसा धराईन । वधू पक्ष के मन चन्द्रसेन ल रूपिया देईन । बर-वधू ल कहिन, सबके पाँव छू के आसीरबाद ले लेवव ।

पुस्पा देवी ह लड्डू, केला, सेव ल सब झन ल बंटवा देथे, बांचे लड्डू, केला, सेव ल घर म भेजवा देथे । समधी भेंट रामदेव, कामदेव, कंठी, महिंगल गले मिल के करथे । समधी भेंट के बाद सब जुटे सगा संबंधी मन ल जेवन जेय ल कहिथे । परछी म चादर बिछा के लाइन से बईठा देथे । महिंगल, सुधेराम, बुधेराम अउ ओकर लड़का मन भोजन परोसथे । इक्कीस प्रकार के पकवान, रोटी पोरसिन । छत्तीसगढ़ी भोजन खा के तृप्त हो जथे । गाय के शुद्द घी म पकाय रहय, फेर उपर के राहेर दार म चम्मच भर के घी डालय । कंठी राउत के जय जायकार होगे । सब झन भोजन करके बईठक म आ जथे । चन्द्रकला देवी ह सादी के मुहुरत कब करबे कहिस । पंचांग देख के पुस्पा पांड़े ह कहिस, बसंत पंचमी के दिन सादी के मुहूरत हे । कंठी राउत कहिस, ठीक हे । चन्द्रकला देवी कहिस, बाबूजी गायत्री परिवार के रीति रिवाज से नेंग होही, यदि तुमन चाहत होहू त गायत्री मंदिर म बिहाव कर डारबो जादा खर्चा नई होही । कंठी राउत कहिथे, तेल हरदी तो चढ़ाय ल पड़ही । चन्द्रकला कथे, अपन-अपन घर म वर-वधू के तेल-हरदी चढ़ाबो बस सात फेरा गायत्री मंदिर म होही । बिहाव तय हो जाथे ।

चन्द्रकला कथे, अब छुट्टी देवा जाय बर । दौनामांजर कथे दीदी दमउदहरा ऋषभदेव तीर्थ थोरकन दूरिहा म हे, चला देखा देथंव । कार, जीप म बईठ के दमउदहरा देखते, बहुत मनोहारी दृस्य रहय । पहार से जल प्रपात बन के पानी गिरत रहय । दहरा के रूप म पानी बारो महीना भरे रथे । साफ पानी, सीतल जल रहय । सामने के पथरा, पत्थर के चट्टान म पाली भासा म लिखे हावय । पं. लोचन प्रसाद पांड़े जी ह प्राचीन महाभारत, रामायण काल के बताय हे । बहुत प्राचीन सिलालेख हे । जैन धर्म के ऋसभदेव महाराज यहाँ तप किये थे । मैकाल पर्वत श्रंखला बहुत प्राचीन है जो कि अमरकंटक से रायगढ़ा, उड़ीसा, बिहार चले गय हे । बहुत मनोहारी स्थान हे, पर्यटन के लिए देस विदेस के पर्यटक आथे । दौनामांजर कथे, दीदी मंय रोजिना झरना म स्नान करे आथंव, बहुत मजा आथे । हमर कई बरदी गाय, गौरा ले चराय बर पहाड़ के अन्दर ले जाय गे हे, गरमी म नीचे लाहय । चन्द्रकला देवी कथे, तोर बिहाव अब होवत हे अच्छा लउहा-लउहा आबो । अब हमन ल रायगढ़ जाना हे, छोड़व । कंठी राउत ह सब झन ल धोती, लूगरा भेंट करथे । साम के पाँच बज गे रहय, दमउदहरा से सक्ती रात आठ बजे पहुँचथे । रात म जेवन जेके सो जथे । रमौतीन ल रामदेव कथे, बिहाव के तियारी कर, बसंत पंचमी म भांवर परही । रमौतीन कथे, कतका दिन बांच हे । रामदेव कथे, एक हफ्ता बांचे हावय । रमौतीन कथे, डोकरा अतका लउहा कईसे करबो तियारी । बिहाव पत्रिका छपवाय ल लगही । रामदेव कथे चन्द्रकला ह सब कर डारही, तंय संसो फिकर झन कर । तोर मईके मंय चल जाथों, पूरनिमा ल टेलीपोन से बुला लेबो । चन्द्रप्रकास ल टेलीफोन से सूचित करबो, सब आ जाही संसो झन कर । सब बढ़िया अच्छा ढंगसे हो जाही । रमौतीन कथे, बेटा के बिहाव करिहंव त संसो तो करना चाही । रामदेव कथे, बेटा के बिहाव बुढ़ापा म होत हे, मड़वा म बने नाचबे डोकरी । रमौतीन कथे, बेटा के बिहाव होथे काबर नई नाचिहंव, पागी छोर के नाचिहंव । मोर आखिरी बेटा के बिहाव होते हे । मोर दू टूरी मन के बिहाव म नाचे नई पायेंव । जरूर चन्द्रप्रकास के बिहाव म नाचे रहेंव । रामदेव कथे डोकरी सब ठीक हो जाही । रात म गप मारत सो जथे ।

चन्द्रकला देवी ह प्रिंटिंग प्रेस वाला ल घर म बुला के पत्रिका छापे बर आदेश दे देथे, दूसर दिन छापके देथे । चन्द्रकला के पी. ए. अउ स्टॉफ कर्मचारी मन नाम व पता लिख के डाक म डाल देथे । रायगढ़ के पत्रिका ल चपरासी अऊ चन्द्रसेन खुद जाके बाँट देते । चन्द्रसेन के कपड़ा घलो सिल के तियार आ जथे । बसंत पंचमी से तीन दिन पहले मड़वा गड़ जाथे । पूरनिमा ह जबलपुर से रायगढ़ चार दिन पहिली आ जथे । सुनील घलो साथ आ जथे । चार बच्चा के आय से घर किलकारी से गूंजे लगथे । चन्द्रप्रकास रायगढ़ आ जथे । डॉं प्रेमलता अउ चार लईका संग म लाय रहय । डॉ. प्रेमलता के माँ पिताजी घलो आय रहय । रमौतीन के मायके के भाई भौजी आगे । पुस्पा देवी ह सब लईका संग मस्त खेले लगिस । चन्द्रकला ह बिहाव के पूरा समान खरीद लिस । भोजन पकाय बर रसोईया चमन हलवाई ल लगा देधे । घर के अँगना म मड़वा गड़ गे, टेंट लग गे । घर के सामने बड़े टेंट म एक सौ कुरसी घलो लग गे रहय । एकदम झकास घर दिखत रहय । दूनो घर म झालर झिलमिलात, चमकत रहय । लाउडस्पीकर म बिहाव गीत बजत रहय । घर अंगना म आदमी, औरत, लईका भर गे रहय । बढ़िया खुसी के माहौल रहयष आसपास के पढ़ोसी मन आवत रहय ।

पुस्पा कथे, चूलमाटी के समय होत हे । चन्द्रकला ह रमौतीन दाई बर पोतिया लूगरा (कोसा), पुस्पा पांड़े बर पोतिया लूगरा, लूगरा कांध के डार के पाँव परिस । पूरनिमा, प्रेमलता अउ चन्दा देवी ल बनारसी लूगरा देईस । जतका पहुना आय रहय, सब ल लूगरा धोती देईस । पूरनिमा ह पर्रा म दीया जला के नवा लूगरा पहिर के निकलिस । प्रेमलता, चन्दा देवी, रमौतीन, पुस्पा देवी घलो नवा लूगरा पहनीस । जतका महिला पहुना रहीन सब लूगरा पहरिन । सुनील ह कुदारी, सब्बल माटी कोड़े बर चपराली ल पकड़वाईस । मुंडहर घर से पर्रा बोह के पूरनिमा निकलिस, पाछू-पाछू रमौतीन सब महिला मन संग बिहाव गीत गावत मड़ला ले निकलीन । चन्द्रकला देवी देवी ह चन्दा देवी के संग चलत रहीस । तरिया के पार म पहुँचीन । पीपर रूख तरी माटी के पूजा अगरबत्ती, धूप जाल के पूरनिमा ह करथे । प्रेमलता, चन्दा सब झन धरती माँ के पूजा करथे । सुवासा बने सुनील ह गैंती, सब्बल रखथे ओकरो पूजा, आरती उतारथे । गैंती ल पाँच हाथ पकड़ के माटी कोड़ के नेंग करथे ।

बिहाव गीत –
तोला माटी कोड़े ल नई आवय सुवासा धीरे-धीरे
अपन तोलगी ल छोर धीरे-धीरे

पाँच कुदारी मारके माटी खोदते । माटी ल रमौतीन दाई ह अपन अंतरा म झोंकथे । पुस्पा, प्रेमलता ह माटी अंचरा म झोंकथे । माटी पूजा के बाद गीत गावत, मंगल गीत गावत घर आ जथे ।
सुवासिन पूरनिमा ह बढ़ई घर से मंगरोहन लाथे । पहिली से बाजार ले कूड़ा, करसा खरीद के रामदेव ले आथे । रात आठ बजे चन्द्रसेन के तेल-हरदी चढ़ाते । तेल, हरदी, दाई, भउजी, काकी, मामी बहिनी सब तेल चढ़ाथे । बिहाव गीत से अंगना गमकत रहय । सब लईका मन खेलत-कूदत रहय । तेल चढ़ाय के बाद चन्द्रसेन ल मड़वा ले पूरनिमा अउ सुनील ह घर म ले जाथे । घर म बहुत दिन के बाद मड़वा गड़े रहय । घर म खुसी छागे रहय ।

बिहाव गीत –
एक गाँठ हरदी पीसे चक चंदन हो पीसे चक चंदन,
होत मोर दुलरू के बिहाव ।
एक तेल चढ़गे, लाला अहिबरन के हो,
लाला अहिबरन के ।

चन्द्रसेन के कपड़ा धोती, बनियान भींग गे रहय । हरदी, तेल से कांपत रहय । टावेल से पानी ल पोछिस अउ उपर से साल ओढ़िस । चन्द्रसेन घलो चरेर होगे रहय । रात म भोजन करके सोगे । जेला जहाँ दूनों घर म जगा मिलिस, सूतगे रहय । चन्द्रकला देवी, चन्दा अऊ प्रेमलता, पूरनिमा अलग कमरा म लईका मन ल लेके सूतगे । चन्द्रप्रकास, सुनील, समारू सब झन अलग कमरा म सूतगे । बांच गे रहय रमौतीन, पुस्पा रंघनी घर के परछी म सोगे । रामदेव अउ कामदेव, प्रेमलता के पिताजी एम. आर. भारद्वाज परछी म सूतगे । रात के बारा बज गे रहय, रसोईया मन घर चले गीन ।

बिहाव के दूसर दिन भर कई तेल हरदी चढ़ाईन । दोपहर म महिला मन हरदाही खेलिन । एक दूसरे ल हरदी, तेल लगाईन । पूरनिमा ह सुनील ल कस के हरदी लगाईस, सुनील घलो कम नई रहय ओहू ह कस के हरदी तेल लगाईस । चन्द्रकला देवी ल चन्दा देवी ल प्रेंमलता अऊ पूरनिमा हरदी लगा के तेल मालिस करीन । घर भर म लोग, लईका मन हरदी म पहिचान नई आवत रहय । सिरफ आँखी ह जुगुर जागर बरत दिखय । रामदेव, कामदेव ल रमौतीन लगाईस । एम. आर. भारद्वाज ल पुस्पा देवी ह समधी कहिके लगाईस, मड़वा म समधीन ल छुये के छुट रहिथे । पहिली बार तो समधी ल छुवत हंव, मंय तो बुढ़िया हंव समधी जी लगाय देवव हरदी । प्रेमलता के माँ आ जथे, कथे बने लगावव ह समधी । बुढ़वा ह जवान हो जाय । पुस्पा देवी ह परणाम करके चल देथे । प्रेमलता के माँ ह घलो हरदी-तेल पीठ म लगा देथे । सब झन मिल के तरिया म नहाय ल चल देथे ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी, प्रेमलता ह घर म स्नान कर लेथे, बाकी सब झन नहाय बर तरिया, नदिया चल देथे . सब झन अंगना म बईठ के जेवन खाथे । ठाढ़ बेरा म सरिया ले जमुना, महिला मंडल के सदस्य मन सारंगढ़ से मधु जीप म दस महिला के आ जाथे । चन्द्रकला देवी ल बधाई देथे, भाई के सादी बर । मधु महिला संगीत के बेवस्था म लग जाथे । सब पुरूष मन घर से बाहर चल देथे । फेर सुरू हो जाते महिला गीत संगीत । सिनेमा के धुन म बिधुन होके सब महिला मन मड़वा म नाचत रहय । पुस्पा देवी अउ रमौतीन घलो पर्रा धरके झूम के नाचिन । मधु कहिस, चन्दा अउ चन्द्रकला दूनो दीदी चलव नाचव । भाई के बिहाव करत हव, फिल्मी गीत म नचवाथे . घर म संगीतमय वातावरण म महिला मन आनंद लेथे । हास परिहास, नाटक, साहेब, दरोगा, कलेक्टर बन के मनोरंजन करीन । चन्द्रकला देवी ल कहीन दीदी तोर बिहाव नई होय हे, तेल हरदी नई चढ़े ऐ । आज तोला हरदी तेल चढ़ा देंथन । मधु, जमुना देवी, महिला मंडल के दस सदस्य अउ चन्दा देवी ह अंदर-बाहर कपड़ा के तेल हरदी लगा के किचकिचवा के नहवा देथे । सब महिला मन तेल-हरदी चढ़ा के नचवाईन, मस्त ठुमका लगा के नाचिस ।

मधु ह कथे, दीदी घर जाथन, मजा आगे आज । बहुत दिन म खेले कूदे म, नाचे गाय म । चन्द्रकला कथे, भोजन करके जावा न । रसोईया ल कथे, भईया सब झन ल भोजन करावव । दार-भात, सब्जी-पूरी खवाथे । खाना खा के सब महिला मन सरिया, सारंगढ़ चल देथे । चन्द्रकला कथे, परसो रिसेप्सेन रखे हन, सब झन ल लेके आबे । चन्द्रकला देवी से आफिस के कर्मचारी, अधिकारी मन बधाई देय आत रहय । पार्टी के नेता, कार्यकर्तागण मन बईठे, आवत जात रहय । कामदेव सब ला चाय नास्ता, फल मीठा खवावय, चाय पिलावय । मस्त धमा चौंकड़ी, लईका मन करत रहय । घर, अंगना, दूवार भरे रहय, घर म आनंद ही आनंद रहय ।

तीसर दिन दो बर अउ जीप, कार पाँच-छ ठन म लगभग दो सौ बराती ले के दमउदहरा पहुँच जाथे । बैण्ड बाजा स्पेसल ले जाय रहय । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा देवी, चन्दा देवी अउ कई बड़े अधिकारी, नेता मन ल कुरसी म बईठाय रहयष बाकी बराती मन ल दरी म बईठाईस । मस्त चाय पान, नास्ता कंठी राउत ह कराईस । बारात ल बाद म परघाईस । बिहाव के नेंग गायत्री मंदिर म गायत्री परिवार के अनुसार कराईस । सात फेरा म सात वचन लिन । पति पत्नी के अटूट बंधन म चन्द्रसेन अउ दौनामांजर बंध गे । चन्द्रकला देवी ल सब अधिकारी मन बधाई दीन । नेता, अधिकारी, कर्मचारी सब झन बधाई दे के अपन-अपन घर चल देथे । दिन म बिहाव पूरा हो जथे । दोपहर म भोजन कंठी राउत बढ़िया छप्पन भोग बनवा के रखे रहय । सब बरतिया मन ल अंगना अउ कोठार म बईठाय के शुद्ध घी के पकवान खवाईस । बरतिया मन छप्पन भोग खा के तृप्त हो जथे । घरतिया, बरतिया सब एक संग बईठ के दोना-पत्तल, पतरी म खाईन ।

दाईज म टीके रहय, झांपी, टुकनी, पाँच हजार रूपिया, पचहर दाईज, पाँच गाय लागत, पाँच बोरा धान, एक एकड़ जमीन देय रहय । चन्द्रकला कथे, बाबूजी हमन ल दाईज म कुछ नई चाही, ए मन ल हमन का करबो । रामदेव कथे, बेटी जो ले जा सकत हन ओला ले जाबो, बाकी धान, गाय ल रहेन देथन । जमीन ल चन्द्रसेन के नांव म चढ़ा देहा । दौनामांजर ल बिदा कराय के समय बहुत रोथे । दौनामांजर, माँ, भाभी, सहेली सबो के कले मिलके बहुत रोथ । लड़की मन आज से पहुना बन जाथे । बिदाई के नेंग करके चल देथे । बस, कार, जीप म बईठ के बराती मन दमउदहरा से रायगढ़ रात म आठ बजे पहुंचथे । सब अपन-अपन घर चल देथे । घर के पहुना मन बांचे रईथे, रात के भोजन करके सो जाथे ।

रामदेव रमौतीन ल कथे, कस डोकरी घर सुन्ना रईसे । मड़वा म बने डींड़वा नाचे के नहीं । रमौतीन कथे, काबर मंय डींडवा नई नाचिहंव, मोर बेटा के बिहाव होत हे । मोला अड़बड़ मजा डींडवा नाचे म आईस । अड़ोस-पड़ोस के महिला मन आ गे रहिन । बड़ नाचेन, सब महिला मन बने नाचिन, मजा आ गे । रामदेव कथे, ठीक हे टूरा के बिहाव म आनंद-मंगल मन म उछाह तो होना चाहिए । अब अंगना म कब मड़वा परही पता नहीं । रात म गपशप करत डोकरा डोकरी सो जाथे ।

दूसर दिन रिसेप्शन रखे रहय, चन्द्रकला देवी ह सरिया क्षेत्र के महिला मन ल निमंत्रण दे रहय । चुनाव होने वाला रहिस । सारंगढ़ अउ सरिया क्षेत्र के महिल मंडल के सदस्य मन बरदी के बरदी दल के दल आय रहय । चन्द्रकला देवी ह बढ़िया भोजन के बेवस्था करे रहय, बहुत पंडाल लगे रहय बिजली के रोसनी म जगर-मगर बरत रहय । पंडाल अउ सड़क म कई हजार के भीड़ जुटे रहय । गाँव वाला मन पंगत म बईठाय के, दरी म बईठाय के दोना पत्तल म भोजन खवाईस । दो से तीन हजार आदमी औरत मन खाना खाईन । चन्द्रकला देवी ल भाई के बिहाव के बधाई देत रहीन । वर-वधू ल गिफ्ट अउ लिफाफा घलो पकड़ावत जावय । रात के बारह बजे तक भोजन के बेवस्ता चलत रहीस । सहर के मेहमान मन ल एक पंडाल म बफे पद्धति से भोजन करवाईस । चन्द्रकला देवी के वाहवाही हो गे । रायगढ़ सहर म धूम-धाम से बिहाव होईस । अतका भीड़ कभू नही होय रहीस । पुस्पादेवी, रमौतीन, प्रेमलता, पूरनिमा, सुनील, चन्द्रप्रकास अऊ घर के पहुना मन सबसे आखरी म भोजन करीन । लईका मन बढ़िया सिनेमा के गाना म नाचत-झूमत रहीन, टूरा-टूरी मन डिस्को डांस नाचत रहीन । बड़े मन हांस-हांस के लोटपोट होगे रहीन । रात के एक बज गे, भोजन करके वर-वधू ल घर म ले जाथे ।

रमौतीन अऊ पुस्पा कथे, आज बने दिन हे सुहागरात बर, घर दे दव । पूरनिमा ह एक कमरा ल बढ़िया सजा देय रहय . चन्द्रसेन अऊ दौनामांजर के जीवन के सुरूवात सुहागरात से हो जथे, दो सरी अउ एक प्राण हो जथे । संग-संग जीये, मरे के कसम खाथे, दौनामांजर बहुत खुस हो जाथे । चरेर उमर के बिहाव होय रहय, गाँव के दुनियादारी ल सीख गेरहय . रात म गपसप करत सोगे । रात म देरी से सोय म बिहनिया 9 बजे जागीस । पूरनिमा ह चाय लेके गईस । पूरनिमा ह गुडमार्निंग कहिस, चाय बिस्कुट ल स्टूल म रख के आगे । दौनामांजर अऊ चन्द्रसेन फ्रेस हो के चाय पीईन । चन्द्रसेन कमरा म बाहर, सुनील, चन्द्रप्रकास अउ पहुना मन संग आके बईठ जथे । सुनील ह बधाई देथे । चन्द्रसेन कथे, सब ठीक-ठाक हे । अच्छा हे, चरेर उमर के बिहाव कतका जोर मारही, सुनील हांसत-हांसत लोटपोट हो जथे ।

चन्द्रसेन सब पहुना मन चाय-पानी पिलाय लगथे । मड़वा ह भरे रहय . लईका मन घलो सोय रहय . अड़बड़ नाचे-कूदे रहय । दस गियारा बजे तक सोवत रहीन । रमौतीन दाई ह दोपहर के भोजन के तियारी म लग जाथे । पूरनिमा ह दौनामांजर ल कथे, भउजी नहा धो के, पूजा-पाठ करके रंधनी म चल भात रांधे ल परही । दौनामांजर लउहा तियार हो जाथे । रमौतीन ह घर के देवता-धामी ल अगरबत्ती, धूप, होम देवाथे । तुलसी चौरा म दीया, अगरबत्ती से पूजा कराथे । फेर रंधनी घर ले जाथे समझाथे, बेटी मोर सास ह जो मोला बताय रहीस तोला बतात हंव, घर के चाबी ले । आज ले तंय घर के मालकिन अस । जो पका के देबे ओला मंय खा लेहूँ । पुस्पा देवी घलो समझाथे । दौनामांजर दूनों झन के पाँव म गिर जथे । पाँव परत हो दाई हाँ, मोला आसीस देवव । दूनों झन, दूधो-नहाओ, पूतो फलो के आसीस देथे । दौनामांजर ल उटा के छाती म लगा लेथे । रमौतीन कथे, बेटी हमन कतका दिन के पहुना आन, कतका दिन जीयत हन । तोर बेटा के मुँह देख के मरबो, तभे हमन ल मुक्ति मिलही । दौनामांजर ल रंधनी घर म सब समझा देथे ।

पूरनिमा ह भउजी के संग खाना बनाय लगथे । भउजी के कान म पूछथे, भउजी भईया ह बने मया करीस । भउजी हां म सिर हला देथे । पूरनिमा कथे दीदी जाग गे, रंघनी घर म आवत हे । चन्द्रकला देवी रंधनी घर म पीढ़ा म बईठ जथे । दौनामांजर पाँव छूथे, आसीस देथे । बछर भर म गोदी म बाबू खेलय । दौनामांजर ल छाती म लगा लेथे । खुसी के आँसू छलक जथे । चन्द्रकला देवी पीढ़ा म बईठ के चाय पीथे । साग ल पूरनिमा के संग साफ करे लगते, मटर ल छीले लगथे । बढ़िया ताजा मटर मीठ-मीठ लगत रहय । पूरनिमा घलो खात जावय । थोरिक देर रंधनी म बईठ के चन्द्रकला अपन कमरा कोती आ जाथे । सब पहुना मन संग अंगना म बईठ के काम बूता भोजन के बेवस्ता म लग जाथे ।

चन्दा देवी ह कथे दीदी अब बिहाव ह निपट गे, मंय ह घर जाहंव कहत रेहेंव . चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी नवा बहुरिया के हाथ के जेवन जेय के जाव । बेचारी ह कतका मेहनत करके भोजन बनावत हे । खीर, तसमई, पुड़ी, दार-भात, साग कतेक जिनिस के व्यंजन बनावत हे । चन्दा देवी कथे, दीदी बने हुसियार पतोथिया हस । मोर जहुरिया होही दौनामांजर ह । चन्द्रकला कथे, तंही ह उमर ल पूछ के बता । रंधनी घर म जा के दौनामांजर ल पूछथे, बहनी तोर जनम तिथि का हे । बताथे दीदी मोर उमर ह उन्तालीस, चालीस चलत हे । चन्दा कथे तब हो बहिनी पाँच बछर छोटे अस । चन्द्रकला कथे बहिनी एक बछर म दू लईका बिया डारही । जुड़वा होही त चार लईका मिल जाही । दौनामांजर सरमा जथे, दीदी काबर चार-चार लईका होवात हव ।अभी मंय खेले खाहंव, मौज मस्ती करे के बाद लईका बियाहंव । चन्द्रकला कथे, बहु तोर सास ह तोर लईका के मुँह देख के मरहूँ कहत हे, नई तो मोर आत्मा ह भटकही कहत हेत कईसे करबे । दौनामांजर कथे, भगवान जईसे हमन राजी हन ।

चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी रंधनी घर म पीढ़ा म बईठ के खीर-पुड़ी, बरा-भजिया, दार भात, साग खाते । बढ़िया सुवादिष्ट खाना पकाय रहय, दूनों झन मस्त भरपेट भोजन खाके आसीस, देईन . घर भर के पहुना मन ला भोजन कराथे । पूरनिमा, प्रेमलता, दौनामांजर बईठ के संग म खाथे । पूरा परिवार भोजन करके संतुष्ट हो के बधाई देथे । दौनामांजर मन लगा के जेवन बनाय रहय । लईका मन के किलकारी के घर-अंगना गूंजत रहय । भोजन करे के बाद म चन्दा देवी ह सारंगढ़ चल देथे । चन्द्रकला देवी पुहना, प्रेमलता, पूरनिमा के संग बईठ के गपबाजी ठट्ठा करेय लग जथे । दूसर दिन चन्द्रप्रकास, सुनील रायपुर अउ जबलपुर रेल से परिवार सहित चले जाथे । घर ह सुन्ना होगे रहय । घर के सामने पंडाल ह उजड़ गे रहय, बचे खुचे समान ल टेंट वाला मन ले जात रहय ।

चन्द्रकला देवी ह सबके हिसाब चुकता करीस । बिहाव म लगभग एक लाख के ऊपर खरचा होय रहय । चन्द्रसेन अपन डेयरी चलाय लगथे, डेयरी के धंधा से बने फायदा होत रहय । बैंक के करजा हर महीना किस्त म जमा करत जावय, दूध के धन्धा चल निकलथे । बढ़िया फायदा होवत रहय । खेती-किसानी से खाय बर आनाज धान, गेहूँ, चना तिंवरा हो जावय । घर म धन्य-धान्य के भंडार भर गे ।

चन्द्रकला देवी ह बिहाव के बाद सरिया विधानसबा क्षेत्र के भ्रमण म जाथे । सरिया के सारंगढ़ चन्दा देवी से मिले जाथे । सरकारी कार से जाय रथे, चन्दा देवी कथे दीदी चल तुरतुरिया वाल्मीकि आसरम देख दे । सब महिला मंडल ल ले के पिकनिक मनाबो । चुनाव घोसना होवईया हे, चुनाव के महासंगराम म कूद पड़बो । चन्दा देवी के बात मान के दूसर दिन सुबह से तीन जीप, कार म ले के सारंगढ़ से तुरतुरिया के लिये निकल पड़थे । सारंगढ़ से मिधौरी, भटगाँव, कसडोल से तुरतुरिया, बारनवापारा के जंगल म पहुँचथे । नदी के किनारे भोजन पकाय के जुगाड़ कर लेथे । सब समान उतार के रख देथे, सब कोई नदी नहाक के काली देवी के पहाड़ के मंदिर के दरसन करथे । वाल्मीकि आसरम म पूजा करथे, प्राकृतिक झरना से पानी तूरूर-तूरूर बहत रईथे बारों महीना ओकरे सेती नांव ह तुरतुरिया पड़गे ।

वाल्मीकि आसरम बहुत अच्छा, मनोरम स्थान घनघोर जंगल म हावय । पहिली जमाना म कईसे लोगन मन पहुँचत रहीन, बड़ चरज के बात ऐ । सीत ह लव-कुस ल ईंहें जनम दे रहीस । लव कुस के शिक्छा बाल्मीकि आसरम म होय रहीस । आसरम दरसनीय स्थान हे । तुरतुरिया के पास म बारनवापारा राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारन्य हे । सब महिला मन मिल-जुल के-भोजन पकाते । खेल-तमासा, नाच गाना घलो करथे, पिकनिक म मजा आ जथे । बढ़िया भोजन पत्तल म बईठ के खाथे । प्रकृति के गोद म, नदी के रेत म, अर्जुन पेड़ के जुड़ छांव म बईठ के मजा लेत रहिन । देस दुनिया के दूर, जंगल म मंगल मनावत रहीन । पिकनिक मनाय बर कालेज के छात्र मन रायपुर से आ जथे, महिला मन से धींगा-मस्ती करे लगथे । चन्द्रकला देवी कथे दीदी, बहिनी हो लउहा खाके घर चलव, सझौंती बेरा होत हे । फेर सांरगढ़ पहुत दुरिहा हे । चन्दा देवी सब महिला मन ल सकेल के कार जीप म बईठार के तुरतुरिया से अभ्यारन्य म सेर, भालू, हिरण, बनभईसा देखे चल देथे । अभ्यारन्य से एक घंटा बाद निकल के सारंगढ़ बर रवाना हो जथे ।

तुरतुरिया पिकनिक से महिला मन प्रसन्नचित रहय बहुत मौज मस्ती करीन । सब महिला मन चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी विधायक, मंत्री ल धन्यवाद देईन । रात नौ बजे सारंगढ़ पहुँचीन, सब अपन-अपन घर चल देथे । चन्द्रकला देवी ह चन्दा देवी के घर रात रूक जाथे । चन्दा देवी ह गरम-गरम दू गिलास दूध केसर डाल के लाथे । बढ़िया सुंगधित दूध मीठा, दू गिलास चन्द्रकला देवी ह पी जाथे । बहिनी कुछु मंय खांव पींयव नहीं । ड्राइवर, गनमेन रेस्ट हाउस म सोये बर चल देहे, तहूँ थक गे होबे चल बिस्तर लगा सोबो ।
चन्दा देवी ह कोलाबारी कोती हाथ-पाँव धो के जैत खाम म दीया रख के परनाम करथे, हे सतपुरूष साहेब, गरू घासीदास बाबा सहायता कर, छीमा कर बाबा जी । ऐ बछर अउ टिकट दिलवा दे । चन्द्रकला देवी ह आरम करत रहीस । समारू अउ लईका मन भोपाल म रहीन । समारू के बहिनी रमसीला ह कथे भउजी तेल लगा देथंव । चन्दा कथे, हाँ तेल ले के आजा । दीदी के पीठ, कनिहा के मालिस बढ़िया दबा-दबा के करथे । चन्द्रकला देवी ह हल्का, आराम लगथे । चन्दादेवी ह मालिस करवाथे, गपसप मारत कब नींद पड़ जथे, पता नई चलय । बड़ भिनसार कुकरा बासत नींद चन्दा देवी के खुलथे । पानी, पेसाब जाके फेर सो जाथे । रात म थोरक ठंड, जाड़ बढ़गे रिहिस । कम्बल, रजाई ओढ़ के सोगे । सुबे आठ बजे सूरज देवता ह चढ़गे रहय, अंगना म घाम बगर गे रहय । आंखी रमजत-रमजत उठिस, चन्द्रकला अउ चन्दा देवी ह । रमसीला कते भउजी हो आज बने नींद पड़े रहीस, अईसे लगते चन्दा कते, हां तय तेल मालिस हाथ, पाँव रगर के करे रहे, बहुत अच्छा लगीस । चन्द्रकला देवी ह ब्रश करके फ्रेश हो के आ जथे । रमसीला ह तुलसी पत्ता, अदरक डाल के दूध के चाय बना के गिलास भर के लाथे । तीनों झन पीढ़ा म बईठ के गुनगुना धूम चाय पीथे ।

चाय पीयत पीयत चंदा देवी कथे, दीदी चुनाव म टिकट मिलही के नहीं । सारंगढ़ अउ सरिया विधानसभा सीट के पुरूष कई दावेदार मन सक्रिय होगे हे । दिल्ली, भोपाल के चक्कर लगा के हजारों रूपिया खरचा कर डाले हे । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी जब पारटी ह टिकट देही त चुनाव लड़बो, नई तो नई लड़न, का हमन अपन औकात म नई जीत सकन । भले बहुत काम कराय हन पर काम कतको करवाव पर वोट डाले के समय रूपिया,पईसा ल देखथे । जब तक गाँव-गाँव म दारू, मुरगा, बकरा नई देबे, तब तक वोट नई देवय । आजकल गाँव के लोगन मन बहुत चालाक, हुसियार होगे हे । विरोधी पारटी से मिल के पईसा घलो ले लेथे । चतुर चालाक नेता मन गली मोहल्ला के नेता मन पईसा ले के अपन पाकिट म धर लेथे, वोटर मन ल कुछ छोट मोट दे देथे । बाकी बचे रूपिया जेब म । यदि ई मन ल नई पूछबे त हरवा देथे, चुनाव के समय करुता, धोती सफेद पहिर के झकास निकल पड़थे । चुनाव के समय पूछ-परख बढ़ जथे । चन्दा देवी कथे, दीदी यदि टिकिट मिलही त लड़हूँ नई तो निर्दलीय नई लड़व । आजकल गाँव गाँव म विधायक बने ललक जागृति बढ़गे हे । बहुत लम्बा कतार हे, गलाकाट प्रतिस्पर्धा होगे हे । एक दूसरे के कमजोरी ल बढ़ा-चढ़ा के नेता के समक्ष रखथे । विधानसभा क्षेत्र म यदि मोला टिकट नई देहा त चुनाव हार जाहा । मंय ह जीत जाहंव, मय विनिंग कण्डीडेट हंव । बने लम्बा चौड़ा, ओवरू सब नेता के चरण छू के था देथे ।

चन्दा देवी कथे, दीदी चल हमन दिल्ली जाके टिकट के जुगाड़ म लगबो । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी माननीय मुख्यमंत्री जी ह कहीस, क्षेत्र म काम करव टिकट मिल जाही । चन्दा कथे, दीदी सांसद अउ केन्द्रीय मंत्री मन हमन के विरोध म हे । मुख्यमंत्री के विरोध म हे । सायद मुख्यमंत्री ह अपन आदमी ल टिकट दिलवा पाथे के नहीं, मोला संका हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी मंय तो ओकरे भरोसा करे हंव, तहूं ह ओकरे भरोसा म हावस । चुनाव तियारे के संबंध म चरचा करत दस बजगे रहय । कार आगे रहय, रमसीला कथे भउजी चलव कुआँ म गरम-गरम पानी निकाल के नहवा देथंव । चन्दा अउ चन्द्रकला कथे चल लउहा नहा लेथन । रमसीला कुआं से बाल्टी म पानी निकारत जाय, दूनों झन के ऊपर म डारत जाय । लक्स साबुर म नहाईन । रमसीला ल कथे, पीठ म साबुन लगा के पथरा म रगड़ दे । चन्दा कथे, दीदी ईहाँ तरोई के रगड़े के बनाय रथें, बढ़िया रगड़-रगड़ के नहा ले । बढिया रगड़-रगड़ के नहाथे । जब तक तेल फूल लगाथे, तियार होथे, तब तक रामसीला ह चीला रोटी, पताल के चटनी बना लेथे । बढ़िया गरम-गरम चीला रोटी परोसथे । पताल के चटनी म मजा आ जथे । चार चार चीला रोटी म पेट भर जाथे, मजा आ जथे ।

अब मंय चलत हंव, रमसीला कथे, भउजी ड्राइवर अउ गनमेन ल रोटी देय हंव तब तक चहापी न । चन्दा कथे लउहा ला चहा ल । चन्द्रकला देवी चहा पीके कार म बईठ जथे । चन्दा देवी हाथ जोड़ के जय सतनाम, नमस्कार करथे । सारंगढ़ से रायगढ़ दू घंटा म पहुंच जाथे । पुस्पा दाई दुवारी म बईठ के रद्दा देखत रहय । रमौतीन दाई ह रंघनी घर म जाके दौनामांजर ल समझावत रहय, दाल म लहसून अउ लाल मिरचा के तड़का (फ्राई) लगाय बर बतावत रहय । जोर से छनाक ले जले के आवाज आथे, मिरचा के जले ले घर भर म मिरचा तेज ह हवाम फईल गे । सब आंक छीं-आंक छीं कर के छींके लगथे । घर से बाहर अंगना म आ जथे, सब कोई साथ म छींकत रहित । चन्द्रकला कथे, दाई का पकावत हंव, अड़ोस-पड़ोस के धम छींक पहुँच गे । रमौतीन कथे, बेटी बहरिया ला तड़का लगाय बर सिखावत रहेंव । दौनामंडर आँखी रमजत, आँसू पोंछत पाँव छूथे, चन्द्रकला कथे बाबू-लईका लउहा होय । दीदी, तोर आसीरबाद ले तीन महीना होगे महावारी नई होय हंव । चन्द्रकला ह माथा ल चूम लेथे, चल बहुत-बहुत बधाई । घर म वंस चलाय बर बाबूजी आवत हे । बलराम बाबूजी चन्द्रसेन ल बहुत चाहत रहीस, ओकरे सेती बेटा बन के आवत हे ।

रमौतीन, पुस्पा देवी दादी बने के खुसी म झूम जथे, नाचे लगथे । घर म खुसी आनंद ही आनंद हो जाथे । चन्द्रसेन डेयरी से आथे त ओहू ल पता लग जथे । बाप बने के खुसी म दौनामांजर के चुमा ले लेथे । रामदेव अउ कामदेव सुन के खुस हो जाथे । दौनामांजर के ओ जिन ले सेवा-सत्कार, देख-रेख सुरू हो जथे । पुस्पा अउ रमौतीन कोई गरू वाला जीच उठाय नई देवय । बढ़िया फल-फूल, दूध-मिठाई दौनामांजर ल खवावय, दौनामांजर ह गदबिदाय गे रहय ।

चन्दा ह टेलीफोन से चन्द्रकला देवी ल कथे, दीदी काली मंय भोपाल जात हंव, तहूँ जाबे तक संग चलव । चुनाव घोसणा होवईया हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी सरिया अउ सारंगढ़ के महिला मन ल दिल्ली ले जाय पड़ही, तंय सब झन ल पूछ लेबे । चन्दा कथे दीदी ठीक हे मंय दस बारा महिला मन ल तियार कर लेथंव । चन्दा देवी ह मधु, अनिता, चन्द्रिका, रामकली, निर्मला ल भोपाल, दिल्ली जाय बर कथे । सब महिला मन घर म पति से पूछ के बताबो कथे । सरिया से जमुना देवी अउ संगवारी मन ल पूछिथे, ब मना कर देथे । मधु दिल्ली के घटना से डर गे रहे बोलथे पिछले बार दिल्ली म बहुत मुस्किल से जीव बांचे रहीस । अब हमन अपन जान ल जोखिम म नई डारन । आप मन जावव । पार्टी टिकट ले के आहव त चुनाव के प्रचार कर देबो । हमन तो कोई पार्टी म नई आन, जेहा हमन ल पूछही, ओकरे काम करबो । चन्दा देवी अवाक रहि जाथे, चन्दा देवी ह सब बात गोठ ल बता देथे ।

चन्दा देवी भोपाल जाय बर रायगढ़ जीप म जाथे । सारंगढ़ से चन्द्रपुर महानदी के रपटा से नदी पार करत रथे, जीप बीच रपटा म फंस जथे । बीच धार म चक्का फंस जथे । चार-पाँच झन मिल के निकारथे । रपटा से बड़ मुस्किल से जीप पार हो जथे । रायगढ़ रेल्वे स्टेसन म चन्द्रकला देवी ह इन्तजार करत रहय । अहमदाबाद एक्सप्रेस से बिलासपुर आ जथे । ट्रेन ले उतार के भोपाल जाय बर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस बर प्लेटफार्म नं. चार म जाके बईठ जथे । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के डिब्बा ठीक 12 बजे लग जथे । ए. सी. एक नं. कोच म बर्थ नं. एक अउ दो म समान, सूटकेस रखवाथे । चन्द्रकला देवी ल विभागीय अधिकारी अउ कार्यकर्ता मन छोड़े आय रहय । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ठीक समय म छूट जथे । बिलासपुर से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगाँव, गोंदिया, नागरपुर से भोपाल सुबह 6 बजे पहुँच जाथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी कार म बईठ के बंगला चल देथे । चन्दा देवी चाय पी के अपन विधायक बिसराम गृह चल देथे । भूरी अउ कुसुवा स्कूल जाय के तियारी करत रहय, समारू चाय-नास्ता तियार करत रहय । चन्दा देवी सीधा रंधनी म चल देथे । भूरी, दाई आगे कहिथे । भूरी कहिथे, दाई अतका दिन कईसे लगा देय । चन्दा कथे, बेटी चुनाव घोसणा होवईया हे चुनाव यदि लड़ना हे विधानसभा क्षेत्र म रहे बर पड़ही । कुसुवा बाथरूम से निकल के आ के दाई के पाँव छूथे । चन्दा आसीस देथे, बड़े साहब बनव, खूब पढ़व लिखव । भूरी अऊ कुसुवा लउहा तियार हो के अपन-अपन स्कूल चल देथे ।

चन्दा देवी अउ समारू बाच जथें, दूनों झन मिल के सब्जी काट के तियार करथे । दार-चावल, सब्जी पकाथे, चन्दा देवी कथे, मंय नहा लेथंव । नहानी घर म घूस जाथे । समारू कथे, गाँव म गे रहे त बने चिक्कन चिक्कन दिखत हस । चन्दा हंस देथे । चन्दा कथे, अउ मोर डउका गाँव म हे ते हर खवाय-पियाय हे, त चिक्कन दिखत हंव । समारू कथे, का भरोसा औरत मनके मन सब ललचा जाय । चन्दा कथे अतका भरोसा तो करना चाही, कम से कम मंय तो नई करेंवा । समारू कथे, मंय कहाँ करत हंव तंय करे हस । मंय तो अतकेच कहेंव हंव बड़ सुघ्घर दिखत हस । चन्दा देवी कथे, चल ठीक हे, आ पीठ म साबुन लगा दे, रगड़ दे । समारू पीछ म साबुन लगा के कपड़ा म रगड़थे । चन्दा कथे, हाँ भरभरावत हे । काल कुआँ म नहावत रहेंव त रमसीला ह बने रगड़ दीस । समारू कथे, करिया गे हे । चन्दा कथे, बस-बस जादा तहूँ झन रगड़, नई तो करिया जाही । चन्दा नहा के तियार हो जथे ।

चन्दा अउ समारू भोजन करके आराम करथे, नींद पड़ जाथे । समारू ह पत्रिका पढ़त रईथे, दू बजे भूरी अउ कुसुवा आ जथे । लउहा कपड़ बदल के भात खा लेथे । भूरी दाई के संग म सो जाथे, कुसुवा समारू के संग पत्रिका, टी.वी. देखथे । समारू घलो दरवाजा बंद करके आराम करे लगथे । भोपाल के हवा पानी सूट करत रहय, पूरा परिवार अंगरेज मन जईसन दिखत रहय । भूरी अउ कुसुवा कक्षा 11 वीं अउ 12 वीं म पढ़त रहय, बोर्ड परीक्छा के तियारी म लग गे ।

चन्द्रकला देवी ह बंगला म हजारों महिला-पुरूष कार्यकर्ता से भेंट करथे, रात दस बजे तक भेंट करके सिकायत के आवेदन लेत रहय । जब सब चले गिन तब चन्द्रकला देवी ह आफिस, कार्यालय से निवास गईस । हाथ पैर धोके भोजन करके सो जाथे ।


क्रमशः
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भाग- पन्द्रह

चन्द्रकला देवी, सरिया क्षेत्र के बरमकेला के महानदी के किनारे के गाँव म दउरा म निकले रहय । रायगढ़ से सरिया फोन पुस्पा देवी चन्द्रसेन करथे । महिला बैंक के मैनेजर फोन उठाथे । मैनेजर ल बताथे, मालूराम अउ वोकर गोसाईन के चाम्पा स्टेसन के पहिनी नदी के पुलिया म एक्सीडेंट होगे हे । पति-पत्नी के मउत होगे हे । तुरंत खबर भेज दे रायगढ़ आ जावय । बड़ भारी एक्सीडेंट होय हे । करीबन सौ आदमी मर गे हे, हजार भर आदमी, बच्चा घायल होगे हे अउ महिला बैंक के मैनेजर ह सरिया से बरमकेला फोन से संदेस भिजवाथे । संदेस बहुत लेट म मिलथे । चन्द्रकला देवी के सब कुछ खतम होगे । रोवत-रोवत, आंखी सूझ गे । आँसू के धार थमत नई रहीस, जमुना देवी ह ढांढस बंधाईस । सब महिला मन चुप करावय, के चन्द्रकला देवी रोवत रहीस । सब के टप-टप आँसू चुचवावत रह । बड़ मुशिकल ले हि, तुमन कार द्वारा रायगढ़ पहुँचाईन चन्द्रकला के हाल, बेहान हो गे रहय पुस्पा माँ ल पोटार के खूब रोईस । रमौतीन दाई ह समझाईस, बेटी भगवान ले अतके दिन के संगवारी रहीस, झन दुःख कर । चन्द्रकला विधुन हो के रोवत रहीस । पुस्पा कईथे, चुप हो जा बेटी, तंय मंत्री अस । बड़े पद म हस । ठीक हे हमन जानत हन, फेर समाज ह थोड़े मानत हे । समाज के नदर म तंय रखैल हस । रखैल के कोई सामाजिक अधिकार नई रहय । ओकर घरवाला, परिवार वाला मन नई मानय । जतका दुःख मन म करना हे त कर ले । पुस्पा कथे, चल चांपा रेल्वे स्टेसन जा के देख, का हालत म लास हावय । पुस्पा दाई के बात ल मान के जाय बर तियार होगे ।

चन्द्रकला देवी ह पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर से जानकारी पूछिस । रायगढ़ सहर के पचास आदमी के मृत्यु के समाचार रहय । अउ लगभग आदमी घायल होय रहय । मालूराम अग्रवाल अउ पत्नी हा ट्रेन के डिब्बा म फंसे हे बताईस । रेल्वे के स्टेसन मास्टर से पूछताछ करिस । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा दाई के संग चाम्पा रेल्वे स्टेसन बर कार द्वारा निकलिस । चन्द्रकला देवी ह दूनों हाथ के चूरी ल पथरा म कुचरिच, माँग के सिंदूर ल पोंछिस अउ रंगीन लूगरा के जगा सफेद लूगरा, बिलाउज पहिन के गईस, दो घंटा म चाम्पा रेल्वे स्टेसन, नदी के पुल के पास पहुँच जथे । दुर्घटना स्थान म आदमी मन के रेला लगे रहय । अपन अपन रिस्तेदार मन के पता लगावत रहय । लाईन से दू सौ लास रखे रहय । दुर्घटना ठउर के चीख-पुकार माते रहय । मातम छाए रहय । सबके आँखी म आँसू बोहात रहय । कलेक्टर, कमिस्नर, पुलिस अधीक्षक अउ बड़े अधिकारी मन आ गे रहय । रोटरी अउ लायन्स-रेडक्रास के कर्मचारी घायल मन के सेवा म लगे रहय । चीख-पुकार के वातावरण गमगीन रहय । सब कोई उत्सुकता से देखत रहय । रेल के डिब्बा ल काट-काट के लास मन ल निकालत रहय । रात होय के कारण दिक्कत होत रहय । रहि-रहि के बादर-पानी भी बरसत रहय । करिया बादर ह लउकत, घपटत रहय । जोर से बिजली कड़कत, चमकत रहीस । खराब मौसम के कारण बहुत दिक्कत होत रहीस । अहमदाबाद के लगभग पाँच डिब्बा ह एक-दूसर के ऊपर चढ़ गे रहिस । एक डिब्बा ह पुल से नीचे नदी म झूलत रहीस । नदी म झूलत डिब्बा ह अब गिरिस, तब गिरिस दिखय़ । बहुत मुस्किल से क्रेन द्वारा खींच के जमीन म लाईस । लोग सर्च लाईट, कंडील, टार्च के रोशनी म रेल डिब्बा ल देखत रहय । जे डिब्बा म मालूराम के परिवार बईठे रहीस, डिब्बा ह चिपट गे रहीस । रेल के डिब्बा ल कटर, वेल्डिंग मसीन से काट के लास ल निकाले रहीन । दो सौ लास के आखिरी म मालूराम अउ ओकर डउकी के लास रहय । के चेहरा तो बुरी तरह से चपट गे रहय । दूनों के सरीर से पहचान म आवत रहय । चन्द्रकला देवी ह फूट-फूट के रोवत रहय । कलेक्टर अउ अधिकारी मन चुप कराईन । रात के तीन बजे तक डिब्बा काट-काट के लाश निकालिन । घायल मन के बिलासपुर, कोरबा के सासकीय अस्पताल म भर्ती करके इलाज करात रहीन । पूरा देस भर म सोक मनावत रहीन ।

रेल मंत्री ह दुर्घटना के जाँच के आदेस दे देथे । टी. वी. समाचार पत्र म दूसर दिन मुख्य समाचार देत रहय । चन्द्रकला देवी ह दूसर दिन लास के पोस्ट-मार्टम कराके ट्रम म लाश ल रायगढ़ भिजवा देथे अउ संग म घलो जाथे । मालूराम अग्रवाल के घर में लास उतरवाथे । दुःखी परिवार ल धीरज धराथे । ओकर बेटा-बेटी बाप के संग चीरकार मारमार रोथे । वोकर बड़े बेटा ह साफ कहि देथे, चन्द्रकला देवी दुःख म जरूर हमर साथ म हस फेर हमन तोला माँ के दरजा नई दे सकन । चन्द्रकला देवी अउ अपमान झन होवय कहि के अपन निवास स्थान गोसाला लहुट जाथे । चन्द्रकला देवी ह आँसू के घूंट पी के रहि गइस । पुस्पा दाई ह समझाते, बेटी ओमन तोला स्वीकार नई करय, जादा दुःख मत कर । अग्रवाल जी के साथ, अतके दिन के रहीस । जादा तोला माना हे त गया, बनारस, इलाहाबाद जाके गंगा नहा ले । मुंड़ मुड़ाय के जरूरत नई हे । चन्द्रकला कथे, दाई तंय ठीक कहत हस । मय कालि गया जाय बर ट्रेन के टिकट आरक्छण करा लेथंव । गनमेन अउ पी. ए. चार टिकट रेल के आरक्छण टाटानगर, टाटानगर से डेहरी आंसन से गया करा लेथे ।

चन्द्रकला के संग पुस्पा अउ गनमेन, पी. ए. गया पहुँच जथे । गया म होटल म रूक जथे । गया घाट गंगा नदी म स्नान करके मृत आत्मा के लिए पिण्डदान माँ, बेटी सिर मुण्डवा के बाल ल गंगा नदी म प्रवाहित कर देथे । पुस्पा देवी ह स्व. बलराम पांड़े के नाम से पाँच झन पंडित, भिखारी, गरीब ल भोजन कराथे । चन्द्रकला देवी ह मालूराम अग्रवाल के नाव अंतिम क्रिया दसकरण के नाव के इक्कीस झन गरीब मन ल भर पेट पुड़ी-सब्जी, दाल-भात खवाथे । मालूराम के आत्मा के सांति के लिये पूजा पाठ भी कराथे । गंगा मईया के पवित्र पानी म स्नान करके मन के मईल घलो ल साफ कर लेथे । मन म जो भाव, प्रेम, पियार मालूराम के प्रति रहीस, ओला आँसू बहा के गंगा नदी म बहा देथे । एक हफ्ता गया म निवास करथे । भागवत, गीता, रामायण के पाठ करथे अउ सुनथे । चन्द्रकला देवी के दुःख ह हल्का होथे । गया से बैजनाथ धाम भी भगवान भोले संकर के दरसन करे चले जाथे । बैजनाथ धाम म मन ल सांति मिल जथे । पुस्पा देवी ह बहुत समझाथे । बेटी एक दिन सब ल जाय बर हे । ऐ संसार नस्वर हे । चल अब घर रायगढ़ जाबो, बैजनाथ धाम से रेल से रायगढ़ आ जथें ।

रायगढ़ म मालूराम अग्रवाल अउ पत्नी के दाह-संस्कार अउ क्रिया-कर्म निपट गे रहय । पन्दरा दिन सोक म दुकान बन्द करे रहय । घर के मुखिया के मउत के बाद घर सम्हाले बर बड़े लड़का दुकान, व्यवसाय ल शुरू करीस । फेर ओही कठिन काम करे लगीन । स्व. मालूराम अउ ओकर पत्नी के कमी रहय । चन्द्रकला देवी ह टेलीफोन से सांत्वना देईस, कहिच यदि कोई काम होही त बताहा, जरूर मय सहयोग देहंव । चन्द्रकला देवी ह मुड़ ल मुड़ाय रहय । ऐकर सेती घर से एक महीना निकले नई सकय । चन्द्रकला देवी रायगढ़ से भोपाल चल देथे । भोपाल के निवास-कार्यालय म आफिस के काम निपटाथे । माननीय मुख्यमंत्री जी से मुलाकात भी करथे । मुख्यमंत्री ह चुनाव तियार, क्षेत्र म करे बर निर्देस भी देथे ।

चन्द्रकला देवी ह निवास कार्यालय से ही मंत्रालय के काम-काज निपटावय । सिर मुंड़ाय रहय, कहीं जावय त पूछय त बतावय कि मित्र के देहावसान होगे हे । मोर साथ बचपना के जिगरी दोस्त रहीस, मोर मितवा रहीस । चन्द्रकला देवी ह विधवा जईसे सफेद लूगरा-पोलखर पहिनत रहय, माथे म चंदन के टीका लगावय । दिन तो काम-बूता म कट जावय फेर रात बइरी ह नई कटय । आँखी ले आँसू टपक जावय । काबर जब ले मिले रहीस, वोमन दू सरीर एक परान रहीन अब महकाय कोन खरे होही ? अभी तक एक खूंटा म बंध के आय हंव, ओकर रहत ले कोई आँखी उठाय के देखे नई सकत रहीन । अब मंय अधूरा हो गेंव । आँसू ह टपाटप बहे लगय । एक मन ह कहै उठो संघर्ष करो । पुरूष समाज ल बता देवय, तोर बिन जीनकी कट जाही । मन ल ढांढस बंधावय । सोंचत-सोंचत नींद कब पड़य, पता नई चलय ।

पुस्पा दाई ह सुबे ले चाय-नास्ता करके रखे रहय । चन्द्रकला ह फ्रेस हो के बईठक रूम म आ के पेपर पढ़े लगथे । चुनाव तियारी के समाचार, सबो पार्टी मन प्रमुखता से कहत रहय । चाय के चुस्की लेत चन्द्रकला कथे, दाई चुनाव के कमान कोन सम्हालही । पुस्पा कथे, बेटी चिंता झन कर कोई भगवान द देही, नई तो मय देखिहंव । तोर बाबूजी अउ कक, भाई चन्द्रसेन घलो हावय । दाई मालूराम जी ह चुनाव बर चन्दा घलो वसूल करके देवत रहीस । बेटी कोई सेठ, बैपारी मन जरूर सहजोग करही । तहूँ ह पईसा, रूपिया ल जोड़ कर रूख । चन्द्रकला देवी ह विभागीय अधिकारी मन से चन्दा वसूल करे लगथे । कई अधिकारी मन ठेकेदार से रूपिया जुगाड़ करा देथे । चुनाव ल के धन इक्ट्ठा हो जाथे ।

चन्दा देवी विधायक ह मिले बर बंगला म आथे । चन्द्रकला देवी ह गर मिलके जोर से खूब रोथे । कहिथे चन्दा बहिनी, अब मंय अनाथ होगेंव, अब मोला कोन सहारा देही । चन्दा देवी कथे, दीदी तोला सतनाम साहेब ह सहायता करही, सतनाम साहेब म विस्वास कर । मय तो ओकरे अपार म भरोसा करथंव । चन्दा देवी ह बहुत समझाथे । दीदी तंय मुड़ ल मुड़ा के ठीक नई करे हस । नर अउ नारी समान हे, का केस उतारे ले जी गे । चन्द्रकला कथे, बहिनी रीति-रिवाज, अंधविस्वास ल माने ल पड़थे । मंय एकदम टूट गे हंव, जउन दाई मन करत गीन, में करत गेंव । मय गंगा नदी म नहा के केस उतवाय रहेंव, मोला अच्छा लगीस । जीये-मरे के साथ किरिया खाये रहेंव । केस ल उतरवा देंव ता का कम होगे, कुछ दिन म केस बाढ़ जाही । चन्दा देवी कथे, दीदी तंयभले पति मानके विधवा बने हावस, फेर समाज अउ परिवार वाला मन कहाँ मानिस । अग्रवाल जी के बेटा मन साफ माता माने बर इंकार कर दीस, कोई सम्मानजनक बेवहार घलो नहीं करीस । तब तोला कोई बात बर नई पुछीन, उल्टा कोई चीज के माँग करही करिके पूछिन नई हे । चल ठीक हे जतक दीन ले तोर संगलिखे रहीस, ओतका सुख तो मिले रहीस । बहुत अच्छा आदमी रहीस । चन्दा कथे, चिंता-फिकर झन कर, सब ठीक हो जाहय । पहली भी अकेल्ला रहे, अभो अकेल्ला रहबो । ये विधवा के बाना ल छोड़, तयं पढ़े-लिखे नारी हस । आज वैज्ञानिक युग म अईसे झन कर । बढ़िया अपन जिनगी ल जी । काकरो भरोसा झन कर एक ना एक दिन सब ल जाना हे ।

चन्दा देवी ह बहुत समाझाइस । तंय समाज ल कतका समझाबे, नई मानय । तोला तो कुँवारी ही समझत रहीन, ओला मत उधार । तोप दे माटी म, सब मुंदाय जाही अउ पहिली जईसे बन-ठन के निकल । आधुनिक नारी के प्रतिनिधित्व कर अगुवा बन, कब तक पुरातन पंथी बन के जीबो । पुरूष जईसे हमू मन काम-धाम करके, हरहिंछा जीवन जीबो । तभे समाज ह चेतही । मोर कहना मान दीदी, अतका दिन ले सफेद लूगरा पहिरे रहे ठीक हे । अबतो रंगीन कोसा के लूगरा पहिर, माँ म सिंदूर झन लगा । फेर हाथ म सोना के चूरी तो पहिर सकत हस । फेर तोला जीत के मंत्री बनना हे । चन्द्रकला देवी के थोरकिन साहस बढ़िस, हिम्मत करके कथे बने कहत हस बहिनी, तुमन सतनाम आंदोलन के जुड़ के मनुवाद के विरोध करत हेव । हमन अभी घलो मनुवाद ल मानत हन, ओही हमन के बाधक हे । चन्दा देवी कथे, दीदी ओही ल त उखाड़ फेंकना चाही । अंधविस्वास, रूढ़िवाद ले जकड़े समाज ल बदलना चाही । यदि हमन पढ़े-लिखे नारी मन ऐ बेड़ी ल नई तोड़बो त कोन तोड़ही, गाँव के अनपढ़ नारी ह । चन्द्रकला देवी ल बहुत समझाईस, चन्द्रकला देवी ल नारी शक्ति से प्रेरणा मिलिस ।

चन्दा देवी ह अपन हाथ ले विधवा के बाना, सफेद लूगरा, पोलखार ल उतारिस अउ रंगीन चटक पीला छींट के लूगरा-पोलखर पहिनाईस । माथा म बिंदी, हाथ म सोना के चूरी दू ठन डालिस । कान म झुमका, नाक मा लौंग, एक पूरा नारी के सिंगार करके दरपन करा खड़ा करीस । चन्द्रकला देवी खुद सरमा गे । बासंती रंग म चेहरा म चमक आगे रहय । बासंती रंग म नव दुल्हन जईसे दिखत रहय, चन्दा देवी मोहा जाथे । माथा ल चूम लेथे । चन्दा कथे, दीदी यदि मंय पुरूष होतेंव त तोला चूरी पहिरा के ले जातेंव । कतको बिहाती देय ल पड़तीच । चन्द्रकला देवी कथे, थोरकन मोर उमर ल तो देख । पचपन बछर के डोकरी ल कोन पूछही । चन्दा कथे दीदी तोर लईका नई होय ले सरी म कसावट, जवा टूरी मन जईसे हे । चन्द्रकला देवी ह दरपन के पास जाके देखथे, सही म बहुत सुन्दर दित रहय । रंग बासंती म बहुत जचत रहय, चन्द्रकला देवी ह चन्दा ल कस के पोटार के चुमे लगथे । सुख-दुःख के गोठ, बात करके चन्दा अपन विधायक विसराम गृह चले जाथे ।

चन्द्रकला देवी मंत्रालय म जाके बईठ गे । सरकारी काम-काज ल निपटाईस । कई मंत्रीगण अउ माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलिस । मुख्यमंत्री जी ह चुनाव के तियारी करे बर कहिस । माननीय मुख्यमंत्री जी, मालूराम अग्रवाल के दुखःद निधन ल बहुत बड़ छति बताईस । चन्द्रकला देवी ल दूसर पार्टी के कार्यकर्त्ता बनाय बर कहिस, मुख्यमंत्री कार्यालय से सड़क, सिंचाई परियोजना बर पचास लाख रूपिया स्वीकृत कराके लाथे । दिन भर मंत्रालय के काम निपटा के शाम 6 बजे बँगला आ जथे । बँगला म दस-बीस झन से भेंट करे के बाद निवास म चले जाथे ।

पुस्पा माँ ह बेटी के रूप-रंग, हाव-भाव म परिवर्तन देख के बहुत खुस होथे । बेटी मरने वाला तो मरगे, ओकर संग हमन काबर मरीन । महूँ ह त जीयत हंव, सौ बछर से जादा होते हे । तोर बाबूजी के बिना पूरी जवानी बितांय अउ अभी घलो जीयत हंव । जब तक जीवन म आस हे तब तक चलत हे । जब सरीर अ थाऊ पड़ जाही तब मर जाहूं ।अभी तो चलत-फिरत हंव । चन्द्रकला देवी कथे दाई मोरो उमर ह लगजावय, दू सौ साल जी दाई । मोर देख-रेख कोन करही । पुस्पा कथे, बेटी मोर उमर तोला लग जाय, तंय जी दो सौ बरस । मंय तो बहुत जी लेंव । चन्द्रकला कथे, दाई आज भूख लगत हे कुछ बनाय हस । पुस्पा दाई ह सब झन नौकर-चारक, पी. ए. गनमेन ल खवाते । गरम-गरम भजिया खाके रात मे थोरकुन दाल-भात खा के चन्द्रकला सो जाथे ।

क्रमशः
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भाग- चौदह

चन्द्रकला देवी रायगढ़ ले जबलपुर दौरा म जाथे । बिलासपुर, इन्दौर नर्मदा एक्सप्रेस ह रात दस बजे जबलपुर पहुँचथे । प्रोटोकॉल से एस. डी. एम. श्री राज कुमार टंडन रेल्वे स्टेसन आय रहय । सुनील अउ पूरनिमा, चार बच्चा धर के आय रहय । चन्द्रकला देवी ह प्लेटफार्म म उतरथे । गनमेन ह सूटकेस, समान ल उतारथे । पूरनिमा ह पाँव छूके परणाम करथे । बारी-बारी से बड़ी माँ के चरण छूके परणाम, बच्चा मन करथे । छोटी गुड़िया रानी ल चन्द्रकला देवी ह गोदी म उटा के पियार करथे । चारों बच्चा मन ल चुमा लेथे । गनमेन अउ एस. डी. एम. ह कार म सूटकेस रखथे । एस. डी. एम. कते, मैडम सर्किट हाउस म रूम नम्बर चार रिजर्व हे, आप सीधे सर्किट हाउस जायेंगे या अपनी बहिनी के घर । मैडम कथे कि मय अपन बहिनी घर रांची जाहूँ । गनमेन अउ स्टॉफ बर कमरा के बेवस्था करा दे ।

चन्द्रकला देवी, पूरनिमा, सुनील, बच्चा मन कार म बईठ के मदन महल के टेलीफोन कॉलोनी म आ जाथे । लालबत्ती के कार देख के लईका मन इकट्ठा हो जते । कॉलोनी भर के निवासी-रहवारी मन आ जथे । पूरनिमा ह एक कमरा ल साफ-सुधरा, चादर बिछा के पलंग म रखे रहय । दू ठन कुरसी घलो रखे रहय । सुनील सुटकेस अउ पेटी मन ला कमरा म रखीस । चन्द्रकला देवी हाथ मुँह धोके फ्रेस होगे । पूरनिमा चूल्हा-चौंकी म दाल, सब्जी गरम करे लगे गे । चन्दा देवी ह गनमेन अउ पी. ए. ल रेस्ट हाउस चले जाय बर कहिते । सुनील चाय, पानी पिला के भेज देथे । कॉलोनी वासी महिला, पुरूष मन भेंट करके चल दीन । चन्द्रकला देवी लईका मन के नाम पूछथे । बड़े लड़की अपन नांव कीर्ति सांडिल्य ओकर बाद के हा वंदना, ओकर के छोटे लड़का ह सूरज सांडिल्य अउ सबसे छोटी ह तोतलावत कथे मोर नाव बड़ी माँ रोमा सांडिल्य अउ मोर माँ के नाव पूरनिमा अउ मोर ददा के नाव सुनील हे । मोर नानी के नाव रमौतीन, मोर दादी के नाव चन्द्रिका देवी, मोर बड़े दाई के नाव चन्द्रकला देवी हे, ओह भोपाल म मंतरी हे । कीर्ति कते तय ओला पहिचानथस रे । रोमा लजा के गोदी म बईठ जाथे । चन्द्रकला देवी ह बच्चा मन संग हंसे खेले लगथे ।

पूरनिमा ह डाईनिंग टेबल म खाना लगा देथे ।खात पियत ले रात के ग्यारह बज गईस । चन्द्रकला कथे, लईका मन नई सोवत हे । पूरनिमा कथे, दीदी बहुत सैतान हे, सब काहत हे बड़ी मैँ के पास सुतबो, आज जागत हे । दूसर दिन सो जात रहीन चलो रात होगे हे, सुतबो ।

पूरनिमा कथे । आज भी बड़ सुन्दर लगत हस । भोपाल म मंत्री बने के बाद म सुन्दरता बढ़ गे । एकदम अंगरेजन अउ कस्मीरी मोहला जईसे दिखत हस । चन्द्रकला कथे भईगे बहिनी आज अतके मालिश कर, काल के ल बचा दे । तहूँ थक गे होबे । सब लईका मन सो गे रहय, पूरनिमा दरवाजा ओधा के अपन कमरा म आके सोय लगथे । नींद नई पड़य, सुनील कईथे का सोंचत हस । पूरनिमा कथे, दीदी ह जीवन ल अईसे काट दीस । ओला पति सुख नई मिलिस । सुनील समझाईस सब के किस्मत एक जईसे नई रहय । तीव्र इच्छा सक्ति खत्म होये के बाद ओला नींद आईस । सुनील भी हट्टा-कट्टा, तंदरूस्त जवान रहय । पूरनिमा भी संतुष्ट रहये । मस्ती म झूमय, हांसत-खेलत चार बच्चा जनमा डारिस, पता नई लगिस ।

चन्द्रकला देवी ल बढ़िया नींद आ जथे । मस्त छुर छिंदहा सोय रहय । बिहनहा सात बजे सो के उठीस । बाथरूम म फ्रेस हो के निकलथे, पूरनिमा ह चाय बना के ले आथे । समाचार पत्र पढ़त-पढ़त चाय पीथे, समाचार पढ़त-पढ़त चाय खतम करथे । सुनील आफिस जाय बर स्नान ध्यान करे लगथे । चन्द्रकला देवी के गनमेन अउ पी. ए. आ जथे । चन्द्रकला देवी विभागीय अधिकारी मन के बैठक बारह बजे से बुलाय रहय । चन्द्रकला देवी ह स्नान करे बर बाथरूम म चले जथे । सेम्पू से बाल धोके निकलथे, बाल ल टॉवेल म लपेटे रहय । बाथरूम से बाहर केस ल टॉवेल म फटकारिस । बढ़िया काला, घना केस रहय । सेम्पू लगाय म चमकत रहय । पूरनिमा भी जल्दी नहा के आ जाथे । दूनों बहिनी अउ लईका मन बईठ के भोजन करथे । चन्द्रकला देवी बारह बजे मीटिंग लेय बर कलेक्टर कार्यालय पहुँच जथे ।

मंत्री जी के सुवागत, कलेक्टर मदर मोहन उपाध्याय करथे । जबलपुर जिला म महिला बाल विकास अउ समाज सेवा विभाग के प्रभारी ठीक नई रहय । चन्द्रकला देवी, मंत्री ह कलेक्टर अउ अधिकारी मन ल खूब फटकारिस, खूब खरी-खोटी सुनाईस । एक महीना के भीतर प्रगति लाय के चेतावनी भी देईस । मीटिंग समाप्त होय के बाद सर्किट हाउस म पत्रकार वार्ता भी होईस दूसर दिन के सबी अखबार म फोटो सहित छपे रहय – “समाज सेवी मंत्री अधिकारियों पर भड़की” । सब्बो जगह एक ही चर्चा, चन्द्रकला देवी, मंत्री जी के वाहवाही होगिस । चन्द्रकला देवी, पूरनिमा के लईका मन के भेड़ाघाट, बंदरकूदनी, घुमांधर, चौसठ जोमनी, मदन महल पूरनिमा संग धूमाथे । चन्द्रकला देवी ल अपन परिवार के संग रहय म विशेष आनंद मिलय । पूरनिमा कथे, दीदी-दू चार दिन अउ रह जाते । चन्द्रकला कथे, बहिनी चुनाव नजदीक आवत हे, सरकार तियारी म लगे गे हे । महूं ह जबलपुर से सतना,रीवा, सहडोल, सरगुजा होके रायगढ़ पहुँचहूँ । पूरनिमा कथे, दीदी दूनों माता मन बने हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी नब्बे बछर से सौ बछर के हो गे हे, हमन ले स्वस्थ हे । आंखी ह बटबट ल दिखत हे, मुँह के छत्तीसी भी चमकत हे । बढ़िया रेंगत, बोलत हे । सब अपन-अपन काम करत हावय । पूरनिमा कथे एक बात पूछत हंव दीदी, पूस्पा माँ ह बाबू जी ल देखत-देखत उमर ल काट दीस । का राज हे मोला बता, मोला संका लागथे .

चन्द्रकला कईथे, बहिनी पुस्पा माँ के रायगढ़ म कोनो नई रहीन । चालीस साल तक बच्चा नई होईस त पांड़े बाबू जी ह छोड़ दे रहीस । पुस्पा माँ ह भरी जवानी, आसरा म काट दीस । कामदेव बाबूजी ह दवाई, बईगा-गुनिया, झाड़-फूँक, अघोर साधू के आसीरबाद देवाईस । पुस्पा माँ के नारीत्व ह जाग गे, बच्चा जन्माय के शक्ति आ गे । पुस्पा माँ गर्भवती हो जाथे । चन्द्रप्रकास के जनम मोर ले पहिली हो जाथे, मय एक महीना के बाद म होय हंव । पुस्पा माँ के दूध नई आवय अउ नगर पालिका के स्कूल म पढ़ाय बर जावय । घर म लईका देखईया कोनो नई रहय, त चन्द्रप्रकास ल रमौतीन दाई अउ ददा ह पाले पोसे हे । रमौतीन दाई ह क स्तन के दूध ल चन्द्रबान ल पियावय अउ एक ल मोला । दूनों के पेट भर जावय । चन्द्रप्रकास ल जरूर जन्माय हे, फेर दूध तो दाई के पीये हे । अपन लईका से जादा पियार करत रहय पुस्पा माँ ह । घर के पूरा खरचा चलावत रहय फेर एक औरत ल मरद के सुरक्षा चाही त राम बाबू जी ह ओला पूरा करे हे । रायगढ़ के मन जानथे के चन्द्रप्रकास रामदेव के बेटा आय । खुल्लम खुल्ला बोलथे, पर पुस्पा माँ ह कईथे, चन्द्रप्रकास ह बलराम के अंस ऐ ।

चन्द्रकला कईथे, बहिनी ऐ प्रश्न काबर पूछे तंय हा । पूरनिमा कईथे, रायगढ़ म सब झन अईसे कहय त आज हिम्मत करके संका के निवारण करे हंव । अब सब सम्पत्ति के मालिक तो चन्द्रसेन होगे हे । चन्द्रप्रकास तो अपन नौकरी से फुरसत नई ऐ । चल आज रायगढ़ म फार्म हाउस, मकान दूमंजिला हावय । खाय-पीये के कोई कमी नई हे । पुस्पा दाई के उमर भी जादा होगे कतका दिन के मेहमान हे । मोर ऊपर ओकर मया के छत हावय । ओकर आँचल के छाँव म बहुत ठीक, सांति लगथे मय ओकर करजा ल छूट नई सकंव । एक बामन परिवार ह यादव परिवार के टूरी ल गोदी लेके पाले-पोसे, पढ़ाय-लिखाय के नौकरी लगवाय हे । चन्द्रकला के आँखी ले आँसू बहे लगथे । पूरनिमा भी रो के दुःख हल्का कर लेथे । पूरनिमा कईथे, दीदी तोला मय रोवा देंव । चन्द्रकला कईथे, बहिनी नारी मन अपन दुःख ल आँसू बहा के हल्का कर लेथे । मोला हल्का लगीस, बहुत दिन होगे रहीस इकट्ठा होगे रहीस । अच्छा होईस, बहा दे तंय ह । ऐकरे नाव तो जीवन हे । सुख, दुःख, हांशी, खुसी जीवन, मरण हे ।

मालूरमाम जी पचासी से नब्बे बछर के जवान हे । पूरा जिनगी भर मोर काम आये हे । मोला विधायक अउ मंत्री बनाय म ओकर जादा हाथ हे । मरे के बेर म मय संग नई छोड़व । मय मंदिर म भगवान ल साक्षी मान के पति-पत्नी बने हन । ऐला समाज स्वीकार करय, चाहे सब स्वीकार करय । मय तो अपन पति मान ले हंव । राम म सो जथे ।

पूरनिमा भी थक गे हरय, पति संग मस्ती करके सो जाथे । सुबह उठके चाय नाश्ता पूरनिमा तियार कर देथे । चन्द्रकला देवी ह जल्दी स्नान, पूजा करके तियार हो जाथे । चाय-नास्ता संग म करथे । गनमेन अउ पी. ए. रेस्ट हाउस से आ जथे । सुनील ह चाय नास्ता कराथे । प्रोटोकॉल से कार सतना जाय बर आ जाथे । चन्द्रकला देवी जबलपुर से सतना कार द्वारा प्रस्थान करथे । सतना जिला के मैहर म माता सारदा देवी जी के दर्सन, पूजा पाठ करथे । दो घंटा ल मैहर म रूक के सतना बर चल पड़थे । सतना के सर्किट हाउस म कमरा आरक्षित रहय । मंत्री जी गार्ड आफ आनर, सेल्यूट ले के सर्किट हाउस के कमरा क्रमांक दो म गईस । प्रोटोकॉल से एस. डी. एम. सुवागत करे बर आय रहय । मंत्री जी हा फ्रेश हो के बाथरूम से निकल के सोफा सेट में आराम से बईठ जथे । आधा घंटा आराम करके पत्रकार, विभागीय अधिकारी, नेता मन से मिलथे । कलेक्टर ल सख्त निर्देस देते कि गाँव-गाँव म महिला मण्डल, महिला बैंक के स्थापना करके महिला मन ल आगे बढ़ाय म सासन की नीति के अनुसार काम करव । कलेक्टर ह सब विभागीय अधिकारी ल निर्देस जारी कर देधे । अधिकारी बैठक के बाद भोजन करके सो जथे ।

चन्द्रकला देवी, समाज सेवा कल्याण मंत्री के दौरा कार्यक्रम अनुसार सतना से रीवा के रहय । सुबह चाय-नास्ता करके कार द्वारा रीवा के लिए प्रस्थान करथे । रीवा के सर्किट हाउस म रूप आरक्षण, प्रोटोकॉल आफिस से होगे रहय । दोपहर के समय रीवा सर्किट हाउस पहुँचथे । गार्ड आफ आनर लेथे । मंत्री जी बैठक कक्ष जाथे । कलेक्टर, कमिस्नर, पुलिस अधीक्षक, संयुक्त संचालक, समाज सेवा कल्याण, महिला अधिकारी, अउ नेता, कर्मचारी मन के भीड़ लगे रहय । सब से मिलिस, बात सुनिस । अधिकारी मन ल निर्देश भी देईस, चाय सब के साथ पीईस । रूम म जाके हाथ, पाँव धो के फ्रेस होईस । कलेक्टर ह भोजन करे बर निवेदन करथे । चन्द्रकला देवी दोपहर भोजन के बाद थोड़ा विसराम, आराम करीस । थके, माँदे रहय, नींद पड़ जथे ।

अधिकारी मन के बैठक साम चार बजे से बुलाय रहय । कलेक्टर, कमिस्नर, संयुक्त संचालक, जिला अधिकारी अउ महिला मंडल के पदाधिकारी, महिला नेता मन आ गे रहय । मंत्री जी ह महिला ससक्तिकरण के काम के प्रगति बर नाराजगी व्यक्त करीस अउ सख्त निर्देस घलो देईस, के महिला बैंक, महिला सहायता समूह, महिला मंडल के गठन, गाँव-गाँव म होना चाहिये । कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देस भी दिये । मीटिंग के बाद पत्रकार वार्ता भी होईच । चन्द्रकला देवी ह मीटिंग के बाद महल अउ लक्ष्मण बाग म हनुमान मंदिर देखे बर गईस । मंदिर म पूजा अर्चना भी करीस । राम जानकी मंदिर म भी पूजा करीस । रीवा के ऐतिहासिक महत्व के स्थान भी देखिस । रात दस बजे भोजन करके सो जाथे । गनमेन, पी. ए. मन बगल के रूम म सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार रीवा के कार द्वारा सीधी से सरगुजा आ जथे । सर्किट हाउस सरगुजा म रात रुकथे । प्रोटोकॉल से कार भी मिल जथे । सर्किट हाउस म विभागीय अधिकारी, कलेक्टर के बैठक बुलवा लेथे । विभाग के प्रगत के समीक्षा करथे । रात्रि विसराम, सर्किट हाउस म करथे । सुबह चाय-नास्ता करके सरगुजा से रायगढ़ बर प्रस्थान करथे । कार ह सीतापुर के आगे जाय रहीस, टायर ह पंचर होगे । चन्द्रकला देवी कार से उतर के महुंवा पेड़ के छांव म खड़ा होईस । दिन के बारा बजे रहय । बने घाम करे रहय, घास म चन्द्रकला देवी के मुंह ललिया गय रहय । पसीना ह चुचवात रहीस । रूमाल से पसीना पोछिस । रूख के छांव ह जुड़-जड़ लागत रहय । सीतल मंद पवन चले लगिस । चन्द्रकला देवी के पसीना ह सुखिस, दूर से हरियर-हरियर जंगल, पहाड़ दिखत रहय । मेनपाट जाय के सड़क ओही मेरा रहय । मेनपाट म तिब्बती मन ह बसे हे, चन्द्रकला देवी सोंचथे । कार के पंचर टायर ल ड्राइवर अउ गनमेन ह दूसर टायर बलद के लगा देथे । पन्दरा बीस मिनट लगीस । चन्द्रकला देवी ह ड्राईवर से पूछते, मेनपाट ह कतका दूर हे । ड्राइवर ह कथे, मेडम ईंहाँ ले बीस कि. मी. दूर हे । चलिहा त चलव, फेर रास्ता ठीक नई हे । उबड़-खाबड़ पहाड़ी सड़क हे । कार नई चल सकव । चन्द्रकला देवी महुँवा के छाँव म बईठ के दूर से पहाड़ ल देखथे ।

ड्राईवर ह टायर बदल के कार ल सड़क के किनारे खड़ा कर देथे । गनमेन ह बोतल के पानी मेडम ल देथे । गरमी म पानी अच्छा लागथे । पानी पी के पसीना पोंछत-पोंछत कार म बईठ जते । कार सीतापुर से सीधा पत्थलगाँव के रेस्ट हाउस म रूकथे । दोपहर के भोजन पत्थलगाँव म करथे । मंत्री जी से भेंट करे बर सैंकड़ों महिला, पुरूष के भीड़ लग गे । एस. डी. एम. बी. डी. ओ. ल बुला के महिला बैंक, स्व-सहायता समूह गठन, महिला मंडल के गठन बर निर्देस देथे । चन्द्रकला देवी गाँव-गाँव म शासन के नीति से महिला विकास के कार्यक्रम चलाय के निर्देस देथे । महिला मंडल ल अधिक से अधिक अनुदान देय बर कईथे, नेता अउ कार्यकर्ता से मिल के मंत्री जी रायगड़ बर कार द्वारा निकल पड़थे । कार फर्राटा भागथे, तीन घंटा म रायगढ़, गोसाला पारा के निवास म पहुँच जथे . चन्द्रकला देवी दौरा,, टूट के कारण के-मांदे उतरिस । एक हफ्ता के बाद रायगढ़ा आय रहीस । पुस्पा दाई के पाव पड़िस । रमौतीन दाई ह एक गिलास ठण्डा पानी ले के आथे । चन्द्रकला ह पाँव छू के आसीरबाद लेथे । पानी पी के थोड़ा सुस्ता के साथ-मुहँ धो के पलंग म कनिहा सीधा करथे । रात के भोजन खा के सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह सुबह मुंह-हांथ धो के, प्रेस हो के अखबार पढ़त रहिथे, चाय पीयत-पीयत नवभारत पेपर पढ़थे । चन्द्रकला से रमौतीन पूछते, बेटी पूरनिमा के लईका मन बने-बने हे । चन्द्रकला कईथे सब बने-बने हे । पूरनिमा घलो अच्छा हे ष बने सहबाईन बने हे । कॉलोनी म पूरनिमा बिना कोई काम नई होवय । बने मान-सम्मान हे । ओकर टूरी अउ टूरा मन बड़ सुघ्घर हे । बड़ हांसथे । अंगरेजन मेम होही, रमौतीन दाई हांसथे । चन्द्रकला कथे, दाई चन्द्रसेन के बिहाव कर दे । भात रंधईया एक झन होना चाही । पुस्पा भी हाँ म हाँ मिला देथे । रामदेव ल लड़की ढूंढे ल कहिथे । कामदेव कहिथे, बोल तो सतनामी समाज के लड़की मिल जाही । चन्द्रकला कथे, हमर परिवार तो समता मूलक वर्गविहीन समाज ल मानथे । अच्छा बने सुन्दर, पढ़ी-लिखी लड़की होना चाही ।

रमौतीन कथे, बेटी जो घर ल सम्हाल सकाय वईसे बहु लाहा त बनही । रामदेव ल चन्द्रकला कथे, बाबूजी सारंगड़ खरसिया, झारसुगड़ा, चन्द्रपुर, सक्ती डाहर लड़की देखव कामदेव कका ल घलो ले जावव । ऐ बछर सादी जरूर करव, नई तो भूखन मरे ल पड़ही । चन्द्रकला देवी बाथरूम म नहा-धो के तियार हो जथे । पी. ए. अउ गनमेन आ जथे । प्रोटोकॉल सेकार मंगवाथे । कलेक्टर अउ विभागीय अधिकारी से बातचीत, फोन से करथे । चन्दा देवी विधायक से भोपाल बात करथे । भोपाल के बारे म बातचीत करथे । चन्दा देवी ह चुनाव तियारी के संबंध म बताथे । भूरी अउ कुसुवा से बात भी करथे । चन्दा देवी कथे, दीदी महूँ ह दो दिन न सारंगढ़ जाहूँ कहत हंव । चुनाव लकठियागे, विधान सभा क्षेत्र म घूमे ल पड़ही । चन्द्रकला देवी कथे, पहली टिकट तो मिलय । टिकट मिलही तब चुनाव लड़बो । चन्दा देवी कथे, माननीय मुख्यमंत्री जी ह चुनाव के तियारी करे बर कहि दे हावय । सब विधायक मन भोपाल से क्षेत्र चले गे हावय । भोपाल सुन्ना-सुन्न लगात हे । चन्द्रकला देवी कथे, आज सरिया जात हंव । महुँ जनता से मिलहंव । चार साल होगे, ऐती-ओती करके पाँच साल पूरा होत हे । चन्दा देवी ह परणाम करके टेलीफोन रख देथे ।

चन्द्रकला देवी कार से रायगढ़ से चन्द्रपुर, सरिया जाथे । सरिया म अपन घर म जाके रूकथे । महिला बैंक कुले रहय । बैंक के हिसाब-किताब, देखथे । बैंक मैनेजर ल निर्देस देथे कि अगले साल चुनाव हे, जो माँगय लोन ओला तुरंत स्वीकृत करदेवव । गाँव-गाँव घर घर म महिला बैंक के कर्जदार रहय । जमुना देवी ह महिला मंडल के सदस्य मन ल लाईस । मंत्री के सुवागत करीन अउ बईठ गे, कुर्सी अउ चांवरा म । चन्द्रकला ह सबके हाल-चाल पूछते । चुनाव के तियारी बर चरचा करथे । गाँव-गाँव म मतदाता सूची म नाम जोड़वाय बर कहिस । मतदाता सूची म अपन आदमी के नाम जोड़वावव, सब महिला मन ल अपन सदस्य बनावव, वोट डाले बर बी कहव । गाँव के महिला मंडल एक दरी अउ ढोलक, मंजीरा भी देवव । मय अपन विधायक निदि से रासि स्वीकृत कर देथंव । चुनाव अब लकठियागे हे । सब झन ल घुलमिल के चुनाव जीतना हे । सक्रिय महिला ल एक लेडी सायकल भी देहव । सायकल से चुनाव प्रचार, घर-घर गाँव-गाँव, गली-खोर म करिहव ।

चन्द्रकला देवी सब महिला ल चाय-नास्ता कराथे । घर के अंगला म बईठ के चौपाल लगाय रहय । जमुना अउ सहेली मन ल लेके कई गाँव के दउरा करीस । सब गाँव म मंत्री जी के सुवागत होईस । गाँव के धूल, कीचड़ कार म लदबदा गे रहय । नाक म रूमाल लगाय रहय । फेर अब्बड़ धूल उड़य । चन्द्रकला देवी ह चुनाव लड़े बर सक्रिय होगे । सब महिला मंडल ल सक्रिय करत रहय । चन्द्रकला देवी के विरोधी मन भी तियारी म लग गे रहय । जगा-जगा म सभा, चौपाल म मिल जावय । चन्द्रकला देवी के स्थिति मजबूत रहय ।

चन्द्रकला देवी ह चार-पाँच दिन रूक के गाँव-गाँव दउरा करिस । सब मन भेंट, मुलाकात भी करिस । बने मुखिया मन ल रूपिया पईसा के मदद करीस ।

क्रमशः

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