छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Sunday, July 02, 2006

लेखक परिचय

डॉ.जे.आर.सोनी
(Dr.J.R.SONI)

जन्म तिथि
08.06.1954

जन्म स्थान
ग्राम टिकारी, बिलासपुर

शिक्षा
एम.ए.(लोक प्रशासन), विधि स्नातक, व्यवसाय प्रबंध डिप्लोमा, पी.एच.डी

पुरस्कार/सम्मान

0डॉ. अम्बेडकर साहित्य सम्मान
0नई दिल्ली-1994, हिंदी सेवी सम्मान
0ग्वालियर-1996, सत्यध्वज साहित्यकार सम्मान
0भिलाई-1996, दीपाक्षर साहित्य सम्मान भिलाई 1999
0भारतीय कलाकार संघ सम्मान, 1999
0दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति-1999
0गायत्री शक्तिपीठ सम्मान दुर्ग-1999,
0बाबू रेवाराम साहित्य सम्मान रतनपुर-1999
0प्रयास प्रकाशन सम्मान बिलासपुर-1999,
0विक्रम शीला विद्यापीठ से वाचस्पति सम्मान- 1999
0जेमिनी अकादमी पानीपत, आचार्य की मानद उपाधि,
0म.प्र. लेखक संघ-आंचलिक साहित्यकार सम्मान- 2000
0सहस्राब्दी हिंदी सम्मान,
0राजेश्वरी प्रकाशन साहित्य सम्मान, गुना
0सृजन सम्मान 2000 उज्जैन,
0मेघानाथ कन्नौजे स्मृति सम्मान 2001,
0बिलासा कला सम्मान 2002
0राष्ट्रभाषा सम्मान 2002
0सृजन सम्मान रायपुर 2003
0साहित्य वैभव सम्मान बालाघाट 2006


कृतियाँ –

-सतनाम के अनुयायी- सतनाम की दार्शनिक पृष्ठभूमि
-बबूल की छाँव
-नगमत
-पछतावा
-रंग झांझर
-मारीशस-एक लघु भारत
-श्रीलंका-यात्रा संस्मरण


।।छत्तीसगढ़ी रचनाएं ।।

-मोंगरा के फूल
-मितान
-उढ़रिया
-चन्द्रकला


विदेश भ्रमण

मारीशस, श्रीलंका

संप्रति

संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, रायपुर, छ.ग.

पता –
डी-95, गुरुघासीदास कॉलोनी, न्यू राजेन्द्र नगर रायपुर (छत्तीसगढ़)
मोबाईल-98271-11018, फोन-0771-2429644, निवास- 4966826

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Saturday, July 01, 2006

लोकार्पण पर्व पर
आपका हार्दिक अभिनंदन


परम आदरणीय

श्री देवी प्रसाद वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, रायपुर

श्री रमेश नैयर, संचालक, छ.ग. हिंदी ग्रंथ अकादमी, छ.ग.

श्री बबन मिश्र, अध्यक्ष, बख्शी सृजनपीठ, भिलाई
डॉ. मन्नू लाल यदु, वरिष्ठ भाषाविद्, रायपुर

डॉ. विनय पाठक, वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद्, बिलासपुर

डॉ. महेश चन्द्र शर्मा, वरिष्ठ संस्कृताचार्य, भिलाई

डॉ.परदेशी राम वर्मा, वरिष्ठ कहानीकार, भिलाई

श्री शिवशंकर शुक्ल, छत्तीसगढ़ी उपन्यासकार, रायपुर

श्री गिरीश पंकज, संपादक, सद्-भावना दर्पण, रायपुर

श्री शंकर पांडे, वरिष्ठ पत्रकार, रायपुर

श्री रामावतार तिवारी, अध्यक्ष प्रेस क्लब, रायपुर

श्री सुधीर शर्मा, प्रकाशक, वैभव प्रकाशन, रायपुर

समस्त साहित्यकार साथी

एवं
पत्रकार गण

मेरा सौभाग्य है कि आपकी ऐतिहासिक उपस्थिति एवं गवाही में मेरी कृति चंद्रकला’ (छत्तीसगढ़ी उपन्यास) का लोकार्पण विश्वजाल पर प्रेस क्लब जैसे महत्वपूर्ण मंच पर हो रहा है । मैं इस अवसर पर सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़ के सभी सदस्यों का भी आभार मानता हूँ जिनके लगन और अभियान के बल पर यह कृति आज से संपूर्ण विश्व के पाठकों के लिए उपलब्ध हो सकेगी । मैं आपका आभार मानता हूँ ....


प्रेस क्लब, रायपुर
दिनांक- 2 जुलाई, 2006
रविवार


डॉ. जे. आर. सोनी

पीछे जायें


Tuesday, June 27, 2006

भाग-सत्रह

चन्द्रकला देवी ह मंत्रालय म सरकारी कामकाज निपटा के बंगला आईस । चन्दादेवी के फोन आईस कि, दीदी मोर सास के तबियत ठीक नई हे मंय भोपाल से सारंगढ़ जाथंव । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी महूँ ह एक-दू दिन म रायगढ़ जाहूं कहत हंव । चुनाव घलो तीन महीना म होवईया हे । पार्टी ह टिकट तो दे देही । चन्दा देवी कथे, दीदी ठीक हे चुनाव तो लड़बो, हारिन या जीतीन । मुख्यमंत्री जी हा वादा तो करे हे जे विधायक हे, ओला जरूर टिकट मिलही । आधा घंटा तक सुख-दुःख के बात करीन । चन्द्रकला देवी ह हाथ मुँह धोके चाय नास्ता करत रईथे, दू-चार झन भेंट करईया से मुलाकात घलो करथे । सिरफ विधानसभा के टिकट मंगाईया, बायोडाटा थमा के चले जावय । प्रदेश भर से हजार से जादा आवेदन पत्र मिलगे रहय । बीस पच्चीस झन समर्थक लेके मंत्री अउ पार्टी अध्यक्ष के बँगला, आफिस म पहुँच जावय । कहय, विधानसभा म चुनाव मही ह भारी बहुमत से जीतहंव के दावा करय । सब ल टिकट के आस्वासन देवय के तोही ल टिकट मिलही । चन्द्रकला देवी रात म भोजन करके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी रात म भयानक सपना देखते, सपना म पुस्पा देवी पांड़े के मिथिया म दब गे हे, बचावव-बचावव कहत हे । चन्द्रकला बेटी मोला बचा ले कहत हे । चन्द्रकला देवी बचा नई पावव, पसीना से लथपथ हो जथे । का अपसुगन सपना देखे हंव । ठीक रात के चार बजे रहय, उठ के एक गिलास पानी पीईस अउ पसीना ल पोछीस । चन्द्रकला देवी सोंचिस, अब दाई ह जादा दिन के मेहमान नई ए । रात म नींद नई पड़ीच, समाचार पत्र पढ़े लगीस । दू-चार पत्रिका ल पलट के देखथे । बँगला म मार्निंग वाक घास म पैदल चलत रहय । मन म सोचत रहय, अब घर म का होत हे, अभी सात बजे टेलीफोन से बात करहूँ ।

चन्द्रकला देवी ह रायगढ़ फोन लगाईस, पुस्पा देवी ह फोन उठाईस । दाई परनाम चन्द्रकला देवी कथे । पुस्पा देवी कथे, जीयत रह बेटी । घर के हाल-चाल पूछथे, सब ठीक के कहिस । पुस्पा देवी कथे, बेटी दौनामांजर ह लदबदाय हे, नव महीना होवत हे । चले-फिर नई सकत हे । पेट ह बने जुड़वा लइका हे अइसे लगत हे । आधा घंटा से फोन म बात करिच । फोन ल काट देते । चन्द्रकला के हाय जीय होइच । सब बने-बने हे । सपना म का सपना डारे हंव, मन थोड़ा हलका लगिच । चपरासी चाय ले आथे, चन्द्रकला देवी चाय बिस्टिक खाथे । समाचार पत्र पढ़े लगथे, पलंग म जाके सो जाथे । हलका नींद पड़ जाथे । दस बजे सो के उठथे । स्नान ध्यान करके कार्यालय म आ के बईठ जाथे । दस बीस झन भेंट करईय़ा से मुलाकात करथे । बंगला म मंत्रालय जाके फाईल निपटाथे । साम 5 बजे बंगला आ जाथे चन्दा देवी के फोन आथे, दीदी मंय घर जाथंव, जय सतनाम । चन्द्रकला कथे जय सतनाम । चन्दा देवी भोपाल से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर से रायगढ़ ट्रेन म जाथे, रायगढ़ से सारंगढ़ बस म जाथे ।

चन्दा देवी जईसे घर पहूँचथे, पता चलथे सब झन काठी म गय हे । चन्दा देवी के सास काल साम 7 बजे के मर गे रहय । रमसीला ह चन्दा भउजी के गला मिलके खूब रोईच । चन्दा देवी घलो बहुत रोईच । रोवई म आँखी फूल गे रहय अड़ोसी-पड़ोसी मन ढांढस बंधाईन, सांत्वना देईन । टूरा-पिला, पूरस मन काठी देके, माटी देके आके तरिया म बईठे हे कहिच । समारू अउ ओकर भाई दुकालू ह दाई ल माटी देके आय रहय । बड़ दुःख लगत रहय । दाई के मरे ले घर सुन्ना होगे रहय । दाई ह लाठी धरे दुवारी म बईठे रहय, सटका धरे रहय त कोई दुवारी म घूस नई पावय । डोकरी बने कड़क रहय । कोई बदमासी करय तेला सटका म मार देवय । समारू सोच-सोच के आँसू ढरकावत रहय । अब घर के रखवारी कोन करही । अतका कन धन दौलत, खेत-खार, कुँआ बारी ल कोन देखही । मन झुंझवावत रहय । समारू के नाता-गोता मन समाझाईन । तरिया के पार म पीपर छाँव म बईठे अगोरत रहय ।

रमसीला कईथे, भउजी दाई के काठी पड़गे हे, चला नहाय ल तरिया । घर के बड़े सियान ह आगू रथे । चन्दा देवी बड़की हे । आगू-आगू चन्दा, रामसीला पाछू पाछू लाईन से पचास झन महिला मन नहाय निकलीन । तरिया घाट गईन । रमसीला के आदमी ह उरई ल लाके गड़िया दे रहय । चन्दा ह नहा के उतई म पाँच चुरूवन पानी सिंचिस अउ परनाम करिच । कहिस, दाई अतका दिन ले तोर अचरा के छाँव म रहेन, जुड़ावा, सितरावा । दुःख तकलीफ म सहायता करव । माई लोगन के नहाय के बाद म पुरू, मन असनादीन अउ उरई म पाँच चुरूवन पानी डारिन, परनाम करके जुड़ावा, सितरावा पुरखा मन कहीन । सब पुर्ष मन पानी सिंचथे, परनाम करथे, समारू ह आगू-आगू गईच, पाछू-पाछू सब झन । घर के दुवारी म बाल्टी म पानी रखे रहय । पानी म पाँव धोईन अउ सरीर म सिंचिन । समारू ह हाथ जोड़ परनाम करीच । सब झन अपन अपन घर चल देथे । घर म परिवार के मन बाच जथे । रमसीला अउ चन्दा मिलके भोजन पकाथे । मेहमान-पहुना मन ला जेवाथे । जेवन से पहिले समारू ह पत्तल दोना म दार-भात, पानी दुवारी म दाई के हिस्सा रख देथे । पहुना मन संग बईठ के जेवन जेथे । पुरूस के बाद महिला पहुना मन ल खवाथे । खवा-पिया के अंगना म बईठ जथे ।

चन्दा देवी ह समारू ल कथे, दस नाहवन कब होही । समारू बताथे रविवार पड़ही । चन्दा कथे सोक-पक्ष छपवा ले । सारंगढ़ अउ सरिया क्षेत्र के महिला मन ल खवाय ल पड़ही । समारू ह शोक पत्र लगभग पाँच सौ धापे बर प्रिंटिंग प्रेस म बोल देथे । समारू ह घर के दुबराज धान, पच्चीस बोरा कुटवा लेथे । एक बोरा उड़द, एक बोरा राहोर दार अउ दू बोरा तिवरा दार दरवा ले रहय । दसकरम के तियारी चलत रहय । चन्दा देवी ह फोन म चन्द्रकला देवी ल निमंत्रण देथे । पूरनिमा ल जबलपुर फोन करथे । चन्द्रप्रकास अउ डॉ. प्रेमलता के पिताजी एम. एल. भारद्वाज, डिप्टी कलेक्टर दुर्ग ल फोन से सूचना देथे । जतका नता-गोता अउ जान पहिचान वाले हे, ओमन सोक-पत्र देथे । समारू ह सारंगढ़ से टेंट मंगाथे, पंडाल लगवा दे रहय । रायगढ़ से रसोईया बुलवा ले रहय । लगभग तीन हजार आदमी के भोजन बेवस्था करे रहय ।

समारू अउ चन्दा के नेता-गोता मन सुकवार, सनिवार के आगे रहय । घर ह भरे रहय । ईतवार के दिन बारह बजे महिला मन नहा के तालाब से आगे रहय । पुरुष मन घलो नहा के आगे । ठीक एक बजे मंगल, चौंका आरती के कार्यक्रम बिलासपुर से आये पंडित रामाधीन सुरू करथे । मंगल गीत भजन एक घंटा चलिस । चोकहार म अंगन म भोजन करे बईठ जाथे । नरियर प्रसाद चढ़ाथे । नरियर के प्रसाद बांटे बर देथे । एक दोना पत्तल म खीर, पूड़ी, दाल भात, लड्डू, बरा, सोंहारी, मोहन भोग पंडित रामाधीन देथे । समारू ह दुवारी के बाहर गली म रखे देथे । दोना म पानी दे देथे, दाई तंय पहिली परसाद पा । अतके दिन के संग म रहे बर रहिस । अंगना म आके भोजन परसागे रहय । समारू ह दूनों हाथ जोड़के भोजन करे बर परनाम करिच, भोजन पावा कहिस । सब पहुना मन ल परछी, कोठार म बईठार के भोजन कराथे ।

चन्दा देवी ह सब महिला मन ल भोजन कराथे । चन्द्रकला देवी ह चार बजे आथे । सब महिला मन से मिलथे अउ संग म बईठ के भोजन करथे । चन्दा देवी ह पूछ पूछ के भोजन कराथे । लगभग पाँच हजार आदमी मन भोजन करथे । चन्दा देवी के वाहवाही हो जाथे । अतका आदमी ल कोई नई भोजन कराय रहीन । भोजन करके सब महिला, पुरूस मन पहुना मन घर चल देथे । दिन म खाना पीना होगे रहय । समारू ह दसकरम के संग भांजा अउ गुरू बिदा घलो कर दे रहय । चन्द्रकला देवी ह रात दस बजे तक रहीस, रात म रायगढ़ चल देथे ।

रात आठ बजे से चौका आरती, मंगल भजन के कार्यक्रम सुरू होथे । रात भर चौका होथे, जय सतनाम, गुरू घासीदास बाबा के गुनगान होथे। घर, गाँव सतनाम मय होगे रहय । मंगल भजन सुबह पाँच बजे तक चलत रहीच । सब चौकहार मन ल पाँच सौ एक रूपिया चन्दा देवी ह भेंट देथे । जीप म बईठ के बिलासपुर भेज देथे । सब पहुना मन चाय पीके अपन-अपन घर चल देथे । समारू के सगा संबंधी मन रूक गे रहय । समारू ह टेंट अउ रसोईया के हिसाब-किताब कर देथे । चन्दा देवी रात भर जागे रहय । दिन के बारह बजे तक सोवत रहय । समारू ह खाय बर जगाईच । आँखी ल रमजत उठीच । सब पहुना चले गिन, चन्दा पूछीच । समारू कथे, हाँ सब चल दीन ।

चन्द्रप्रकास अउ एम. एल. भारद्वाज जीप म रायपुर अउ दुर्ग चल देथे । सब पहुना एकेक करके झर जथे । घर सुन्ना के सुन्न हो जथे । चन्दा देवी चुनाव के तियारी घलो करत रहीस । चन्दा देवी ह मधु, सरला, क्रांति ल लेके सारंगढ़ क्षेत्र के गाँव के दउरा कर बर गीच । लगभग बीस गाँव के महिला मन से मिलिच । सब समर्थन दीन । गाँव-गाँव के मतदाता सूची घलो कार्यकर्ता मन ल दिवाईच । चुनाव के तियारी सुरू होगे । गाँव-गाँव के दीवार म लिखे के सुरू हो रहय । चन्दा देवी ह धूल-धक्का म सनाय रहय । गाँव-गाँव, घर-घर, दुवारी म हाथ जोड़ के वोट माँगय । अच्छा समर्थन मिले ल लगिच । चन्दा देवी के पक्ष म हवा चल गिस । सरपंच अ पंच मन चन्दा देवी ल टिकट देय पर पार्टी से माँग करीन । चन्दा देवी टिकट बर आस्वस्त होगे । रायगढ़ म जिला कमेटी से वर्तमान विधायक मन ल टिकट देय बर प्रस्ताव पारित करके हाई कमान ल दिल्ली भेज देथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी के टिकट पक्का होगे रहय ।

चन्दा देवी सारंगढ़ क्षेत्र के दउरा करके चन्द्रकला देवी से मिले रायगढ़ बस म चल देथ । संग म मधु भी रहय । चन्द्रकला देवी निवास म मिल जथे । चन्द्रकला कथे, चल बहिनी पार्टी कार्यालय जाके देख लेथन, काकर नाव भेजे गे हे । पार्टी के निरदेस अनुसार जिलाध्यक्ष ह वर्तमान विधायक मन ल टिकट देय के अनुसंसा करके भेज देय रहय । ओकर कापी चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी ल देथे । मधु कथे, महूँ ल सरिया से टिकट देवव । चन्द्रकला देवी ल नई मिलही त मोला टिकट देवावव । अध्यक्ष महोदय कथे, वर्तमान विधायक, मंत्री के रहत दूसर ले टिकट नई मिलय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के टिकट पक्का होगे । पार्टी ओही मन ल टिकट देही । चन्दा देवी कथे, बहिनी मधु दीदी के रहिते कईसे तोला टिकट मिलही । मधु कथे, मंय तो मजाक करत हंव । मंय तो अभी नगर पालिका के अध्यक्ष हंव । तीन साल अभी कार्यकाल बांचे हे । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी अभी काम करे के अवसर मिले हे । नगर के बिकास के काम करावव । भोपाल चलके अनुदास रासि स्वीकृत करावव । मधु कथे दीदी बिना कुछ दिये अनुदान रासि नहीं मिलय । चन्द्रकला कथे, बहिनी जो भी लगय रासि ले आवव । एडजेस्ट करा लेहा । कोन अपन घर से देहा, नगर पालिका से निकाल लेहा । मधु कथे, जब भोपाल जाहा त महूँ ल ले जाहव ।

चन्द्रकला देवी अपन निवास आ जाथे । पुस्पा देवी, रमौतीन, बेटी के भोजन के अगोला म बईठे रहय । पुस्पा कथे, बेटी अतका देरी कईसे कर देय । चन्द्रकला कथे, दाई पार्टी कार्यालय गे रहेन, देरी होगे । चन्दा अउ मधु घलो साथ म हे । दू थाली अउ लगा । चन्दा पूछथे, बहू के का होईच । दौनामांजर ह थाली म भोजन ले के आईच । बड़ पेट निकले रहय । चन्दा के पाँव परिस । दीदी अब दिन लकठियागे, आठ दिन के भीतर हो जाही । चन्दा कथे, चन्द्रकला दीदी ऐकर पेट म जुड़वा बच्चा हावय अईसे लगत हे । दौनामांजर कथे, चन्दा दीदी देक तो कहाँ लुकाय हे । चन्दा ह कान लगा के सुनथे पेट ल छूथे । दू मुड़ी जानत रहय । दौनामांजर चलत फिरत बच्चा जनमही कहत रहय । चन्दा कथे, अब ऐला अस्पताल म भरती करा देवव, पेट ह सिंधियागे हे, दू-चार दिन म पीरा उठ जाही । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ह भोजन परोसथे । खाना खाके चन्दा अउ मधु रायगढ़ से सांरगढ़ चल देथे ।

दौनामांजर के रतिहा पीरा उसल गे । कहिना रमरमावत (दरद) रहय । पुस्पा रमौतीन दाई, चन्द्रकला ह दौनामांजर ल चलावत रहीन । दरद बाढ़बे नई करीच । बिहनिया होगे । दौनामांजर ल नहवाईन, शौच कराथे । चाय-नास्ता घलो कराईन । दरद ह थोड़-थोड़ बाढ़त रहय । चिल्लाई शुरू कर दीच । चन्द्रकला कथे, दाई हो दौनामांजर के पीरा ह बाढ़त हे, अस्पताल म भरती करा देथंव । रमौतीन कथे, बेटी लईका के मुड़ी हे तीरम आगे हे । बने जोर से कांखही त लईका बाहर आ जाही । चन्द्रकला सिरहाना म बईठ के ढांढस बंधावत रहय । दौनामांजर बने जोर के धक्का दे, लईका के मुड़ी ह दिखत हे । चन्द्रकला ह छू के देखथे । पुस्पा दाई ह दूनों हाथ ले रास्ता ला चौड़ा करथे, जेमा बच्चा लउहा निकल जाय । दौनामांजर प्रसव पीड़ा म कल्पत रहय । पसीना-पसीना होत रहय । पुस्पादेवी अउ रमौतीन कथे, बेटी पीरा ह बाढ़गे बने जोर से धक्का दे । दौनामांजर दाई मन के हिम्मत से बने जोर के चिल्लाईच, मंय मर गेंव दाई हो, जोर से धक्का दीच । लईका के मुड़ी बाहर होगे । रमौतीन दाई ह दूनों हाथ डार के लईका ल बाहर निकालथे । दौनामांजर के हाय जी ह हलका लगिच । पाँच मिनट के बाद म पीरा उठगे । कसके धक्का लगाईच, दूसर लईका बाहर आगे । दाई, माँ बचावव । पुस्पा ह लईका ल पकड़के खीचिस, नोनी बेटी आय रहीस । रमौतीन ह बड़े लईका के हाथ पाँव ल दबावत रहीस । लईका ह ऐंव-ऐंव रोय लगीच । दूनो लईका ह स्वस्थ, सुन्दर, तगड़ा रहय । पुस्पा अउ रमौतीन लईका ल सम्हारत रहय । चन्द्रकला ह गरम पानी गिलास म दौनामांजर ल पिलाईच पसीना अउ पीरा म अधमरा होगे हरय । चन्द्रकला ह हवा देईच कुछ देर बाद म होस आईच ।

रामदेव ह सुनईन दाई बुलाय हे कहिके बैकुंठपुर चल देथे । दाई नवा पत्ती से नाल काट के दूनो लईका ल अलग-अलग करथे । दौनामांजर के चेत पानी सींचे ले आथे । कपड़ा ल सम्हारे लगथे । चन्द्रकला कथे, अभी सोय रहय । दाई ह साफ-सफाई करके दौनामांजर ल कपड़ा पहिना के पलंग म सुला देथे । चन्द्रकला ह चाय बिस्कुट खवाथे । दौनामांजर एकदम ठीक होगे रहय । बातचीत घलो कर लगीच । दाई ह दूनो लईका ल दिखाथे अउ पास म सोवा देथे । दौनामांजर ह दूनों लईका ल छूईच अउ पियार करीछ । दूनों लईका मन माँ के स्पर्श ले गरम-गरम हवा ले नींद म सो जथे । तब तक दाई हर घर के साफ सफाई कर डारे रहय । चन्द्रकला ह लेडी डाक्टर अउ सिसु रोग विशेषज्ञ ल फोन करके बुलवा ले रहय । डॉक्टर मन जच्चा-बच्चा ल स्वस्थ कहीन । यदि कोई तकलीफ होही त बुला लेहा । डॉक्टर मन समझा के चल देथे । चन्द्रकला देवी दौनामांजर के सेवा म लग गे रहय । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ल खिलौना अउ वंस चलाय बर बेटा मिल गे रहय ।

रामदेव अउ कामदेव, चन्द्रसेवन बहुत खुस होईन । रमौतीन आस-पड़ोस म लड्डू बंटवाथे । बच्चा मन ल मिठाई देथे । बड़ दिन के बाद म घर म लईका जनम होय रहय, ओहू म जुड़वा बेटा अउ बेटी । दुगुना खुसी होय रहय । चन्द्रसेन बहुत खुस रहय । तीन घंटा बाद लईका मन जागीच अउ ऐंव-ऐंव रोय लगीन । रमौतीन ह कथे, लईका मन भूख म रोवत हे । दौनामांजर ल जगाईच, बेटी उठ अ लईका मन ल दूध पिलाव । दौनामांजर ल कथे, बेटी ढेठी ल गरम पानी म धोले मईल ह निकल जाही । थोरक दबाके ढेंठी ल । दूनों ढेठी म धूध भरे रहय । एक ढेंठी ल बेटा के मुँह मा डारिच । चुमुल-चखल के दूध पीय लगथे । मस्त दूध पी के सोय लगथे । दूसर ढेंठी ल बेटी के मुँह म ओधाथे । चखल-चखल करके दूध पीये लगथे । पेट भर दूध पी के दाई के गोदी म सो जाथे, दौना मांजर ह दूध पिलाके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह फोन करके दुबारा पूरनिमा ल बताथ, चन्द्रसेन के जुड़वा लईका होय हे । कालि तंय ह रायगढ़ आ जा । चन्द्रप्रकास ल रायपुर फोन म बताथे । दुर्ग म चन्द्रप्रकास के ससुन ल छट्ठी के नेवता देथे । चन्द्रसेन ह दमउदहरा जाके ससुर अउ सास ल बताथे, बड़ खुस होथे । छट्ठी के नेवता चन्द्रकला देवी ह सरिया अउ सारंगढ़ के महिला मन ल देथे । चन्दा देवी ह मधु के संग पहिली के आगे रहय । सबे सगा-संबंधी, जान-पहिचान वाला मन ल नेवता दे देथे । चन्द्रकला देवी ह छट्ठी के तियारी म लग जथे । टेंट वाला ल पंडाल लगाय बर बोल देथे । रसोईया ल दू हजार आदमी के पकवान, भोजन बनाय के आदेस दे देथे । छट्ठी के तियारी पूरा हो जथे । दौनामांजर ल छः दिन म गरम पानी से ओखद जड़ी बूटी डाल के पकाय पानी म नहवाथे । नवा लूगरा, पोलखर पहिना के घर के कुल देवता, तुलसी चौरा म अगबत्ती, धूप-जला के पूजा कराथे । दौनामांजर ह पुस्पा, रमौतीन, रामदेव, कामदेव, चन्द्रकला देवी, चन्दा देवी, पूरनिमा, अपन ददा अउ दाई अउ सब बड़ सियान के पाँव छू के पैलगी करिच । सब आसीस दीन, दूधो नहाओ, पूतो फलो । चन्द्रकला देवी ह छाती से लगा के माथा ल चूम लेथे । घर म आनंद मंगल होत रहय । घर म धून-धड़ाका होत रहय । दौनामांजर ल दूबराज धान के भात-दार, मुनगा-बड़ी के साग भोजन म देईन । घर म सुद्ध घी से बनाय लड्डू जेमा काजू, किसमिस, बादाम छोहारा, लौंग, इलायची डाले गे रहय । करायत, तिल, अलसी, सोंठ के लड्डू, घी म बनाय रहय । माँजर ह थोरिक थोरिक चीख के देखिच । कांके पानी बड़े ओखद जड़ी-बूटी, खस औसधियुक्त पेय पीईच । सब पहुना मन ल काके पानी, लड्डू, दार-भात, सब्जी, हजार आदमी मन ल खवाईच । मस्त सुवागत सतकार करीन । चन्दा देवी अउ मधु मन बढ़िया सोहर गीत घलो गाईन अउ नाचिन । पूरनिमा, प्रेमलता, चन्द्रकला देवी लईका मन ल गोदी म ले के मस्त नाचिन, आनंद मंगल मनाईन ।

रायगढ़ सहर के नेता, अधिकारी, कर्मचारी अउ कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, एस. डी. एम., थानेदार सब मैडम ल बधाई दीन । चन्द्रसेन ल बधाई दीन । भोजन करके सब अपन-अपन घर जल देथे । निकट के नातेदार मन रात रूकथे । बांचे मनखे मन रात तक घर चल देथे । चन्दा देवी अउ मधु सरिया के मन जीप म सांरगढ़, सरिया चल देथे । मस्त चहल-पहल घर म रहय । चन्द्रप्रकास अ पूरनिमा के चार-चार बच्चा मन धमा-चौकड़ी मचाय रहय । घर भरे लगय । घर म खुसी आनंद मंगल रहय । बहुत अकन भेंट, रूपिया-पईसा, कपड़ा, खिलौना, लूगरा मिले रहय । छट्ठी के खवाई-पियाई रात तक चलत रहीच ।

चन्द्रकला देवी ह सबके हिसाब-किताब चुकता करथे । सब पहुना मन ल चन्द्रसेन ह धोती, लूगरा, गमछा, लूंगी भेंट म देथे । दौनामांजर के दाई-ददा मन ह खुस होगे । अतका खरचा करबो त हमर खेत बेचा जाही । हमन तो गरीब किसान ठेठवार आन । अईसे ताम झाम नई कर सकन । बहुत अच्छा, बड़ नाम कमाही बेटी मंतरी ह । मजा आ जथे, देख के आदमी मन ल । खुसी म फूले नई समावत रहय, रामदेव अ कामदेव । पुस्पा देवी ह बेटा ल पावय अउ रमौतीन ह बेटी ल बढ़िया लोरी सुना-सुना के सुलावय, बढ़िया खिलौना मिल गे रहय, दूनों दाई के रहत माँजर ल कोई तकलीफ नई होवय ।

दौनामांजर ल बारा दिन म बरही नहवाईन । महिना भर गरम पानी म नहावय । धीरे-धीरे सरीर पक्का होत गईच, पहिली जईसे सरीर होगे । बढ़िया पुष्टिवर्धक लड्डू दवाई खाईच जल्दी देह ह भर गय । शरीर ह पेट ह पहिली जईसे होगे रहय । दूनो लईका मन पेट भर दूध बी के सोवत रहय । माँजर ह घरके काम बूता घलो करे लागय । माँजर के दूनों ढेठी म दूध भरे रहयष कमी नई होवय । चन्द्रसेन डेयरी के धन्धा म लग जाथे । फार्महाउस से अनाज, धान, राहर, चना, सरसों, गन्ना, फल, केला, पपीता आ जावय । बढ़िया खाता-पीता घर होगे रहय । पुस्पा अउ रमौतीन डोकरी मन लईका ल रोये नई देवय, बारी-बारी ले सब झन पावय ।

चन्द्रकला देवी ह नगर पालिका के जन्म-मृत्यु पंजीयन के कर्मचारी ल बुला के पंजीयन करवा देथे । बेटा के नाम राजेन्द्र प्रसाद अउ बेटी के नाम कमलाबाई लिखवा दीच । चन्द्रकला देवी के घर टिकट मंगईया मन के भीड़ जुटे लगीच । पूरा छत्तीसगढ़ से पारटी कार्यकर्ता मन आय लगीन । सबो के आवेदन ले के बायो डाटा लेके, पारटी कार्यालय भेज देवय । हर समय भीड़ बने रहय ।

चुनाव आयोग ह चुनाव तिथि के घोसना कर देथे । पैंतालिस दिन पहिली राजपत्र म छप जथे । चुनाव के तारीख पक्का हो जथे । नामांकन के तारीख म चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी अपना समर्थक महिला नेता मन ल ले के नामांकन परचा भर देथे । दिल्ली म कार्यसमिति के बैठक म पूरा विधायक मन ल टिकट देय के घोसन हो जाथे । दूर दिन समाचार पत्र म चन्द्रकला देवी ल सरिया क्षेत्र से अउ चन्दादेवी ले सांरगढ़ से टिकट मिले के खबर छपे रथे । पुरूस वर्ग के नेता मन बहुत विरोध करके पारटी छोड़ देथे, पर पारटी ह नीतिगत निरनय ल नई छोड़य । वर्तमान विधायक ल पारटी टिकट देथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के नामांकन ल सही पाथे । विरोधी पक्ष के नेता मन नया चेहरा ल टिकट देथे । सरिया विधानसभा क्षेत्र से चन्द्रकला देवी, रामचन्द्र चौधरी, जवाहर-नायक उम्मीदवार रहय ।

सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चन्दा देवी वारे, सत्ता पक्ष से, विपक्ष से सेरसिंह, निरदलीय राम भजन जोलाहे उम्मीदवार रहय । नामांकन वापस ले बर सोचें रहय । कई निरदलीय महिला मन भरे रहय । मान-मनोवल से नाम वापस ले लेथे । चुनाव के महासमर म चन्दा देवी कूद जाथे । पहिली चुनाव के अनुभव ह काम आईच । गाँव-गाँव, गली-गली, घर-दूवारी म वोट मांगय । रात-दिन धूल-धक्कड़ म फदके रहय । बड़ भिनसार चाय पी के निकल के रात 12 बजे के बाद रात म घर आवय । न खाये पीये के फिकर न नहाय धोय के । चन्दा देवी चुनाव के महासमर म कूद पड़ीच । समारू ह चुनाव के कमान ल सम्हारे रहय । मधु ह नगर पालिका क्षेत्र के जवाबदारी लेय रहय । गाँव गाँ के महिला मंजल ल सक्रिय करके चुनाव के प्रचार म लगा देय रहय । सारंगढ़ क्षेत्र के हर गाँव के एक राउंड दउरा एक हफ्ता म चन्दा देवी पूरा करीच । पाँच ठन जीप, टेक्टर, कार, चुनाव प्रचार म लगाय रहय । चुनाव कार्यालय गाँव गाँव म गाँव के महिला मन चंदा देवी के पक्ष म पीरा कसके चुनाव समर म कूद गे रहय । चन्दा देवी ह पोस्टर, बेनर के बेवस्था अउ रूपिया, पईसा, खाय पीये के बेवस्था घलो कर देय रहीस ।

चन्द्रकला देवी ह रायगढ़ से सरिया म निवास बना ले रहीस । सरिया म चुनाव कार्यालय खोल दे रहिस । चुनाव के कमान पुस्पा दाई सम्हारे रहाय । पूरनिमा ह जबलपुर से आ गे रहय । कामदेव कका, गफ्फार चाचा, अमृत जोसी चुनाव प्रचार करत रहय । लगातार गाँव गाँव घर-घर अंगना म बईठक, आम सभा लेवय । परछी, चंउरा, चौपालगुड़ी, म धुआंधार प्रचार करत रहय । चन्द्रकला देवी ह दस जीप, सायकल, मोटर सायकल, टेक्टर, बैलगाड़ी चुनाव प्रचार म लगाये रहय । सरिया क्षेत्र, चुनावी पोस्टर बैनर से पट गे रहय । सरिया क्षेत्र म चन्द्रकला देवी के पक्ष म हवा चल गीस । सब महिला मन चुनाव प्रचार म कूद गीन । बहुत बढ़िया समरथन मिलत रहय । चन्द्रकला देवी ह महिला ससक्तिकरण बर अच्छा-अच्छा काम करे रहय । गाँव के विकास, उद्योग, कृषि, बागवानी, सिंचाई, स़ड़क, रोजगार धंधा म बहुत काम कराय ले चन्द्रकला देवी के जय जयकार होत रहय । सरिया म एक तरफ हवा बह गे । चारों मुड़ा चन्द्रकला देवी ल जीताय के समर खाईन, बढ़िया चुनाव प्रचार चलत रहीस ।

सरिया म चुनाव कार्यालय म भंडारा खोल दे रहय, कार्यकर्ता मन भोजन कराय अउ चुनाव प्रचार म जावय । सुबह खाना खा के जावय अउ आधा रात म आवय । अच्छा माहौल बन गे रहय . चन्द्रकला देवी ह बड़े नेता के संग सभा म रहय । चुनाव मतदान दिन सब मतदान केन्द्र म महिला एजेंट रहय । जादा से जादा महिला मन मतदान करीन। सरिया क्षेत्र म महिला मतदान के प्रतिसन 90 होईस अउ पुरूस मन के 60 प्रतिसत वोट पड़ीच । चन्द्रकला देवी, मतदान केन्द्र के वोट के धांधली झन होवय कहिके देखत रहीस ।

सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र म मतदान पचास प्रतिसत वोट पड़ीच । चन्दा देवी के पक्ष म हवा चले रहय । महिला मंडल के सदस्य मन अधिक से अधिक महिला मन वोट डालवाय रहय । चन्दा देवी जीत के प्रति आस्वस्त होगे । मत पेटी, सांरगढ़ से रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय म जमा हो जथे ।

चन्द्रकला देवी के भाग्य के फैसला, मत पेटी म बंद हो जथे । सरिया क्षेत्र म जबरदस्त मतदान के चरचा समाचार पत्र अउ टी. वी. म आय रहय । चन्द्रकला देवी जीत के प्रति आस्वस्थ रहय । पुस्पा दाई ह चुनाव के कोसाध्यक्ष रहीस । बढ़िया सब कार्यकर्ता मन खुस रहय । सब ला भोजन, डीजल, पेट्रोल के पईसा माँग अनुसार देवय । कार्यकर्ता मनु के उत्साह ह बढ़े रहय । चन्द्रकला देवी पस्त हो गे रहय । धूल धक्कड़, धाम म चेहरा मुरझा गे रहय । छप्पन साल म एकदम सौ साल के डोकरी कस दिखत रहय, सब कोई पहिचान नई पावय । दूसर दिन सुघ्घर साबुन से रगड़ रगड़ के नहाईच । केस ल सेम्पू से धोईच अउ काला रंग के मेंहदी लगाईच, चेहरा म क्रीम लगाईच अउ भोजन करके मस्त एक नींद सोईच । एक महीना के थकान ह दूर होईच ।
चन्दा देवी के चुनाव के कोसाध्यक्ष समारू रहय । पहिली चुनाव म घलो समारू ह देखे रहिस । अच्छा अच्छा चुनाव के काम निपट गे रहय । चन्दा देवी थकान से चूर हो गे रहय । दरद के गोली खाके सोईच । दिन भर सोवत रहिगे । समारू ह सबके हिसाब किताब करिच ।

कलेक्टरेट, रायगढ़ म मतगनना होईच । प्रथम चक्र से चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी आगू चलत रहीस । आखिरी चक्र म कई वोट मिले रहीस । चन्दा देवी ह बारह हजार से अधिक मत से जीत हासिल करीछ । चन्द्रकला देवी ह बीस हाजार मतों से विजयी होईच । दूनों महिला मन अपन सीट ल बरकरार रखीन । जय जयगार होगे, चन्द्रकला देवी के । भारत निर्वाचन आयोग से विजयी होय के परमाण पत्र कलेक्टर जिला निर्वाचन अधिकारी ह चन्द्रकला देवी ल देईच अउ बधाई दीच । चन्दा देवी ल विजयी घोसित करीच । प्रमाण-पत्र देईच अउ बधाई घलो दीच ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के जीत के खुसी म विजयी जुलुस रायगढ़ नगर म निकलिच । बधाई देवईया मन के तांता लगे रहय । रंग गुलाल, बैंड बाजा सहित विजय जुलूस पारटी कार्यालय से बाजार होके निवास स्थान समाप्त होईच । चन्द्रकला देवी सबो झन ल लड्डू बांटथे । जबरदस्त जुलूस रहय । पूरा सहर उमड़ पड़े रहय का लईका अउ का सियान । मजा आगे । घर म खुसी छा जथे । पुस्पादाई, रमौतीन, चन्द्रसेन, रामदेव, कामदेव, एम. ए. गफ्पार भाई, कृस्नचंद भारद्वाज झूम झूम के नाचिन, गाईन अउ मौज मस्ती मनाईन । चन्द्रकला देवी सब ल धन्यवाद करीच । सरिया अउ सारंगढ़ से आये महिला मंडल के सदस्य मन हिरदे ले आभार व्यक्त अउ धन्यवाद देईच । सब अपन घर जीप म बईठ के चल देथे ।

चन्दा देवी ह सांरगढ़ के महिला अउ पुरूस कार्यकर्ता मन ल तीन जीप म ले जाथे । सारंगढ़ म विजय जुलूस रात म निकलिच । रंग, गुलाल, ढोल-तासा बाजत रहीस । जुलूस, सहर घूम के रानीसागर निवास म खतम होईच । सब ल चन्दादेवी ल लड्डू बांटिच । हाथ पांव के अंगना के जैतखाम म अगरबत्ती जला के पूरा करीच । माटी के दीया जला के रखीच । जय सतनाम बाबा गुरू घासीदास जी की जय बोलाईच । आकास गूंज उठीस । बाबा जी के परनाम माथा टेक के करीच अ माँगिच, बाबा जी सहायता करबे । मय तो तोरे भरोसा हंव, समारू अउ पूरा परिवार मिलके पूजा आरती करथे । घर म आनंद खुसी छा गे रहय ।

दूसर दिन अखबार म सत्ता पक्ष के करारी हार के समाचार पत्र छपे रहय । मध्यप्रदेश के मुख्मंत्री सहित आधा दर्जन मंत्री, विधायक चुनाव हार गे रहय । सत्ता प के करारी हार से मुख्यमंत्री के जवाबदारी लेते हुए मंत्रीमंडल भंग करके मुख्यमंत्री पद से इसतीफा, राज्यपाल महोदय ल भेज देथे । राज्यपाल महोदय ह मुख्यमंत्री के निर्वाचन तक काम चलाऊ मुख्यमंत्री बने रहे के आग्रह करथे ।

चन्द्रकला देवी ह मंत्री पद से इसतीफा भेजवा देथे । प्रोटोकाल के कार अउ स्टाफ ल वापस कर देथे, विधायक रहिहूं कहिच । चन्दा देवी ह सब हिसाब किताब अउ सब कार्यकर्ता मन ल धन्यवाद घलो गाँव गाँव जाके देईच । पाँच साल के बात फेर वोट देहा कहिके निवदन करीच । चन्दा देवी ह भोपाल जाय बर रायगढ़ आ जाथे । चन्द्रकला देवी के निवास म आ जथे । पुस्पा देवी, रामदेव, कामदेव, रमौतीन, चन्द्रसेन, दौनामांजर मन विधायक जीत के आय ले बधाई दीन । चन्द्रकला देवी ह चुनाव आयोग ल व्यय के हिसाब घलो भेज देथे । दूसर दिन रायगढ़ से भोपाल जाय बर बिलासपुर चल देथे . बिलासपुर से भोपाल छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस म चल देथे । ट्रेन म नव निर्वाचित विधायक मन से परिचय होते । नवा-नवा विधायक चुन के जात रहय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी वारे, वरिष्ठ विधायक बनगे रहय । सब कोई नमस्कार परनाम करीन । गपसप करत बिलासपुर से भोपाल सुबह 6 बजे पहुँचीन । चन्दा देवी के संग समारू रहय . दो आटो म विधायक विसराम गृह पहुँचीन । चन्द्रकला देवी ह चाय पी के अपन बँगला, चौहत्तर बँगला चल देथे । चौकीदार, चपरासी मन दरवाजा खोलथे । चपरासी ल चन्द्रकला देवी बोलथे, सब समान ल पेक करके रख दो मंय बंगला एक-दू दिन म खाली कर देहूँ । पूरा बँगला खाली रहय । सुनसान, भूत बँगला जईसे खाली लगत रहय । मंत्री के बोर्ड, झंडा निकल गे रहय । स्टाफ के घलो ट्रांसफर होगे रहय ।

चन्द्रकला देवी ह लउहा स्नान करके पूजा पाठ, अगरबत्ती जलाईस । तियार हो के विधान सभा भवन चल देथे । विधानसभा सत्र म सपथ ग्रहण, नव निर्वाचित विधायक मन ल राज्यपाल महोदय, विधानसभा अध्यक्ष महोदय ह सपथ दिलवाथे । साम के वक्त विधायक दल के बैठक म बहुमत वाले पारटी के नेता ल मुख्यमंत्री चुने जाथे । दूसर दिन राजभवन म राज्यपाल महोदय ह मुख्यमंत्री अउ मंत्रीमंडल के सदस्य ल सपथ कराथे । चन्द्रकला देवी विपक्ष म जाके बईठ जाथे ।

चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी, विधानसभा भवन के बंगला आ जाथे । चन्द्रकला देवी ह विधायक विसराम गृह म चन्दा देवी के पास के कमरा ल आबंटन करा लेथे । चन्द्रकला देवी ह सब समान ल पेक करा डरे रहय . एक मेटाडोर म समान विधायक बिसराम गृह भेजवा देथे । बंगला के चाबी पी. डब्ल्यू. डी. के आफिस म जमा कर देथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी, न्यू मार्केट से साग भाजी, मीठा, खारा, नमकीन लेके निवास म पहुँच जथे । समारू ह सब समान ल जमवा देथे । चन्द्रकला देवी पड़ोसिन हो जथे ।

चन्दा देवी कपड़ा बदल के रंधनी म पहुँच जथे । बढ़िया दार-भात, सब्जी पकाथे । चन्द्रकला देवी ल भूरी ह खाना खाय ल बुलाथे, चल बड़ी माँ भोजन खाय बर । चन्द्रकला देवी, भूरी, कुसुवा, चन्दा देवी, समारू एके संग बईठ के भोजन करीन । खाना खा के गप मारत बईठे रहय । लईका मन सोगे । समारू घलो सोवत रहय । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी गप मारत-मारत सोचे लगथे । चन्द्रकला कथे चन्दा बहिनी, हमर दाई-ददा मन हमन के नाव चन्द्रकला ला सोच के धरीन होही, सोंच तो भला । चन्दा कथे दीदी मंय तो सउघे चन्द्रमा मोर नाव हे । चन्दा के सीतल किरण से सांति मिलथे । दिन के सूरज के घाम म आदमी तप जथे, परेसान हो जथे । सोचथे कब सूरज डूबे अउ चन्दा के सीतल, ठंडी किरण मिले । चन्द्रकला कथे बहिनी, तंय समूचा चन्दा आच, पर मंय तो ओकर कला आँव । जईसे परिवार, दूज, तीज, चौथ, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमीं, दसमी, अकादशी, द्वादसी, त्रयोदसी, चौदस, अमावस, पूरा अंधकार, कृष्ण पक्ष । सुक्ल पक्ष फिर वही क्रम अंतिम म पूनम के चांद । जईसे चन्दा के कला हावय वईसे ये मोर जीवन म अंधियार उजियार होईस । चन्द्रकला के आँखई ले आँसू झरर-झरर बहे लगथे । चन्दा कथे, का बात हे दीदी । चन्द्रकला कथे, बहिनी, मालूराम जी के याद आगे । दू साल से जादा होगे, संसार ल छोड़े । जब तक जीयत रहिस, का नई करे हे । सब कुछ ओकरे बनाय आय । मंय तो मंवरी रहेंव तभो ले एक ठन कुरिया घलो नई बनाय सकेंव ।

चन्दा देवी कथे, दीदी, मालूराम जी बने आदमी रहिस । तब तंय ह लोग, लईका के परयास काबर नई करे । चन्द्रकला कथे बहिनी, ओह पहिली ले बाल-बच्चेदार आदमी रहीस । ओला बच्चा नई चाहत रहीस । मंय भी सोचेव मंदिर के बिहाव ल समाज नई स्वीकारय । ओकरे सेती मंय ह नसबंदी आपरेसन करा डारे हंव, नई तो मोरो कई ठन लईका दनादन हो जातिच । चन्दा बहिनी, मोर किस्मत म प्रसव पीड़ा अउ लईका के सुख नई लिखे हावयष तब तो मंय बगठी हंव । उल्ला सांड़ जईसे घूमत-फिरत हंव . अब मरे के बेला मोला कोन पानी देही । मोर जतन कोन करही । सरीर अभी चलत-फिरत हे, जे दिन थाउ, अचल पड़ही त कोन जतनही । अब तो परिवार के जादा जरूरत हे, जवानी म खा पी लेंव ।

चन्दा कथे दीदी, जईसे जवानी कटिस, वईसे बुढापा घलो कट जाही । अब पेंसन घलो बढ़िया मिलही जीये लाईक ।कई झन पाले पोसे बर सेवा करईया मिल जाही । चन्द्रसेन भाई तो हे । चन्द्रकला कथे बहिनी, पुस्पा दाई, रमौतीन, रामदेव अउ कका कामदेव के उमर सौ बरिस जादा एक सौ पाँच बरिस होगे हे । सब एक संग आगू पाछू जाही । चन्दा कथे दीदी, सबे ल एक दिन जाना हे । अब तो पाँच साल तक राज कर सकत हन । पाँच साल तक भोपाल म रह सकत हन । चन्द्रकला कथे बहिनी, जब ले मोर संग धरे हंव मोला फायदा होय हे । चन्दा कथे दीदी, ऐ तो सतनाम साहेब के किरपा हे । कहाँ सोचत रहेन कि हमू मन एक दिन गोबर थपई से विधानसभा पहुँच जाबो । ऐ तो हमर किस्मत म लिखे रहीस, विधायक बन के ।

चन्द्रकला देवी ह गपसप मारत-मारत कलाई के घड़ी ल देखथे, रात के साढ़े दस बज के रहय । चन्दा बहिनी चल सोबो, काल जल्दी विधान सभा जाना हे । चल आज अतका गपसप मारे काली अ बईठको । चन्द्रकला देवी अपन कमरा म जाके सो जाथे । चन्दा देवी बाथरूम से हाँथ-पाँव धोके जाथे । समारू के नींद पड़गे रहय । चन्दा हे जगाथे, सोगे का जी । समारू कथे, हां थके रहेंव नीदं पड़गे । चन्दा ह कथे बच्चा मन सोगे के नहीं, देखथे सब सोगे रहय । चन्दा कथे, आज तेल मालिस कर भई । दो-तीन महीना म आज मिल हे । चन्दा देवी ह नरियर तेल निकाल के रखथे समारू ह आंखी ल रमजत-रमजत उठीच । चन्दाकथे मोर पीठ, कनिहा म तेल लगा के मालिस कर जी । चन्दा ह उलाट सो के मालिस पीठ, कमर म कराथे । बने दबा-दबा के मालिस कराईच । समारू कथे थक गेंव जी । चन्दा कथे, दे मंय तेल मालिस कर देथंव । पीठ, कमर, हाथ पाँव म तेल मालिस करथे । चन्दा के देंह एकदम गरम हो जाथे । मस्ती करके चंदा सांत हो जाथे । आत्मिक सुख के अनुभव करथे । समारू घलो आनंद लेके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी के रात म नींद नई पड़ीच, रात ऐती ल ओती कलथस करीस । चन्द्रकला देवी ह दिमाग म सेसे जीवन के काली छाया के चिंता सताय लगिच । चिंता के कारन रात म नींद नहीं पड़ीच । बिहंचे उठके मार्निंग वाक म सड़क म निकलगे । दो-तीन किलोमीटर घूमे गईच अउ वापिस आगे । तब तक चन्दा देवी के दरवाजा खुल गे रहय । समारू ह अखबार पढ़त हय । भूरी अउ कुसी ब्रस करत रहय । चन्दा देवी रंधनी म चाय बनावत रहय । अदरक, लौंग, इलाइची, कूटत रहय । चन्द्रकला देवी रंधनी म पहुँच जाथे । पीढ़हा म बईठ के रंधनी मचाय पीईन । समारू बर चाय भेजथे । भूरी अउ कुसुवा रंधनी म आ के बईठ के चाय संग म पीइन । बहुत बढ़िया चाय बनाय रहय, मजा आ गे चाय पीये म ।

चाय पीके चन्द्रकला देवी ह फ्रेस होय चल देथे । चन्दा देवी अउ समारू साग-भाजी के तियारी म लग जथे । लईका मन बर पोहा के नास्ता बनाथे । चन्दा देवी ह विधानसभा जाय बर स्नान करके तियारी करे लगथे । चन्द्रकला देवी लूगरा पोलखर पहिन के आ जाथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी पोहा के नास्ता करके विधानसभा जाय बर सड़क म आ जथे । पैदल चल के विधानसभा पहुँच जाथे । विधानसभा म मुख्यमंत्री ह सब मंत्री मंडल के सदस्य मन के परिचय कराथे । विधायक मन टेबल पीट के सुवागत करथे । विधानसभा म पूर्ण बहुमत मिल गे रहय । विधानसभा अध्यक्ष घलो सत्ता पक्ष के रहय । विधान सभा उपाध्यक्ष, विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य ल बना दिये जाथे । विधान सभा म मुख्यमंत्री जी द्वारा भोज दिये जाथे । दोपहर भोजनावकास म हास-परिहास कर भोज समाप्त हो जाथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी हर रेल्वे कूपन, बस कूपन, टेलीफोन एवं अन्य सुविधा के माँग करथे । अउ विसराम करे बर विसराम गृह आ जाथे । चन्द्रकला देवी कथे बहिनी, नींद लगत हे मंय जांथव सोहंव । चन्दा कथे ठीक हे महूँ सो जाथंव एक घंटा सो जाथे । चन्द्रकला ह पाँच बजे तक सोवत रईथे ।

चन्दा देवी के फोन नम्बर म चन्द्रसेन, रायगढ़ से फोन करथे अउ रोवत-रोवत बताथे दीदी, रायगढ़ सहर म रबड़ी खाय ले पचास आदमी बीमार हो के अस्पताल म भरती हे । होटल से पुस्पा दाई ह रबड़ी लाके, सियान मन चारों झन खाईन । फूड पायजनिंग होगे, उल्टी, दस्त, होगे । पूरा जहर सरीर म फईल गे । अस्पताल म चारों झन के मृत्यु होगे हे । मंय तो अनाथ होगे हंव । चन्द्रकला देवी ल आज छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से रायगढ़ भेज दे । चन्द्रसेन रोवत रोवत फोन रखिच । चन्दा देवी के गला सूख गे । झटपट चन्द्रकला देवी ह सांकल खटखटाईच, बेल घलो बजाईच । चन्द्रकला आँखी रमजत उठीच, का होगे चन्दा बहिनी । चन्दा बहिनी ह रोवत रोवत चन्द्रसेन के बात बता देथे । चन्द्रकला देवी गस खा के गिर जाथे । चन्दा देवी छींटा मारके होश म लाथे । चन्द्रकला देवी आँखी ले आँसू के धार बहत रहय । रूके के नाव नई लेत रहीस । चन्दा देवी कथे दीदी, चल रायगढ़ जाय ल पड़ही । चन्द्रकला कथे बहिनी, मोर तो रायगढ़ से दाना पानी अउ मातृ छाया उठगे । सब सियान मन मरगे । मोर घर ल कोन देखही, बम फारके होईच ।

समारू ह दूनों के सूटकेस म लूगरा, साया कुछ सामान भरके तियार कर देथे । रात के भोजन बर पराठा, सब्जी बना के रख देथे । चन्दा देवी ह चन्द्रकला ल पकड़ के रेल्वे स्टेसन ले जाथे । गाड़ी ह आधा घंटा लेट रईथे । चन्दा देवी ह दो टिकट कूपन से कटवाथे । ए. सी. म बर्थ आरक्षित मिल जाथे । भोपाल से रायगढ़ व्हाया बिलासपुर के टिकट बन जाथे । चन्द्रकला के हालत खराब होत रहय । चन्दा ह दरद के गोली डिस्प्रिन खवाथे अउ सो जा कहिथे । चन्द्रकला कथे जेकर घर चार-चार झन मर गे हे, कईसे नींद आही । मोर दाई-ददा, कका, मोर माँ पुस्पा के अकालमृत्यु होगे । चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास अउ मय अनाथ होगेन । चन्दा कथे दीदी, तोर तबियत खराब हे, थोरिक आराम करले । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस भोपाल से प्रस्थान करथे ।

चन्द्रसेन ह टेलीफोन से चन्द्रप्रकास ल बताथे । जल्दी काल आ जावव । चन्द्रप्रकास के हालत खराब हो जाथे । एक ठो माँ रहीस ओहू ह छोड़ के चले गे । चन्द्रप्रकास ह अपन ससुर ल दुर्ग टेलीफोन करथे । सब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुँचथे । चन्द्रसेन ह पूरनिमा ल सूचना देथे, पूरनिमा के हालत घलो रोवई म खराब होगे रहय । पूरनिमा, सुनील जबलपुर से कार म रायगढ़ तीन बजे तक पहुँचथे । चन्द्रकला अउ चन्दा, चन्द्रप्रकास, एम. आर. भारद्वाज अउ रिस्तेदार मन बिलासपुर से रेल म रायगढ़ तीन बजे पहुँचीन । चन्द्रसेन ह अपन ससुराल घलो पता भेज दे रहीस । दौनामंजर के रोवई म आखी सूज गे रहय, दूनों दाई के मरे ले । दौनामांजर के बच्चा मन अनाथ जईसे होगे । काबर दूनों मन गोदी म पावत रहय, खेलवाय, सोवावय, नहावावय, बढ़िया लईका मन बाढ़ता रहीन, अब कोन सहजोग देही । अड़बड़ रोईच । आस-पड़ोस के मन जुट गे रहय । चन्द्रसेन अउ दौनामांजर ल ढांढस बंधाईन ।

चन्द्रसेन ह चारों लास ल अस्पताल के मरचुरी म रखवा दे रहय । फूड पायजनिंग के पचास आदमी भरती होय रहय । होटल के रबड़ी के जाँच म पता चलथे, रबड़ी ठंडा करत समय छिपकली गिर के मर जाथे । रबड़ी के साथ मिल जथे अउ छिपकली के जहर से रबड़ी जहरीला हो जाथे । जतका झन रबड़ी खाय रहय मौत के मुँह म समा गे रहय । होटल मालिक ल गिरफ्तार कर जेल भेज दे जाथे । पुलिस ह एफ. आई. आर. दर्ज करके कारवाही करथे । रायगढ़ सहर अ पूरा परदेस म तहलका मच जाथे । दूसर दिन विधानसभा म ध्यानाकरसन के माध्यम से सरकार के धियान आकरसित करे जाथे मुख्यमंत्री ह जाँच के आदेश देथे । मृतक के परिवार ल आर्थिक सहायता एक एक लाख रूपिया के घोसना घलो करथे । पूरा देस भर रबड़ी खाय से पाचस आदमियों की मौत, खबर छपथे । टी. वी. न्यूज में घलो आ जाथे ।

चन्द्रकला अउ चन्दा देवी तीन बजे रायगढ़ पहुँचथे । वहाँ से सब झन अस्पताल लास लाये बर चल देथे । अस्पताल म कोहराम मचे रहय सब रोवई म मातम, सन्नाटा रहय । चन्द्रकला देवी ह लास ल देख के बहुत रोईच । दाई-ददा, कका, दाई के लास ल देख के बमफार के रोईच । सज के आँखी ले आँसू बहत रहय । घर के सियान के मौत होगे रहय । हजारों के भीड़ अस्पताल म रहय । अस्पताल से एम्बूलेन्स गाड़ी से लास गोसाला पास के निवास म लाथे । चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन, सुनील, एम. आर. भारद्वाज, गफ्फार भाई, बलदेव साव, डॉ. बिहारी लाल साहू, शिवरतन पांड़े, बिहारी लाल उपाध्याय, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, जगदीस मेहर अउ सब झन मिल के लास ल घर के अंगना म ले जाथे ।

चारों लास ल दू खटिया म सुला देथे । पानी से स्नान कराथे, शरीर म हरदी, चन्दन लगाथे । नया लूगरा, धोती पहिराथे । पुस्पादेवी अउ रमौतीन दाई ल टिकली, फुंदरी, चुरी पहिराथे । चारों झन के लाश ल चार मयाना म राम नाम सत्य हे, सबका यही गत्य हे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन के आँसू नई रूकत रहीस । रूंधे गला से चन्द्रसेन अउ चन्द्रप्रकास चारों मयाना म कंधा लगाथे । हजारों के भीड़ काठी म जाय बर जूटे रहय । कोतरा रोड के समसान घाट म चारों लाश ल जला के दाह संस्कार चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन करथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी विधायक, कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक, एस. डी. एम., तहसीलदार, थानेदार, नेता, अधिकारी मन पाँच लकड़ी डाल के दाह संस्कार पूरा करथे । लाश धू-धू करके जलत रहय । समासान घाट म दो मिनट मौन धारनकर श्रंद्धाजलि देथे । तरिया म नहाके कर घर आ जाथे । घर से सब अपन निवास स्थान चले जाथे । चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन हाथ जोड़ के परनाम, सब पहुना जो काठी म आय रहय, करथे ।

दौनामांजर घर वाला मन बर भोजन बनाथे, बुझे मन से सब भोजन करथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी विधायक से भेंट कराईया, सोक व्यक्त करईया मन के तांता लगे रहय । घर ह एकदम सुन्ना पड़गे रहय । छोट छोट लईका मन दादी माँ के कोरा बर अड़बड़ रोवय । चन्द्रकला अउ चन्दा देवी के कोरा म लईका मन चुप हो गीन . चन्द्रकला ह दूनों लईका मन ल चुमीच । मस्त हांस लगीन । चन्द्रप्रकास ह बहुत रोईच । दीदी, अब रायगढ़ सहर से मोर दाना पानी उठगे हे । अब ऐ संसार म कोई नईये । चन्द्रकला कथे भईया, अभी तो मंय जीयत हंव । चन्द्रसेन घलो हावय । तीनो भाई बहिनी हांवन । चन्द्रप्रकास कथे दीदी, पुस्पा दाई ह दू-तीन दिन पहिली टेलीफोन करे रहीस, कहिस बेटा, रायगढ़ के आधा मकान, घर, खेत-खार ल चन्द्रसेन के नाव म चढ़ा देहे हेव । आधा ह तोर नाव म हे । तोर ददा ह इंदौर के मकान ल बेच के रायगढ़ म मकान अउ खेत, फार्म हाउस खरीदे रहीस । तोर पिताजी तो कई बछर होगे हे मरगे हे । चन्द्रकला बेटी के ददा ह तोर धरम पिता ऐ । अउ रमौतीन ह तोर दाई ऐ । काबर ओकर दूध पी के पले बढ़े हच ।

चन्द्रप्रकास बताथे दीदी, पुस्पा दाई बह जानत रहीस कहिस बेटा मंय जादा दिन के संगवारी नो हंव । चन्द्रकला देवी ल अच्छा मानबे मुनबे । ओही ह माँ बाप के दुलार देही । चन्द्रकला के घलो लोग लईका नईये । तोर लईका के संग रईही । चन्द्रप्रकास बताईच दीदी, मंय तो पहिली से बता दे रहें । मोला रायगढ़ के धन-सम्पत्ति नई चाही । दीदी के नाव म चढ़ा हव । मोर कहे अनुसार चन्द्रसेन के नांव चढ़वा दे । चन्दा देवी ह लईका ल कोरा म लेके खेलावत रहीस, मस्त हांसत, रोवत, खेलत रहय ।

चन्द्रकला कथे भाई हो तीन दिन के अस (हड्डी) बीन लेथन । पुस्पा दाई के इच्छानुसार अस ल महानदी म चन्द्रपुर म सरो (विसर्जित) देथन । दस दिन म दसकरम खात-खवई कर देबो । चन्दा देवी कथे, ठीक कहत हे दीदी ह । सब सुनता हो के काम ल निपटाबो । तीन दिन म चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन, सुनील, कंठी राउत मारघट्टी जा के अस बीन लेथे । एक माटी के बरतन म रख लेथें । चारों झन के अस ल एके बरतन म रख लेथे । घर आ जाथे । जीप किराया म दू ठन ले लेथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी, पूरनिमा, प्रेमलात अउ चार महिला मन एक जीम म । दूसर जीप म चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन, सुनील, भारद्वाज, कंठी राउत अउ चार पाँच झन बईठ के चन्द्रपुर के घाट म महानदी म अस ल सरो देथे । चन्द्रकला देवी, चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास के आँखी ले आसू के धार फट पड़थे । आँसू टप-टप महानदी के जल म मिल जथे । जईसे पुस्पा बाई, रमौतीन दाई, रामदेव ददा, कामदेव कका के शरीर ह पंचतत्व म मिलगे । महानदी के जल म मिल के समुद्र म समा जाही, ओकरे संग चन्द्रकला देवी के आँसू ह जल म मिल जाथे । चन्द्रकला देवी ह बहुत रोथे । चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास, पूरनिमा के सर ले दाई ददा, कका के छाया ह उठ जाथे । घर के सियान मन खतम होगे । छत्तीसगढ़ के विख्यात कवि, भाई लक्ष्मण मस्तुरिया के गीत “मोर संग चलव ग” याद आगे –

कहाँ जाहव बड़ दूर हे गंगा,
सब जुर-मिल यही तरव ग,
मोर संग चलव ग ।

महानदी के सीतल जल धारा म स्नान करथे अउ गरीब मन ल भोजन कराथे । दसकरम के काम पूरा करथे । चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन दान घलो देथे । चन्दा देवी ह कथे दीदी, सब ल एक दिन जाना हे जो धरती म जनम लेय हे ओला एक दिन मरना होही । सबके आत्मा ह परमात्मा म जाके मिलगे । जईसे नदिया के पानी ह समुद्र म मिल जाथे, पता नई चलय कहाँ समा जाथे । चन्द्रसेनी देवी के दरसन पहाड़ी म करथे । पूजा पाठ करके चन्द्रपुर से रायगढ़ आ जथे । चन्द्रसेन ह घर के लिपई –पोताई घलो करवा लेथे । दू-चार दिन चंद्रप्रकास, डॉ. प्रेमलता ह दिया दिखाथे । पूरनिमा घलो बहुत रोथे । घर ल उज्जर करके पूजा पाठ घलो कराथे । सब पहुना मन अपन-अपन घर चल देथे । चन्द्रप्रकास ह चन्द्रसेन ल सब घर-द्वार सौंप के रायगढ़ से रायपुर, सुन्दर नगर आ जथे । चन्दा देवी घलो रायग़ से भोपाल चल देथे । बांच गे घर म चन्द्रकला देवी, चन्द्रसेन, दौनामांजर अ जुड़वा लईका मन । जुड़वा लईका मन ल कोरा नई मिलय सुन्ना होगे रहय . चन्द्रसेन डेयरी के धन्धा म लग जाथे । फार्म हाउस घलो देख लेवय । पुस्तैनी धंधा गउ माता के सेवा करई ह मुख्य धंधा बन जाथे । चन्द्रसेन दूधवाला, रायगढ़ अउ आसपास म बहुत परसिद्ध हो जाथे । चन्द्रकला देवी, दूनों लईका के पालन-पोसन म लग जाथे । सबके जीवन चक्र ह, समय चक्र के संग चले लगथे ।

क्रमशः

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भाग- सोलह



न्द्रकला देवी सो के उठिस, फ्रेस होके बेडरूम ले निकलिस । अंगना के कुरसी म बईठ के समाचार पत्र पढ़त रहिस । रायगढ़ संदेश अखबार चार दिन बाद पहुँचय । मुख्य पृष्ठ म समाचार देय रहय कि गोसाला के गाय, बैल, अज्ञात बीमारी से मृत्यु । बैकुण्टपुर स्थित गोसाल के लगभग एक सौ से जादा गाय अज्ञात बीमारी के चपेट में आने से अकाल, काल के गाल में समा गये । विगत एक मास से गायों के मरने का सिलसिला जारी था । अब एक भी जानवर नहीं है । गोसाला प्रबंधन कमेटी न चौकीदार, जो पुस्तैनी गाय की सेवा करते आ रहे थे को हटाकर दूसरे चौकीदार नियुक्त कर दियें है । चन्द्रकला देवी के आँखी ले आँसू आ जाथे । पीढ़ी दर पीढ़ी गउ माता के सेवा करत रहीन, आज खतम होगे । पुस्पा देवी भी रो डारथे । बेटी गोसाला के गाय के दूध पी के पले-बढ़े रहेंव । चन्द्रप्रकास, पूरनिमा, चन्द्रसेन, रामदेव, कामदेव सब झन दूध पी के रहेंव । चन्द्रकला देवी कथे, दाई पूरा परिवार के जीये के आधार रहीस, कम से कम गो माता के सेवा करत रहीन, आज अनाथ हो गेन ।

पुस्पा देवी कथे बेटी अनाथ कईसे होही । चन्द्रप्रकास डिप्टी कलेक्टर बनगे हे । ओहा अभी पाँच-सात-साल अभी अऊ नौकरी करही, का पता कहा बसही पता लगे हे ओहा रायपुर सुन्दर नगर म मकान ले डारे हे । चन्द्रकला कथे, ठीक हे दाई तभो ले । पुस्पा कथे, बेटी अभी जाके चन्द्रसेन के नाम म चार एकड़ जमीन ल चढ़वा देथंव । मकान के आधा चन्द्रसेन के नाम म हो जाही त सब झंझट ले मुक्त हो जाही । वईसे घलो चन्द्रप्रकास रायगढ़ म नई रहय, रायपुर म बसही । डॉ. प्रेमलता ह सरकारी डॉक्टर बन गे हे । अभी ओकर पन्दरा बछर नौकरी बांचे हे, चन्द्रप्रकास ओकर संग रईही । चन्द्रप्रकास ल धन सम्पत्ति के लालच नईये । पुस्पा कथे, बेटी चन्द्रप्रकास ह मोला कई बार बोल चुके हे माँ रायगढ़ के सम्पत्ति ल दीदी के नाम कर दे । मंय ओकर करजा ल नई चुका सकंव । ओकर परसादे मोला नौकरी मिले हे । यदि दीदी नई होतिस त मंय बेरोजगार घुमत रहितेंव । यदि मंय सारी उमर करजा उतारिहंव त नई उतरही । चन्द्रकला कथे, दाई मोर सगा भाई भी अईसना नई सोंचय ।

पुस्पा कथे, बेटी चन्द्रप्रकास ल दूसर काबर मानत हस, तोर दाई के दूध पी के बड़े होय हे । मोर कोख म दस महीना जरूर रहीस, फेर रमौतीन के दूध पी के जीये हे । दाई के दूध के करजा अभी नई छुटाय हे । रमौतीन बहिनी धन्य हे, अईसे माता बहुत कम होथे जऊन अपन लईका ल कम दूध पिलावय अऊ चन्द्रप्रकास ल जादा । चन्द्रप्रकास के नानपन म पेट नई भरय काबर, जादा उमर के बच्चा होय म दूध नई आवत रहीस । मंय दूध जरूर-जरूर पियावंव । मोर दूध नई आवत रहीस । मय रात-रात रोवत रहेंव । मोर बेटा ह कईसे बांचही । गाय के दूध पिलावव, पेट भर नई पीयय । मंय संसों म सूख के कांटा बन गे रहेंव, फेर भगवान के किरपा ले रमौतीन ह तोला जनम दिस । मोर जी ह हलका होगे । मोला उपाय सूझिस, मंय नौकरी म चल देथंव त लईका ल कोन देखही । डरावत-डरावत एक दिन रमौतीन बहिनी के पास गयेंव अऊ परेसानी बतायेंव । तोर बुआ घलो रहय, कहिस भउजी तंय कुछ पईसा महीना म दे देबे । हमन लईका ल पोस देबो । मोर बात बनगे मंय पहिली दिनी ही दू सौ रूपिया रमौतीन ल दे देंव । तोर बुआ टेटकी ह चन्द्रप्रकास ल गोदी म लिस, रमौतीन कहिस टेटकी दे दूध पीला देथंव । जईसे गोदी म लिस, चन्दा हांसे लगिस । मस्त दूध पेट भर भी के खेले लगिस । पहिली बार भर पेट दूध पाय रहीस । मंय मुस्कावत अपन सिक्षकीय काम म चल देंव । साम के आंव त मस्त खेलत मिलिस । रमौतीन कहिस, दीदी मस्त दूध पीयत हे पर मोर टूरी के पेट नई भरत हे । मय कहेंव बहिनी तोर टूरी के जूठा बांचे दूध ल पिया देकर । मोर बेटा बांच जाही । अईसे करके चन्दू अऊ चन्द्रकला बड़े होय हे । पुस्पा के आँखी ले आँसू टपक जथे, चन्द्रकला घलो सुन के रो डारथे ।

चन्द्रकला कथे, दाई कालि रायगढ़ जाबो, पी. ए. ल टिकट आरक्षण कराये बर कहि दे हंव । दूसर दिन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर जाय बर रेल्वे स्टेसन पहुँच जाथे, चन्दा देवी विधायक घलो स्टेसन म मिल जथे । भोपाल से बिलासपुर गप मारत, सोवत पहुँच जाथे, चन्दा बिलासपुर से रायगढ़ अहमदाबाद एक्सप्रेस से पहुँच जाथे । प्रोटोकाल से कार आय रहय, चन्द्रकला देवी, पुस्पा देवी बईठ गे कार म अउ चन्दा देवी ह जीप म सांरगढ़ चल देथे । चन्द्रसेन ह सूटकेस अउ समान ल दूसर जीप म भर के ले आथे । विभागीय अधिकारी, कर्मचारी एस. डी. एम. मन मैडम से भेंट करके चल देथे । रमौतीन दाई ह बढ़िया नीबू के चाय पीलाथे । रमौतीन कथे, बेटी गोशाला के सब गाय मन बीमार म एक महीना के भीतर मरगे । एक महीना होगे, दूध कईसन होथे नई जानन । तोर ददा ह उदास-उदास बईठे हे । तोर कका घलो के पास कोई काम नईए । एक सांस म रमौतीन अपन दुःख ल सुना डारथे । गोशाला ह जीये के आधार रहीस, ओहू लसेठ जी ह छोड़ा दे हे । चन्द्रकला कथे, दाई मोला सब मालूम होगे हे ओकरे सेती आय हंव । घबराय के जरूरत नईए । कोई उपाय सोंचत हंव, आज रात खाये के बेरा बिचारबो ।

पुस्पा कथे रमौतीन बहिनी काबर हदरत हव, घर म खेती किसानी हे ओला एक जूर मिलके करव । खाय के पुरता धान, गेहू, चना हो जाही । रहे बर दुमंजिला मकान हे । रमौतीन कथे, दीदी ये सब तो चन्द्रप्रकास के हे, हमर पास तो ये खपरा वाला मकान रहे बर हावय । सिर छिपाय के जगा हे । पुस्पा कथे, बहिनी ये सब तो मोरे आय चन्द्रप्रकास घलो तोर बेटा आय । चन्द्रप्रकास के सब धन सम्पत्ति ल चन्द्रकला दीदी के नाम करे ल कहे हे । चन्द्रकला ह कथे, माँ भाई के हिस्सा ल मंय नई खांव । यदि देना हे तो आधा हिस्सा ल चन्द्रसेन के नाम म करवा दे । पुस्पा कथे, ठीक हे बेटी जईसे चाही वईसे हो जाही । रात 9 बजे भोजन के बर परछी म पीढ़ा म लाइन से बईठथे । चन्द्रकला कथे, बाबूजी काबर मुँह ल ओरमाय हस, मंय तो हंव न । चन्द्रसेन ल एक बेटा कहिथस, बेड़े बेटा मंय हंव । बाबूजी मंय भोपाल ले सोंच के आय हंव के तुमन बर दूध डेयरी खोलिहंव । का विचार हे सब झन बतावव । चन्द्रसेन कथे, दीदी बहुत बढ़िया सोचे हस । ओतका म हम जीबो-खाबो । रामदेव, कामदेव अउ रमौतीन मन हाँ में हाँ मुड़ ल हला देथे । चन्द्रकला कथे, घर के पीछवाड़ा म पसुपालन बर एक परछी उतरवा देथंव, जेमा दस भईसी बाँधे जा सकय । चारा, भूँसा, पानी के बेवस्था रहय । फर्स ह पक्का रहय । भईसी के दूध ले बेचहा अऊ गोबर ल खाद बना के खेत म डारिहा, धान घलो जादा होही । सबके सलाह मसविरा हो जाथे, भात खा के सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह पी. ए. ल बुला के भारतीय स्टेट बैंक कृसि साखा, रायगढ़ से डेयरी उद्योग के लिये मैनेजर ल बुलवाथे । मैनेजर ह डेयरी के लिये एक लाख तक लोन देबर तियार हो जाथे । पचास हजार रूपिया सेड बनाये बर अउ पचास हजार रूपिया भंईसी खरीदे बर । चन्द्रकला देवी बैंक के मैनेजर ल फार्म चन्द्रसेन के नाव म भरवा देधे अउ गारेंटर अपन बन जाथे । पचास हजार रूपिया मार्जिन मनी जमा भी कर देथे । दूसर दिन मिस्त्री बुला के घर के पीछवाड़ा म परछी बनवा देथे । बैंक लोन म दस भंईसी मुर्रा नस्ल के हरियाणा से दो ट्रक म मंगवाथे । बैंक मैनेजर ह भैंस मालिक ल एक लाख के ड्राफ्ट दे देधे । भईसी मन के बीमा भी करवा देथे । सब भंईसी के कान म छल्ला पहिना देधे । दस भंईस के एक सौ बीस लीटर दूध होत रहीस । मस्त चारा-दाना, रामदेव अउ कामदेव अउ चन्द्रसेन खिलावय । दूध डेयरी चल निकलिस, एक साल भर म एक लाख रूपिया बैंक लोन ल छूट दीस । अच्छा दूध के धंधा ह चल निकलिस ।

चन्द्रकला देवी ह डेयरी के नाम – ‘सतनाम डेयरी’, प्रोप्राइटर ‘चन्द्रसेन यादव’ रखे रहय । ऐ बछर गेबर खाद डाले ले धान के फसल घलो जादा होईस । घर म धरे के जगा नई रहय । आयीस त लक्ष्मी ल बम्फर के, एकदम चकाचक होगे । रायगढ़ सहर म चन्द्रसेन दूधवाला के नाम से फेमस होगे । सुद्ध दूध, दही, मही, घी भी बनाय लगीन । आस-पास के सहर म घी, दही के माँग बहुत रहय । सतनाम डेयरी नाम के अनुसार काम भी करय । दूसर से दाम भी कम लेवय । पूरा परिवार जईसे गोसाला म काम करय वईसे सब जुर मिल के साफ सफाई, गोपर फेंकाई, दूध दुहाई अउ बेचाई । सतनाम डेयरी से ग्राहक मन संतुष्ट रहय । रामदेव यादव परिवार कई बछर ले गोसाला के दूध बेचत रहीन, सब सेठ, साहूकार, अधिकारी मन जानत रहिन ।

चन्द्रकला देवी ह दउरा म सरिया जाथे । गाँव-गाँव घर-घर लोगन से सम्पर्क करथे । कई विरोधी पार्टी वाला मन कहय, अब चुनाव आवत हे त घर घर घूमत हे अउ पाँच साल कहाँ रहीस । चन्द्रकला कथे, भाई हो तुमन जीतवाय रहय त मंय मंत्री बनगे रहेंव, मंत्री तो पूरा परदेस के होथे । मोर चुनाव क्षेत्र के साथ पूरा मध्यप्रदेस ल देखत रहेंव । मंय तो हर महीना आवत रहेंव, भले ही आप लोगन से नई मिल पायेंव । चन्द्रकला देवी नमस्कार करके आगे बढ़ जावय । महिला मंडल के सदस्य मन कर्मठ कार्यकर्ता रहय । जिंहा जावय महिला मन, उहाँ आरती उतार के सुवागत करय । महिला मंडल के सदस्य मन फेर चुनाव म खड़े होय बर कहीन । एक चुनाव म अ जीतवाबो । सरिया क्षेत्र म चन्द्रकला देवी के पक्ष म माहौल रहय । जतका बिकास चन्द्रकला के कार्यकाल म होईस, आज तक नी होय रहीस । चन्द्रकला देवी एक हफ्ता गाँव-गाँव के भारी दौरा करके सरपंच मन के दस्तखत कराके रख लेथे । चुनाव तियारी के शुरूआत कर देथे ।

गाँव के महिला मंडल के प्रमुख सदस्य मन ल पिछले चुनाव म प्रचार करे बर सायकल देय रहिस । सब कहीन ए साल अच्छा सायकल देबे, चन्द्रकला देवी । चन्द्रकला देवी कहिस, टिकिट मिले के बाद सब झन ला सायकल देहूँ । सब झन गाँव-गाँव, गली-गली परचार करीहव । चन्द्रकला देवी जनसंपर्क करके सारंगढ़, चन्दा देवी विधायक के पास जाथे । मधु, निर्मला, गुंजा सब महिला मंडल के सदस्य मन ल बुलवा लेथे । मधु नगरपालिका के अध्यक्ष बन जाथे । मधु अउ महिला मंडल के सदस्य मन एकमत हो के चन्दा देवी ल विधायक के टिकट फेर ए साल मिलय के प्रस्ताव पारित करीन । पूरा राज्य म महिला उत्थान के काम म सरिया अउ सारंगढ़ माडल बने हे । चन्दा देवी के मार्गदरसन अउ मेहनत के बल पर माडल बने हे । चन्दा देवी ह चाय नास्ता कराथे । सब झन संझौती बेरा म घर चले जाथे ।

चन्द्रकला कथे, मंय रायगढ़ जाथंव बहिनी । कार म बईठ के रात 10 बजे पहुँचथे । गनमेन अउ पी. ए. रेस्ट हाउस म रूक जाथे । चन्द्रकला देवी अपन घर म रूकथे । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ह रस्ता देखत रहीन । चन्द्रकला कथे, माँ मंय जेवन जे के आये हंव । चन्दा बहिनी जेवन बिना आन नई देवय । मोला एक गिलास गरम दूध देवव। हाथ मुंह धो के कुरसी म बईठ जाथे । पुस्पा दाई ह हाल चाल पूछथे, सब ठीक हे बताथे । चन्दा देवी विधायक हे ओकर घर म सब चीज उपजथे । मंय आधा दिन तो ओकर घर खाय हांवव, बढ़िया प्रेम से खिलाथे । गपसप मारत चन्द्रकला सो जाथे ।

रामदेव ह दूसर दिन रेल से सक्ती जाथे, सक्ती म दमउरहरा जाथे । उहा राउत परिवार म टूरी बाढ़े रहय, उमर तीस साल के उपर होगे रहय । सुन्दर गोरी नारी, ऊंच पूर, नाक-नक्शा बने रहय । रामदेव ह कंठी राउत ल कहिथे, तोर नोनी ल पसंद कर लेंव, मोर लड़का ल लेके रविवार के दिन आवत हंव । ओही दिन फलदान, सगाई, मुँह देखाई कराबो । रामदेव के बढ़िया सुवागत करथे । रामदेव दूसर दिन रेल से रायगढ़ आ जथे । रमौतीन अउ चन्द्रसेन ल बताते, कंठी राउत के दस एकड़ जमीन अउ पचास से जादा गाय, बईला हे, एक बदरी जंगल म चरे गय हे । बने-बने घर द्वार हे, पूरा घर ल ओही सम्हारत हे । बने चोर होगे हे । रमौतीन कथे, चन्द्रसेन घलो तो जादा उमर के होगे हे । पुस्पा देवी ह सुन के खुस हो जाथे । चन्द्रकला देवी घलो मीटिंग से आ जथे, बहुत खुस होथे । चला बहुत दिन के बाद म घर म बिहाव होत हे । रामदेव ह चन्द्रकला ल बताते कि बेटी ईतवार के दिन चन्द्रसेन ल लेके जाबो । फलदान के समान खरीद लेबे, एक जीप किराया म ले लेबो । चन्द्रकला कथे, बाबूजी तंय फिकर झन कर सब ठीक हो जाही ।

चन्द्रकला देवी ह पुस्पा देवी दाई ल बाजार ले के जाथे । बाजार से लूगरा, पोलखा दू जोड़ी सोना के अंगूठी, पैर पट्टी, झुमका खरीद लेथे । ईतवार के दिन सब झन कपड़ा पहिर के तियार हो जथे । चन्द्रकला देवी ह होटल से पाँच किलो मोतीचूर के लड्डू मंगवा लेथे । सेवफल पाँच किलो, केला, संतरा घलो डाली म रखवा लेथे । जीप अऊ कार म रायगढ़ से निकल जथे, सड़क खराब होय के कारण से दू घंटा म दमउदहरा पहूँच जथे । ठीक बारह बजे पहुँचथे । कंठी राउत, ह अपन सगा, संबंधी मन ल गाँव वाला मन ल बुला के रखे रहय । लगभग बीस आदमी जूरे रहय । घर के परसार म खटिया बिछा दे रहय, घर के भीतर परछी म खटिया चार पाँच ठन बिछा दे रहय । कंठी राउत अउ ओकर भाई महिंगल, सुधेराम, बुधेराम, गाँव वाला मन एक-दूसर के पायलगी करके जोहार करीन । महिला मन के घर के अंदर दौनामांजर ल लेके बैठाईस । बने घर समरे पकड़े रहय । दौनामांजर ह सबके टपाटप पाँव परिस । चन्द्रकला ह पहिचान लेथे, तंहि ह हमर बहू बनत हस । दौनामांजर लजावत हाँ म सिर हला देथे । महिला मन ललोटा म पानी देथे । गोड़ हाथ धोये बर कुआँ बारी कोती ले जाते, कुआँ से पानी निकाल के पैर धोवाथे । दो तीन एकड़ म बारी अउ खलिहान, कोठार रहय । बरे किसान, पसु पालक रहय । घर घलो चारों ओर घेराय रहय, अंगना के बीच म तुलसी चौरा रहय । अंगना म पथरी फरसी लगे रहय । कंठी राउत, आस-पास के सम्मानित किसान रहय । चन्द्रकला, पुस्पा देवी देख के खुस हो जथे । अंगना के परछी म बईठारते । दौनामांजर के दाई मंगली कथे दूकलहीन, समारीन, देवकी चार-पाँच महिला मन गाँव के आ जथे । पायलगी करके खटिया अउ पीढ़ा म बईठ जथे ।

कंठी राउत के घर के दूवारी म लाल बत्ती के कार देख के लईका मन के भीड़ लग जथे । गाँ म सोर उड़ जथे, कंठी राउत के घर मंत्री आय हे । गनमेन अउ पी. ए. गाड़ी म बईठे रहय । ड्राईवर ह लइका मन ल भगावत जाय, सब झन ह कार ल छू-छू देखय । धीरे धीरे स्कूल के गुरूजी, पटवारी, ग्राम सेवक, नर्स सबआ जाथे । कंठी राउत सब ल परछी म बईठाथे । सब झन ल चौंगी, बीड़ी देईस । सब झन जाग गे कि लड़खी देखे आये हे, आज फलदान हे । कंठी राउत ह बताईस कि रायगढ़ से आय हे, लड़का के बहिनी मंत्री हे । दौनामांजर के भाई सुखराम अउ कका महिंगल ह चाय-पानी लेके आईस । सब झन ल पिलाईस, कंठी राउत भोजन के पहिली से तियारी कर डारे रहय ।

रामदेव चन्द्रकला ल कईथे, बेटा चाय पानी तो पी डारेन, फलदान के नेंग करके जेवन जेबो । कारज हो जाय तो खाबो । कंठी राउत ल कईथे, बाबूजी ह कहत हे फलदान हो जावय, ओकर बाद खाना खाबो । कंठी राउत कईथे, बेटी पंड़ित महराज ल नई बुलाय हन, दूसर गाँव म रईथे । चन्द्रकला कईथे, बाबूजी हमन लाय हन न । पुस्पा पांड़े हावय, कारज पूरा कर देही । तुमन जईसे चाहत हंव । कंठी राउत ह अंगना म परछी म चादर बिछा देथे । एक डहार लड़की वाले, एक डहार लड़का वाले मन बईठ गे । पुस्पा पांड़े ह महाराज बनके कारज करीस । बीच म चौंक पुर के कलस मढ़ाईस, भगवान के फोटो रखीस, अगरबत्ती धूम के हूम दीस । वर-वधू ल बईठाइस । चन्द्रकला देवी ह कार से लट्टू, केला, सेव, जेवर-गहना ल मंगाईस । पुस्पा पांड़े ह दूनों झन ल अगरबत्ती जला के पूजा कराईस । एक-दूसरे के अंगरी म सोना के मुंदरी पहिनाईस, सब कोई ताली बजा के बधाई देईन । लड़की के गोदी भराई के रस्म घलो पूरा करीन । वर पक्ष के मन रामदेव ह सबसे पहिली दो सौ रूपिया वधू ल देईस अऊ आसीस देईस । दौनामांजर ह पाँव परिस । चन्दा देवी, कामदेव अउ पुस्पा देवी ह पईसा धराईन । वधू पक्ष के मन चन्द्रसेन ल रूपिया देईन । बर-वधू ल कहिन, सबके पाँव छू के आसीरबाद ले लेवव ।

पुस्पा देवी ह लड्डू, केला, सेव ल सब झन ल बंटवा देथे, बांचे लड्डू, केला, सेव ल घर म भेजवा देथे । समधी भेंट रामदेव, कामदेव, कंठी, महिंगल गले मिल के करथे । समधी भेंट के बाद सब जुटे सगा संबंधी मन ल जेवन जेय ल कहिथे । परछी म चादर बिछा के लाइन से बईठा देथे । महिंगल, सुधेराम, बुधेराम अउ ओकर लड़का मन भोजन परोसथे । इक्कीस प्रकार के पकवान, रोटी पोरसिन । छत्तीसगढ़ी भोजन खा के तृप्त हो जथे । गाय के शुद्द घी म पकाय रहय, फेर उपर के राहेर दार म चम्मच भर के घी डालय । कंठी राउत के जय जायकार होगे । सब झन भोजन करके बईठक म आ जथे । चन्द्रकला देवी ह सादी के मुहुरत कब करबे कहिस । पंचांग देख के पुस्पा पांड़े ह कहिस, बसंत पंचमी के दिन सादी के मुहूरत हे । कंठी राउत कहिस, ठीक हे । चन्द्रकला देवी कहिस, बाबूजी गायत्री परिवार के रीति रिवाज से नेंग होही, यदि तुमन चाहत होहू त गायत्री मंदिर म बिहाव कर डारबो जादा खर्चा नई होही । कंठी राउत कहिथे, तेल हरदी तो चढ़ाय ल पड़ही । चन्द्रकला कथे, अपन-अपन घर म वर-वधू के तेल-हरदी चढ़ाबो बस सात फेरा गायत्री मंदिर म होही । बिहाव तय हो जाथे ।

चन्द्रकला कथे, अब छुट्टी देवा जाय बर । दौनामांजर कथे दीदी दमउदहरा ऋषभदेव तीर्थ थोरकन दूरिहा म हे, चला देखा देथंव । कार, जीप म बईठ के दमउदहरा देखते, बहुत मनोहारी दृस्य रहय । पहार से जल प्रपात बन के पानी गिरत रहय । दहरा के रूप म पानी बारो महीना भरे रथे । साफ पानी, सीतल जल रहय । सामने के पथरा, पत्थर के चट्टान म पाली भासा म लिखे हावय । पं. लोचन प्रसाद पांड़े जी ह प्राचीन महाभारत, रामायण काल के बताय हे । बहुत प्राचीन सिलालेख हे । जैन धर्म के ऋसभदेव महाराज यहाँ तप किये थे । मैकाल पर्वत श्रंखला बहुत प्राचीन है जो कि अमरकंटक से रायगढ़ा, उड़ीसा, बिहार चले गय हे । बहुत मनोहारी स्थान हे, पर्यटन के लिए देस विदेस के पर्यटक आथे । दौनामांजर कथे, दीदी मंय रोजिना झरना म स्नान करे आथंव, बहुत मजा आथे । हमर कई बरदी गाय, गौरा ले चराय बर पहाड़ के अन्दर ले जाय गे हे, गरमी म नीचे लाहय । चन्द्रकला देवी कथे, तोर बिहाव अब होवत हे अच्छा लउहा-लउहा आबो । अब हमन ल रायगढ़ जाना हे, छोड़व । कंठी राउत ह सब झन ल धोती, लूगरा भेंट करथे । साम के पाँच बज गे रहय, दमउदहरा से सक्ती रात आठ बजे पहुँचथे । रात म जेवन जेके सो जथे । रमौतीन ल रामदेव कथे, बिहाव के तियारी कर, बसंत पंचमी म भांवर परही । रमौतीन कथे, कतका दिन बांच हे । रामदेव कथे, एक हफ्ता बांचे हावय । रमौतीन कथे, डोकरा अतका लउहा कईसे करबो तियारी । बिहाव पत्रिका छपवाय ल लगही । रामदेव कथे चन्द्रकला ह सब कर डारही, तंय संसो फिकर झन कर । तोर मईके मंय चल जाथों, पूरनिमा ल टेलीपोन से बुला लेबो । चन्द्रप्रकास ल टेलीफोन से सूचित करबो, सब आ जाही संसो झन कर । सब बढ़िया अच्छा ढंगसे हो जाही । रमौतीन कथे, बेटा के बिहाव करिहंव त संसो तो करना चाही । रामदेव कथे, बेटा के बिहाव बुढ़ापा म होत हे, मड़वा म बने नाचबे डोकरी । रमौतीन कथे, बेटा के बिहाव होथे काबर नई नाचिहंव, पागी छोर के नाचिहंव । मोर आखिरी बेटा के बिहाव होते हे । मोर दू टूरी मन के बिहाव म नाचे नई पायेंव । जरूर चन्द्रप्रकास के बिहाव म नाचे रहेंव । रामदेव कथे डोकरी सब ठीक हो जाही । रात म गप मारत सो जथे ।

चन्द्रकला देवी ह प्रिंटिंग प्रेस वाला ल घर म बुला के पत्रिका छापे बर आदेश दे देथे, दूसर दिन छापके देथे । चन्द्रकला के पी. ए. अउ स्टॉफ कर्मचारी मन नाम व पता लिख के डाक म डाल देथे । रायगढ़ के पत्रिका ल चपरासी अऊ चन्द्रसेन खुद जाके बाँट देते । चन्द्रसेन के कपड़ा घलो सिल के तियार आ जथे । बसंत पंचमी से तीन दिन पहले मड़वा गड़ जाथे । पूरनिमा ह जबलपुर से रायगढ़ चार दिन पहिली आ जथे । सुनील घलो साथ आ जथे । चार बच्चा के आय से घर किलकारी से गूंजे लगथे । चन्द्रप्रकास रायगढ़ आ जथे । डॉं प्रेमलता अउ चार लईका संग म लाय रहय । डॉ. प्रेमलता के माँ पिताजी घलो आय रहय । रमौतीन के मायके के भाई भौजी आगे । पुस्पा देवी ह सब लईका संग मस्त खेले लगिस । चन्द्रकला ह बिहाव के पूरा समान खरीद लिस । भोजन पकाय बर रसोईया चमन हलवाई ल लगा देधे । घर के अँगना म मड़वा गड़ गे, टेंट लग गे । घर के सामने बड़े टेंट म एक सौ कुरसी घलो लग गे रहय । एकदम झकास घर दिखत रहय । दूनो घर म झालर झिलमिलात, चमकत रहय । लाउडस्पीकर म बिहाव गीत बजत रहय । घर अंगना म आदमी, औरत, लईका भर गे रहय । बढ़िया खुसी के माहौल रहयष आसपास के पढ़ोसी मन आवत रहय ।

पुस्पा कथे, चूलमाटी के समय होत हे । चन्द्रकला ह रमौतीन दाई बर पोतिया लूगरा (कोसा), पुस्पा पांड़े बर पोतिया लूगरा, लूगरा कांध के डार के पाँव परिस । पूरनिमा, प्रेमलता अउ चन्दा देवी ल बनारसी लूगरा देईस । जतका पहुना आय रहय, सब ल लूगरा धोती देईस । पूरनिमा ह पर्रा म दीया जला के नवा लूगरा पहिर के निकलिस । प्रेमलता, चन्दा देवी, रमौतीन, पुस्पा देवी घलो नवा लूगरा पहनीस । जतका महिला पहुना रहीन सब लूगरा पहरिन । सुनील ह कुदारी, सब्बल माटी कोड़े बर चपराली ल पकड़वाईस । मुंडहर घर से पर्रा बोह के पूरनिमा निकलिस, पाछू-पाछू रमौतीन सब महिला मन संग बिहाव गीत गावत मड़ला ले निकलीन । चन्द्रकला देवी देवी ह चन्दा देवी के संग चलत रहीस । तरिया के पार म पहुँचीन । पीपर रूख तरी माटी के पूजा अगरबत्ती, धूप जाल के पूरनिमा ह करथे । प्रेमलता, चन्दा सब झन धरती माँ के पूजा करथे । सुवासा बने सुनील ह गैंती, सब्बल रखथे ओकरो पूजा, आरती उतारथे । गैंती ल पाँच हाथ पकड़ के माटी कोड़ के नेंग करथे ।

बिहाव गीत –
तोला माटी कोड़े ल नई आवय सुवासा धीरे-धीरे
अपन तोलगी ल छोर धीरे-धीरे

पाँच कुदारी मारके माटी खोदते । माटी ल रमौतीन दाई ह अपन अंतरा म झोंकथे । पुस्पा, प्रेमलता ह माटी अंचरा म झोंकथे । माटी पूजा के बाद गीत गावत, मंगल गीत गावत घर आ जथे ।
सुवासिन पूरनिमा ह बढ़ई घर से मंगरोहन लाथे । पहिली से बाजार ले कूड़ा, करसा खरीद के रामदेव ले आथे । रात आठ बजे चन्द्रसेन के तेल-हरदी चढ़ाते । तेल, हरदी, दाई, भउजी, काकी, मामी बहिनी सब तेल चढ़ाथे । बिहाव गीत से अंगना गमकत रहय । सब लईका मन खेलत-कूदत रहय । तेल चढ़ाय के बाद चन्द्रसेन ल मड़वा ले पूरनिमा अउ सुनील ह घर म ले जाथे । घर म बहुत दिन के बाद मड़वा गड़े रहय । घर म खुसी छागे रहय ।

बिहाव गीत –
एक गाँठ हरदी पीसे चक चंदन हो पीसे चक चंदन,
होत मोर दुलरू के बिहाव ।
एक तेल चढ़गे, लाला अहिबरन के हो,
लाला अहिबरन के ।

चन्द्रसेन के कपड़ा धोती, बनियान भींग गे रहय । हरदी, तेल से कांपत रहय । टावेल से पानी ल पोछिस अउ उपर से साल ओढ़िस । चन्द्रसेन घलो चरेर होगे रहय । रात म भोजन करके सोगे । जेला जहाँ दूनों घर म जगा मिलिस, सूतगे रहय । चन्द्रकला देवी, चन्दा अऊ प्रेमलता, पूरनिमा अलग कमरा म लईका मन ल लेके सूतगे । चन्द्रप्रकास, सुनील, समारू सब झन अलग कमरा म सूतगे । बांच गे रहय रमौतीन, पुस्पा रंघनी घर के परछी म सोगे । रामदेव अउ कामदेव, प्रेमलता के पिताजी एम. आर. भारद्वाज परछी म सूतगे । रात के बारा बज गे रहय, रसोईया मन घर चले गीन ।

बिहाव के दूसर दिन भर कई तेल हरदी चढ़ाईन । दोपहर म महिला मन हरदाही खेलिन । एक दूसरे ल हरदी, तेल लगाईन । पूरनिमा ह सुनील ल कस के हरदी लगाईस, सुनील घलो कम नई रहय ओहू ह कस के हरदी तेल लगाईस । चन्द्रकला देवी ल चन्दा देवी ल प्रेंमलता अऊ पूरनिमा हरदी लगा के तेल मालिस करीन । घर भर म लोग, लईका मन हरदी म पहिचान नई आवत रहय । सिरफ आँखी ह जुगुर जागर बरत दिखय । रामदेव, कामदेव ल रमौतीन लगाईस । एम. आर. भारद्वाज ल पुस्पा देवी ह समधी कहिके लगाईस, मड़वा म समधीन ल छुये के छुट रहिथे । पहिली बार तो समधी ल छुवत हंव, मंय तो बुढ़िया हंव समधी जी लगाय देवव हरदी । प्रेमलता के माँ आ जथे, कथे बने लगावव ह समधी । बुढ़वा ह जवान हो जाय । पुस्पा देवी ह परणाम करके चल देथे । प्रेमलता के माँ ह घलो हरदी-तेल पीठ म लगा देथे । सब झन मिल के तरिया म नहाय ल चल देथे ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी, प्रेमलता ह घर म स्नान कर लेथे, बाकी सब झन नहाय बर तरिया, नदिया चल देथे . सब झन अंगना म बईठ के जेवन खाथे । ठाढ़ बेरा म सरिया ले जमुना, महिला मंडल के सदस्य मन सारंगढ़ से मधु जीप म दस महिला के आ जाथे । चन्द्रकला देवी ल बधाई देथे, भाई के सादी बर । मधु महिला संगीत के बेवस्था म लग जाथे । सब पुरूष मन घर से बाहर चल देथे । फेर सुरू हो जाते महिला गीत संगीत । सिनेमा के धुन म बिधुन होके सब महिला मन मड़वा म नाचत रहय । पुस्पा देवी अउ रमौतीन घलो पर्रा धरके झूम के नाचिन । मधु कहिस, चन्दा अउ चन्द्रकला दूनो दीदी चलव नाचव । भाई के बिहाव करत हव, फिल्मी गीत म नचवाथे . घर म संगीतमय वातावरण म महिला मन आनंद लेथे । हास परिहास, नाटक, साहेब, दरोगा, कलेक्टर बन के मनोरंजन करीन । चन्द्रकला देवी ल कहीन दीदी तोर बिहाव नई होय हे, तेल हरदी नई चढ़े ऐ । आज तोला हरदी तेल चढ़ा देंथन । मधु, जमुना देवी, महिला मंडल के दस सदस्य अउ चन्दा देवी ह अंदर-बाहर कपड़ा के तेल हरदी लगा के किचकिचवा के नहवा देथे । सब महिला मन तेल-हरदी चढ़ा के नचवाईन, मस्त ठुमका लगा के नाचिस ।

मधु ह कथे, दीदी घर जाथन, मजा आगे आज । बहुत दिन म खेले कूदे म, नाचे गाय म । चन्द्रकला कथे, भोजन करके जावा न । रसोईया ल कथे, भईया सब झन ल भोजन करावव । दार-भात, सब्जी-पूरी खवाथे । खाना खा के सब महिला मन सरिया, सारंगढ़ चल देथे । चन्द्रकला कथे, परसो रिसेप्सेन रखे हन, सब झन ल लेके आबे । चन्द्रकला देवी से आफिस के कर्मचारी, अधिकारी मन बधाई देय आत रहय । पार्टी के नेता, कार्यकर्तागण मन बईठे, आवत जात रहय । कामदेव सब ला चाय नास्ता, फल मीठा खवावय, चाय पिलावय । मस्त धमा चौंकड़ी, लईका मन करत रहय । घर, अंगना, दूवार भरे रहय, घर म आनंद ही आनंद रहय ।

तीसर दिन दो बर अउ जीप, कार पाँच-छ ठन म लगभग दो सौ बराती ले के दमउदहरा पहुँच जाथे । बैण्ड बाजा स्पेसल ले जाय रहय । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा देवी, चन्दा देवी अउ कई बड़े अधिकारी, नेता मन ल कुरसी म बईठाय रहयष बाकी बराती मन ल दरी म बईठाईस । मस्त चाय पान, नास्ता कंठी राउत ह कराईस । बारात ल बाद म परघाईस । बिहाव के नेंग गायत्री मंदिर म गायत्री परिवार के अनुसार कराईस । सात फेरा म सात वचन लिन । पति पत्नी के अटूट बंधन म चन्द्रसेन अउ दौनामांजर बंध गे । चन्द्रकला देवी ल सब अधिकारी मन बधाई दीन । नेता, अधिकारी, कर्मचारी सब झन बधाई दे के अपन-अपन घर चल देथे । दिन म बिहाव पूरा हो जथे । दोपहर म भोजन कंठी राउत बढ़िया छप्पन भोग बनवा के रखे रहय । सब बरतिया मन ल अंगना अउ कोठार म बईठाय के शुद्ध घी के पकवान खवाईस । बरतिया मन छप्पन भोग खा के तृप्त हो जथे । घरतिया, बरतिया सब एक संग बईठ के दोना-पत्तल, पतरी म खाईन ।

दाईज म टीके रहय, झांपी, टुकनी, पाँच हजार रूपिया, पचहर दाईज, पाँच गाय लागत, पाँच बोरा धान, एक एकड़ जमीन देय रहय । चन्द्रकला कथे, बाबूजी हमन ल दाईज म कुछ नई चाही, ए मन ल हमन का करबो । रामदेव कथे, बेटी जो ले जा सकत हन ओला ले जाबो, बाकी धान, गाय ल रहेन देथन । जमीन ल चन्द्रसेन के नांव म चढ़ा देहा । दौनामांजर ल बिदा कराय के समय बहुत रोथे । दौनामांजर, माँ, भाभी, सहेली सबो के कले मिलके बहुत रोथ । लड़की मन आज से पहुना बन जाथे । बिदाई के नेंग करके चल देथे । बस, कार, जीप म बईठ के बराती मन दमउदहरा से रायगढ़ रात म आठ बजे पहुंचथे । सब अपन-अपन घर चल देथे । घर के पहुना मन बांचे रईथे, रात के भोजन करके सो जाथे ।

रामदेव रमौतीन ल कथे, कस डोकरी घर सुन्ना रईसे । मड़वा म बने डींड़वा नाचे के नहीं । रमौतीन कथे, काबर मंय डींडवा नई नाचिहंव, मोर बेटा के बिहाव होत हे । मोला अड़बड़ मजा डींडवा नाचे म आईस । अड़ोस-पड़ोस के महिला मन आ गे रहिन । बड़ नाचेन, सब महिला मन बने नाचिन, मजा आ गे । रामदेव कथे, ठीक हे टूरा के बिहाव म आनंद-मंगल मन म उछाह तो होना चाहिए । अब अंगना म कब मड़वा परही पता नहीं । रात म गपशप करत डोकरा डोकरी सो जाथे ।

दूसर दिन रिसेप्शन रखे रहय, चन्द्रकला देवी ह सरिया क्षेत्र के महिला मन ल निमंत्रण दे रहय । चुनाव होने वाला रहिस । सारंगढ़ अउ सरिया क्षेत्र के महिल मंडल के सदस्य मन बरदी के बरदी दल के दल आय रहय । चन्द्रकला देवी ह बढ़िया भोजन के बेवस्था करे रहय, बहुत पंडाल लगे रहय बिजली के रोसनी म जगर-मगर बरत रहय । पंडाल अउ सड़क म कई हजार के भीड़ जुटे रहय । गाँव वाला मन पंगत म बईठाय के, दरी म बईठाय के दोना पत्तल म भोजन खवाईस । दो से तीन हजार आदमी औरत मन खाना खाईन । चन्द्रकला देवी ल भाई के बिहाव के बधाई देत रहीन । वर-वधू ल गिफ्ट अउ लिफाफा घलो पकड़ावत जावय । रात के बारह बजे तक भोजन के बेवस्ता चलत रहीस । सहर के मेहमान मन ल एक पंडाल म बफे पद्धति से भोजन करवाईस । चन्द्रकला देवी के वाहवाही हो गे । रायगढ़ सहर म धूम-धाम से बिहाव होईस । अतका भीड़ कभू नही होय रहीस । पुस्पादेवी, रमौतीन, प्रेमलता, पूरनिमा, सुनील, चन्द्रप्रकास अऊ घर के पहुना मन सबसे आखरी म भोजन करीन । लईका मन बढ़िया सिनेमा के गाना म नाचत-झूमत रहीन, टूरा-टूरी मन डिस्को डांस नाचत रहीन । बड़े मन हांस-हांस के लोटपोट होगे रहीन । रात के एक बज गे, भोजन करके वर-वधू ल घर म ले जाथे ।

रमौतीन अऊ पुस्पा कथे, आज बने दिन हे सुहागरात बर, घर दे दव । पूरनिमा ह एक कमरा ल बढ़िया सजा देय रहय . चन्द्रसेन अऊ दौनामांजर के जीवन के सुरूवात सुहागरात से हो जथे, दो सरी अउ एक प्राण हो जथे । संग-संग जीये, मरे के कसम खाथे, दौनामांजर बहुत खुस हो जाथे । चरेर उमर के बिहाव होय रहय, गाँव के दुनियादारी ल सीख गेरहय . रात म गपसप करत सोगे । रात म देरी से सोय म बिहनिया 9 बजे जागीस । पूरनिमा ह चाय लेके गईस । पूरनिमा ह गुडमार्निंग कहिस, चाय बिस्कुट ल स्टूल म रख के आगे । दौनामांजर अऊ चन्द्रसेन फ्रेस हो के चाय पीईन । चन्द्रसेन कमरा म बाहर, सुनील, चन्द्रप्रकास अउ पहुना मन संग आके बईठ जथे । सुनील ह बधाई देथे । चन्द्रसेन कथे, सब ठीक-ठाक हे । अच्छा हे, चरेर उमर के बिहाव कतका जोर मारही, सुनील हांसत-हांसत लोटपोट हो जथे ।

चन्द्रसेन सब पहुना मन चाय-पानी पिलाय लगथे । मड़वा ह भरे रहय . लईका मन घलो सोय रहय . अड़बड़ नाचे-कूदे रहय । दस गियारा बजे तक सोवत रहीन । रमौतीन दाई ह दोपहर के भोजन के तियारी म लग जाथे । पूरनिमा ह दौनामांजर ल कथे, भउजी नहा धो के, पूजा-पाठ करके रंधनी म चल भात रांधे ल परही । दौनामांजर लउहा तियार हो जाथे । रमौतीन ह घर के देवता-धामी ल अगरबत्ती, धूप, होम देवाथे । तुलसी चौरा म दीया, अगरबत्ती से पूजा कराथे । फेर रंधनी घर ले जाथे समझाथे, बेटी मोर सास ह जो मोला बताय रहीस तोला बतात हंव, घर के चाबी ले । आज ले तंय घर के मालकिन अस । जो पका के देबे ओला मंय खा लेहूँ । पुस्पा देवी घलो समझाथे । दौनामांजर दूनों झन के पाँव म गिर जथे । पाँव परत हो दाई हाँ, मोला आसीस देवव । दूनों झन, दूधो-नहाओ, पूतो फलो के आसीस देथे । दौनामांजर ल उटा के छाती म लगा लेथे । रमौतीन कथे, बेटी हमन कतका दिन के पहुना आन, कतका दिन जीयत हन । तोर बेटा के मुँह देख के मरबो, तभे हमन ल मुक्ति मिलही । दौनामांजर ल रंधनी घर म सब समझा देथे ।

पूरनिमा ह भउजी के संग खाना बनाय लगथे । भउजी के कान म पूछथे, भउजी भईया ह बने मया करीस । भउजी हां म सिर हला देथे । पूरनिमा कथे दीदी जाग गे, रंघनी घर म आवत हे । चन्द्रकला देवी रंधनी घर म पीढ़ा म बईठ जथे । दौनामांजर पाँव छूथे, आसीस देथे । बछर भर म गोदी म बाबू खेलय । दौनामांजर ल छाती म लगा लेथे । खुसी के आँसू छलक जथे । चन्द्रकला देवी पीढ़ा म बईठ के चाय पीथे । साग ल पूरनिमा के संग साफ करे लगते, मटर ल छीले लगथे । बढ़िया ताजा मटर मीठ-मीठ लगत रहय । पूरनिमा घलो खात जावय । थोरिक देर रंधनी म बईठ के चन्द्रकला अपन कमरा कोती आ जाथे । सब पहुना मन संग अंगना म बईठ के काम बूता भोजन के बेवस्ता म लग जाथे ।

चन्दा देवी ह कथे दीदी अब बिहाव ह निपट गे, मंय ह घर जाहंव कहत रेहेंव . चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी नवा बहुरिया के हाथ के जेवन जेय के जाव । बेचारी ह कतका मेहनत करके भोजन बनावत हे । खीर, तसमई, पुड़ी, दार-भात, साग कतेक जिनिस के व्यंजन बनावत हे । चन्दा देवी कथे, दीदी बने हुसियार पतोथिया हस । मोर जहुरिया होही दौनामांजर ह । चन्द्रकला कथे, तंही ह उमर ल पूछ के बता । रंधनी घर म जा के दौनामांजर ल पूछथे, बहनी तोर जनम तिथि का हे । बताथे दीदी मोर उमर ह उन्तालीस, चालीस चलत हे । चन्दा कथे तब हो बहिनी पाँच बछर छोटे अस । चन्द्रकला कथे बहिनी एक बछर म दू लईका बिया डारही । जुड़वा होही त चार लईका मिल जाही । दौनामांजर सरमा जथे, दीदी काबर चार-चार लईका होवात हव ।अभी मंय खेले खाहंव, मौज मस्ती करे के बाद लईका बियाहंव । चन्द्रकला कथे, बहु तोर सास ह तोर लईका के मुँह देख के मरहूँ कहत हे, नई तो मोर आत्मा ह भटकही कहत हेत कईसे करबे । दौनामांजर कथे, भगवान जईसे हमन राजी हन ।

चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी रंधनी घर म पीढ़ा म बईठ के खीर-पुड़ी, बरा-भजिया, दार भात, साग खाते । बढ़िया सुवादिष्ट खाना पकाय रहय, दूनों झन मस्त भरपेट भोजन खाके आसीस, देईन . घर भर के पहुना मन ला भोजन कराथे । पूरनिमा, प्रेमलता, दौनामांजर बईठ के संग म खाथे । पूरा परिवार भोजन करके संतुष्ट हो के बधाई देथे । दौनामांजर मन लगा के जेवन बनाय रहय । लईका मन के किलकारी के घर-अंगना गूंजत रहय । भोजन करे के बाद म चन्दा देवी ह सारंगढ़ चल देथे । चन्द्रकला देवी पुहना, प्रेमलता, पूरनिमा के संग बईठ के गपबाजी ठट्ठा करेय लग जथे । दूसर दिन चन्द्रप्रकास, सुनील रायपुर अउ जबलपुर रेल से परिवार सहित चले जाथे । घर ह सुन्ना होगे रहय । घर के सामने पंडाल ह उजड़ गे रहय, बचे खुचे समान ल टेंट वाला मन ले जात रहय ।

चन्द्रकला देवी ह सबके हिसाब चुकता करीस । बिहाव म लगभग एक लाख के ऊपर खरचा होय रहय । चन्द्रसेन अपन डेयरी चलाय लगथे, डेयरी के धंधा से बने फायदा होत रहय । बैंक के करजा हर महीना किस्त म जमा करत जावय, दूध के धन्धा चल निकलथे । बढ़िया फायदा होवत रहय । खेती-किसानी से खाय बर आनाज धान, गेहूँ, चना तिंवरा हो जावय । घर म धन्य-धान्य के भंडार भर गे ।

चन्द्रकला देवी ह बिहाव के बाद सरिया विधानसबा क्षेत्र के भ्रमण म जाथे । सरिया के सारंगढ़ चन्दा देवी से मिले जाथे । सरकारी कार से जाय रथे, चन्दा देवी कथे दीदी चल तुरतुरिया वाल्मीकि आसरम देख दे । सब महिला मंडल ल ले के पिकनिक मनाबो । चुनाव घोसना होवईया हे, चुनाव के महासंगराम म कूद पड़बो । चन्दा देवी के बात मान के दूसर दिन सुबह से तीन जीप, कार म ले के सारंगढ़ से तुरतुरिया के लिये निकल पड़थे । सारंगढ़ से मिधौरी, भटगाँव, कसडोल से तुरतुरिया, बारनवापारा के जंगल म पहुँचथे । नदी के किनारे भोजन पकाय के जुगाड़ कर लेथे । सब समान उतार के रख देथे, सब कोई नदी नहाक के काली देवी के पहाड़ के मंदिर के दरसन करथे । वाल्मीकि आसरम म पूजा करथे, प्राकृतिक झरना से पानी तूरूर-तूरूर बहत रईथे बारों महीना ओकरे सेती नांव ह तुरतुरिया पड़गे ।

वाल्मीकि आसरम बहुत अच्छा, मनोरम स्थान घनघोर जंगल म हावय । पहिली जमाना म कईसे लोगन मन पहुँचत रहीन, बड़ चरज के बात ऐ । सीत ह लव-कुस ल ईंहें जनम दे रहीस । लव कुस के शिक्छा बाल्मीकि आसरम म होय रहीस । आसरम दरसनीय स्थान हे । तुरतुरिया के पास म बारनवापारा राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारन्य हे । सब महिला मन मिल-जुल के-भोजन पकाते । खेल-तमासा, नाच गाना घलो करथे, पिकनिक म मजा आ जथे । बढ़िया भोजन पत्तल म बईठ के खाथे । प्रकृति के गोद म, नदी के रेत म, अर्जुन पेड़ के जुड़ छांव म बईठ के मजा लेत रहिन । देस दुनिया के दूर, जंगल म मंगल मनावत रहीन । पिकनिक मनाय बर कालेज के छात्र मन रायपुर से आ जथे, महिला मन से धींगा-मस्ती करे लगथे । चन्द्रकला देवी कथे दीदी, बहिनी हो लउहा खाके घर चलव, सझौंती बेरा होत हे । फेर सांरगढ़ पहुत दुरिहा हे । चन्दा देवी सब महिला मन ल सकेल के कार जीप म बईठार के तुरतुरिया से अभ्यारन्य म सेर, भालू, हिरण, बनभईसा देखे चल देथे । अभ्यारन्य से एक घंटा बाद निकल के सारंगढ़ बर रवाना हो जथे ।

तुरतुरिया पिकनिक से महिला मन प्रसन्नचित रहय बहुत मौज मस्ती करीन । सब महिला मन चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी विधायक, मंत्री ल धन्यवाद देईन । रात नौ बजे सारंगढ़ पहुँचीन, सब अपन-अपन घर चल देथे । चन्द्रकला देवी ह चन्दा देवी के घर रात रूक जाथे । चन्दा देवी ह गरम-गरम दू गिलास दूध केसर डाल के लाथे । बढ़िया सुंगधित दूध मीठा, दू गिलास चन्द्रकला देवी ह पी जाथे । बहिनी कुछु मंय खांव पींयव नहीं । ड्राइवर, गनमेन रेस्ट हाउस म सोये बर चल देहे, तहूँ थक गे होबे चल बिस्तर लगा सोबो ।
चन्दा देवी ह कोलाबारी कोती हाथ-पाँव धो के जैत खाम म दीया रख के परनाम करथे, हे सतपुरूष साहेब, गरू घासीदास बाबा सहायता कर, छीमा कर बाबा जी । ऐ बछर अउ टिकट दिलवा दे । चन्द्रकला देवी ह आरम करत रहीस । समारू अउ लईका मन भोपाल म रहीन । समारू के बहिनी रमसीला ह कथे भउजी तेल लगा देथंव । चन्दा कथे, हाँ तेल ले के आजा । दीदी के पीठ, कनिहा के मालिस बढ़िया दबा-दबा के करथे । चन्द्रकला देवी ह हल्का, आराम लगथे । चन्दादेवी ह मालिस करवाथे, गपसप मारत कब नींद पड़ जथे, पता नई चलय । बड़ भिनसार कुकरा बासत नींद चन्दा देवी के खुलथे । पानी, पेसाब जाके फेर सो जाथे । रात म थोरक ठंड, जाड़ बढ़गे रिहिस । कम्बल, रजाई ओढ़ के सोगे । सुबे आठ बजे सूरज देवता ह चढ़गे रहय, अंगना म घाम बगर गे रहय । आंखी रमजत-रमजत उठिस, चन्द्रकला अउ चन्दा देवी ह । रमसीला कते भउजी हो आज बने नींद पड़े रहीस, अईसे लगते चन्दा कते, हां तय तेल मालिस हाथ, पाँव रगर के करे रहे, बहुत अच्छा लगीस । चन्द्रकला देवी ह ब्रश करके फ्रेश हो के आ जथे । रमसीला ह तुलसी पत्ता, अदरक डाल के दूध के चाय बना के गिलास भर के लाथे । तीनों झन पीढ़ा म बईठ के गुनगुना धूम चाय पीथे ।

चाय पीयत पीयत चंदा देवी कथे, दीदी चुनाव म टिकट मिलही के नहीं । सारंगढ़ अउ सरिया विधानसभा सीट के पुरूष कई दावेदार मन सक्रिय होगे हे । दिल्ली, भोपाल के चक्कर लगा के हजारों रूपिया खरचा कर डाले हे । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी जब पारटी ह टिकट देही त चुनाव लड़बो, नई तो नई लड़न, का हमन अपन औकात म नई जीत सकन । भले बहुत काम कराय हन पर काम कतको करवाव पर वोट डाले के समय रूपिया,पईसा ल देखथे । जब तक गाँव-गाँव म दारू, मुरगा, बकरा नई देबे, तब तक वोट नई देवय । आजकल गाँव के लोगन मन बहुत चालाक, हुसियार होगे हे । विरोधी पारटी से मिल के पईसा घलो ले लेथे । चतुर चालाक नेता मन गली मोहल्ला के नेता मन पईसा ले के अपन पाकिट म धर लेथे, वोटर मन ल कुछ छोट मोट दे देथे । बाकी बचे रूपिया जेब म । यदि ई मन ल नई पूछबे त हरवा देथे, चुनाव के समय करुता, धोती सफेद पहिर के झकास निकल पड़थे । चुनाव के समय पूछ-परख बढ़ जथे । चन्दा देवी कथे, दीदी यदि टिकिट मिलही त लड़हूँ नई तो निर्दलीय नई लड़व । आजकल गाँव गाँव म विधायक बने ललक जागृति बढ़गे हे । बहुत लम्बा कतार हे, गलाकाट प्रतिस्पर्धा होगे हे । एक दूसरे के कमजोरी ल बढ़ा-चढ़ा के नेता के समक्ष रखथे । विधानसभा क्षेत्र म यदि मोला टिकट नई देहा त चुनाव हार जाहा । मंय ह जीत जाहंव, मय विनिंग कण्डीडेट हंव । बने लम्बा चौड़ा, ओवरू सब नेता के चरण छू के था देथे ।

चन्दा देवी कथे, दीदी चल हमन दिल्ली जाके टिकट के जुगाड़ म लगबो । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी माननीय मुख्यमंत्री जी ह कहीस, क्षेत्र म काम करव टिकट मिल जाही । चन्दा कथे, दीदी सांसद अउ केन्द्रीय मंत्री मन हमन के विरोध म हे । मुख्यमंत्री के विरोध म हे । सायद मुख्यमंत्री ह अपन आदमी ल टिकट दिलवा पाथे के नहीं, मोला संका हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी मंय तो ओकरे भरोसा करे हंव, तहूं ह ओकरे भरोसा म हावस । चुनाव तियारे के संबंध म चरचा करत दस बजगे रहय । कार आगे रहय, रमसीला कथे भउजी चलव कुआँ म गरम-गरम पानी निकाल के नहवा देथंव । चन्दा अउ चन्द्रकला कथे चल लउहा नहा लेथन । रमसीला कुआं से बाल्टी म पानी निकारत जाय, दूनों झन के ऊपर म डारत जाय । लक्स साबुर म नहाईन । रमसीला ल कथे, पीठ म साबुन लगा के पथरा म रगड़ दे । चन्दा कथे, दीदी ईहाँ तरोई के रगड़े के बनाय रथें, बढ़िया रगड़-रगड़ के नहा ले । बढिया रगड़-रगड़ के नहाथे । जब तक तेल फूल लगाथे, तियार होथे, तब तक रामसीला ह चीला रोटी, पताल के चटनी बना लेथे । बढ़िया गरम-गरम चीला रोटी परोसथे । पताल के चटनी म मजा आ जथे । चार चार चीला रोटी म पेट भर जाथे, मजा आ जथे ।

अब मंय चलत हंव, रमसीला कथे, भउजी ड्राइवर अउ गनमेन ल रोटी देय हंव तब तक चहापी न । चन्दा कथे लउहा ला चहा ल । चन्द्रकला देवी चहा पीके कार म बईठ जथे । चन्दा देवी हाथ जोड़ के जय सतनाम, नमस्कार करथे । सारंगढ़ से रायगढ़ दू घंटा म पहुंच जाथे । पुस्पा दाई दुवारी म बईठ के रद्दा देखत रहय । रमौतीन दाई ह रंघनी घर म जाके दौनामांजर ल समझावत रहय, दाल म लहसून अउ लाल मिरचा के तड़का (फ्राई) लगाय बर बतावत रहय । जोर से छनाक ले जले के आवाज आथे, मिरचा के जले ले घर भर म मिरचा तेज ह हवाम फईल गे । सब आंक छीं-आंक छीं कर के छींके लगथे । घर से बाहर अंगना म आ जथे, सब कोई साथ म छींकत रहित । चन्द्रकला कथे, दाई का पकावत हंव, अड़ोस-पड़ोस के धम छींक पहुँच गे । रमौतीन कथे, बेटी बहरिया ला तड़का लगाय बर सिखावत रहेंव । दौनामंडर आँखी रमजत, आँसू पोंछत पाँव छूथे, चन्द्रकला कथे बाबू-लईका लउहा होय । दीदी, तोर आसीरबाद ले तीन महीना होगे महावारी नई होय हंव । चन्द्रकला ह माथा ल चूम लेथे, चल बहुत-बहुत बधाई । घर म वंस चलाय बर बाबूजी आवत हे । बलराम बाबूजी चन्द्रसेन ल बहुत चाहत रहीस, ओकरे सेती बेटा बन के आवत हे ।

रमौतीन, पुस्पा देवी दादी बने के खुसी म झूम जथे, नाचे लगथे । घर म खुसी आनंद ही आनंद हो जाथे । चन्द्रसेन डेयरी से आथे त ओहू ल पता लग जथे । बाप बने के खुसी म दौनामांजर के चुमा ले लेथे । रामदेव अउ कामदेव सुन के खुस हो जाथे । दौनामांजर के ओ जिन ले सेवा-सत्कार, देख-रेख सुरू हो जथे । पुस्पा अउ रमौतीन कोई गरू वाला जीच उठाय नई देवय । बढ़िया फल-फूल, दूध-मिठाई दौनामांजर ल खवावय, दौनामांजर ह गदबिदाय गे रहय ।

चन्दा ह टेलीफोन से चन्द्रकला देवी ल कथे, दीदी काली मंय भोपाल जात हंव, तहूँ जाबे तक संग चलव । चुनाव घोसणा होवईया हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी सरिया अउ सारंगढ़ के महिला मन ल दिल्ली ले जाय पड़ही, तंय सब झन ल पूछ लेबे । चन्दा कथे दीदी ठीक हे मंय दस बारा महिला मन ल तियार कर लेथंव । चन्दा देवी ह मधु, अनिता, चन्द्रिका, रामकली, निर्मला ल भोपाल, दिल्ली जाय बर कथे । सब महिला मन घर म पति से पूछ के बताबो कथे । सरिया से जमुना देवी अउ संगवारी मन ल पूछिथे, ब मना कर देथे । मधु दिल्ली के घटना से डर गे रहे बोलथे पिछले बार दिल्ली म बहुत मुस्किल से जीव बांचे रहीस । अब हमन अपन जान ल जोखिम म नई डारन । आप मन जावव । पार्टी टिकट ले के आहव त चुनाव के प्रचार कर देबो । हमन तो कोई पार्टी म नई आन, जेहा हमन ल पूछही, ओकरे काम करबो । चन्दा देवी अवाक रहि जाथे, चन्दा देवी ह सब बात गोठ ल बता देथे ।

चन्दा देवी भोपाल जाय बर रायगढ़ जीप म जाथे । सारंगढ़ से चन्द्रपुर महानदी के रपटा से नदी पार करत रथे, जीप बीच रपटा म फंस जथे । बीच धार म चक्का फंस जथे । चार-पाँच झन मिल के निकारथे । रपटा से बड़ मुस्किल से जीप पार हो जथे । रायगढ़ रेल्वे स्टेसन म चन्द्रकला देवी ह इन्तजार करत रहय । अहमदाबाद एक्सप्रेस से बिलासपुर आ जथे । ट्रेन ले उतार के भोपाल जाय बर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस बर प्लेटफार्म नं. चार म जाके बईठ जथे । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के डिब्बा ठीक 12 बजे लग जथे । ए. सी. एक नं. कोच म बर्थ नं. एक अउ दो म समान, सूटकेस रखवाथे । चन्द्रकला देवी ल विभागीय अधिकारी अउ कार्यकर्ता मन छोड़े आय रहय । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ठीक समय म छूट जथे । बिलासपुर से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगाँव, गोंदिया, नागरपुर से भोपाल सुबह 6 बजे पहुँच जाथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी कार म बईठ के बंगला चल देथे । चन्दा देवी चाय पी के अपन विधायक बिसराम गृह चल देथे । भूरी अउ कुसुवा स्कूल जाय के तियारी करत रहय, समारू चाय-नास्ता तियार करत रहय । चन्दा देवी सीधा रंधनी म चल देथे । भूरी, दाई आगे कहिथे । भूरी कहिथे, दाई अतका दिन कईसे लगा देय । चन्दा कथे, बेटी चुनाव घोसणा होवईया हे चुनाव यदि लड़ना हे विधानसभा क्षेत्र म रहे बर पड़ही । कुसुवा बाथरूम से निकल के आ के दाई के पाँव छूथे । चन्दा आसीस देथे, बड़े साहब बनव, खूब पढ़व लिखव । भूरी अऊ कुसुवा लउहा तियार हो के अपन-अपन स्कूल चल देथे ।

चन्दा देवी अउ समारू बाच जथें, दूनों झन मिल के सब्जी काट के तियार करथे । दार-चावल, सब्जी पकाथे, चन्दा देवी कथे, मंय नहा लेथंव । नहानी घर म घूस जाथे । समारू कथे, गाँव म गे रहे त बने चिक्कन चिक्कन दिखत हस । चन्दा हंस देथे । चन्दा कथे, अउ मोर डउका गाँव म हे ते हर खवाय-पियाय हे, त चिक्कन दिखत हंव । समारू कथे, का भरोसा औरत मनके मन सब ललचा जाय । चन्दा कथे अतका भरोसा तो करना चाही, कम से कम मंय तो नई करेंवा । समारू कथे, मंय कहाँ करत हंव तंय करे हस । मंय तो अतकेच कहेंव हंव बड़ सुघ्घर दिखत हस । चन्दा देवी कथे, चल ठीक हे, आ पीठ म साबुन लगा दे, रगड़ दे । समारू पीछ म साबुन लगा के कपड़ा म रगड़थे । चन्दा कथे, हाँ भरभरावत हे । काल कुआँ म नहावत रहेंव त रमसीला ह बने रगड़ दीस । समारू कथे, करिया गे हे । चन्दा कथे, बस-बस जादा तहूँ झन रगड़, नई तो करिया जाही । चन्दा नहा के तियार हो जथे ।

चन्दा अउ समारू भोजन करके आराम करथे, नींद पड़ जाथे । समारू ह पत्रिका पढ़त रईथे, दू बजे भूरी अउ कुसुवा आ जथे । लउहा कपड़ बदल के भात खा लेथे । भूरी दाई के संग म सो जाथे, कुसुवा समारू के संग पत्रिका, टी.वी. देखथे । समारू घलो दरवाजा बंद करके आराम करे लगथे । भोपाल के हवा पानी सूट करत रहय, पूरा परिवार अंगरेज मन जईसन दिखत रहय । भूरी अउ कुसुवा कक्षा 11 वीं अउ 12 वीं म पढ़त रहय, बोर्ड परीक्छा के तियारी म लग गे ।

चन्द्रकला देवी ह बंगला म हजारों महिला-पुरूष कार्यकर्ता से भेंट करथे, रात दस बजे तक भेंट करके सिकायत के आवेदन लेत रहय । जब सब चले गिन तब चन्द्रकला देवी ह आफिस, कार्यालय से निवास गईस । हाथ पैर धोके भोजन करके सो जाथे ।


क्रमशः
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भाग- पन्द्रह

चन्द्रकला देवी, सरिया क्षेत्र के बरमकेला के महानदी के किनारे के गाँव म दउरा म निकले रहय । रायगढ़ से सरिया फोन पुस्पा देवी चन्द्रसेन करथे । महिला बैंक के मैनेजर फोन उठाथे । मैनेजर ल बताथे, मालूराम अउ वोकर गोसाईन के चाम्पा स्टेसन के पहिनी नदी के पुलिया म एक्सीडेंट होगे हे । पति-पत्नी के मउत होगे हे । तुरंत खबर भेज दे रायगढ़ आ जावय । बड़ भारी एक्सीडेंट होय हे । करीबन सौ आदमी मर गे हे, हजार भर आदमी, बच्चा घायल होगे हे अउ महिला बैंक के मैनेजर ह सरिया से बरमकेला फोन से संदेस भिजवाथे । संदेस बहुत लेट म मिलथे । चन्द्रकला देवी के सब कुछ खतम होगे । रोवत-रोवत, आंखी सूझ गे । आँसू के धार थमत नई रहीस, जमुना देवी ह ढांढस बंधाईस । सब महिला मन चुप करावय, के चन्द्रकला देवी रोवत रहीस । सब के टप-टप आँसू चुचवावत रह । बड़ मुशिकल ले हि, तुमन कार द्वारा रायगढ़ पहुँचाईन चन्द्रकला के हाल, बेहान हो गे रहय पुस्पा माँ ल पोटार के खूब रोईस । रमौतीन दाई ह समझाईस, बेटी भगवान ले अतके दिन के संगवारी रहीस, झन दुःख कर । चन्द्रकला विधुन हो के रोवत रहीस । पुस्पा कईथे, चुप हो जा बेटी, तंय मंत्री अस । बड़े पद म हस । ठीक हे हमन जानत हन, फेर समाज ह थोड़े मानत हे । समाज के नदर म तंय रखैल हस । रखैल के कोई सामाजिक अधिकार नई रहय । ओकर घरवाला, परिवार वाला मन नई मानय । जतका दुःख मन म करना हे त कर ले । पुस्पा कथे, चल चांपा रेल्वे स्टेसन जा के देख, का हालत म लास हावय । पुस्पा दाई के बात ल मान के जाय बर तियार होगे ।

चन्द्रकला देवी ह पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर से जानकारी पूछिस । रायगढ़ सहर के पचास आदमी के मृत्यु के समाचार रहय । अउ लगभग आदमी घायल होय रहय । मालूराम अग्रवाल अउ पत्नी हा ट्रेन के डिब्बा म फंसे हे बताईस । रेल्वे के स्टेसन मास्टर से पूछताछ करिस । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा दाई के संग चाम्पा रेल्वे स्टेसन बर कार द्वारा निकलिस । चन्द्रकला देवी ह दूनों हाथ के चूरी ल पथरा म कुचरिच, माँग के सिंदूर ल पोंछिस अउ रंगीन लूगरा के जगा सफेद लूगरा, बिलाउज पहिन के गईस, दो घंटा म चाम्पा रेल्वे स्टेसन, नदी के पुल के पास पहुँच जथे । दुर्घटना स्थान म आदमी मन के रेला लगे रहय । अपन अपन रिस्तेदार मन के पता लगावत रहय । लाईन से दू सौ लास रखे रहय । दुर्घटना ठउर के चीख-पुकार माते रहय । मातम छाए रहय । सबके आँखी म आँसू बोहात रहय । कलेक्टर, कमिस्नर, पुलिस अधीक्षक अउ बड़े अधिकारी मन आ गे रहय । रोटरी अउ लायन्स-रेडक्रास के कर्मचारी घायल मन के सेवा म लगे रहय । चीख-पुकार के वातावरण गमगीन रहय । सब कोई उत्सुकता से देखत रहय । रेल के डिब्बा ल काट-काट के लास मन ल निकालत रहय । रात होय के कारण दिक्कत होत रहय । रहि-रहि के बादर-पानी भी बरसत रहय । करिया बादर ह लउकत, घपटत रहय । जोर से बिजली कड़कत, चमकत रहीस । खराब मौसम के कारण बहुत दिक्कत होत रहीस । अहमदाबाद के लगभग पाँच डिब्बा ह एक-दूसर के ऊपर चढ़ गे रहिस । एक डिब्बा ह पुल से नीचे नदी म झूलत रहीस । नदी म झूलत डिब्बा ह अब गिरिस, तब गिरिस दिखय़ । बहुत मुस्किल से क्रेन द्वारा खींच के जमीन म लाईस । लोग सर्च लाईट, कंडील, टार्च के रोशनी म रेल डिब्बा ल देखत रहय । जे डिब्बा म मालूराम के परिवार बईठे रहीस, डिब्बा ह चिपट गे रहीस । रेल के डिब्बा ल कटर, वेल्डिंग मसीन से काट के लास ल निकाले रहीन । दो सौ लास के आखिरी म मालूराम अउ ओकर डउकी के लास रहय । के चेहरा तो बुरी तरह से चपट गे रहय । दूनों के सरीर से पहचान म आवत रहय । चन्द्रकला देवी ह फूट-फूट के रोवत रहय । कलेक्टर अउ अधिकारी मन चुप कराईन । रात के तीन बजे तक डिब्बा काट-काट के लाश निकालिन । घायल मन के बिलासपुर, कोरबा के सासकीय अस्पताल म भर्ती करके इलाज करात रहीन । पूरा देस भर म सोक मनावत रहीन ।

रेल मंत्री ह दुर्घटना के जाँच के आदेस दे देथे । टी. वी. समाचार पत्र म दूसर दिन मुख्य समाचार देत रहय । चन्द्रकला देवी ह दूसर दिन लास के पोस्ट-मार्टम कराके ट्रम म लाश ल रायगढ़ भिजवा देथे अउ संग म घलो जाथे । मालूराम अग्रवाल के घर में लास उतरवाथे । दुःखी परिवार ल धीरज धराथे । ओकर बेटा-बेटी बाप के संग चीरकार मारमार रोथे । वोकर बड़े बेटा ह साफ कहि देथे, चन्द्रकला देवी दुःख म जरूर हमर साथ म हस फेर हमन तोला माँ के दरजा नई दे सकन । चन्द्रकला देवी अउ अपमान झन होवय कहि के अपन निवास स्थान गोसाला लहुट जाथे । चन्द्रकला देवी ह आँसू के घूंट पी के रहि गइस । पुस्पा दाई ह समझाते, बेटी ओमन तोला स्वीकार नई करय, जादा दुःख मत कर । अग्रवाल जी के साथ, अतके दिन के रहीस । जादा तोला माना हे त गया, बनारस, इलाहाबाद जाके गंगा नहा ले । मुंड़ मुड़ाय के जरूरत नई हे । चन्द्रकला कथे, दाई तंय ठीक कहत हस । मय कालि गया जाय बर ट्रेन के टिकट आरक्छण करा लेथंव । गनमेन अउ पी. ए. चार टिकट रेल के आरक्छण टाटानगर, टाटानगर से डेहरी आंसन से गया करा लेथे ।

चन्द्रकला के संग पुस्पा अउ गनमेन, पी. ए. गया पहुँच जथे । गया म होटल म रूक जथे । गया घाट गंगा नदी म स्नान करके मृत आत्मा के लिए पिण्डदान माँ, बेटी सिर मुण्डवा के बाल ल गंगा नदी म प्रवाहित कर देथे । पुस्पा देवी ह स्व. बलराम पांड़े के नाम से पाँच झन पंडित, भिखारी, गरीब ल भोजन कराथे । चन्द्रकला देवी ह मालूराम अग्रवाल के नाव अंतिम क्रिया दसकरण के नाव के इक्कीस झन गरीब मन ल भर पेट पुड़ी-सब्जी, दाल-भात खवाथे । मालूराम के आत्मा के सांति के लिये पूजा पाठ भी कराथे । गंगा मईया के पवित्र पानी म स्नान करके मन के मईल घलो ल साफ कर लेथे । मन म जो भाव, प्रेम, पियार मालूराम के प्रति रहीस, ओला आँसू बहा के गंगा नदी म बहा देथे । एक हफ्ता गया म निवास करथे । भागवत, गीता, रामायण के पाठ करथे अउ सुनथे । चन्द्रकला देवी के दुःख ह हल्का होथे । गया से बैजनाथ धाम भी भगवान भोले संकर के दरसन करे चले जाथे । बैजनाथ धाम म मन ल सांति मिल जथे । पुस्पा देवी ह बहुत समझाथे । बेटी एक दिन सब ल जाय बर हे । ऐ संसार नस्वर हे । चल अब घर रायगढ़ जाबो, बैजनाथ धाम से रेल से रायगढ़ आ जथें ।

रायगढ़ म मालूराम अग्रवाल अउ पत्नी के दाह-संस्कार अउ क्रिया-कर्म निपट गे रहय । पन्दरा दिन सोक म दुकान बन्द करे रहय । घर के मुखिया के मउत के बाद घर सम्हाले बर बड़े लड़का दुकान, व्यवसाय ल शुरू करीस । फेर ओही कठिन काम करे लगीन । स्व. मालूराम अउ ओकर पत्नी के कमी रहय । चन्द्रकला देवी ह टेलीफोन से सांत्वना देईस, कहिच यदि कोई काम होही त बताहा, जरूर मय सहयोग देहंव । चन्द्रकला देवी ह मुड़ ल मुड़ाय रहय । ऐकर सेती घर से एक महीना निकले नई सकय । चन्द्रकला देवी रायगढ़ से भोपाल चल देथे । भोपाल के निवास-कार्यालय म आफिस के काम निपटाथे । माननीय मुख्यमंत्री जी से मुलाकात भी करथे । मुख्यमंत्री ह चुनाव तियार, क्षेत्र म करे बर निर्देस भी देथे ।

चन्द्रकला देवी ह निवास कार्यालय से ही मंत्रालय के काम-काज निपटावय । सिर मुंड़ाय रहय, कहीं जावय त पूछय त बतावय कि मित्र के देहावसान होगे हे । मोर साथ बचपना के जिगरी दोस्त रहीस, मोर मितवा रहीस । चन्द्रकला देवी ह विधवा जईसे सफेद लूगरा-पोलखर पहिनत रहय, माथे म चंदन के टीका लगावय । दिन तो काम-बूता म कट जावय फेर रात बइरी ह नई कटय । आँखी ले आँसू टपक जावय । काबर जब ले मिले रहीस, वोमन दू सरीर एक परान रहीन अब महकाय कोन खरे होही ? अभी तक एक खूंटा म बंध के आय हंव, ओकर रहत ले कोई आँखी उठाय के देखे नई सकत रहीन । अब मंय अधूरा हो गेंव । आँसू ह टपाटप बहे लगय । एक मन ह कहै उठो संघर्ष करो । पुरूष समाज ल बता देवय, तोर बिन जीनकी कट जाही । मन ल ढांढस बंधावय । सोंचत-सोंचत नींद कब पड़य, पता नई चलय ।

पुस्पा दाई ह सुबे ले चाय-नास्ता करके रखे रहय । चन्द्रकला ह फ्रेस हो के बईठक रूम म आ के पेपर पढ़े लगथे । चुनाव तियारी के समाचार, सबो पार्टी मन प्रमुखता से कहत रहय । चाय के चुस्की लेत चन्द्रकला कथे, दाई चुनाव के कमान कोन सम्हालही । पुस्पा कथे, बेटी चिंता झन कर कोई भगवान द देही, नई तो मय देखिहंव । तोर बाबूजी अउ कक, भाई चन्द्रसेन घलो हावय । दाई मालूराम जी ह चुनाव बर चन्दा घलो वसूल करके देवत रहीस । बेटी कोई सेठ, बैपारी मन जरूर सहजोग करही । तहूँ ह पईसा, रूपिया ल जोड़ कर रूख । चन्द्रकला देवी ह विभागीय अधिकारी मन से चन्दा वसूल करे लगथे । कई अधिकारी मन ठेकेदार से रूपिया जुगाड़ करा देथे । चुनाव ल के धन इक्ट्ठा हो जाथे ।

चन्दा देवी विधायक ह मिले बर बंगला म आथे । चन्द्रकला देवी ह गर मिलके जोर से खूब रोथे । कहिथे चन्दा बहिनी, अब मंय अनाथ होगेंव, अब मोला कोन सहारा देही । चन्दा देवी कथे, दीदी तोला सतनाम साहेब ह सहायता करही, सतनाम साहेब म विस्वास कर । मय तो ओकरे अपार म भरोसा करथंव । चन्दा देवी ह बहुत समझाथे । दीदी तंय मुड़ ल मुड़ा के ठीक नई करे हस । नर अउ नारी समान हे, का केस उतारे ले जी गे । चन्द्रकला कथे, बहिनी रीति-रिवाज, अंधविस्वास ल माने ल पड़थे । मंय एकदम टूट गे हंव, जउन दाई मन करत गीन, में करत गेंव । मय गंगा नदी म नहा के केस उतवाय रहेंव, मोला अच्छा लगीस । जीये-मरे के साथ किरिया खाये रहेंव । केस ल उतरवा देंव ता का कम होगे, कुछ दिन म केस बाढ़ जाही । चन्दा देवी कथे, दीदी तंयभले पति मानके विधवा बने हावस, फेर समाज अउ परिवार वाला मन कहाँ मानिस । अग्रवाल जी के बेटा मन साफ माता माने बर इंकार कर दीस, कोई सम्मानजनक बेवहार घलो नहीं करीस । तब तोला कोई बात बर नई पुछीन, उल्टा कोई चीज के माँग करही करिके पूछिन नई हे । चल ठीक हे जतक दीन ले तोर संगलिखे रहीस, ओतका सुख तो मिले रहीस । बहुत अच्छा आदमी रहीस । चन्दा कथे, चिंता-फिकर झन कर, सब ठीक हो जाहय । पहली भी अकेल्ला रहे, अभो अकेल्ला रहबो । ये विधवा के बाना ल छोड़, तयं पढ़े-लिखे नारी हस । आज वैज्ञानिक युग म अईसे झन कर । बढ़िया अपन जिनगी ल जी । काकरो भरोसा झन कर एक ना एक दिन सब ल जाना हे ।

चन्दा देवी ह बहुत समाझाइस । तंय समाज ल कतका समझाबे, नई मानय । तोला तो कुँवारी ही समझत रहीन, ओला मत उधार । तोप दे माटी म, सब मुंदाय जाही अउ पहिली जईसे बन-ठन के निकल । आधुनिक नारी के प्रतिनिधित्व कर अगुवा बन, कब तक पुरातन पंथी बन के जीबो । पुरूष जईसे हमू मन काम-धाम करके, हरहिंछा जीवन जीबो । तभे समाज ह चेतही । मोर कहना मान दीदी, अतका दिन ले सफेद लूगरा पहिरे रहे ठीक हे । अबतो रंगीन कोसा के लूगरा पहिर, माँ म सिंदूर झन लगा । फेर हाथ म सोना के चूरी तो पहिर सकत हस । फेर तोला जीत के मंत्री बनना हे । चन्द्रकला देवी के थोरकिन साहस बढ़िस, हिम्मत करके कथे बने कहत हस बहिनी, तुमन सतनाम आंदोलन के जुड़ के मनुवाद के विरोध करत हेव । हमन अभी घलो मनुवाद ल मानत हन, ओही हमन के बाधक हे । चन्दा देवी कथे, दीदी ओही ल त उखाड़ फेंकना चाही । अंधविस्वास, रूढ़िवाद ले जकड़े समाज ल बदलना चाही । यदि हमन पढ़े-लिखे नारी मन ऐ बेड़ी ल नई तोड़बो त कोन तोड़ही, गाँव के अनपढ़ नारी ह । चन्द्रकला देवी ल बहुत समझाईस, चन्द्रकला देवी ल नारी शक्ति से प्रेरणा मिलिस ।

चन्दा देवी ह अपन हाथ ले विधवा के बाना, सफेद लूगरा, पोलखार ल उतारिस अउ रंगीन चटक पीला छींट के लूगरा-पोलखर पहिनाईस । माथा म बिंदी, हाथ म सोना के चूरी दू ठन डालिस । कान म झुमका, नाक मा लौंग, एक पूरा नारी के सिंगार करके दरपन करा खड़ा करीस । चन्द्रकला देवी खुद सरमा गे । बासंती रंग म चेहरा म चमक आगे रहय । बासंती रंग म नव दुल्हन जईसे दिखत रहय, चन्दा देवी मोहा जाथे । माथा ल चूम लेथे । चन्दा कथे, दीदी यदि मंय पुरूष होतेंव त तोला चूरी पहिरा के ले जातेंव । कतको बिहाती देय ल पड़तीच । चन्द्रकला देवी कथे, थोरकन मोर उमर ल तो देख । पचपन बछर के डोकरी ल कोन पूछही । चन्दा कथे दीदी तोर लईका नई होय ले सरी म कसावट, जवा टूरी मन जईसे हे । चन्द्रकला देवी ह दरपन के पास जाके देखथे, सही म बहुत सुन्दर दित रहय । रंग बासंती म बहुत जचत रहय, चन्द्रकला देवी ह चन्दा ल कस के पोटार के चुमे लगथे । सुख-दुःख के गोठ, बात करके चन्दा अपन विधायक विसराम गृह चले जाथे ।

चन्द्रकला देवी मंत्रालय म जाके बईठ गे । सरकारी काम-काज ल निपटाईस । कई मंत्रीगण अउ माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलिस । मुख्यमंत्री जी ह चुनाव के तियारी करे बर कहिस । माननीय मुख्यमंत्री जी, मालूराम अग्रवाल के दुखःद निधन ल बहुत बड़ छति बताईस । चन्द्रकला देवी ल दूसर पार्टी के कार्यकर्त्ता बनाय बर कहिस, मुख्यमंत्री कार्यालय से सड़क, सिंचाई परियोजना बर पचास लाख रूपिया स्वीकृत कराके लाथे । दिन भर मंत्रालय के काम निपटा के शाम 6 बजे बँगला आ जथे । बँगला म दस-बीस झन से भेंट करे के बाद निवास म चले जाथे ।

पुस्पा माँ ह बेटी के रूप-रंग, हाव-भाव म परिवर्तन देख के बहुत खुस होथे । बेटी मरने वाला तो मरगे, ओकर संग हमन काबर मरीन । महूँ ह त जीयत हंव, सौ बछर से जादा होते हे । तोर बाबूजी के बिना पूरी जवानी बितांय अउ अभी घलो जीयत हंव । जब तक जीवन म आस हे तब तक चलत हे । जब सरीर अ थाऊ पड़ जाही तब मर जाहूं ।अभी तो चलत-फिरत हंव । चन्द्रकला देवी कथे दाई मोरो उमर ह लगजावय, दू सौ साल जी दाई । मोर देख-रेख कोन करही । पुस्पा कथे, बेटी मोर उमर तोला लग जाय, तंय जी दो सौ बरस । मंय तो बहुत जी लेंव । चन्द्रकला कथे, दाई आज भूख लगत हे कुछ बनाय हस । पुस्पा दाई ह सब झन नौकर-चारक, पी. ए. गनमेन ल खवाते । गरम-गरम भजिया खाके रात मे थोरकुन दाल-भात खा के चन्द्रकला सो जाथे ।

क्रमशः
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भाग- चौदह

चन्द्रकला देवी रायगढ़ ले जबलपुर दौरा म जाथे । बिलासपुर, इन्दौर नर्मदा एक्सप्रेस ह रात दस बजे जबलपुर पहुँचथे । प्रोटोकॉल से एस. डी. एम. श्री राज कुमार टंडन रेल्वे स्टेसन आय रहय । सुनील अउ पूरनिमा, चार बच्चा धर के आय रहय । चन्द्रकला देवी ह प्लेटफार्म म उतरथे । गनमेन ह सूटकेस, समान ल उतारथे । पूरनिमा ह पाँव छूके परणाम करथे । बारी-बारी से बड़ी माँ के चरण छूके परणाम, बच्चा मन करथे । छोटी गुड़िया रानी ल चन्द्रकला देवी ह गोदी म उटा के पियार करथे । चारों बच्चा मन ल चुमा लेथे । गनमेन अउ एस. डी. एम. ह कार म सूटकेस रखथे । एस. डी. एम. कते, मैडम सर्किट हाउस म रूम नम्बर चार रिजर्व हे, आप सीधे सर्किट हाउस जायेंगे या अपनी बहिनी के घर । मैडम कथे कि मय अपन बहिनी घर रांची जाहूँ । गनमेन अउ स्टॉफ बर कमरा के बेवस्था करा दे ।

चन्द्रकला देवी, पूरनिमा, सुनील, बच्चा मन कार म बईठ के मदन महल के टेलीफोन कॉलोनी म आ जाथे । लालबत्ती के कार देख के लईका मन इकट्ठा हो जते । कॉलोनी भर के निवासी-रहवारी मन आ जथे । पूरनिमा ह एक कमरा ल साफ-सुधरा, चादर बिछा के पलंग म रखे रहय । दू ठन कुरसी घलो रखे रहय । सुनील सुटकेस अउ पेटी मन ला कमरा म रखीस । चन्द्रकला देवी हाथ मुँह धोके फ्रेस होगे । पूरनिमा चूल्हा-चौंकी म दाल, सब्जी गरम करे लगे गे । चन्दा देवी ह गनमेन अउ पी. ए. ल रेस्ट हाउस चले जाय बर कहिते । सुनील चाय, पानी पिला के भेज देथे । कॉलोनी वासी महिला, पुरूष मन भेंट करके चल दीन । चन्द्रकला देवी लईका मन के नाम पूछथे । बड़े लड़की अपन नांव कीर्ति सांडिल्य ओकर बाद के हा वंदना, ओकर के छोटे लड़का ह सूरज सांडिल्य अउ सबसे छोटी ह तोतलावत कथे मोर नाव बड़ी माँ रोमा सांडिल्य अउ मोर माँ के नाव पूरनिमा अउ मोर ददा के नाव सुनील हे । मोर नानी के नाव रमौतीन, मोर दादी के नाव चन्द्रिका देवी, मोर बड़े दाई के नाव चन्द्रकला देवी हे, ओह भोपाल म मंतरी हे । कीर्ति कते तय ओला पहिचानथस रे । रोमा लजा के गोदी म बईठ जाथे । चन्द्रकला देवी ह बच्चा मन संग हंसे खेले लगथे ।

पूरनिमा ह डाईनिंग टेबल म खाना लगा देथे ।खात पियत ले रात के ग्यारह बज गईस । चन्द्रकला कथे, लईका मन नई सोवत हे । पूरनिमा कथे, दीदी बहुत सैतान हे, सब काहत हे बड़ी मैँ के पास सुतबो, आज जागत हे । दूसर दिन सो जात रहीन चलो रात होगे हे, सुतबो ।

पूरनिमा कथे । आज भी बड़ सुन्दर लगत हस । भोपाल म मंत्री बने के बाद म सुन्दरता बढ़ गे । एकदम अंगरेजन अउ कस्मीरी मोहला जईसे दिखत हस । चन्द्रकला कथे भईगे बहिनी आज अतके मालिश कर, काल के ल बचा दे । तहूँ थक गे होबे । सब लईका मन सो गे रहय, पूरनिमा दरवाजा ओधा के अपन कमरा म आके सोय लगथे । नींद नई पड़य, सुनील कईथे का सोंचत हस । पूरनिमा कथे, दीदी ह जीवन ल अईसे काट दीस । ओला पति सुख नई मिलिस । सुनील समझाईस सब के किस्मत एक जईसे नई रहय । तीव्र इच्छा सक्ति खत्म होये के बाद ओला नींद आईस । सुनील भी हट्टा-कट्टा, तंदरूस्त जवान रहय । पूरनिमा भी संतुष्ट रहये । मस्ती म झूमय, हांसत-खेलत चार बच्चा जनमा डारिस, पता नई लगिस ।

चन्द्रकला देवी ल बढ़िया नींद आ जथे । मस्त छुर छिंदहा सोय रहय । बिहनहा सात बजे सो के उठीस । बाथरूम म फ्रेस हो के निकलथे, पूरनिमा ह चाय बना के ले आथे । समाचार पत्र पढ़त-पढ़त चाय पीथे, समाचार पढ़त-पढ़त चाय खतम करथे । सुनील आफिस जाय बर स्नान ध्यान करे लगथे । चन्द्रकला देवी के गनमेन अउ पी. ए. आ जथे । चन्द्रकला देवी विभागीय अधिकारी मन के बैठक बारह बजे से बुलाय रहय । चन्द्रकला देवी ह स्नान करे बर बाथरूम म चले जथे । सेम्पू से बाल धोके निकलथे, बाल ल टॉवेल म लपेटे रहय । बाथरूम से बाहर केस ल टॉवेल म फटकारिस । बढ़िया काला, घना केस रहय । सेम्पू लगाय म चमकत रहय । पूरनिमा भी जल्दी नहा के आ जाथे । दूनों बहिनी अउ लईका मन बईठ के भोजन करथे । चन्द्रकला देवी बारह बजे मीटिंग लेय बर कलेक्टर कार्यालय पहुँच जथे ।

मंत्री जी के सुवागत, कलेक्टर मदर मोहन उपाध्याय करथे । जबलपुर जिला म महिला बाल विकास अउ समाज सेवा विभाग के प्रभारी ठीक नई रहय । चन्द्रकला देवी, मंत्री ह कलेक्टर अउ अधिकारी मन ल खूब फटकारिस, खूब खरी-खोटी सुनाईस । एक महीना के भीतर प्रगति लाय के चेतावनी भी देईस । मीटिंग समाप्त होय के बाद सर्किट हाउस म पत्रकार वार्ता भी होईस दूसर दिन के सबी अखबार म फोटो सहित छपे रहय – “समाज सेवी मंत्री अधिकारियों पर भड़की” । सब्बो जगह एक ही चर्चा, चन्द्रकला देवी, मंत्री जी के वाहवाही होगिस । चन्द्रकला देवी, पूरनिमा के लईका मन के भेड़ाघाट, बंदरकूदनी, घुमांधर, चौसठ जोमनी, मदन महल पूरनिमा संग धूमाथे । चन्द्रकला देवी ल अपन परिवार के संग रहय म विशेष आनंद मिलय । पूरनिमा कथे, दीदी-दू चार दिन अउ रह जाते । चन्द्रकला कथे, बहिनी चुनाव नजदीक आवत हे, सरकार तियारी म लगे गे हे । महूं ह जबलपुर से सतना,रीवा, सहडोल, सरगुजा होके रायगढ़ पहुँचहूँ । पूरनिमा कथे, दीदी दूनों माता मन बने हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी नब्बे बछर से सौ बछर के हो गे हे, हमन ले स्वस्थ हे । आंखी ह बटबट ल दिखत हे, मुँह के छत्तीसी भी चमकत हे । बढ़िया रेंगत, बोलत हे । सब अपन-अपन काम करत हावय । पूरनिमा कथे एक बात पूछत हंव दीदी, पूस्पा माँ ह बाबू जी ल देखत-देखत उमर ल काट दीस । का राज हे मोला बता, मोला संका लागथे .

चन्द्रकला कईथे, बहिनी पुस्पा माँ के रायगढ़ म कोनो नई रहीन । चालीस साल तक बच्चा नई होईस त पांड़े बाबू जी ह छोड़ दे रहीस । पुस्पा माँ ह भरी जवानी, आसरा म काट दीस । कामदेव बाबूजी ह दवाई, बईगा-गुनिया, झाड़-फूँक, अघोर साधू के आसीरबाद देवाईस । पुस्पा माँ के नारीत्व ह जाग गे, बच्चा जन्माय के शक्ति आ गे । पुस्पा माँ गर्भवती हो जाथे । चन्द्रप्रकास के जनम मोर ले पहिली हो जाथे, मय एक महीना के बाद म होय हंव । पुस्पा माँ के दूध नई आवय अउ नगर पालिका के स्कूल म पढ़ाय बर जावय । घर म लईका देखईया कोनो नई रहय, त चन्द्रप्रकास ल रमौतीन दाई अउ ददा ह पाले पोसे हे । रमौतीन दाई ह क स्तन के दूध ल चन्द्रबान ल पियावय अउ एक ल मोला । दूनों के पेट भर जावय । चन्द्रप्रकास ल जरूर जन्माय हे, फेर दूध तो दाई के पीये हे । अपन लईका से जादा पियार करत रहय पुस्पा माँ ह । घर के पूरा खरचा चलावत रहय फेर एक औरत ल मरद के सुरक्षा चाही त राम बाबू जी ह ओला पूरा करे हे । रायगढ़ के मन जानथे के चन्द्रप्रकास रामदेव के बेटा आय । खुल्लम खुल्ला बोलथे, पर पुस्पा माँ ह कईथे, चन्द्रप्रकास ह बलराम के अंस ऐ ।

चन्द्रकला कईथे, बहिनी ऐ प्रश्न काबर पूछे तंय हा । पूरनिमा कईथे, रायगढ़ म सब झन अईसे कहय त आज हिम्मत करके संका के निवारण करे हंव । अब सब सम्पत्ति के मालिक तो चन्द्रसेन होगे हे । चन्द्रप्रकास तो अपन नौकरी से फुरसत नई ऐ । चल आज रायगढ़ म फार्म हाउस, मकान दूमंजिला हावय । खाय-पीये के कोई कमी नई हे । पुस्पा दाई के उमर भी जादा होगे कतका दिन के मेहमान हे । मोर ऊपर ओकर मया के छत हावय । ओकर आँचल के छाँव म बहुत ठीक, सांति लगथे मय ओकर करजा ल छूट नई सकंव । एक बामन परिवार ह यादव परिवार के टूरी ल गोदी लेके पाले-पोसे, पढ़ाय-लिखाय के नौकरी लगवाय हे । चन्द्रकला के आँखी ले आँसू बहे लगथे । पूरनिमा भी रो के दुःख हल्का कर लेथे । पूरनिमा कईथे, दीदी तोला मय रोवा देंव । चन्द्रकला कईथे, बहिनी नारी मन अपन दुःख ल आँसू बहा के हल्का कर लेथे । मोला हल्का लगीस, बहुत दिन होगे रहीस इकट्ठा होगे रहीस । अच्छा होईस, बहा दे तंय ह । ऐकरे नाव तो जीवन हे । सुख, दुःख, हांशी, खुसी जीवन, मरण हे ।

मालूरमाम जी पचासी से नब्बे बछर के जवान हे । पूरा जिनगी भर मोर काम आये हे । मोला विधायक अउ मंत्री बनाय म ओकर जादा हाथ हे । मरे के बेर म मय संग नई छोड़व । मय मंदिर म भगवान ल साक्षी मान के पति-पत्नी बने हन । ऐला समाज स्वीकार करय, चाहे सब स्वीकार करय । मय तो अपन पति मान ले हंव । राम म सो जथे ।

पूरनिमा भी थक गे हरय, पति संग मस्ती करके सो जाथे । सुबह उठके चाय नाश्ता पूरनिमा तियार कर देथे । चन्द्रकला देवी ह जल्दी स्नान, पूजा करके तियार हो जाथे । चाय-नास्ता संग म करथे । गनमेन अउ पी. ए. रेस्ट हाउस से आ जथे । सुनील ह चाय नास्ता कराथे । प्रोटोकॉल से कार सतना जाय बर आ जाथे । चन्द्रकला देवी जबलपुर से सतना कार द्वारा प्रस्थान करथे । सतना जिला के मैहर म माता सारदा देवी जी के दर्सन, पूजा पाठ करथे । दो घंटा ल मैहर म रूक के सतना बर चल पड़थे । सतना के सर्किट हाउस म कमरा आरक्षित रहय । मंत्री जी गार्ड आफ आनर, सेल्यूट ले के सर्किट हाउस के कमरा क्रमांक दो म गईस । प्रोटोकॉल से एस. डी. एम. सुवागत करे बर आय रहय । मंत्री जी हा फ्रेश हो के बाथरूम से निकल के सोफा सेट में आराम से बईठ जथे । आधा घंटा आराम करके पत्रकार, विभागीय अधिकारी, नेता मन से मिलथे । कलेक्टर ल सख्त निर्देस देते कि गाँव-गाँव म महिला मण्डल, महिला बैंक के स्थापना करके महिला मन ल आगे बढ़ाय म सासन की नीति के अनुसार काम करव । कलेक्टर ह सब विभागीय अधिकारी ल निर्देस जारी कर देधे । अधिकारी बैठक के बाद भोजन करके सो जथे ।

चन्द्रकला देवी, समाज सेवा कल्याण मंत्री के दौरा कार्यक्रम अनुसार सतना से रीवा के रहय । सुबह चाय-नास्ता करके कार द्वारा रीवा के लिए प्रस्थान करथे । रीवा के सर्किट हाउस म रूप आरक्षण, प्रोटोकॉल आफिस से होगे रहय । दोपहर के समय रीवा सर्किट हाउस पहुँचथे । गार्ड आफ आनर लेथे । मंत्री जी बैठक कक्ष जाथे । कलेक्टर, कमिस्नर, पुलिस अधीक्षक, संयुक्त संचालक, समाज सेवा कल्याण, महिला अधिकारी, अउ नेता, कर्मचारी मन के भीड़ लगे रहय । सब से मिलिस, बात सुनिस । अधिकारी मन ल निर्देश भी देईस, चाय सब के साथ पीईस । रूम म जाके हाथ, पाँव धो के फ्रेस होईस । कलेक्टर ह भोजन करे बर निवेदन करथे । चन्द्रकला देवी दोपहर भोजन के बाद थोड़ा विसराम, आराम करीस । थके, माँदे रहय, नींद पड़ जथे ।

अधिकारी मन के बैठक साम चार बजे से बुलाय रहय । कलेक्टर, कमिस्नर, संयुक्त संचालक, जिला अधिकारी अउ महिला मंडल के पदाधिकारी, महिला नेता मन आ गे रहय । मंत्री जी ह महिला ससक्तिकरण के काम के प्रगति बर नाराजगी व्यक्त करीस अउ सख्त निर्देस घलो देईस, के महिला बैंक, महिला सहायता समूह, महिला मंडल के गठन, गाँव-गाँव म होना चाहिये । कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देस भी दिये । मीटिंग के बाद पत्रकार वार्ता भी होईच । चन्द्रकला देवी ह मीटिंग के बाद महल अउ लक्ष्मण बाग म हनुमान मंदिर देखे बर गईस । मंदिर म पूजा अर्चना भी करीस । राम जानकी मंदिर म भी पूजा करीस । रीवा के ऐतिहासिक महत्व के स्थान भी देखिस । रात दस बजे भोजन करके सो जाथे । गनमेन, पी. ए. मन बगल के रूम म सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार रीवा के कार द्वारा सीधी से सरगुजा आ जथे । सर्किट हाउस सरगुजा म रात रुकथे । प्रोटोकॉल से कार भी मिल जथे । सर्किट हाउस म विभागीय अधिकारी, कलेक्टर के बैठक बुलवा लेथे । विभाग के प्रगत के समीक्षा करथे । रात्रि विसराम, सर्किट हाउस म करथे । सुबह चाय-नास्ता करके सरगुजा से रायगढ़ बर प्रस्थान करथे । कार ह सीतापुर के आगे जाय रहीस, टायर ह पंचर होगे । चन्द्रकला देवी कार से उतर के महुंवा पेड़ के छांव म खड़ा होईस । दिन के बारा बजे रहय । बने घाम करे रहय, घास म चन्द्रकला देवी के मुंह ललिया गय रहय । पसीना ह चुचवात रहीस । रूमाल से पसीना पोछिस । रूख के छांव ह जुड़-जड़ लागत रहय । सीतल मंद पवन चले लगिस । चन्द्रकला देवी के पसीना ह सुखिस, दूर से हरियर-हरियर जंगल, पहाड़ दिखत रहय । मेनपाट जाय के सड़क ओही मेरा रहय । मेनपाट म तिब्बती मन ह बसे हे, चन्द्रकला देवी सोंचथे । कार के पंचर टायर ल ड्राइवर अउ गनमेन ह दूसर टायर बलद के लगा देथे । पन्दरा बीस मिनट लगीस । चन्द्रकला देवी ह ड्राईवर से पूछते, मेनपाट ह कतका दूर हे । ड्राइवर ह कथे, मेडम ईंहाँ ले बीस कि. मी. दूर हे । चलिहा त चलव, फेर रास्ता ठीक नई हे । उबड़-खाबड़ पहाड़ी सड़क हे । कार नई चल सकव । चन्द्रकला देवी महुँवा के छाँव म बईठ के दूर से पहाड़ ल देखथे ।

ड्राईवर ह टायर बदल के कार ल सड़क के किनारे खड़ा कर देथे । गनमेन ह बोतल के पानी मेडम ल देथे । गरमी म पानी अच्छा लागथे । पानी पी के पसीना पोंछत-पोंछत कार म बईठ जते । कार सीतापुर से सीधा पत्थलगाँव के रेस्ट हाउस म रूकथे । दोपहर के भोजन पत्थलगाँव म करथे । मंत्री जी से भेंट करे बर सैंकड़ों महिला, पुरूष के भीड़ लग गे । एस. डी. एम. बी. डी. ओ. ल बुला के महिला बैंक, स्व-सहायता समूह गठन, महिला मंडल के गठन बर निर्देस देथे । चन्द्रकला देवी गाँव-गाँव म शासन के नीति से महिला विकास के कार्यक्रम चलाय के निर्देस देथे । महिला मंडल ल अधिक से अधिक अनुदान देय बर कईथे, नेता अउ कार्यकर्ता से मिल के मंत्री जी रायगड़ बर कार द्वारा निकल पड़थे । कार फर्राटा भागथे, तीन घंटा म रायगढ़, गोसाला पारा के निवास म पहुँच जथे . चन्द्रकला देवी दौरा,, टूट के कारण के-मांदे उतरिस । एक हफ्ता के बाद रायगढ़ा आय रहीस । पुस्पा दाई के पाव पड़िस । रमौतीन दाई ह एक गिलास ठण्डा पानी ले के आथे । चन्द्रकला ह पाँव छू के आसीरबाद लेथे । पानी पी के थोड़ा सुस्ता के साथ-मुहँ धो के पलंग म कनिहा सीधा करथे । रात के भोजन खा के सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह सुबह मुंह-हांथ धो के, प्रेस हो के अखबार पढ़त रहिथे, चाय पीयत-पीयत नवभारत पेपर पढ़थे । चन्द्रकला से रमौतीन पूछते, बेटी पूरनिमा के लईका मन बने-बने हे । चन्द्रकला कईथे सब बने-बने हे । पूरनिमा घलो अच्छा हे ष बने सहबाईन बने हे । कॉलोनी म पूरनिमा बिना कोई काम नई होवय । बने मान-सम्मान हे । ओकर टूरी अउ टूरा मन बड़ सुघ्घर हे । बड़ हांसथे । अंगरेजन मेम होही, रमौतीन दाई हांसथे । चन्द्रकला कथे, दाई चन्द्रसेन के बिहाव कर दे । भात रंधईया एक झन होना चाही । पुस्पा भी हाँ म हाँ मिला देथे । रामदेव ल लड़की ढूंढे ल कहिथे । कामदेव कहिथे, बोल तो सतनामी समाज के लड़की मिल जाही । चन्द्रकला कथे, हमर परिवार तो समता मूलक वर्गविहीन समाज ल मानथे । अच्छा बने सुन्दर, पढ़ी-लिखी लड़की होना चाही ।

रमौतीन कथे, बेटी जो घर ल सम्हाल सकाय वईसे बहु लाहा त बनही । रामदेव ल चन्द्रकला कथे, बाबूजी सारंगड़ खरसिया, झारसुगड़ा, चन्द्रपुर, सक्ती डाहर लड़की देखव कामदेव कका ल घलो ले जावव । ऐ बछर सादी जरूर करव, नई तो भूखन मरे ल पड़ही । चन्द्रकला देवी बाथरूम म नहा-धो के तियार हो जथे । पी. ए. अउ गनमेन आ जथे । प्रोटोकॉल सेकार मंगवाथे । कलेक्टर अउ विभागीय अधिकारी से बातचीत, फोन से करथे । चन्दा देवी विधायक से भोपाल बात करथे । भोपाल के बारे म बातचीत करथे । चन्दा देवी ह चुनाव तियारी के संबंध म बताथे । भूरी अउ कुसुवा से बात भी करथे । चन्दा देवी कथे, दीदी महूँ ह दो दिन न सारंगढ़ जाहूँ कहत हंव । चुनाव लकठियागे, विधान सभा क्षेत्र म घूमे ल पड़ही । चन्द्रकला देवी कथे, पहली टिकट तो मिलय । टिकट मिलही तब चुनाव लड़बो । चन्दा देवी कथे, माननीय मुख्यमंत्री जी ह चुनाव के तियारी करे बर कहि दे हावय । सब विधायक मन भोपाल से क्षेत्र चले गे हावय । भोपाल सुन्ना-सुन्न लगात हे । चन्द्रकला देवी कथे, आज सरिया जात हंव । महुँ जनता से मिलहंव । चार साल होगे, ऐती-ओती करके पाँच साल पूरा होत हे । चन्दा देवी ह परणाम करके टेलीफोन रख देथे ।

चन्द्रकला देवी कार से रायगढ़ से चन्द्रपुर, सरिया जाथे । सरिया म अपन घर म जाके रूकथे । महिला बैंक कुले रहय । बैंक के हिसाब-किताब, देखथे । बैंक मैनेजर ल निर्देस देथे कि अगले साल चुनाव हे, जो माँगय लोन ओला तुरंत स्वीकृत करदेवव । गाँव-गाँव घर घर म महिला बैंक के कर्जदार रहय । जमुना देवी ह महिला मंडल के सदस्य मन ल लाईस । मंत्री के सुवागत करीन अउ बईठ गे, कुर्सी अउ चांवरा म । चन्द्रकला ह सबके हाल-चाल पूछते । चुनाव के तियारी बर चरचा करथे । गाँव-गाँव म मतदाता सूची म नाम जोड़वाय बर कहिस । मतदाता सूची म अपन आदमी के नाम जोड़वावव, सब महिला मन ल अपन सदस्य बनावव, वोट डाले बर बी कहव । गाँव के महिला मंडल एक दरी अउ ढोलक, मंजीरा भी देवव । मय अपन विधायक निदि से रासि स्वीकृत कर देथंव । चुनाव अब लकठियागे हे । सब झन ल घुलमिल के चुनाव जीतना हे । सक्रिय महिला ल एक लेडी सायकल भी देहव । सायकल से चुनाव प्रचार, घर-घर गाँव-गाँव, गली-खोर म करिहव ।

चन्द्रकला देवी सब महिला ल चाय-नास्ता कराथे । घर के अंगला म बईठ के चौपाल लगाय रहय । जमुना अउ सहेली मन ल लेके कई गाँव के दउरा करीस । सब गाँव म मंत्री जी के सुवागत होईस । गाँव के धूल, कीचड़ कार म लदबदा गे रहय । नाक म रूमाल लगाय रहय । फेर अब्बड़ धूल उड़य । चन्द्रकला देवी ह चुनाव लड़े बर सक्रिय होगे । सब महिला मंडल ल सक्रिय करत रहय । चन्द्रकला देवी के विरोधी मन भी तियारी म लग गे रहय । जगा-जगा म सभा, चौपाल म मिल जावय । चन्द्रकला देवी के स्थिति मजबूत रहय ।

चन्द्रकला देवी ह चार-पाँच दिन रूक के गाँव-गाँव दउरा करिस । सब मन भेंट, मुलाकात भी करिस । बने मुखिया मन ल रूपिया पईसा के मदद करीस ।

क्रमशः

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